मध्यकालीन भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- तमिल क्षेत्र के सिद्ध (सित्तार) एकेश्वरवादी थे और मूर्तिपूजा की निंदा करते थे।
- कन्नड़ क्षेत्र के लिंगायतों ने पुनर्जन्म के सिद्धांत पर प्रश्न उठाया और जाति पदानुक्रम को अस्वीकार कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
✅ कथन 1 – सही: तमिलनाडु के सिद्ध (सित्तार) मध्यकालीन भारत में उभरे एकेश्वरवादी भक्ति आंदोलन का हिस्सा थे। वे निराकार परम सत्ता में विश्वास करते थे और मूर्तिपूजा, कर्मकांड और मंदिर-केंद्रित प्रथाओं का कड़ा विरोध करते थे। उनका दर्शन बाहरी धार्मिक प्रतीकों की तुलना में प्रत्यक्ष आध्यात्मिक अनुभव पर जोर देता था।
✅ कथन 2 – सही: 12वीं शताब्दी में कर्नाटक में बासवन्ना द्वारा स्थापित लिंगायत आंदोलन एक क्रांतिकारी सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन था। लिंगायतों ने पुनर्जन्म के सिद्धांत और जाति पदानुक्रम को कायम रखने वाले कर्म चक्र को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने सामाजिक समानता की वकालत की, ब्राह्मणवादी प्रभुत्व का विरोध किया और जाति-आधारित भेदभाव को अस्वीकार किया। वे पुनर्जन्म के चक्र के बजाय मृत्यु के तुरंत बाद मोक्ष (ऐक्य) में विश्वास करते थे।
Question 1 of 1 भक्ति आंदोलन
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