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भारतीय कला और संस्कृति Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for भारतीय कला और संस्कृति in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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कुछ बौद्ध शैलकृत गुफाओं को चैत्य कहा जाता है, जबकि अन्य को विहार कहा जाता है। दोनों में क्या अंतर है?
Detailed Explanation:
चैत्य एक बौद्ध प्रार्थना कक्ष या मंदिर है जिसके एक छोर पर स्तूप होता है, जो पूजा और सामूहिक प्रार्थना के स्थान के रूप में कार्य करता है।
विहार एक आवासीय मठ है जिसमें एक केंद्रीय हॉल के साथ छोटे कक्ष (आवास कक्ष) जुड़े होते हैं, जहाँ भिक्षु निवास करते थे, ध्यान करते थे और अध्ययन करते थे।
भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, नृत्य और नाटक में 'त्रिभंग' नामक मुद्रा प्राचीन काल से लेकर आज तक भारतीय कलाकारों की पसंदीदा रही है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन इस मुद्रा का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
त्रिभंग (अर्थात 'तीन मोड़') भारतीय कला और नृत्य में एक शास्त्रीय खड़ी मुद्रा है जिसमें शरीर एक कोमल S-आकार की वक्रता बनाता है और तीन बिंदुओं पर मुड़ता है: गर्दन, कमर और घुटना।
यह त्रि-मोड़ मुद्रा कमर और गर्दन पर विपरीत वक्र बनाती है, जो इसे ओडिसी नृत्य और मंदिर की मूर्तिकला जैसी परंपराओं में सबसे सुंदर और मोहक मुद्रा बनाती है, जो अक्सर भगवान कृष्ण के चित्रों में दर्शाई जाती है।
निम्नलिखित ऐतिहासिक स्थानों पर विचार कीजिए:
- अजंता गुफाएँ
- लेपाक्षी मंदिर
- साँची स्तूप
उपर्युक्त में से कौन सा/से स्थान भित्ति चित्रों के लिए भी जाना/जाने जाता/जाते है/हैं?
Detailed Explanation:
भित्ति चित्र वे कलाकृतियाँ हैं जो सीधे दीवारों या छतों पर चित्रित की जाती हैं, सतह के साथ अभिन्न रूप से।
✅ अजंता गुफाएँ: 2री शताब्दी ईसा पूर्व से 5वीं शताब्दी ईस्वी के जातक कथाओं और धार्मिक विषयों को दर्शाने वाले बौद्ध भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध।
✅ लेपाक्षी मंदिर: 16वीं शताब्दी के विजयनगर काल के भित्ति चित्रों से युक्त, जो रामायण, महाभारत और वैष्णव विषयों के दृश्य दर्शाते हैं।
❌ साँची स्तूप: द्वारों (तोरणों) पर पत्थर की नक्काशी और मूर्तियों के लिए जाना जाता है, लेकिन इसमें भित्ति चित्र नहीं हैं।
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निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन जैन सिद्धांत पर लागू होता है/होते हैं?
- कर्म को नष्ट करने का सबसे निश्चित तरीका तपस्या करना है।
- प्रत्येक वस्तु, यहां तक कि सबसे छोटे कण की भी आत्मा होती है।
- कर्म आत्मा का अभिशाप है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।
नीचे दिए गए कूटों का उपयोग करके सही उत्तर चुनें
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: जैन सिद्धांत में निर्जरा (कर्म का विनाश) तपस्या (तप) और संयम के माध्यम से प्राप्त होता है, जो आत्मा से संचित कार्मिक कणों को हटाने में मदद करता है।
✅ कथन 2 – सही: जैन धर्म सार्वभौमिक जीववाद में विश्वास करता है – पत्थर, जल, अग्नि और वायु सहित प्रत्येक वस्तु में आत्मा (जीव) होती है, जिससे सबसे छोटा कण भी जीवित इकाई बन जाता है।
✅ कथन 3 – सही: कर्म को सूक्ष्म पदार्थ के रूप में देखा जाता है जो आत्मा को बांधता है और उसके अनंत ज्ञान और आनंद के प्राकृतिक गुणों को अवरुद्ध करता है; मोक्ष के लिए कार्मिक बंधन का पूर्ण उन्मूलन आवश्यक है।
तीनों कथन सही हैं।
भारत में दार्शनिक विचारधारा के इतिहास के संदर्भ में, सांख्य दर्शन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सांख्य पुनर्जन्म या आत्मा के पुनर्गमन के सिद्धांत को स्वीकार नहीं करता है।
- सांख्य मानता है कि यह आत्म-ज्ञान है जो मुक्ति की ओर ले जाता है, न कि कोई बाहरी प्रभाव या कारक।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: सांख्य दर्शन, पुनर्जन्म और आत्मा (पुरुष) के पुनर्गमन के सिद्धांत को स्वीकार करता है। पुरुष (चेतना) और प्रकृति (जड़ पदार्थ) के बीच भेद की अज्ञानता के कारण संसार चक्र जारी रहता है।
✅ कथन 2 – सही: सांख्य मानता है कि मुक्ति (कैवल्य), आत्म-ज्ञान (विवेक-ज्ञान) से प्राप्त होती है – जो पुरुष को प्रकृति से अलग पहचानने का ज्ञान है। नास्तिक दर्शन होने के कारण, यह मुक्ति में किसी बाहरी कारक या ईश्वर की भूमिका को नकारता है।
निम्नलिखित में से कौन सा बौद्ध धर्म में निर्वाण की अवधारणा का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
बौद्ध धर्म में निर्वाण का शाब्दिक अर्थ "बुझना" या "विलोपन" है, जो इच्छा (तृष्णा), घृणा और अज्ञानता की ज्वाला के विलोपन को दर्शाता है।
यह दुख (दुक्ख) की समाप्ति और पुनर्जन्म के चक्र (संसार) के अंत का प्रतिनिधित्व करता है, जो तब प्राप्त होता है जब सभी लालसाएं और आसक्तियां समाप्त हो जाती हैं, न कि आत्म का विनाश या केवल आनंद की स्थिति।
निम्नलिखित भक्ति संतों पर विचार कीजिए:
- दादू दयाल
- गुरु नानक
- त्यागराज
उपर्युक्त में से कौन लोदी वंश के पतन और बाबर के सत्ता में आने के समय उपदेश दे रहे थे?
Detailed Explanation:
✅ कथन 2 – सही: गुरु नानक (1469-1539) प्रथम पानीपत युद्ध (1526) में बाबर द्वारा इब्राहिम लोदी की पराजय के समय सक्रिय रूप से उपदेश दे रहे थे, जिसने लोदी वंश के पतन को चिह्नित किया।
❌ कथन 1 – गलत: दादू दयाल (1544-1603) का जन्म लोदी वंश के पतन के 18 वर्ष बाद हुआ था।
❌ कथन 3 – गलत: त्यागराज (1767-1847), एक कर्नाटक संगीत संगीतकार, दो शताब्दियों से अधिक बाद जीवित थे।
भारतीय शैल-कर्तित (रॉक-कट) स्थापत्यकला के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बादामी की गुफाएँ भारत में सबसे प्राचीन जीवित शैल-कर्तित गुफाएँ हैं।
- बराबर शैल-कर्तित गुफाएँ मूलतः सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा आजीविकों के लिए बनवाई गई थीं।
- एलोरा में, विभिन्न धर्मों के लिए गुफाएँ बनाई गई थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: बिहार की बराबर गुफाएँ (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व, मौर्य काल) भारत की सबसे प्राचीन जीवित शैल-कर्तित गुफाएँ हैं, न कि बादामी गुफाएँ (छठी–सातवीं शताब्दी ईस्वी, चालुक्य)।
❌ कथन 2 – गलत: बराबर गुफाएँ सम्राट अशोक और उनके पौत्र दशरथ द्वारा आजीविक संप्रदाय के लिए बनवाई गई थीं, न कि चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा।
✅ कथन 3 – सही: एलोरा की गुफाएँ (छठी–नौवीं शताब्दी ईस्वी) तीन धर्मों — बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म — के लिए खोदी गई थीं, जो धार्मिक सौहार्द को दर्शाती हैं।
प्राचीन भारत के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से बौद्ध धर्म और जैन धर्म दोनों में समान था/थे?
- तपस्या और भोग की चरम सीमाओं से बचना
- वेदों के अधिकार के प्रति उदासीनता
- अनुष्ठानों की प्रभावकारिता से इनकार
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: बौद्ध धर्म ने मध्यम मार्ग (मध्यमा मार्ग) की वकालत की जो विलासिता और कठोर तपस्या दोनों चरम सीमाओं से बचता है, लेकिन जैन धर्म ने आध्यात्मिक मुक्ति के लिए अत्यधिक संयम और कठोर तपस्या पर जोर दिया।
✅ कथन 2 – सही: बौद्ध और जैन धर्म दोनों ने वेदों के अधिकार को अस्वीकार किया और उन्हें परम धार्मिक ग्रंथ नहीं माना, जिससे वे नास्तिक परंपराओं के रूप में चिह्नित हुए।
✅ कथन 3 – सही: दोनों परंपराओं ने वैदिक अनुष्ठानों और यज्ञों की प्रभावकारिता से इनकार किया, और मुक्ति प्राप्त करने के लिए व्यक्तिगत नैतिक आचरण, सही ज्ञान और मानसिक अनुशासन पर जोर दिया।
आप कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम नृत्यों के बीच कैसे अंतर करते हैं?
- नर्तकों द्वारा कभी-कभी संवाद बोलना कुचिपुड़ी नृत्य में पाया जाता है लेकिन भरतनाट्यम में नहीं।
- पीतल की थाली पर अपने पैरों को किनारों पर रखकर नृत्य करना भरतनाट्यम की विशेषता है लेकिन कुचिपुड़ी नृत्य में ऐसी गति का रूप नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: कुचिपुड़ी नर्तक प्रस्तुतियों के दौरान वाचिक अभिनय (बोले गए संवाद) का उपयोग करते हैं, जो भरतनाट्यम में नहीं पाई जाने वाली एक अनूठी विशेषता है।
❌ कथन 2 – गलत: पीतल की थाली पर नृत्य (तरंगम) कुचिपुड़ी की विशिष्ट विशेषता है, भरतनाट्यम की नहीं।
ध्रुपद, जो भारत की एक प्रमुख परंपरा है और सदियों से जीवित रखी गई है, के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
- ध्रुपद की उत्पत्ति और विकास मुगल काल के दौरान राजपूत राज्यों में हुआ।
- ध्रुपद मुख्यतः भक्तिपरक और आध्यात्मिक संगीत है।
- ध्रुपद आलाप में मंत्रों के संस्कृत अक्षरों का प्रयोग होता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: ध्रुपद की उत्पत्ति प्राचीन काल में सामवेद के गायन से हुई और 12वीं-15वीं शताब्दी में मंदिरों में विकसित हुआ, जो मुगल काल से पहले की बात है। बाद में राजपूत और मुगल दरबारों ने इसे संरक्षण दिया लेकिन यह वहाँ उत्पन्न नहीं हुआ।
✅ कथन 2 – सही: ध्रुपद मुख्यतः भक्तिपरक और आध्यात्मिक संगीत है, जो पारंपरिक रूप से मंदिरों में देवताओं के समक्ष गाया जाता था, जो ध्यान और आत्मचिंतन पर जोर देता है।
✅ कथन 3 – सही: ध्रुपद आलाप में वैदिक मंत्रों के संस्कृत अक्षरों जैसे "ॐ, अनंत, हरि, नारायण" का प्रयोग होता है, जो वैदिक गायन परंपराओं में इसकी जड़ों को दर्शाता है।
मध्यकालीन भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में, सूफी रहस्यवादी निम्नलिखित में से किन प्रथाओं का पालन करने के लिए जाने जाते थे?
- ध्यान और श्वास नियंत्रण
- एकांत स्थान पर कठोर तपस्या अभ्यास
- अपने श्रोताओं में समाधि की स्थिति उत्पन्न करने के लिए पवित्र गीतों का पाठ
नीचे दिए गए कूटों का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सूफी रहस्यवादी आध्यात्मिक एकाग्रता और आत्म-शुद्धि प्राप्त करने के लिए ध्यान (मुराकाबा) और श्वास नियंत्रण (हब्स-ए-दम) तकनीकों का अभ्यास करते थे।
✅ कथन 2 – सही: कई सूफी सांसारिक इच्छाओं से अलग होने के लिए एकांत स्थानों (खानकाहों) में एकांतवास, उपवास और आत्म-संयम सहित तपस्या प्रथाओं (खल्वा) में संलग्न होते थे।
✅ कथन 3 – सही: समा (संगीत सभाएं) जिसमें भक्ति गीतों (कव्वाली) और कविताओं (गज़लों) का पाठ शामिल था, आध्यात्मिक समाधि (वज्द) और दैवीय संबंध उत्पन्न करने के लिए सूफी अभ्यास का केंद्र था।
भगवान बुद्ध की प्रतिमा को कभी-कभी 'भूमिस्पर्श मुद्रा' नामक हस्त मुद्रा के साथ दिखाया जाता है। यह प्रतीक है
Detailed Explanation:
भूमिस्पर्श मुद्रा (पृथ्वी-स्पर्श मुद्रा) उस क्षण को दर्शाती है जब सिद्धार्थ गौतम ने बोध गया में मार के प्रलोभनों के दौरान, अपने दाहिने हाथ से पृथ्वी को छूकर पृथ्वी देवी (वसुधारा/स्थविरा) को साक्षी के रूप में बुलाया।
पृथ्वी ने अनगिनत पूर्व जन्मों में बुद्ध के संचित पुण्य, पवित्रता और आध्यात्मिक योग्यता की गवाही दी, जिससे मार का दावा पराजित हुआ और उनके ज्ञान प्राप्ति के अधिकार की पुष्टि हुई। यह मुद्रा पवित्रता और शुद्धता की साक्षी का प्रतीक है, न कि विघ्न से भौतिक सुरक्षा का।
नागर, द्रविड़ और वेसर हैं:
Detailed Explanation:
नागर (उत्तरी शैली), द्रविड़ (दक्षिणी शैली), और वेसर (मिश्रित शैली) भारतीय मंदिर वास्तुकला की तीन मुख्य शैलियाँ हैं।
नागर में मधुमक्खी के छत्ते जैसे शिखर होते हैं, द्रविड़ में पिरामिडनुमा विमान होते हैं, और वेसर दोनों शैलियों के तत्वों को मिलाती है, जो दक्कन क्षेत्र में प्रचलित है।