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शास्त्रीय नृत्य Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for शास्त्रीय नृत्य with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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प्रसिद्ध सत्रीया नृत्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सत्रीया संगीत, नृत्य और नाटक का एक संयोजन है।
- यह असम के वैष्णवों की सदियों पुरानी जीवंत परंपरा है।
- यह तुलसीदास, कबीर और मीराबाई द्वारा रचित भक्ति गीतों के शास्त्रीय रागों और तालों पर आधारित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सत्रीया, संगीत, नृत्य और नाटक का संयोजन है, जो गति, भाव और भक्ति गीतों के माध्यम से कहानी कहता है।
✅ कथन 2 – सही: यह असम के वैष्णवों की सदियों पुरानी जीवंत परंपरा है, जो 15वीं शताब्दी में श्रीमंत शंकरदेव द्वारा नव-वैष्णव आंदोलन के भाग के रूप में आरंभ की गई।
❌ कथन 3 – गलत: सत्रीया शंकरदेव और असमिया संतों की रचनाओं पर आधारित है, तुलसीदास, कबीर या मीराबाई की नहीं, जो विभिन्न क्षेत्रीय भक्ति परंपराओं से संबंधित थे; यह विशिष्ट असमिया रागों और तालों का उपयोग करता है।
भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, नृत्य और नाटक में 'त्रिभंग' नामक मुद्रा प्राचीन काल से लेकर आज तक भारतीय कलाकारों की पसंदीदा रही है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन इस मुद्रा का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
त्रिभंग (अर्थात 'तीन मोड़') भारतीय कला और नृत्य में एक शास्त्रीय खड़ी मुद्रा है जिसमें शरीर एक कोमल S-आकार की वक्रता बनाता है और तीन बिंदुओं पर मुड़ता है: गर्दन, कमर और घुटना।
यह त्रि-मोड़ मुद्रा कमर और गर्दन पर विपरीत वक्र बनाती है, जो इसे ओडिसी नृत्य और मंदिर की मूर्तिकला जैसी परंपराओं में सबसे सुंदर और मोहक मुद्रा बनाती है, जो अक्सर भगवान कृष्ण के चित्रों में दर्शाई जाती है।
आप कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम नृत्यों के बीच कैसे अंतर करते हैं?
- नर्तकों द्वारा कभी-कभी संवाद बोलना कुचिपुड़ी नृत्य में पाया जाता है लेकिन भरतनाट्यम में नहीं।
- पीतल की थाली पर अपने पैरों को किनारों पर रखकर नृत्य करना भरतनाट्यम की विशेषता है लेकिन कुचिपुड़ी नृत्य में ऐसी गति का रूप नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: कुचिपुड़ी नर्तक प्रस्तुतियों के दौरान वाचिक अभिनय (बोले गए संवाद) का उपयोग करते हैं, जो भरतनाट्यम में नहीं पाई जाने वाली एक अनूठी विशेषता है।
❌ कथन 2 – गलत: पीतल की थाली पर नृत्य (तरंगम) कुचिपुड़ी की विशिष्ट विशेषता है, भरतनाट्यम की नहीं।
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Common questions about शास्त्रीय नृत्य in UPSC CSE PRELIMS