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भारत की भाषाएँ एवं साहित्य Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: भारत की भाषाएँ एवं साहित्य
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
साहित्यिक कृति: लेखक
- देवीचंद्रगुप्त: बिल्हण
- हम्मीर-महाकाव्य: नयचंद्र सूरि
- मिलिंद-पन्ह: नागार्जुन
- नीतिवाक्यामृत: सोमदेव सूरि
उपर्युक्त युग्मों में से कितने सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
यह प्रश्न प्राचीन भारतीय साहित्यिक कृतियों को उनके संबंधित लेखकों के साथ सही युग्मन की जांच करता है। दिए गए चार युग्मों में से केवल दो सही सुमेलित हैं—हम्मीर-महाकाव्य नयचंद्र सूरि के साथ और नीतिवाक्यामृत सोमदेव सूरि के साथ।
❌ युग्म 1 – गलत: देवीचंद्रगुप्तम् की रचना विशाखदत्त ने की थी, जो एक प्रसिद्ध संस्कृत नाटककार थे, न कि बिल्हण ने, जो विक्रमांकदेवचरित के लिए प्रसिद्ध बाद के कश्मीरी कवि थे।
✅ युग्म 2 – सही: हम्मीर-महाकाव्य वास्तव में नयचंद्र सूरि द्वारा रचित था, जो एक जैन विद्वान और कवि थे, जिन्होंने चौहान शासक हम्मीरदेव की वीरता का गुणगान किया।
❌ युग्म 3 – गलत: मिलिंद-पन्ह (राजा मिलिंद के प्रश्न) बौद्ध भिक्षु नागसेन और इंडो-ग्रीक राजा मिनांडर (मिलिंद) के बीच संवादों को दर्ज करता है, न कि नागार्जुन को, जो बाद के महायान दार्शनिक थे।
✅ युग्म 4 – सही: नीतिवाक्यामृत, राजनीतिक नीति और ज्ञान पर एक कृति, सोमदेव सूरि द्वारा लिखी गई थी, जो एक जैन विद्वान थे।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्राचीन भारतीय साहित्यिक कृतियाँ और लेखक
| साहित्यिक कृति | वास्तविक लेखक | काल/परंपरा | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|---|
| देवीचंद्रगुप्तम् | विशाखदत्त | 5वीं-6वीं शताब्दी ई. | चंद्रगुप्त द्वितीय और ध्रुवदेवी पर संस्कृत नाटक |
| हम्मीर-महाकाव्य | नयचंद्र सूरि | 15वीं शताब्दी ई., जैन | चौहान शासक हम्मीरदेव की वीरता पर महाकाव्य |
| मिलिंद-पन्ह | अज्ञात (नागसेन के संवादों का अभिलेख) | 2री शताब्दी ई.पू.-1ली शताब्दी ई., थेरवाद बौद्ध धर्म | बौद्ध अवधारणाओं पर दार्शनिक संवाद |
| नीतिवाक्यामृत | सोमदेव सूरि | 10वीं शताब्दी ई., जैन | नैतिक सूक्तियाँ और राजनीतिक ज्ञान |
- बिल्हण: 11वीं शताब्दी के कश्मीरी कवि, विक्रमांकदेवचरित और चौरपंचाशिका के रचयिता
- नागार्जुन: 2री शताब्दी ई. के महायान बौद्ध दार्शनिक, माध्यमक संप्रदाय के संस्थापक; मूलमाध्यमककारिका के रचयिता
- नागसेन बनाम नागार्जुन: अक्सर भ्रमित किए जाते हैं—नागसेन एक थेरवाद भिक्षु थे (2री शताब्दी ई.पू.), जबकि नागार्जुन एक महायान दार्शनिक थे (2री शताब्दी ई.)
- विशाखदत्त: मुद्राराक्षस के भी रचयिता, चंद्रगुप्त मौर्य और चाणक्य पर एक राजनीतिक नाटक
- जैन साहित्यिक योगदान: नयचंद्र सूरि और सोमदेव सूरि दोनों नैतिकता, राजनीति और साहित्य में जैन विद्वता की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करते हैं
भारत के संदर्भ में, शब्द 'हल्बी, हो और कुई' किससे संबंधित हैं
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — जनजातीय भाषाएँ
हल्बी, हो और कुई भारत के विभिन्न क्षेत्रों में स्वदेशी समुदायों द्वारा बोली जाने वाली जनजातीय भाषाएँ हैं। हल्बी एक इंडो-आर्यन भाषा है जो छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों में हल्बा जनजाति द्वारा बोली जाती है, हो एक ऑस्ट्रोएशियाटिक भाषा है जो झारखंड और ओडिशा में हो लोगों द्वारा बोली जाती है, और कुई एक द्रविड़ भाषा है जो मुख्य रूप से ओडिशा में कोंध जनजाति द्वारा बोली जाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत की प्रमुख जनजातीय भाषाएँ
| भाषा | भाषा परिवार | प्राथमिक बोलने वाले | मुख्य क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| हल्बी | इंडो-आर्यन | हल्बा जनजाति | छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र |
| हो | ऑस्ट्रोएशियाटिक (मुंडा) | हो लोग | झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल |
| कुई | द्रविड़ | कंध/खोंड जनजाति | ओडिशा, आंध्र प्रदेश |
| गोंडी | द्रविड़ | गोंड जनजाति | मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना |
| संताली | ऑस्ट्रोएशियाटिक (मुंडा) | संताल लोग | झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार (आठवीं अनुसूची में शामिल) |
| बोडो | तिब्बती-बर्मन | बोडो लोग | असम (आठवीं अनुसूची में शामिल) |
निम्नलिखित में से प्राचीन भारत की कौन सी पुस्तक में शुंग वंश के संस्थापक के पुत्र की प्रेम कहानी है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — मालविकाग्निमित्र
मालविकाग्निमित्र प्रसिद्ध कवि कालिदास द्वारा लिखा गया एक क्लासिकल संस्कृत नाटक है। यह राजा अग्निमित्र की रोमांटिक प्रेम कहानी बताता है, जो शुंग वंश के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग के पुत्र थे (लगभग 185 ई.पू.)। यह नाटक अग्निमित्र और मालविका नामक एक सुंदर युवती के प्रेम के इर्द-गिर्द घूमता है जो राज महल में रहती थी। स्वप्नवासवदत्ता भास द्वारा रचित नाटक है जो राजा उदयन और रानी वासवदत्ता की कहानी बताता है, जिसका शुंग वंश से कोई संबंध नहीं है। मेघदूत कालिदास की गीतात्मक कविता है जो एक यक्ष के बारे में है जो बादल के माध्यम से अपनी प्रिय पत्नी को संदेश भेजता है। रत्नावली हर्ष द्वारा रचित एक रोमांटिक नाटक है जो राजा उदयन और राजकुमारी रत्नावली के बारे में है, जिसका शुंगों से कोई संबंध नहीं है।
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हाल ही में निम्नलिखित में से किसे शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया?
Detailed Explanation:
ओड़िया को फरवरी 2014 में शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया था, जो इसे भारत की छठी शास्त्रीय भाषा और उस समय सबसे हालिया जोड़ बनाती है जब यह प्रश्न पूछा गया था।
भारत की शास्त्रीय भाषाएँ (2014 तक): तमिल (2004), संस्कृत (2005), तेलुगु (2008), कन्नड़ (2008), मलयालम (2013), और ओड़िया (2014)। कोंकणी, भोजपुरी, और असमिया को 2014-15 में शास्त्रीय दर्जा नहीं मिला था।
नोट: अक्टूबर 2024 में पाँच और भाषाएँ—मराठी, बंगाली, पाली, प्राकृत, और असमिया—सूची में जोड़ी गईं।
निम्नलिखित भाषाओं पर विचार कीजिए:
- गुजराती
- कन्नड़
- तेलुगु
उपर्युक्त में से किसे/किन्हें सरकार द्वारा 'शास्त्रीय भाषा/भाषाओं' के रूप में घोषित किया गया है?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भारत सरकार द्वारा गुजराती को शास्त्रीय भाषा घोषित नहीं किया गया है।
✅ कथन 2 – सही: कन्नड़ को 2008 में शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया गया, जो इसकी 2000 वर्षों से अधिक की प्राचीनता और समृद्ध साहित्यिक परंपरा को मान्यता देता है।
✅ कथन 3 – सही: तेलुगु को 2008 में शास्त्रीय भाषा घोषित किया गया, जो प्रथम सहस्राब्दी ईस्वी के प्रारंभिक ग्रंथों और स्वतंत्र साहित्यिक विरासत के मानदंडों को पूरा करती है।