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हिंदुस्तानी संगीत परंपरा Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for हिंदुस्तानी संगीत परंपरा with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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कर्नाटक के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर ने इसका प्रतिनिधित्व किया:
Detailed Explanation:
पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर (1910–1992) कर्नाटक के प्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक थे और उन्हें
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उन्होंने उस्ताद मंजी खान और उस्ताद भुरजी खान से प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो इस घराने के संस्थापक उस्ताद अल्लादिया खान के पुत्र थे।
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वे दुर्लभ और जटिल रागों की प्रस्तुति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे।
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अतः सही उत्तर विकल्प (D) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| घराना | कारण |
|---|---|
| आगरा घराना | मंसूर इससे संबंधित नहीं थे। |
| ग्वालियर घराना | प्रारंभिक प्रशिक्षण मिला था, लेकिन बाद में जयपुर-अतरौली शैली अपनाई। |
| पटियाला घराना | यह घराना मंसूर से संबंधित नहीं है। |
| जयपुर-अतरौली घराना | मंसूर इसी घराने के प्रमुख गायक थे। ✅ |
जयपुर-अतरौली घराना
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| संस्थापक | उस्ताद अल्लादिया खान |
| संगीत परंपरा | हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत |
| विशेषता | दुर्लभ राग, जटिल तानें और लयकारी |
| प्रमुख गायक | पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर |
| गायन शैली | खुली आवाज़ और गहन राग विस्तार |
महत्वपूर्ण तथ्य
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जयपुर-अतरौली घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रमुख घरानों में से एक है।
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यह घराना विशेष रूप से दुर्लभ रागों के संरक्षण और प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध है।
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पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर ने इस शैली को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
पहला गंधर्व महाविद्यालय, एक संगीत प्रशिक्षण विद्यालय, 1901 में विष्णु दिगंबर पलुस्कर द्वारा स्थापित किया गया था
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (लाहौर)
Vishnu Digambar Paluskar ने 1901 में Lahore में पहला गंधर्व महाविद्यालय स्थापित किया था। उनका उद्देश्य शास्त्रीय संगीत की शिक्षा को आम लोगों तक पहुँचाना था।
✅ कथन I सही है: पहला गंधर्व महाविद्यालय 1901 में लाहौर में स्थापित किया गया था।
✅ कथन II सही है: पलुस्कर ने घराना-आधारित सीमित परंपरा से बाहर निकलकर संगीत शिक्षा को सभी के लिए उपलब्ध कराया।
❌ दिल्ली, ग्वालियर और उज्जैन गलत हैं: इन शहरों में बाद में शाखाएँ स्थापित हुईं, लेकिन पहला संस्थान लाहौर में था।
संक्षिप्त नोट्स: विष्णु दिगंबर पलुस्कर और गंधर्व महाविद्यालय
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विष्णु दिगंबर पलुस्कर (1872–1931) हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान आचार्य थे।
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उन्होंने 1901 में लाहौर में पहला गंधर्व महाविद्यालय स्थापित किया।
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इस संस्थान ने घराना परंपरा से बाहर संगठित संगीत शिक्षा को बढ़ावा दिया।
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उन्होंने शास्त्रीय संगीत को आम जनता तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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संगीत शिक्षण के लिए व्यवस्थित पाठ्यक्रम और नोटेशन प्रणाली विकसित की।
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बाद में गंधर्व महाविद्यालय की शाखाएँ अनेक शहरों में खुलीं।
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उन्हें आधुनिक हिंदुस्तानी संगीत शिक्षा का प्रमुख निर्माता माना जाता है।
ध्रुपद, जो भारत की एक प्रमुख परंपरा है और सदियों से जीवित रखी गई है, के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं?
- ध्रुपद की उत्पत्ति और विकास मुगल काल के दौरान राजपूत राज्यों में हुआ।
- ध्रुपद मुख्यतः भक्तिपरक और आध्यात्मिक संगीत है।
- ध्रुपद आलाप में मंत्रों के संस्कृत अक्षरों का प्रयोग होता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: ध्रुपद की उत्पत्ति प्राचीन काल में सामवेद के गायन से हुई और 12वीं-15वीं शताब्दी में मंदिरों में विकसित हुआ, जो मुगल काल से पहले की बात है। बाद में राजपूत और मुगल दरबारों ने इसे संरक्षण दिया लेकिन यह वहाँ उत्पन्न नहीं हुआ।
✅ कथन 2 – सही: ध्रुपद मुख्यतः भक्तिपरक और आध्यात्मिक संगीत है, जो पारंपरिक रूप से मंदिरों में देवताओं के समक्ष गाया जाता था, जो ध्यान और आत्मचिंतन पर जोर देता है।
✅ कथन 3 – सही: ध्रुपद आलाप में वैदिक मंत्रों के संस्कृत अक्षरों जैसे "ॐ, अनंत, हरि, नारायण" का प्रयोग होता है, जो वैदिक गायन परंपराओं में इसकी जड़ों को दर्शाता है।
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