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भारतीय रंगमंच एवं कठपुतली कला Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: भारतीय रंगमंच एवं कठपुतली कला
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निम्नलिखित में से कौन सी रचना नाटककार भास को आरोपित की जाती है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — मध्यम-व्यायोग
मध्यम-व्यायोग भास को आरोपित एक प्रसिद्ध संस्कृत नाटक है, जो कालिदास से पूर्ववर्ती प्राचीन भारत के सबसे प्रतिष्ठित नाटककारों में से एक थे। यह नाटक, जिसका अर्थ है 'मध्यम वाला', महाभारत पर आधारित त्रयी का हिस्सा है और भास की विशिष्ट नाटकीय तीव्रता और भावनात्मक गहराई को प्रदर्शित करता है।
आइए देखें कि अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
❌ विकल्प 1 – काव्यालंकार: यह संस्कृत काव्यशास्त्र (अलंकार शास्त्र) पर एक ग्रंथ है जिसे विद्वान भामह ने रचा था, भास ने नहीं।
❌ विकल्प 2 – नाट्यशास्त्र: यह भारतीय नाट्यकला, नृत्य और प्रदर्शन कलाओं पर मूलभूत ग्रंथ है जो ऋषि भरत मुनि को आरोपित है, भास को नहीं।
❌ विकल्प 4 – महाभाष्य: यह पाणिनि के अष्टाध्यायी व्याकरण पर महान भाष्य है जिसे व्याकरणविद् पतंजलि ने रचा था, यह भास का नाटकीय कार्य नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भास और शास्त्रीय संस्कृत नाटक
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| भास का काल | तीसरी-चौथी शताब्दी ईस्वी (संभवतः पहले); कालिदास से पूर्ववर्ती |
| प्रमुख रचनाएँ | उन्हें 13 नाटक आरोपित हैं जिनमें स्वप्नवासवदत्ता, प्रतिज्ञायौगन्धरायण, पंचरात्र, मध्यम-व्यायोग, दूतवाक्य, कर्णभार, उरुभंग शामिल हैं |
| विषय | अधिकतर महाभारत, रामायण और बौद्ध कथाओं पर आधारित; भावनात्मक तीव्रता और वीर पात्रों के लिए जाने जाते हैं |
| शैली | सरल लेकिन शक्तिशाली संवाद; प्राकृत भाषाओं का विशेषज्ञ उपयोग; क्रिया और भाव (रस) पर ध्यान |
| मध्यम-व्यायोग | महाभारत की घटनाओं को दर्शाने वाली त्रयी का हिस्सा; 'मध्यम' पांडव भाई भीम पर केंद्रित |
| खोज | भास के नाटकों की पुनः खोज 20वीं सदी की शुरुआत में केरल में पंडित गणपति शास्त्री द्वारा की गई |
प्राचीन भारत के इतिहास के संदर्भ में, भवभूति, हस्तिमल्ल और क्षेमेश्वर प्रसिद्ध थे
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — नाटककार
भवभूति, हस्तिमल्ल और क्षेमेश्वर प्राचीन और प्रारंभिक मध्यकालीन भारत के प्रसिद्ध नाटककार थे जिन्होंने संस्कृत नाटक में महत्वपूर्ण योगदान दिया। भवभूति (8वीं शताब्दी) ने कन्नौज के राजा यशोवर्मन के दरबार में सेवा की और मालतीमाधव और उत्तररामचरित जैसे प्रसिद्ध नाटक लिखे। हस्तिमल्ल (13वीं शताब्दी) होयसल काल के एक जैन नाटककार थे जो विक्रांतकौरव जैसी रचनाओं के लिए जाने जाते हैं, जबकि क्षेमेश्वर (10वीं शताब्दी) ने पाल वंश के राजा महिपाल की सेवा की और चंदकौशिक जैसे नाटकों की रचना की।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्राचीन भारत के प्रसिद्ध संस्कृत नाटककार
| नाटककार | काल | दरबार/संरक्षण | प्रमुख रचनाएँ |
|---|---|---|---|
| भवभूति | 8वीं शताब्दी ईस्वी | कन्नौज के राजा यशोवर्मन | मालतीमाधव, महावीरचरित, उत्तररामचरित |
| हस्तिमल्ल | 13वीं शताब्दी ईस्वी | होयसल काल (जैन नाटककार) | विक्रांतकौरव, मैथिलीकल्याण, अंजनपवनांजय |
| क्षेमेश्वर | 10वीं शताब्दी ईस्वी | राजा महिपाल (पाल वंश) | चंदकौशिक, नैषधानंद |
| कालिदास | 4थी-5वीं शताब्दी ईस्वी | गुप्त काल | अभिज्ञानशाकुंतलम्, विक्रमोर्वशीयम्, मालविकाग्निमित्रम् |
| शूद्रक | 3री-4थी शताब्दी ईस्वी | गुप्त काल | मृच्छकटिक (द लिटिल क्ले कार्ट) |
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