निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन जैन सिद्धांत पर लागू होता है/होते हैं?
- कर्म को नष्ट करने का सबसे निश्चित तरीका तपस्या करना है।
- प्रत्येक वस्तु, यहां तक कि सबसे छोटे कण की भी आत्मा होती है।
- कर्म आत्मा का अभिशाप है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।
नीचे दिए गए कूटों का उपयोग करके सही उत्तर चुनें
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: जैन सिद्धांत में निर्जरा (कर्म का विनाश) तपस्या (तप) और संयम के माध्यम से प्राप्त होता है, जो आत्मा से संचित कार्मिक कणों को हटाने में मदद करता है।
✅ कथन 2 – सही: जैन धर्म सार्वभौमिक जीववाद में विश्वास करता है – पत्थर, जल, अग्नि और वायु सहित प्रत्येक वस्तु में आत्मा (जीव) होती है, जिससे सबसे छोटा कण भी जीवित इकाई बन जाता है।
✅ कथन 3 – सही: कर्म को सूक्ष्म पदार्थ के रूप में देखा जाता है जो आत्मा को बांधता है और उसके अनंत ज्ञान और आनंद के प्राकृतिक गुणों को अवरुद्ध करता है; मोक्ष के लिए कार्मिक बंधन का पूर्ण उन्मूलन आवश्यक है।
तीनों कथन सही हैं।
Question 3 of 3 जैन धर्म
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