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भारतीय मूर्तिकला Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: भारतीय मूर्तिकला
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अमरावती स्तूप और इसकी उभरी हुई मूर्तिकला पर निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह निचली कृष्णा घाटी में स्थित था।
- भारत में यह आकार में साँची स्तूप के बाद दूसरे स्थान पर था।
- अमरावती मूर्तिकला शैली ने बाद के दक्षिण भारतीय मूर्तिकला पर स्थायी प्रभाव डाला और इसके उत्पादों को श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया में ले जाया गया।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
अमरावती स्तूप (महा चैत्य) प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्मारक था।
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कथन 1 सही है: यह वर्तमान आंध्र प्रदेश के कृष्णा नदी के निचले घाटी क्षेत्र में स्थित था।
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कथन 2 गलत है: अमरावती स्तूप सांची स्तूप से भी बड़ा था, इसलिए यह सांची के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्तूप नहीं था।
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कथन 3 सही है: अमरावती कला शैली का प्रभाव दक्षिण भारत, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैला।
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अतः कथन 1 और 3 सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
कथनवार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| यह कृष्णा घाटी के निचले भाग में स्थित था। | ✅ सही | आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के किनारे स्थित था। |
| आकार में यह केवल सांची स्तूप से छोटा था। | ❌ गलत | अमरावती स्तूप सांची स्तूप से बड़ा था। |
| इसकी कला का प्रभाव दक्षिण भारत, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया पर पड़ा। | ✅ सही | व्यापार और सांस्कृतिक संपर्कों के माध्यम से इसका प्रभाव फैला। |
अमरावती स्तूप एवं अमरावती कला शैली
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | अमरावती, आंध्र प्रदेश |
| नदी घाटी | कृष्णा नदी की निचली घाटी |
| काल | मुख्यतः सातवाहन काल |
| अन्य नाम | महा चैत्य |
| निर्माण सामग्री | श्वेत चूना पत्थर |
| कला शैली | अमरावती (आंध्र) कला शैली |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
यह अपने सुंदर उत्कीर्णन (Relief Sculptures) के लिए प्रसिद्ध है।
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यहाँ बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं का चित्रण मिलता है।
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अमरावती कला का प्रभाव बाद की पल्लव, चोल, श्रीलंकाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई कला पर पड़ा।
भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन एक भावी बुद्ध है, जो संसार को बचाने के लिए अभी आना बाकी है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — मैत्रेय
बौद्ध परंपरा में मैत्रेय को भावी बुद्ध के रूप में मान्यता प्राप्त है जो पृथ्वी पर शुद्ध धर्म की शिक्षा देने के लिए तब प्रकट होंगे जब गौतम बुद्ध की शिक्षाएं पूरी तरह से भुला दी जाएंगी। अवलोकितेश्वर (जिन्हें लोकेश्वर या पद्मपाणि के नाम से भी जाना जाता है) महायान बौद्ध धर्म में एक करुणामय बोधिसत्व हैं, लेकिन उन्हें संसार को बचाने के लिए नियत भावी बुद्ध नहीं माना जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रमुख बौद्ध व्यक्तित्व
| व्यक्तित्व | विवरण |
|---|---|
| मैत्रेय | भावी बुद्ध जो भविष्य में धर्म की शिक्षा देने के लिए प्रकट होंगे; वर्तमान में तुषित स्वर्ग में निवास करते हैं |
| अवलोकितेश्वर | महायान बौद्ध धर्म में करुणा के बोधिसत्व; सभी बुद्धों की करुणा का प्रतीक हैं |
| लोकेश्वर | अवलोकितेश्वर का दूसरा नाम, जिसका अर्थ है "विश्व के स्वामी" |
| पद्मपाणि | अवलोकितेश्वर का रूप जो कमल (पद्म) धारण करते हैं; अजंता की गुफा चित्रों में चित्रित |
| गौतम बुद्ध | वर्तमान युग के ऐतिहासिक बुद्ध; बोधगया में ज्ञान प्राप्त किया |
भगवान बुद्ध की प्रतिमा को कभी-कभी 'भूमिस्पर्श मुद्रा' नामक हस्त मुद्रा के साथ दिखाया जाता है। यह प्रतीक है
Detailed Explanation:
भूमिस्पर्श मुद्रा (पृथ्वी-स्पर्श मुद्रा) उस क्षण को दर्शाती है जब सिद्धार्थ गौतम ने बोध गया में मार के प्रलोभनों के दौरान, अपने दाहिने हाथ से पृथ्वी को छूकर पृथ्वी देवी (वसुधारा/स्थविरा) को साक्षी के रूप में बुलाया।
पृथ्वी ने अनगिनत पूर्व जन्मों में बुद्ध के संचित पुण्य, पवित्रता और आध्यात्मिक योग्यता की गवाही दी, जिससे मार का दावा पराजित हुआ और उनके ज्ञान प्राप्ति के अधिकार की पुष्टि हुई। यह मुद्रा पवित्रता और शुद्धता की साक्षी का प्रतीक है, न कि विघ्न से भौतिक सुरक्षा का।
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