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मंदिर वास्तुकला Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for मंदिर वास्तुकला with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित में से किस मंदिर में नागर शैली का शिखर है?
- मालेगिट्टी शिवालय, बादामी
- हुचिमल्लीगुडी मंदिर, ऐहोल
- दशावतार मंदिर, देवगढ़
- विरुपाक्ष मंदिर, पत्तदकल
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
नागर शैली की पहचान इसकी घुमावदार (Curvilinear) शिखर से होती है और यह मुख्यतः उत्तर भारत में विकसित हुई।
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कथन 1 गलत है: मालेगिट्टी शिवालय, बादामी द्रविड़ शैली का मंदिर है, इसमें नागर शैली का शिखर नहीं है।
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कथन 2 सही है: हुचिमल्लिगुड़ी मंदिर, ऐहोल में नागर शैली का घुमावदार शिखर पाया जाता है।
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कथन 3 सही है: दशावतार मंदिर, देवगढ़ नागर शैली के सबसे प्राचीन उदाहरणों में से एक है।
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कथन 4 गलत है: विरुपाक्ष मंदिर, पट्टडकल द्रविड़ शैली का मंदिर है और इसमें पिरामिडाकार विमाना है।
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अतः कथन 2 और 3 सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
नागर एवं द्रविड़ मंदिर वास्तुकला
| विशेषता | नागर शैली | द्रविड़ शैली |
|---|---|---|
| क्षेत्र | उत्तर भारत | दक्षिण भारत |
| शिखर | घुमावदार (Curvilinear) | पिरामिडाकार (Vimana) |
| शीर्ष भाग | आमलक एवं कलश | स्तूपिका |
| उदाहरण | दशावतार मंदिर, खजुराहो मंदिर | बृहदेश्वर मंदिर, विरुपाक्ष मंदिर |
महत्वपूर्ण तथ्य
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ऐहोल को "भारतीय मंदिर वास्तुकला की जननी (Cradle of Indian Temple Architecture)" कहा जाता है।
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पट्टडकल में नागर और द्रविड़ दोनों शैलियों के मंदिर मिलते हैं।
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दशावतार मंदिर, देवगढ़ गुप्तकालीन नागर शैली का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
याद रखने की ट्रिक:
👉 Nagara = North = Curved Shikhara
👉 Dravida = South = Pyramid Tower
प्रधानमंत्री ने हाल ही में वेरावल में सोमनाथ मंदिर के पास नए सर्किट हाउस का उद्घाटन किया।
सोमनाथ मंदिर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
- सोमनाथ मंदिर ज्योतिर्लिंग तीर्थों में से एक है।
- सोमनाथ मंदिर का विवरण अल-बिरूनी द्वारा दिया गया था।
- सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा (वर्तमान मंदिर की स्थापना) राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन द्वारा की गई थी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
यह प्रश्न सोमनाथ मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन 3 गलत है क्योंकि प्रतिष्ठा डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी, न कि डॉ. एस. राधाकृष्णन द्वारा।
✅ कथन 1 – सही: सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के बारह पवित्र ज्योतिर्लिंग तीर्थों में से एक है, जो इसे हिंदू धर्म में सबसे पूजनीय तीर्थ स्थलों में से एक बनाता है।
✅ कथन 2 – सही: फारसी विद्वान अल-बिरूनी, जो महमूद गजनवी के साथ आए थे, ने अपने लेखन में सोमनाथ मंदिर की भव्यता का दस्तावेजीकरण किया, इसे 10वीं शताब्दी के आसपास निर्मित एक पत्थर की संरचना बताया जो तीन तरफ से समुद्र द्वारा सुरक्षित थी।
❌ कथन 3 – गलत: 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा (अभिषेक) भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा की गई थी, न कि डॉ. एस. राधाकृष्णन (जो दूसरे राष्ट्रपति थे) द्वारा।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सोमनाथ मंदिर
- स्थान: वेरावल (प्रभास पाटन), गुजरात, भारत के पश्चिमी तट पर
- धार्मिक महत्व: 12 ज्योतिर्लिंग तीर्थों में से एक, इन्हें पहला माना जाता है
- ऐतिहासिक विनाश: मंदिर को कई बार नष्ट और पुनर्निर्मित किया गया; विशेष रूप से 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा
- अल-बिरूनी का विवरण: मंदिर की शानदार वास्तुकला और संपत्ति का वर्णन किया, जिसने आक्रमणों को आकर्षित किया
- आधुनिक पुनर्निर्माण: 1947 में सरदार वल्लभभाई पटेल और के.एम. मुंशी द्वारा शुरू किया गया; 1951 में पूर्ण हुआ
- प्रतिष्ठा (1951): 11 मई 1951 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा संपन्न
- स्थापत्य शैली: वर्तमान संरचना बलुआ पत्थर का उपयोग करते हुए मंदिर वास्तुकला की चालुक्य शैली में निर्मित
मोरेना के निकट स्थित चौसठ योगिनी मंदिर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह कच्छपघात वंश के शासनकाल के दौरान निर्मित एक वृत्ताकार मंदिर है।
- यह भारत में निर्मित एकमात्र वृत्ताकार मंदिर है।
- इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में वैष्णव पंथ को बढ़ावा देना था।
- इसके डिज़ाइन ने एक लोकप्रिय धारणा को जन्म दिया है कि यह भारतीय संसद भवन के पीछे प्रेरणा था।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 4
मोरेना के निकट चौसठ योगिनी मंदिर 11वीं शताब्दी ईस्वी में कच्छपघात वंश के दौरान निर्मित एक वृत्ताकार मंदिर है। इसके अनूठे वृत्ताकार डिज़ाइन ने लोकप्रिय धारणा को प्रेरित किया है कि इसने भारतीय संसद भवन की वास्तुकला को प्रभावित किया, हालांकि इसका कोई निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।
✅ कथन 1 – सही: मंदिर वास्तव में वृत्ताकार है और 11वीं शताब्दी ईस्वी के आसपास कच्छपघात वंश के शासनकाल के दौरान निर्मित किया गया था।
❌ कथन 2 – गलत: यह भारत में एकमात्र वृत्ताकार मंदिर नहीं है; अन्य उदाहरणों में खजुराहो, जबलपुर और भेड़ाघाट में समान चौसठ योगिनी मंदिर शामिल हैं।
❌ कथन 3 – गलत: मंदिर 64 योगिनियों (तांत्रिक देवियों) की पूजा के लिए समर्पित था और इसका उद्देश्य शक्ति/तांत्रिक पंथ को बढ़ावा देना था, न कि वैष्णव पंथ को।
✅ कथन 4 – सही: एक लोकप्रिय धारणा है कि इस मंदिर के वृत्ताकार, खुले आकाश वाले डिज़ाइन ने भारतीय संसद भवन के वास्तुकारों को प्रेरित किया, हालांकि ऐतिहासिक रूप से पुष्टि नहीं की गई है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: चौसठ योगिनी मंदिर
- अर्थ: चौसठ का अर्थ है 64; ये मंदिर 64 योगिनियों (देवी दुर्गा/शक्ति की महिला परिचारिकाओं) को समर्पित थे।
- काल: अधिकतर 9वीं-12वीं शताब्दी ईस्वी के बीच भारत में तांत्रिक प्रथाओं के उदय के दौरान निर्मित।
- वास्तुकला: आमतौर पर वृत्ताकार या आयताकार, हाइपेथ्रल (आकाश के लिए खुला), एक केंद्रीय आंगन के चारों ओर व्यवस्थित छोटे मंदिरों के साथ।
- प्रमुख मंदिर: मोरेना (मध्य प्रदेश), हीरापुर (ओडिशा), खजुराहो (मप्र), भेड़ाघाट (मप्र), जबलपुर (मप्र), और रानीपुर-झारियाल (ओडिशा)।
- धार्मिक महत्व: शक्ति और तांत्रिक पूजा से जुड़ा हुआ, वैष्णव या शैव परंपराओं से नहीं।
- मोरेना मंदिर विशिष्टताएं: कच्छपघात शासकों द्वारा निर्मित; 64 कक्षों के साथ वृत्ताकार; माना जाता है कि इसने भारतीय संसद के वृत्ताकार डिज़ाइन को प्रेरित किया।
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किसी राज्य में मंदिर निर्माण में 'कल्याण मंडप' का निर्माण एक उल्लेखनीय विशेषता थी
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — विजयनगर
मंदिर परिसरों में विस्तृत 'कल्याण मंडप' (विवाह कक्ष) का निर्माण विजयनगर साम्राज्य (14वीं-17वीं शताब्दी) की एक विशिष्ट स्थापत्य विशेषता थी। ये अलंकृत मंडप विशेष रूप से देवताओं के औपचारिक विवाह अनुष्ठानों के लिए डिज़ाइन किए गए थे और विजयनगर मंदिर वास्तुकला की पहचान बन गए, जो इसे पूर्व दक्षिण भारतीय शैलियों से अलग करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: विजयनगर मंदिर स्थापत्य
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| कल्याण मंडप | देवता के औपचारिक विवाह के लिए विस्तृत विवाह कक्ष; जटिल नक्काशी से अत्यधिक सजाया गया |
| राय गोपुरम | विशाल प्रवेश द्वार (अक्सर मुख्य गर्भगृह से भी ऊँचे) |
| अम्मन मंदिर | मुख्य देवता की पत्नी को समर्पित अलग मंदिर |
| स्तंभयुक्त हॉल | याली (पौराणिक प्राणी) और दौड़ते घोड़ों की विशेषता वाले विशाल स्तंभ |
| उदाहरण | हम्पी में विट्ठल मंदिर और विरुपाक्ष मंदिर; कांचीपुरम में वरदराज मंदिर |
निम्नलिखित में से कौन सूर्य मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है/हैं?
- अरसावल्ली
- अमरकंटक
- ओंकारेश्वर
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
दिए गए विकल्पों में से, केवल अरसावल्ली अपने सूर्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। आंध्र प्रदेश के अरसावल्ली में स्थित सूर्यनारायण मंदिर पूर्वी गंग वंश द्वारा निर्मित एक प्रसिद्ध 7वीं शताब्दी का सूर्य मंदिर है, जो वास्तुकला की दृष्टि से इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि सूर्य की किरणें वर्ष में दो बार देवता के चरणों पर पड़ती हैं।
✅ कथन 1 – सही: आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले में स्थित अरसावल्ली में पूर्वी गंग वंश के राजा देवेंद्र वर्मा द्वारा निर्मित प्रसिद्ध 7वीं शताब्दी का सूर्यनारायण सूर्य मंदिर है।
❌ कथन 2 – गलत: मध्य प्रदेश में अमरकंटक नर्मदा नदी के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है और यहाँ कलचुरी वंश के मंदिर हैं, लेकिन यह सूर्य मंदिर के लिए प्रसिद्ध नहीं है।
❌ कथन 3 – गलत: मध्य प्रदेश में ओंकारेश्वर भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह एक शैव तीर्थ केंद्र है, सूर्य मंदिर के लिए नहीं जाना जाता है।
भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, 'पंचायतन' शब्द किसे संदर्भित करता है
Detailed Explanation:
पंचायतन (संस्कृत से: पंच = पाँच + आयतन = निवास स्थान) एक मंदिर स्थापत्य शैली है जिसमें मुख्य गर्भगृह के चारों कोनों पर चार सहायक मंदिर होते हैं, जो कुल मिलाकर पाँच मंदिर बनाते हैं।
यह शैली गुप्त काल (4th–6th शताब्दी ईस्वी) में लोकप्रिय हुई और उत्तर भारत में नागर शैली की मंदिर स्थापत्य की पहचान बनी, जो पाँच देवताओं (पंचदेवता) की पूजा का प्रतीक है: शिव, विष्णु, शक्ति, सूर्य और गणेश/स्कंद।
नागर, द्रविड़ और वेसर हैं:
Detailed Explanation:
नागर (उत्तरी शैली), द्रविड़ (दक्षिणी शैली), और वेसर (मिश्रित शैली) भारतीय मंदिर वास्तुकला की तीन मुख्य शैलियाँ हैं।
नागर में मधुमक्खी के छत्ते जैसे शिखर होते हैं, द्रविड़ में पिरामिडनुमा विमान होते हैं, और वेसर दोनों शैलियों के तत्वों को मिलाती है, जो दक्कन क्षेत्र में प्रचलित है।
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