भारत में दार्शनिक विचारधारा के इतिहास के संदर्भ में, सांख्य दर्शन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सांख्य पुनर्जन्म या आत्मा के पुनर्गमन के सिद्धांत को स्वीकार नहीं करता है।
- सांख्य मानता है कि यह आत्म-ज्ञान है जो मुक्ति की ओर ले जाता है, न कि कोई बाहरी प्रभाव या कारक।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: सांख्य दर्शन, पुनर्जन्म और आत्मा (पुरुष) के पुनर्गमन के सिद्धांत को स्वीकार करता है। पुरुष (चेतना) और प्रकृति (जड़ पदार्थ) के बीच भेद की अज्ञानता के कारण संसार चक्र जारी रहता है।
✅ कथन 2 – सही: सांख्य मानता है कि मुक्ति (कैवल्य), आत्म-ज्ञान (विवेक-ज्ञान) से प्राप्त होती है – जो पुरुष को प्रकृति से अलग पहचानने का ज्ञान है। नास्तिक दर्शन होने के कारण, यह मुक्ति में किसी बाहरी कारक या ईश्वर की भूमिका को नकारता है।
Question 2 of 2 भारतीय दर्शन के विद्यालय
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निम्नलिखित में से कौन सा एक युग्म भारतीय दर्शन की छह प्रणालियों का हिस्सा नहीं है?
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