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भारतीय नृत्य Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: भारतीय नृत्य
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मणिपुरी संकीर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह एक गीत और नृत्य प्रदर्शन है।
- प्रदर्शन में उपयोग किए जाने वाले एकमात्र संगीत वाद्ययंत्र झांझ हैं।
- यह भगवान कृष्ण के जीवन और कार्यों का वर्णन करने के लिए प्रस्तुत किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 3
मणिपुरी संकीर्तन मणिपुर की एक पारंपरिक प्रदर्शन कला है जो भगवान कृष्ण के जीवन और कार्यों का वर्णन करने के लिए गायन, ढोलक और नृत्य को संयोजित करती है। इसमें केवल झांझ नहीं, बल्कि कई संगीत वाद्ययंत्रों का उपयोग किया जाता है।
✅ कथन 1 – सही: मणिपुरी संकीर्तन वास्तव में एक गीत और नृत्य प्रदर्शन है जो मणिपुर में वैष्णव परंपराओं के अभिन्न अंग के रूप में गायन, नृत्य और ढोलक वादन को संयोजित करता है।
❌ कथन 2 – गलत: झांझ (करताल) के अलावा, मणिपुरी संकीर्तन में कई अन्य वाद्ययंत्रों का उपयोग किया जाता है, जिसमें पुंग (बैरल के आकार का ढोल) शामिल है, जो प्राथमिक ताल वाद्य है, साथ ही हारमोनियम और अन्य वाद्ययंत्र भी हैं।
✅ कथन 3 – सही: यह प्रदर्शन मुख्य रूप से भगवान कृष्ण के जीवन, कार्यों और लीलाओं (दिव्य नाटकों) का वर्णन करने के लिए समर्पित है, जो मणिपुरी वैष्णव धर्म और धार्मिक सभाओं का एक मुख्य पहलू है।
अतिरिक्त जानकारी: मणिपुरी संकीर्तन को 2013 में यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में अंकित किया गया था, जो इसे एक जीवंत परंपरा के रूप में मान्यता देता है जो मणिपुर के मंदिरों और घरेलू स्थानों में प्रस्तुत किए जाने वाले अनुष्ठानिक गायन, ढोलक वादन और नृत्य को समाहित करती है।
निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए
- गरबा : गुजरात
- मोहिनीअट्टम : ओडिशा
- यक्षगान : कर्नाटक
उपर्युक्त युग्मों में से कौन सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: गरबा गुजरात का पारंपरिक लोक नृत्य है, जो नवरात्रि के दौरान देवी दुर्गा के सम्मान में किया जाता है।
❌ कथन 2 – गलत: मोहिनीअट्टम केरल का शास्त्रीय नृत्य है, ओडिशा का नहीं। यह महिलाओं द्वारा एकल रूप से प्रस्तुत किया जाने वाला सुंदर और कोमल नृत्य है।
✅ कथन 3 – सही: यक्षगान कर्नाटक का पारंपरिक रंगमंच है, जो नृत्य, संगीत, संवाद और विस्तृत वेशभूषा के साथ पौराणिक कहानियों को प्रस्तुत करता है।
प्रसिद्ध सत्रीया नृत्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- सत्रीया संगीत, नृत्य और नाटक का एक संयोजन है।
- यह असम के वैष्णवों की सदियों पुरानी जीवंत परंपरा है।
- यह तुलसीदास, कबीर और मीराबाई द्वारा रचित भक्ति गीतों के शास्त्रीय रागों और तालों पर आधारित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सत्रीया, संगीत, नृत्य और नाटक का संयोजन है, जो गति, भाव और भक्ति गीतों के माध्यम से कहानी कहता है।
✅ कथन 2 – सही: यह असम के वैष्णवों की सदियों पुरानी जीवंत परंपरा है, जो 15वीं शताब्दी में श्रीमंत शंकरदेव द्वारा नव-वैष्णव आंदोलन के भाग के रूप में आरंभ की गई।
❌ कथन 3 – गलत: सत्रीया शंकरदेव और असमिया संतों की रचनाओं पर आधारित है, तुलसीदास, कबीर या मीराबाई की नहीं, जो विभिन्न क्षेत्रीय भक्ति परंपराओं से संबंधित थे; यह विशिष्ट असमिया रागों और तालों का उपयोग करता है।
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भारत के सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, नृत्य और नाटक में 'त्रिभंग' नामक मुद्रा प्राचीन काल से लेकर आज तक भारतीय कलाकारों की पसंदीदा रही है। निम्नलिखित में से कौन सा कथन इस मुद्रा का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
त्रिभंग (अर्थात 'तीन मोड़') भारतीय कला और नृत्य में एक शास्त्रीय खड़ी मुद्रा है जिसमें शरीर एक कोमल S-आकार की वक्रता बनाता है और तीन बिंदुओं पर मुड़ता है: गर्दन, कमर और घुटना।
यह त्रि-मोड़ मुद्रा कमर और गर्दन पर विपरीत वक्र बनाती है, जो इसे ओडिसी नृत्य और मंदिर की मूर्तिकला जैसी परंपराओं में सबसे सुंदर और मोहक मुद्रा बनाती है, जो अक्सर भगवान कृष्ण के चित्रों में दर्शाई जाती है।
आप कुचिपुड़ी और भरतनाट्यम नृत्यों के बीच कैसे अंतर करते हैं?
- नर्तकों द्वारा कभी-कभी संवाद बोलना कुचिपुड़ी नृत्य में पाया जाता है लेकिन भरतनाट्यम में नहीं।
- पीतल की थाली पर अपने पैरों को किनारों पर रखकर नृत्य करना भरतनाट्यम की विशेषता है लेकिन कुचिपुड़ी नृत्य में ऐसी गति का रूप नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: कुचिपुड़ी नर्तक प्रस्तुतियों के दौरान वाचिक अभिनय (बोले गए संवाद) का उपयोग करते हैं, जो भरतनाट्यम में नहीं पाई जाने वाली एक अनूठी विशेषता है।
❌ कथन 2 – गलत: पीतल की थाली पर नृत्य (तरंगम) कुचिपुड़ी की विशिष्ट विशेषता है, भरतनाट्यम की नहीं।