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भक्ति एवं सूफी आंदोलन Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: भक्ति एवं सूफी आंदोलन
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मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- तमिल क्षेत्र के सिद्ध (सित्तार) एकेश्वरवादी थे और मूर्तिपूजा की निंदा करते थे।
- कन्नड़ क्षेत्र के लिंगायतों ने पुनर्जन्म के सिद्धांत पर प्रश्न उठाया और जाति पदानुक्रम को अस्वीकार कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
✅ कथन 1 – सही: तमिलनाडु के सिद्ध (सित्तार) मध्यकालीन भारत में उभरे एकेश्वरवादी भक्ति आंदोलन का हिस्सा थे। वे निराकार परम सत्ता में विश्वास करते थे और मूर्तिपूजा, कर्मकांड और मंदिर-केंद्रित प्रथाओं का कड़ा विरोध करते थे। उनका दर्शन बाहरी धार्मिक प्रतीकों की तुलना में प्रत्यक्ष आध्यात्मिक अनुभव पर जोर देता था।
✅ कथन 2 – सही: 12वीं शताब्दी में कर्नाटक में बासवन्ना द्वारा स्थापित लिंगायत आंदोलन एक क्रांतिकारी सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन था। लिंगायतों ने पुनर्जन्म के सिद्धांत और जाति पदानुक्रम को कायम रखने वाले कर्म चक्र को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने सामाजिक समानता की वकालत की, ब्राह्मणवादी प्रभुत्व का विरोध किया और जाति-आधारित भेदभाव को अस्वीकार किया। वे पुनर्जन्म के चक्र के बजाय मृत्यु के तुरंत बाद मोक्ष (ऐक्य) में विश्वास करते थे।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 'बीजक' संत दादू दयाल की शिक्षाओं का संकलन है।
- पुष्टिमार्ग का दर्शन माधवाचार्य द्वारा प्रतिपादित किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: 'बीजक' 15वीं सदी के रहस्यवादी कवि और दार्शनिक संत कबीर की शिक्षाओं का संकलन है, दादू दयाल का नहीं। दादू दयाल की शिक्षाएं 'दादू दयाल की बानी' में संकलित हैं।
❌ कथन 2 – गलत: पुष्टि मार्ग (कृपा का मार्ग) के दर्शन का प्रतिपादन वल्लभाचार्य (1479-1531) ने किया था, माधवाचार्य ने नहीं। माधवाचार्य ने द्वैत (द्वैतवादी) दर्शन की स्थापना की, जो आत्मा और ईश्वर के बीच द्वैत पर जोर देता है।
निम्नलिखित भक्ति संतों पर विचार कीजिए:
- दादू दयाल
- गुरु नानक
- त्यागराज
उपर्युक्त में से कौन लोदी वंश के पतन और बाबर के सत्ता में आने के समय उपदेश दे रहे थे?
Detailed Explanation:
✅ कथन 2 – सही: गुरु नानक (1469-1539) प्रथम पानीपत युद्ध (1526) में बाबर द्वारा इब्राहिम लोदी की पराजय के समय सक्रिय रूप से उपदेश दे रहे थे, जिसने लोदी वंश के पतन को चिह्नित किया।
❌ कथन 1 – गलत: दादू दयाल (1544-1603) का जन्म लोदी वंश के पतन के 18 वर्ष बाद हुआ था।
❌ कथन 3 – गलत: त्यागराज (1767-1847), एक कर्नाटक संगीत संगीतकार, दो शताब्दियों से अधिक बाद जीवित थे।
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मध्यकालीन भारत के धार्मिक इतिहास के संदर्भ में, सूफी रहस्यवादी निम्नलिखित में से किन प्रथाओं का पालन करने के लिए जाने जाते थे?
- ध्यान और श्वास नियंत्रण
- एकांत स्थान पर कठोर तपस्या अभ्यास
- अपने श्रोताओं में समाधि की स्थिति उत्पन्न करने के लिए पवित्र गीतों का पाठ
नीचे दिए गए कूटों का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सूफी रहस्यवादी आध्यात्मिक एकाग्रता और आत्म-शुद्धि प्राप्त करने के लिए ध्यान (मुराकाबा) और श्वास नियंत्रण (हब्स-ए-दम) तकनीकों का अभ्यास करते थे।
✅ कथन 2 – सही: कई सूफी सांसारिक इच्छाओं से अलग होने के लिए एकांत स्थानों (खानकाहों) में एकांतवास, उपवास और आत्म-संयम सहित तपस्या प्रथाओं (खल्वा) में संलग्न होते थे।
✅ कथन 3 – सही: समा (संगीत सभाएं) जिसमें भक्ति गीतों (कव्वाली) और कविताओं (गज़लों) का पाठ शामिल था, आध्यात्मिक समाधि (वज्द) और दैवीय संबंध उत्पन्न करने के लिए सूफी अभ्यास का केंद्र था।