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रक्षा प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: रक्षा प्रौद्योगिकी
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भारत के मिशन सुदर्शन चक्र के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- इसका उद्देश्य भारत की वायु रक्षा, बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा और हवाई आक्रामक क्षमताओं को बढ़ाना है।
- इस मिशन को भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करते हुए तीव्र, सटीक और शक्तिशाली रक्षा प्रतिक्रियाओं को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- इस मिशन का एक उद्देश्य 2035 तक भारत के सभी सार्वजनिक स्थानों को एक विस्तारित राष्ट्रव्यापी सुरक्षा कवच द्वारा कवर करना है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
तीनों कथन सही हैं। मिशन सुदर्शन चक्र भारत की वायु रक्षा, बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा और आक्रामक क्षमता को मजबूत करने के लिए तैयार की गई एक समेकित सुरक्षा पहल है।
यह उन्नत तकनीकों की सहायता से तेज़ और सटीक रक्षा प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने तथा रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने का लक्ष्य रखती है। साथ ही, इसका उद्देश्य 2035 तक पूरे देश के सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षा कवच के दायरे में लाना भी है।
इसलिए विकल्प A (1, 2 और 3) सही उत्तर है।
मिशन सुदर्शन चक्र एक दीर्घकालिक रक्षा आधुनिकीकरण पहल है, जिसका उद्देश्य स्वदेशी तकनीकों के माध्यम से बहु-स्तरीय सुरक्षा तंत्र विकसित करना है। इसमें वायु रक्षा, मिसाइल रक्षा, AI आधारित निगरानी, अंतरिक्ष आधारित सेंसर और उन्नत हथियार प्रणालियों का समावेश किया गया है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और मजबूत हो सके।
रक्षा हार्डवेयर की निम्नलिखित में से कौन सी वस्तु भारत में निर्मित होती है/हैं?
- Su-30 MKI फाइटर जेट
- T-90 MK-III टैंक
- अकुला क्लास पनडुब्बी
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 और 2 सही हैं। Su-30 MKI लड़ाकू विमान भारत में HAL द्वारा बनाए जाते हैं, जबकि T-90 Mk-III (भीष्म) टैंक अवाड़ी स्थित फैक्ट्री में निर्मित किए जाते हैं।
कथन 3 गलत है क्योंकि Akula श्रेणी की पनडुब्बियां रूस में बनाई जाती हैं। भारत ने इन्हें केवल लीज पर लिया है, उनका निर्माण नहीं करता।
इसलिए विकल्प A (1 और 2) सही उत्तर है।
भारत रक्षा आत्मनिर्भरता (Defence Indigenisation) को बढ़ावा दे रहा है, जिसके तहत सैन्य उपकरणों का निर्माण देश में ही किया जा रहा है। इसमें तकनीक हस्तांतरण, लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और स्वदेशी अनुसंधान को प्रोत्साहन दिया जाता है। यह आत्मनिर्भर भारत पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
ड्रोन झुंड के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- वे कमांड सेंटर के साथ संचार करने के लिए आवृत्ति के टेराहर्ट्ज़ बैंड का उपयोग करते हैं।
- झुंड में मौजूद अलग-अलग ड्रोन झुंड में शामिल अन्य ड्रोन के साथ संचार कर सकते हैं।
- जीपीएस स्पूफिंग ड्रोन झुंड के हमले का मुकाबला करने के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली तकनीक है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 गलत है क्योंकि ड्रोन स्वार्म आमतौर पर कमांड सेंटर से संपर्क के लिए रेडियो फ्रीक्वेंसी (RF) का उपयोग करते हैं, न कि टेराहर्ट्ज़ (THz) बैंड का।
कथन 2 और 3 सही हैं। स्वार्म के ड्रोन आपस में संपर्क करके अपने कार्यों का समन्वय करते हैं, और GPS Spoofing ड्रोन स्वार्म को भ्रमित करने तथा उसके मार्ग को बदलने की एक सामान्य तकनीक है।
इसलिए विकल्प B (केवल 2 और 3) सही उत्तर है।
ड्रोन स्वार्म कई ड्रोन का ऐसा समूह होता है जो आपस में जानकारी साझा करके एक टीम की तरह काम करता है। इसका उपयोग निगरानी, रक्षा, आपदा प्रबंधन और मानचित्रण में किया जाता है। इसके विरुद्ध जैमिंग, GPS Spoofing और डायरेक्टेड एनर्जी सिस्टम जैसे उपाय अपनाए जाते हैं।
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स्टील्थ तकनीक के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
- चुपके वस्तुओं का रडार क्रॉस-सेक्शन बहुत छोटा होता है और वे रडार अवशोषित सामग्री से लेपित होते हैं।
- विशिष्ट आवृत्तियों का उपयोग करके गुप्त वस्तुओं का पता लगाया जा सकता है।
- विद्युत चुम्बकीय विकिरण के प्रकीर्णन को बढ़ाने के लिए गुप्त वस्तुओं को मेटामटेरियल्स के साथ लेपित किया जाता है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। स्टेल्थ तकनीक का प्राथमिक लक्ष्य किसी वस्तु के रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) को न्यूनतम करना है। यह निम्न द्वारा प्राप्त किया जाता है:
- ज्यामितीय आकार — रडार तरंगों को स्रोत से दूर विक्षेपित करने के लिए
- रडार अवशोषक सामग्री (RAM) — जो विद्युत चुंबकीय ऊर्जा को अवशोषित कर ऊष्मा के रूप में नष्ट करती है
कथन 2 — सही। स्टेल्थ वस्तुएं पूरी तरह अदृश्य नहीं होतीं। RAM कोटिंग उच्च-आवृत्ति रडार (X-band) को विफल करने के लिए अनुकूलित है। हालांकि कम-आवृत्ति रडार (VHF/UHF बैंड) स्टेल्थ वस्तुओं का पता लगा सकते हैं क्योंकि उनकी लंबी तरंगदैर्ध्य विमान के भौतिक आयामों के साथ अनुनाद करती है — यद्यपि इनमें मिसाइल लॉक के लिए आवश्यक रिज़ॉल्यूशन नहीं होता।
कथन 3 — गलत। मेटामटेरियल स्टेल्थ अनुप्रयोगों में रडार प्रकीर्णन को बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि घटाने/समाप्त करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये कार्य करते हैं:
- विद्युत चुंबकीय विकिरण को पूरी तरह अवशोषित करके, या
- तरंगों को वस्तु के चारों ओर मोड़कर पुनर्निर्देशित करके (विद्युत चुंबकीय क्लोकिंग)
मुख्य ट्रिक: कथन 3 मेटामटेरियल के कार्य को उलट देता है — यह UPSC का क्लासिक罗 जाल है जहाँ सही शब्द की जगह उसका विपरीत रख दिया जाता है।
भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने हाल ही में बम निपटान प्रणाली का परीक्षण और मूल्यांकन करने के लिए एक राष्ट्रीय मानक पेश किया है। इस प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- नए मानक को IS 19445 : 2025 के नाम से जाना जाता है।
- यह विभिन्न एजेंसियों में उपकरणों की अंतरसंचालनीयता में सुधार करेगा।
- इसे 30वें केंद्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान, रूस के सहयोग से टीबीआरएल, डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया था।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 3 (केवल 1 और 2)
कथन 1 — सही। दिसंबर 2025 में, BIS ने बम निपटान प्रणालियों के लिए भारत का पहला समर्पित राष्ट्रीय मानक अधिसूचित किया, जिसे आधिकारिक रूप से IS 19445:2025 नामित किया गया।
कथन 2 — सही। यह मानक बम कंबल, बास्केट और इन्हिबिटर जैसे बम निपटान उपकरणों के मूल्यांकन के लिए व्यापक दिशा-निर्देश स्थापित करता है। इसका एक प्रमुख उद्देश्य परीक्षण और खरीद में एकरूपता लाना है, जिससे सशस्त्र बल, CAPF, NSG और राज्य पुलिस जैसी एजेंसियों में अंतर-संचालनीयता (Interoperability) में सुधार हो।
कथन 3 — गलत। यह मानक MHA के अनुरोध पर BIS और DRDO के टर्मिनल बैलिस्टिक रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया था। किसी भी रूसी संस्था के साथ कोई सहयोग नहीं था। वास्तव में यह मानक विदेशी मानदंडों पर निर्भरता कम करने के लिए बनाया गया था।
मुख्य बिंदु: IS 19445:2025 रक्षा मानकों के स्वदेशीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है — यह BIS + DRDO/TBRL द्वारा पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है।
भारत की रक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
विमान प्रकार - विवरण
I. Dornier-228: समुद्री गश्ती विमान
II. IL-76 : सुपरसोनिक लड़ाकू विमान
III. C-17 Globemaster III: सैन्य परिवहन विमान
ऊपर दिए गए कितने जोड़े सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
तीनों युग्मों में से Dornier-228 और C-17 Globemaster III सही हैं, जबकि IL-76 का वर्णन गलत दिया गया है।
-
युग्म I सही है: Dornier-228 का उपयोग समुद्री गश्त (Maritime Patrol) और निगरानी के लिए किया जाता है।
-
युग्म II गलत है: IL-76 एक भारी सैन्य परिवहन विमान है, न कि सुपरसोनिक लड़ाकू विमान।
-
युग्म III सही है: C-17 Globemaster III एक सैन्य परिवहन विमान है जिसका उपयोग सैनिकों और भारी सामान के परिवहन में होता है।
-
अतः केवल दो युग्म सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
युग्म-वार विश्लेषण
| युग्म | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. Dornier-228 : Maritime Patrol Aircraft | ✅ सही | भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा समुद्री निगरानी हेतु उपयोग। |
| II. IL-76 : Supersonic Combat Aircraft | ❌ गलत | यह एक भारी परिवहन विमान है, लड़ाकू विमान नहीं। |
| III. C-17 Globemaster III : Military Transport Aircraft | ✅ सही | भारतीय वायुसेना का प्रमुख रणनीतिक परिवहन विमान। |
भारत के प्रमुख परिवहन विमान
Dornier-228
-
दो इंजन वाला बहुउद्देश्यीय विमान।
-
समुद्री गश्त, निगरानी और खोज-बचाव कार्यों में उपयोग।
-
भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल द्वारा संचालित।
IL-76
-
रूसी मूल का भारी परिवहन विमान।
-
सैनिकों और भारी सामान के परिवहन में उपयोग।
-
AWACS प्लेटफॉर्म के रूप में भी प्रयुक्त।
C-17 Globemaster III
-
Boeing द्वारा निर्मित रणनीतिक परिवहन विमान।
-
टैंक, हेलीकॉप्टर, सैनिक और भारी उपकरण ले जाने में सक्षम।
-
भारत की लंबी दूरी की एयरलिफ्ट क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा।
मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. सभी प्रकार के यूएवी वर्टिकल लैंडिंग कर सकते हैं।
II. सभी प्रकार के यूएवी स्वचालित होवरिंग कर सकते हैं।
III. सभी प्रकार के यूएवी बैटरी का उपयोग केवल बिजली आपूर्ति के स्रोत के रूप में कर सकते हैं।
ऊपर दिए गए कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
UAV (ड्रोन) की क्षमताएँ उसके डिज़ाइन पर निर्भर करती हैं। इसलिए तीनों कथनों में
-
कथन I गलत है: सभी UAV वर्टिकल लैंडिंग नहीं कर सकते। Fixed-wing UAV को रनवे या अन्य रिकवरी सिस्टम की आवश्यकता होती है।
-
कथन II गलत है: सभी UAV हॉवर (एक स्थान पर स्थिर रहना) नहीं कर सकते। Fixed-wing UAV हॉवर नहीं कर सकते।
-
कथन III गलत है: सभी UAV केवल बैटरी से नहीं चलते। कई UAV ईंधन, हाइब्रिड या सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं।
-
अतः कोई भी कथन सही नहीं है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (D) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. सभी UAV वर्टिकल लैंडिंग कर सकते हैं | ❌ गलत | केवल VTOL और मल्टीरोटर UAV ऐसा कर सकते हैं। |
| II. सभी UAV हॉवर कर सकते हैं | ❌ गलत | Fixed-wing UAV हॉवर नहीं कर सकते। |
| III. सभी UAV केवल बैटरी से चलते हैं | ❌ गलत | कई UAV ईंधन, हाइब्रिड या सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं। |
UAV के प्रकार
| प्रकार | हॉवर | वर्टिकल टेक-ऑफ/लैंडिंग | ऊर्जा स्रोत |
|---|---|---|---|
| Fixed-Wing | ❌ नहीं | ❌ नहीं | ईंधन, बैटरी, हाइब्रिड |
| Multirotor | ✅ हाँ | ✅ हाँ | मुख्यतः बैटरी |
| VTOL Hybrid | ✅ हाँ | ✅ हाँ | बैटरी, ईंधन, हाइब्रिड |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
Fixed-wing UAV लंबी दूरी की निगरानी और मैपिंग के लिए उपयोगी हैं।
-
Multirotor UAV फोटोग्राफी और सर्विलांस में अधिक उपयोग होते हैं।
-
Hybrid UAV दोनों प्रणालियों के लाभ प्रदान करते हैं।
-
आधुनिक UAV बैटरी, ईंधन, हाइड्रोजन फ्यूल सेल या सौर ऊर्जा से संचालित हो सकते हैं।
आम तौर पर CL-20, HMX औरLLM-105 के नाम से जाने जाने वाले रासायनिक पदार्थों की सामान्य विशेषता क्या है, जिनके बारे में कभी-कभी मीडिया में बात की जाती है?
Detailed Explanation:
CL-20, HMX और LLM-105 उन्नत उच्च-ऊर्जा विस्फोटक (High-Energy Explosives) हैं जिनका उपयोग सैन्य हथियारों में किया जाता है।
-
CL-20 दुनिया के सबसे शक्तिशाली पारंपरिक विस्फोटकों में से एक है।
-
HMX का उपयोग मिसाइलों, वारहेड और अन्य सैन्य गोला-बारूद में किया जाता है।
-
LLM-105 उच्च प्रदर्शन और बेहतर तापीय स्थिरता वाला आधुनिक विस्फोटक है।
-
अतः तीनों सैन्य हथियारों में उपयोग होने वाले विस्फोटक हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| HFC रेफ्रिजरेंट के विकल्प | ये रेफ्रिजरेंट नहीं हैं। |
| सैन्य हथियारों में विस्फोटक | सही उत्तर। ✅ |
| क्रूज़ मिसाइलों के ईंधन | ये ईंधन नहीं, बल्कि विस्फोटक हैं। |
| रॉकेट प्रणोदन के ईंधन | रॉकेट ईंधन और विस्फोटक अलग-अलग होते हैं। |
निम्नलिखित गतिविधियों पर विचार करें:
- हवाई अड्डों या विमान में यात्रियों पर नशीले पदार्थों की पहचान
- वर्षा की निगरानी
- जानवरों के प्रवास पर नज़र रखना
उपरोक्त में से कितनी गतिविधियों में रडार का उपयोग किया जा सकता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल दो (Option B)
रडार रेडियो तरंगों को भेजकर और उनके परावर्तन को पकड़कर वस्तुओं का पता लगाता है। इसका उपयोग मौसम की निगरानी और पशुओं के प्रवास को ट्रैक करने में होता है, लेकिन नशीले पदार्थों की पहचान के लिए सामान्यतः नहीं किया जाता।
❌ कथन I गलत है: हवाई अड्डों पर नशीले पदार्थों की पहचान आमतौर पर एक्स-रे स्कैनर, ट्रेस डिटेक्टर, स्निफर डॉग और रासायनिक परीक्षणों से की जाती है, रडार से नहीं।
✅ कथन II सही है: मौसम रडार का उपयोग वर्षा, बर्फबारी, तूफान आदि की निगरानी के लिए किया जाता है।
✅ कथन III सही है: पक्षियों, चमगादड़ों और अन्य जानवरों के प्रवास को ट्रैक करने के लिए रडार का उपयोग किया जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: रडार (Radar)
-
RADAR का पूरा नाम Radio Detection And Ranging है।
-
यह रेडियो तरंगों का उपयोग करके वस्तुओं की स्थिति और गति का पता लगाता है।
-
मौसम रडार वर्षा, आंधी और चक्रवात की निगरानी करते हैं।
-
डॉप्लर रडार वस्तुओं की गति माप सकता है।
-
रडार का उपयोग विमानन, रक्षा, नौवहन और मौसम विज्ञान में होता है।
-
यह पक्षियों और जानवरों के प्रवास का अध्ययन करने में उपयोगी है।
-
रडार रात, कोहरे और बादलों में भी प्रभावी रूप से काम करता है।
निम्नलिखित विमानों पर विचार करें:
- राफेल
- मिग-29
- तेजस एमके-1
उपरोक्त में से कितने को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान माना जाता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (कोई नहीं)
पाँचवीं पीढ़ी (Fifth Generation) के लड़ाकू विमानों की प्रमुख विशेषताएँ स्टेल्थ तकनीक, सेंसर फ्यूज़न, सुपरक्रूज़ क्षमता, उन्नत एवियोनिक्स और नेटवर्क-केंद्रित युद्ध प्रणाली हैं। दिए गए तीनों विमान इस श्रेणी में नहीं आते।
❌ Rafale – गलत: Dassault Rafale एक 4.5वीं पीढ़ी का बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है।
❌ MiG-29 – गलत: Mikoyan MiG-29 एक चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है।
❌ Tejas MK-1 – गलत: HAL Tejas Mk1 को सामान्यतः चौथी पीढ़ी का हल्का लड़ाकू विमान माना जाता है।
अतः तीनों में से कोई भी पाँचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: Fighter Aircraft Generations
-
4th Generation: उच्च गतिशीलता, Fly-by-Wire, उन्नत रडार (जैसे MiG-29)।
-
4.5 Generation: AESA रडार, आधुनिक एवियोनिक्स, सीमित स्टेल्थ क्षमता (जैसे Rafale)।
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5th Generation: पूर्ण स्टेल्थ, सेंसर फ्यूज़न, सुपरक्रूज़ क्षमता।
-
पाँचवीं पीढ़ी के उदाहरण: F-22 Raptor, F-35 Lightning II, Sukhoi Su-57।
-
भारत वर्तमान में Rafale, Su-30MKI, MiG-29 और Tejas संचालित करता है।
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भारत Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) विकसित कर रहा है।
-
स्टेल्थ तकनीक रडार पर पहचान कम करती है।
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सेंसर फ्यूज़न विभिन्न सेंसरों की जानकारी को एकीकृत करता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बैलिस्टिक मिसाइलें अपनी पूरी उड़ान के दौरान सबसोनिक गति पर जेट-संचालित होती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें केवल उड़ान के प्रारंभिक चरण में रॉकेट-संचालित होती हैं।
- अग्नि-V एक मध्यम दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जबकि ब्रह्मोस एक ठोस-ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — न तो 1 और न ही 2
दोनों कथन बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों की मौलिक विशेषताओं के साथ-साथ अग्नि-V और ब्रह्मोस मिसाइलों के विशिष्ट प्रकारों का गलत वर्णन करते हैं। आइए प्रत्येक कथन का मूल्यांकन करें:
❌ कथन 1 – गलत: कथन प्रणोदन विशेषताओं को गलत तरीके से अदल-बदल करता है। बैलिस्टिक मिसाइलें रॉकेट-संचालित होती हैं और सुपरसोनिक या हाइपरसोनिक गति से ऊंचे, चापाकार बैलिस्टिक पथ का अनुसरण करती हैं, जबकि क्रूज मिसाइलें जेट-संचालित होती हैं, वायुगतिकीय उत्थापन का उपयोग करते हुए कम ऊंचाई पर उड़ती हैं, और सबसोनिक, सुपरसोनिक, या हाइपरसोनिक हो सकती हैं।
❌ कथन 2 – गलत: कथन दोनों मिसाइलों का गलत वर्णन करता है। अग्नि-V एक ठोस-ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है जिसकी सीमा 5,000 किमी से अधिक है, जो महाद्वीपों में लक्ष्यों पर वार करने में सक्षम है। ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (बैलिस्टिक मिसाइल नहीं) है जिसे भारत और रूस द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है, जिसकी सीमा लगभग 450-600 किमी है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बैलिस्टिक बनाम क्रूज मिसाइलें
| विशेषता | बैलिस्टिक मिसाइलें | क्रूज मिसाइलें |
|---|---|---|
| प्रणोदन | रॉकेट-संचालित (प्रारंभिक बूस्ट चरण) | जेट-संचालित (वायु-श्वसन इंजन) पूरी उड़ान के दौरान |
| प्रक्षेपवक्र | ऊंचा, चापाकार बैलिस्टिक पथ; वायुमंडल से बाहर निकलता है और पुनः प्रवेश करता है | कम-ऊंचाई, वायुगतिकीय उत्थापन का उपयोग करते हुए भूभाग की आकृति का अनुसरण करता है |
| गति | सुपरसोनिक से हाइपरसोनिक | सबसोनिक, सुपरसोनिक, या हाइपरसोनिक |
| मार्गदर्शन | केवल बूस्ट चरण के दौरान निर्देशित; मुक्त-पतन अवरोहण | पूरी उड़ान के दौरान निरंतर निर्देशित |
| सीमा श्रेणियां | लघु (< 1,000 किमी), मध्यम (1,000-3,000 किमी), मध्यवर्ती (3,000-5,500 किमी), अंतरमहाद्वीपीय (> 5,500 किमी) | सामरिक (< 300 किमी), मध्यम (300-1,000 किमी), लंबी दूरी (> 1,000 किमी) |
| भारतीय उदाहरण | अग्नि श्रृंखला (I, II, III, IV, V), पृथ्वी श्रृंखला | ब्रह्मोस, निर्भय |
- अग्नि-V: भारत की सबसे लंबी दूरी की ICBM जिसकी मारक सीमा 5,000 किमी से अधिक है, तीन-चरणीय ठोस-ईंधन वाली मिसाइल, परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम, भारत की रणनीतिक प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाती है।
- ब्रह्मोस: विश्व की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (मैक 2.8-3), भारत (DRDO) और रूस (NPO Mashinostroyeniya) के बीच संयुक्त उद्यम, भूमि, समुद्र, वायु और पनडुब्बी से प्रक्षेपित प्रकारों में उपलब्ध।
- पता लगाने में कठिनाई: क्रूज मिसाइलें कम उड़ती हैं और रडार द्वारा पता लगाना कठिन होता है, जबकि बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण के बाद अनुमानित प्रक्षेपवक्र होते हैं लेकिन उच्च गति के कारण रोकना कठिन होता है।
कभी-कभी समाचारों में देखा जाने वाला "टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD)" क्या है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर अमेरिका की एंटी-मिसाइल प्रणाली (विकल्प 3) है। THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) अमेरिका द्वारा विकसित एक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जो कम, मध्यम और मध्यम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को उनकी अंतिम उड़ान अवस्था में नष्ट करती है।
THAAD बैलिस्टिक मिसाइलों को पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों जगह रोकने में सक्षम है। यह अमेरिका की प्रमुख मिसाइल रक्षा प्रणाली है और दक्षिण कोरिया तथा सऊदी अरब जैसे देशों में भी तैनात की गई है।
हाल ही में समाचारों में रहे 'INS अस्त्रधारिणी' का सबसे सटीक विवरण निम्नलिखित में से कौन सा है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — टॉरपीडो प्रक्षेपण और पुनर्प्राप्ति पोत
INS अस्त्रधारिणी भारत का पहला स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित टॉरपीडो लॉन्च एंड रिकवरी वेसल (TLRV) है, जिसे 2015 में 95% स्वदेशी सामग्री के साथ कमीशन किया गया था।
यह NSTL द्वारा विकसित टॉरपीडो और माइन्स जैसे पानी के नीचे के हथियारों के तकनीकी परीक्षणों के लिए एक विशेष मंच के रूप में कार्य करता है, जिसमें हथियार पुनर्प्राप्ति संचालन के दौरान बेहतर स्थिरता के लिए कैटामरन हल डिजाइन है।
अग्नि-IV मिसाइल के संदर्भ में, निम्नलिखित में कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह एक सतह-से-सतह मिसाइल है।
- यह केवल तरल प्रणोदक द्वारा संचालित होती है।
- यह लगभग 7500 किमी दूर एक टन परमाणु वारहेड पहुँचा सकती है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: अग्नि-IV एक सतह-से-सतह बैलिस्टिक मिसाइल है जो मोबाइल भूमि-आधारित प्लेटफार्मों से प्रक्षेपित की जाती है और जमीनी लक्ष्यों को निशाना बनाती है।
❌ कथन 2 – गलत: अग्नि-IV दो-चरणीय ठोस-ईंधन प्रणोदन का उपयोग करती है, तरल प्रणोदक का नहीं। ठोस प्रणोदक बेहतर भंडारण स्थिरता और त्वरित प्रक्षेपण क्षमता प्रदान करते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: अग्नि-IV की रेंज लगभग 4,000 किमी है, 7,500 किमी नहीं। हालांकि यह एक टन पेलोड ले जा सकती है, लेकिन 7,500 किमी रेंज का आंकड़ा गलत है।