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भारतीय हस्तशिल्प, मेले एवं उत्सव Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: भारतीय हस्तशिल्प, मेले एवं उत्सव
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निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| परंपरा | राज्य |
|---|---|
| 1. चापचार कुट महोत्सव | मिजोरम |
| 2. खोंगजोम परबा गाथागीत | मणिपुर |
| 3. थांग-टा नृत्य | सिक्किम |
उपर्युक्त में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — 1 और 2
यह प्रश्न पूर्वोत्तर भारत की पारंपरिक सांस्कृतिक प्रथाओं और उनसे संबंधित राज्यों के ज्ञान का परीक्षण करता है। युग्म 1 और 2 सही सुमेलित हैं, जबकि युग्म 3 में थांग-टा को मणिपुर के बजाय गलती से सिक्किम से जोड़ा गया है।
✅ युग्म 1 – सही: चापचार कुट मिजोरम के मिजो लोगों द्वारा मनाया जाने वाला एक जीवंत वसंत उत्सव है, जो झूम खेती (स्लैश-एंड-बर्न खेती) के पूर्ण होने का प्रतीक है।
✅ युग्म 2 – सही: खोंगजोम परबा एक अनुष्ठानिक गाथागीत प्रदर्शन है जो 1891 के एंग्लो-मणिपुरी युद्ध, विशेष रूप से खोंगजोम की लड़ाई की याद दिलाता है जहां मणिपुरी सैनिकों ने ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।
❌ युग्म 3 – गलत: थांग-टा मणिपुर की एक पारंपरिक मार्शल आर्ट है, सिक्किम की नहीं। यह सशस्त्र ('थांग' - तलवार/भाला) और निहत्थे ('टा' - हाथों से लड़ाई) युद्ध तकनीकों को जोड़ता है और मणिपुरी संस्कृति का अभिन्न अंग है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ
| राज्य | सांस्कृतिक परंपरा | विवरण |
|---|---|---|
| मिजोरम | चापचार कुट | झूम संचालन के अंत का जश्न मनाने वाला वसंत उत्सव; बांस नृत्य प्रस्तुत करता है |
| मणिपुर | खोंगजोम परबा | खोंगजोम की लड़ाई (1891) का वर्णन करने वाला गाथागीत-नाटक; वार्षिक रूप से प्रस्तुत किया जाता है |
| मणिपुर | थांग-टा | तलवारबाजी और निहत्थे युद्ध को संयोजित करने वाली मार्शल आर्ट |
| मणिपुर | रास लीला | भगवान कृष्ण के जीवन को दर्शाने वाला शास्त्रीय नृत्य-नाटक |
| सिक्किम | लोसार | भूटिया और लेप्चा समुदायों द्वारा मनाया जाने वाला तिब्बती नव वर्ष |
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| शिल्प | विरासत |
|---|---|
| 1. पुथुक्कुली शॉल | तमिलनाडु |
| 2. सुजनी कढ़ाई | महाराष्ट्र |
| 3. उप्पाडा जामदानी साड़ियाँ | कर्नाटक |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न पारंपरिक भारतीय शिल्पों और उनके भौगोलिक मूल के ज्ञान का परीक्षण करता है। केवल पहला युग्म सही रूप से सुमेलित है, जबकि अन्य दो युग्म शिल्पों को गलत राज्यों से जोड़ते हैं।
✅ युग्म 1 – सही: पुथुक्कुली शॉल वास्तव में तमिलनाडु के नीलगिरि पहाड़ियों में तोडा जनजाति द्वारा पारंपरिक रूप से बनाए गए कढ़ाईदार वस्त्र हैं।
❌ युग्म 2 – गलत: सुजनी कढ़ाई बिहार (विशेष रूप से भुसुरा गाँव) का पारंपरिक शिल्प है, महाराष्ट्र का नहीं।
❌ युग्म 3 – गलत: उप्पाडा जामदानी साड़ियाँ आंध्र प्रदेश के उप्पाडा की प्रसिद्ध रेशमी साड़ियाँ हैं, कर्नाटक की नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पारंपरिक भारतीय शिल्प और उनके राज्य
| शिल्प | राज्य | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|
| पुथुक्कुली शॉल | तमिलनाडु | तोडा जनजाति द्वारा कढ़ाईदार वस्त्र, नीलगिरि पहाड़ियाँ |
| सुजनी कढ़ाई | बिहार | पारंपरिक रनिंग स्टिच कढ़ाई, भुसुरा गाँव में उत्पन्न |
| उप्पाडा जामदानी साड़ियाँ | आंध्र प्रदेश | जटिल बुनाई वाली पारदर्शी रेशमी साड़ियाँ, जीआई टैग प्राप्त |
| पैठणी साड़ियाँ | महाराष्ट्र | सोने/चाँदी के जरी काम वाली रेशमी साड़ियाँ |
| इलकल साड़ियाँ | कर्नाटक | विशिष्ट बॉर्डर डिजाइन के साथ कपास-रेशम मिश्रण |
| चंदेरी कपड़ा | मध्य प्रदेश | रेशम और सुनहरी जरी के साथ हल्का कपड़ा |
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| परंपरा | समुदाय |
|---|---|
| 1. चालिहा साहिब महोत्सव | सिंधी |
| 2. नंदा राज जात यात्रा | गोंड |
| 3. वारी-वारकरी | संथाल |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न सांस्कृतिक परंपराओं का उनके संबंधित समुदायों के साथ सही मिलान की जांच करता है। केवल पहला युग्म सही सुमेलित है, क्योंकि चालिहा साहिब वास्तव में एक सिंधी हिंदू त्योहार है, जबकि अन्य दो युग्म गलत तरीके से परंपराओं को समुदायों के साथ जोड़ते हैं।
✅ युग्म 1 – सही: चालिहा साहिब (चालियो या चालिहो भी कहा जाता है) हिंदू सिंधी समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला चालीस दिन का त्योहार है, जो सिंधियों के संरक्षक संत झूलेलाल (उदेरोलाल) के सम्मान में मनाया जाता है।
❌ युग्म 2 – गलत: नंदा राज जात यात्रा उत्तराखंड (विशेष रूप से गढ़वाल क्षेत्र) के लोगों से जुड़ा एक तीर्थयात्रा उत्सव है, न कि गोंड समुदाय से, जो मध्य भारत की एक आदिवासी जनजाति है।
❌ युग्म 3 – गलत: वारी-वारकरी महाराष्ट्र में भगवान विट्ठल (विठोबा) के भक्तों से जुड़ी एक तीर्थयात्रा परंपरा है, जिसमें मुख्य रूप से मराठी भाषी समुदाय शामिल है, न कि संथाल, जो पूर्वी भारत की एक आदिवासी जनजाति हैं।
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भारत के निम्नलिखित शहरों पर विचार कीजिए:
- भद्राचलम
- चंदेरी
- कांचीपुरम
- करनाल
उपर्युक्त में से कौन-से पारंपरिक साड़ियों / कपड़ों के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भद्राचलम (तेलंगाना) श्री सीता रामचंद्र स्वामी मंदिर के लिए प्रसिद्ध एक प्रमुख तीर्थस्थल है, पारंपरिक साड़ी या कपड़ा उत्पादन के लिए नहीं।
✅ कथन 2 – सही: चंदेरी (मध्य प्रदेश) चंदेरी साड़ियों और कपड़ों के लिए प्रसिद्ध है, जो हल्के वजन, पारदर्शी बनावट और रेशम और कपास पर बारीक जरी काम के लिए जाने जाते हैं।
✅ कथन 3 – सही: कांचीपुरम (तमिलनाडु) हाथ से बुनी कांचीपुरम रेशम साड़ियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है, जो भारी रेशम, विपरीत बॉर्डर और मंदिर-प्रेरित रूपांकनों के लिए जानी जाती हैं।
❌ कथन 4 – गलत: करनाल (हरियाणा) कृषि उत्पादन (चावल) और राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI) के लिए जाना जाता है, पारंपरिक वस्त्र निर्माण के लिए नहीं।
'चांगपा' समुदाय के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- वे मुख्य रूप से उत्तराखंड राज्य में रहते हैं।
- वे पश्मीना बकरियों का पालन करते हैं जो उत्तम ऊन देती हैं।
- उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: चांगपा समुदाय मुख्य रूप से लद्दाख के चांगथांग पठार में रहता है, उत्तराखंड में नहीं। वे तिब्बत की सीमा से लगे ऊँचाई वाले शीत मरुस्थल क्षेत्रों में निवास करते हैं।
✅ कथन 2 – सही: चांगपा अर्ध-घुमंतू पशुपालक हैं जो चांगथांगी बकरियों (जिन्हें पश्मीना बकरियाँ भी कहा जाता है) का पालन करते हैं, जो लग्जरी शॉल में उपयोग होने वाली उत्तम पश्मीना ऊन देती हैं।
✅ कथन 3 – सही: चांगपा समुदाय को भारत में अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है, विशेष रूप से लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में।