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प्राचीन भारत की स्थापत्य कला Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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प्राचीन भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- स्तूप की अवधारणा बौद्ध मूल की है।
- स्तूप सामान्यतः अवशेषों का भंडार था।
- स्तूप बौद्ध परंपरा में एक मनौती और स्मारकीय संरचना थी।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
तीन कथनों में से केवल कथन 2 और 3 सही हैं। जबकि स्तूप वास्तव में अवशेषों के भंडार थे और बौद्ध परंपरा में मनौती और स्मारकीय संरचनाओं के रूप में कार्य करते थे, स्तूप की अवधारणा स्वयं बौद्ध धर्म से पूर्व की है और बौद्ध-पूर्व शवाधान टीलों के रूप में उत्पन्न हुई थी।
❌ कथन 1 – गलत: स्तूप की अवधारणा बौद्ध मूल की नहीं है; यह बौद्ध-पूर्व काल में शवाधान टीलों के रूप में अस्तित्व में थी और बाद में बौद्ध धर्म द्वारा इसे अपनाया गया और एक पवित्र स्मारक में परिवर्तित किया गया।
✅ कथन 2 – सही: स्तूप सामान्यतः अवशेषों के भंडार के रूप में कार्य करते थे, जिनमें बुद्ध या आदरणीय बौद्ध भिक्षुओं के भौतिक अवशेष या सामान होते थे।
✅ कथन 3 – सही: स्तूप मनौती (भक्ति प्रसाद) और स्मारकीय संरचनाओं के रूप में कार्य करते थे, जो बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को चिह्नित करते थे या धार्मिक भक्ति व्यक्त करते थे।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्राचीन भारत में स्तूप
- बौद्ध-पूर्व उत्पत्ति: स्तूप मूलतः बौद्ध धर्म के उदय से पहले प्राचीन भारत में शवाधान टीलों (चैत्य) के रूप में अस्तित्व में थे।
- बौद्ध अंगीकरण: बौद्ध धर्म ने स्तूप को अपनाया और इसे एक केंद्रीय धार्मिक स्मारक में परिवर्तित किया, विशेष रूप से बुद्ध के परिनिर्वाण (483 ईसा पूर्व) के बाद।
- उद्देश्य: स्तूप तीन कार्य करते थे - पवित्र अवशेषों (शरीर) के भंडार, महत्वपूर्ण बौद्ध घटनाओं को चिह्नित करने वाले स्मारकीय स्मारक, और भक्ति के कृत्यों के रूप में निर्मित मनौती संरचनाएं।
- मुख्य घटक: एक विशिष्ट स्तूप में अर्धगोलाकार गुंबद (अंड), एक वर्गाकार रेलिंग (हर्मिका), और एक छत्र जैसी संरचना (छत्रावली) होती है।
- प्रसिद्ध उदाहरण: सांची स्तूप (मध्य प्रदेश), अमरावती स्तूप (आंध्र प्रदेश), और धामेक स्तूप (सारनाथ) विभिन्न स्थापत्य शैलियों और कालों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- परिक्रमा: भक्तजन पूजा और ध्यान के रूप में स्तूपों के चारों ओर प्रदक्षिणा (दक्षिणावर्त चलना) करते हैं।
निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में धान्यकटक स्थित था, जो महासांघिकों के अधीन एक प्रमुख बौद्ध केंद्र के रूप में समृद्ध हुआ?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — आंध्र
धान्यकटक (आधुनिक अमरावती, आंध्र प्रदेश) दक्षिण भारत के आंध्र क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन नगर था। यह महासांघिक संप्रदाय के अधीन एक प्रमुख बौद्ध केंद्र के रूप में समृद्ध हुआ, जो प्रारंभिक बौद्ध संप्रदायों में से एक था और जिसने बाद में महायान बौद्ध धर्म के विकास को प्रभावित किया। यह स्थल अपने भव्य स्तूप और मूर्तिकला कला के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे प्राचीन काल में एक प्रमुख तीर्थ और शिक्षा केंद्र बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत के प्राचीन बौद्ध केंद्र
| बौद्ध केंद्र | क्षेत्र/स्थान | संबद्ध संप्रदाय/महत्व |
|---|---|---|
| धान्यकटक (अमरावती) | आंध्र प्रदेश | महासांघिक संप्रदाय; विस्तृत मूर्तिकला के साथ प्रसिद्ध स्तूप |
| तक्षशिला | गांधार (पाकिस्तान) | प्रमुख शिक्षा केंद्र; गांधार कला शैली |
| नालंदा | मगध (बिहार) | महान मठवासी विश्वविद्यालय; महायान बौद्ध धर्म |
| विक्रमशिला | मगध (बिहार) | धर्मपाल द्वारा स्थापित; तांत्रिक बौद्ध धर्म |
| सांची | मध्य प्रदेश | अशोक द्वारा निर्मित प्रसिद्ध स्तूप |
| धौली | कलिंग (ओडिशा) | अशोक के शिलालेख; कलिंग युद्ध का स्थल |
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :
स्थल : प्रसिद्धि
- बेसनगर : शैव गुफा मंदिर
- भाजा : बौद्ध गुफा मंदिर
- सित्तनवासल : जैन गुफा मंदिर
उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
दिए गए तीन युग्मों में से दो सही सुमेलित हैं। भाजा बौद्ध गुफा मंदिरों (पुणे के पास 2री शताब्दी ईसा पूर्व की शैलकृत गुफाएं) से सही रूप से जुड़ा है, और सित्तनवासल जैन गुफा मंदिरों (तमिलनाडु में प्राचीन जैन स्मारक) के लिए सही रूप से जाना जाता है। हालांकि, बेसनगर (विदिशा, मध्य प्रदेश) विशेष रूप से शैव गुफा मंदिर के लिए नहीं जाना जाता है; यह हेलिओडोरस स्तंभ के लिए अधिक प्रसिद्ध है, जो भगवान विष्णु को समर्पित एक प्राचीन गरुड़ स्तंभ है, साथ ही बौद्ध, जैन और हिंदू मंदिरों के अवशेष भी हैं।
❌ युग्म 1 (बेसनगर : शैव गुफा मंदिर) – गलत: बेसनगर (विदिशा) मुख्य रूप से हेलिओडोरस स्तंभ (विष्णु को समर्पित गरुड़ स्तंभ) के लिए जाना जाता है, शैव गुफा मंदिर के लिए नहीं।
✅ युग्म 2 (भाजा : बौद्ध गुफा मंदिर) – सही: महाराष्ट्र में भाजा गुफाएं 2री शताब्दी ईसा पूर्व की प्रसिद्ध शैलकृत बौद्ध गुफाएं हैं।
✅ युग्म 3 (सित्तनवासल : जैन गुफा मंदिर) – सही: तमिलनाडु में सित्तनवासल सुंदर भित्तिचित्रों वाले प्राचीन जैन गुफा मंदिर के लिए प्रसिद्ध है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत के प्रसिद्ध गुफा मंदिर
| स्थल | स्थान | धार्मिक संबद्धता | प्रमुख विशेषताएं |
|---|---|---|---|
| भाजा गुफाएं | महाराष्ट्र (पुणे के पास) | बौद्ध | 22 शैलकृत गुफाएं, 2री शताब्दी ईसा पूर्व, हीनयान वास्तुकला |
| सित्तनवासल | तमिलनाडु (पुदुक्कोट्टई) | जैन | भित्तिचित्रों वाला प्राचीन जैन गुफा मंदिर, अर्धनारी गुफा |
| एलिफेंटा गुफाएं | महाराष्ट्र (मुंबई) | शैव (हिंदू) | यूनेस्को स्थल, शिव की प्रसिद्ध त्रिमूर्ति मूर्ति |
| अजंता गुफाएं | महाराष्ट्र (औरंगाबाद) | बौद्ध | यूनेस्को स्थल, चित्रों और मूर्तियों वाली 30 गुफाएं |
| एलोरा गुफाएं | महाराष्ट्र (औरंगाबाद) | बौद्ध, हिंदू, जैन | 34 गुफाएं, कैलास मंदिर (गुफा 16), यूनेस्को स्थल |
| बादामी गुफाएं | कर्नाटक | हिंदू और जैन | 4 गुफाएं, चालुक्य वास्तुकला, 6ठी शताब्दी |
| उदयगिरि गुफाएं | मध्य प्रदेश (विदिशा) | हिंदू (वैष्णव) | गुप्त काल, वराह मूर्ति |
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — अजंता की गुफाएं वाघोरा नदी की घाटी में स्थित हैं।
अजंता की गुफाएं, यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल, जिसमें 29 रॉक-कट बौद्ध गुफा स्मारक शामिल हैं, महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में वाघोरा नदी की घोड़े की नाल के आकार की घाटी में स्थित हैं। आइए प्रत्येक कथन का मूल्यांकन करें:
✅ कथन 1 – सही: अजंता की गुफाएं वास्तव में महाराष्ट्र में वाघोरा नदी की घाटी में स्थित हैं।
❌ कथन 2 – गलत: साँची स्तूप मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में बेतवा नदी के निकट एक पहाड़ी पर स्थित है, चम्बल नदी के निकट नहीं।
❌ कथन 3 – गलत: पांडु-लेना गुफाएं (नासिक गुफाएं) महाराष्ट्र के नासिक के निकट त्रिरश्मि पहाड़ियों में उकेरी गई हैं, नर्मदा नदी की घाटी में नहीं।
❌ कथन 4 – गलत: अमरावती स्तूप आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है, गोदावरी नदी पर नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रमुख बौद्ध स्मारक और उनके स्थान
| स्मारक | स्थान | नदी/भौगोलिक विशेषता | राज्य |
|---|---|---|---|
| अजंता की गुफाएं | औरंगाबाद जिला | वाघोरा नदी की घाटी | महाराष्ट्र |
| साँची स्तूप | रायसेन जिला | बेतवा नदी के निकट | मध्य प्रदेश |
| पांडु-लेना गुफाएं | नासिक | त्रिरश्मि पहाड़ियां | महाराष्ट्र |
| अमरावती स्तूप | गुंटूर जिला | कृष्णा नदी | आंध्र प्रदेश |
| एलोरा की गुफाएं | औरंगाबाद जिला | अजंता के निकट | महाराष्ट्र |
अजंता और महाबलीपुरम के नाम से जाने जाने वाले दो ऐतिहासिक स्थलों में क्या समानता है?
- दोनों एक ही काल में बनाए गए थे।
- दोनों एक ही धार्मिक संप्रदाय से संबंधित हैं।
- दोनों में शैलकृत स्मारक हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 3
❌ कथन 1 – गलत: अजंता की गुफाएं दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से छठी शताब्दी ईस्वी के बीच बनाई गई थीं (मुख्यतः वाकाटक और गुप्त काल में), जबकि महाबलीपुरम के स्मारक सातवीं-आठवीं शताब्दी ईस्वी में पल्लव वंश के शासनकाल में बनाए गए थे। ये अलग-अलग कालखंड से संबंधित हैं जिनके बीच कम से कम एक शताब्दी का अंतर है।
❌ कथन 2 – गलत: अजंता की गुफाएं बौद्ध स्मारक हैं जो मठों और प्रार्थना कक्षों (चैत्य और विहार) के रूप में काम करते थे, जबकि महाबलीपुरम के स्मारक मुख्यतः हिंदू हैं, जो शिव और विष्णु को समर्पित हैं जैसे शोर मंदिर और पंच रथ।
✅ कथन 3 – सही: दोनों स्थलों में शैलकृत वास्तुकला मौजूद है। अजंता में बेसाल्ट चट्टानों में तराशी गई 30 शैलकृत गुफा मंदिर हैं, जबकि महाबलीपुरम में ग्रेनाइट के एक ही पत्थर से तराशे गए रथ, मंडप और उभरी हुई मूर्तियां हैं।
भारत की कला और पुरातात्विक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा सबसे पहले बनाया गया था?
Detailed Explanation:
धौली में शिला-कटित हाथी का निर्माण सम्राट अशोक के अधीन मौर्य साम्राज्य के दौरान तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (लगभग 260 ईसा पूर्व) में हुआ था, जो इसे विकल्पों में सबसे प्राचीन स्मारक बनाता है।
उदयगिरि में वराह प्रतिमा का काल गुप्त काल (लगभग 401-402 ईस्वी) है, महाबलीपुरम में शिला-कटित स्मारक का निर्माण पल्लव वंश द्वारा 7वीं-8वीं शताब्दी ईस्वी में हुआ था, और भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी ईस्वी में हुआ था।
भारत में बौद्ध इतिहास, परंपरा और संस्कृति के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| प्रसिद्ध मंदिर | स्थान |
|---|---|
| 1. ताबो मठ और मंदिर परिसर | स्पीति घाटी |
| 2. ल्होत्सावा ल्हाखांग मंदिर | नाको जांस्कर घाटी |
| 3. अलची मंदिर परिसर | लद्दाख |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ युग्म 1 – सही: ताबो मठ और मंदिर परिसर ताबो गांव, स्पीति घाटी, हिमाचल प्रदेश में स्थित है, 996 ईस्वी में स्थापित, जिसे 'हिमालय का अजंता' कहा जाता है।
❌ युग्म 2 – गलत: ल्होत्सावा ल्हाखांग मंदिर नाको गांव, किन्नौर जिले में स्थित है, जांस्कर घाटी में नहीं। नाको किन्नौर के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में है, जहां नाको झील और नाको मठ (1025 ईस्वी) है।
✅ युग्म 3 – सही: अलची मंदिर परिसर (अलची गोम्पा) एक बौद्ध मठ परिसर है जो अलची गांव, लेह जिला, लद्दाख में स्थित है, जो अपनी 11वीं-12वीं सदी की भित्ति चित्रकला और भारत-हिमालयी कला के लिए प्रसिद्ध है।
भारतीय कला और संस्कृति के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| मूर्तिकला की प्रसिद्ध कृति | स्थल |
|---|---|
| 1. बुद्ध के महापरिनिर्वाण की भव्य प्रतिमा जिसके ऊपर अनेक आकाशीय संगीतकार और नीचे उनके शोकाकुल अनुयायी हैं | अजंता |
| 2. विष्णु के वराह अवतार (सूअर अवतार) की विशाल प्रतिमा, जब वे पृथ्वी देवी को गहरे और अव्यवस्थित जल से बचाते हैं, चट्टान पर उकेरी गई | माउंट आबू |
| 3. विशाल शिलाखंडों की सतह पर उकेरी गई "अर्जुन की तपस्या"/"गंगा का अवतरण" | मामल्लपुरम |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ युग्म 1 – सही: अजंता गुफा 26 में बुद्ध की भव्य महापरिनिर्वाण मूर्ति है जिसमें ऊपर आकाशीय संगीतकार और नीचे शोकाकुल शिष्य हैं, यह बौद्ध रॉक-कट कला की उत्कृष्ट कृति है।
❌ युग्म 2 – गलत: विशाल वराह अवतार मूर्ति (पृथ्वी देवी को ब्रह्मांडीय जल से बचाते हुए) उदयगिरि गुफाएं, मध्य प्रदेश में स्थित है, माउंट आबू में नहीं; माउंट आबू में दिलवाड़ा जैन मंदिर हैं।
✅ युग्म 3 – सही: मामल्लपुरम (महाबलीपुरम) में प्रतिष्ठित "अर्जुन की तपस्या"/"गंगा का अवतरण" है – विश्व की सबसे बड़ी खुली चट्टान पर उकेरी गई कृति जो दो विशाल शिलाखंडों पर बनी है।
कुछ बौद्ध शैलकृत गुफाओं को चैत्य कहा जाता है, जबकि अन्य को विहार कहा जाता है। दोनों में क्या अंतर है?
Detailed Explanation:
चैत्य एक बौद्ध प्रार्थना कक्ष या मंदिर है जिसके एक छोर पर स्तूप होता है, जो पूजा और सामूहिक प्रार्थना के स्थान के रूप में कार्य करता है।
विहार एक आवासीय मठ है जिसमें एक केंद्रीय हॉल के साथ छोटे कक्ष (आवास कक्ष) जुड़े होते हैं, जहाँ भिक्षु निवास करते थे, ध्यान करते थे और अध्ययन करते थे।
भारतीय शैल-कर्तित (रॉक-कट) स्थापत्यकला के इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- बादामी की गुफाएँ भारत में सबसे प्राचीन जीवित शैल-कर्तित गुफाएँ हैं।
- बराबर शैल-कर्तित गुफाएँ मूलतः सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा आजीविकों के लिए बनवाई गई थीं।
- एलोरा में, विभिन्न धर्मों के लिए गुफाएँ बनाई गई थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: बिहार की बराबर गुफाएँ (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व, मौर्य काल) भारत की सबसे प्राचीन जीवित शैल-कर्तित गुफाएँ हैं, न कि बादामी गुफाएँ (छठी–सातवीं शताब्दी ईस्वी, चालुक्य)।
❌ कथन 2 – गलत: बराबर गुफाएँ सम्राट अशोक और उनके पौत्र दशरथ द्वारा आजीविक संप्रदाय के लिए बनवाई गई थीं, न कि चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा।
✅ कथन 3 – सही: एलोरा की गुफाएँ (छठी–नौवीं शताब्दी ईस्वी) तीन धर्मों — बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म — के लिए खोदी गई थीं, जो धार्मिक सौहार्द को दर्शाती हैं।
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