UPSC CSE Prelims
आधुनिक इतिहास Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for आधुनिक इतिहास in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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भारत सरकार अधिनियम, 1935 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- इसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांतों और रियासतों के संघ पर आधारित एक अखिल भारतीय संघ की स्थापना का प्रावधान था।
- रक्षा और विदेशी मामलों को संघीय विधायिका के नियंत्रण में रखा गया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल 1 (Option A)
भारत शासन अधिनियम, 1935 ब्रिटिश शासन द्वारा लागू किया गया सबसे व्यापक संवैधानिक सुधार था। इसने अखिल भारतीय संघ (All India Federation) का प्रस्ताव दिया, लेकिन महत्वपूर्ण विषयों पर ब्रिटिश नियंत्रण बनाए रखा।
✅ कथन I सही है: इस अधिनियम ने ब्रिटिश भारतीय प्रांतों और देशी रियासतों के संघ के रूप में All India Federation का प्रावधान किया था। लेकिन पर्याप्त रियासतों के शामिल न होने के कारण यह लागू नहीं हो सका।
❌ कथन II गलत है: रक्षा (Defence) और विदेश मामले (Foreign Affairs) संघीय विधानमंडल के अधीन नहीं थे। ये गवर्नर-जनरल के नियंत्रण में आरक्षित विषय थे।
संक्षिप्त नोट्स: भारत शासन अधिनियम, 1935
-
यह भारत के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा पारित सबसे बड़ा अधिनियम था।
-
इसमें All India Federation का प्रस्ताव दिया गया था।
-
प्रांतों में Provincial Autonomy (प्रांतीय स्वायत्तता) लागू की गई।
-
केंद्र में Dyarchy (द्वैध शासन) का प्रावधान किया गया, लेकिन लागू नहीं हुआ।
-
1937 में Federal Court की स्थापना की गई।
-
शक्तियों को Federal, Provincial और Concurrent Lists में बाँटा गया।
-
Separate Electorates की व्यवस्था को जारी रखा गया।
-
इसके कई प्रावधान बाद में भारतीय संविधान, 1950 का आधार बने।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस घोषित किया गया है।
कथन-II: 1905 में इसी दिन स्वदेशी आंदोलन शुरू किया गया था।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रतिवर्ष 7 अगस्त को हथकरघा बुनकरों को सम्मानित करने और भारत के हथकरघा उद्योग को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। यह तिथि विशेष रूप से 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की स्मृति में चुनी गई थी, जिसका उद्देश्य बंगाल के विभाजन के विरोध में घरेलू उत्पादों और उत्पादन प्रक्रियाओं को पुनर्जीवित करना था।
✅ कथन-I – सही: 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस घोषित किया गया है, जिसे पहली बार 2015 में मनाया गया था।
✅ कथन-II – सही: स्वदेशी आंदोलन 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में शुरू किया गया था।
चूंकि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की तिथि जानबूझकर स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की स्मृति में चुनी गई थी, इसलिए कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वदेशी आंदोलन (1905-1908)
- शुरुआत की तिथि: 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में लॉर्ड कर्जन द्वारा घोषित बंगाल विभाजन के जवाब में
- उद्देश्य: ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार और भारतीय निर्मित उत्पादों (स्वदेशी वस्तुओं) को आर्थिक राष्ट्रवाद के रूप में बढ़ावा देना
- प्रमुख विशेषताएं: विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी उद्योगों (विशेषकर हथकरघा वस्त्र) को बढ़ावा, स्वदेशी स्टोर की स्थापना और जन-भागीदारी
- नेता: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल, अरबिंदो घोष
- विधियां: सार्वजनिक सभाएं, जुलूस, स्वदेशी समितियों का गठन, स्वदेशी या देशी वस्तुओं का उपयोग, और राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना
- प्रभाव: समाज के विभिन्न वर्गों को शामिल करने वाला पहला जन आंदोलन; भविष्य के जन आंदोलनों की नींव रखी और स्वदेशी उद्योगों, विशेषकर हथकरघा को बढ़ावा दिया
- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: 2015 में भारत सरकार द्वारा स्थापित, 7 अगस्त को हथकरघा बुनकरों के योगदान और स्वदेशी भावना का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है
भारतीय इतिहास के संदर्भ में, अलेक्जेंडर रिया, ए. एच. लॉन्गहर्स्ट, रॉबर्ट सेवेल, जेम्स बर्गेस और वाल्टर इलियट किससे संबद्ध थे?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — पुरातात्विक उत्खनन
उल्लिखित सभी पाँच व्यक्ति—अलेक्जेंडर रिया, ए. एच. लॉन्गहर्स्ट, रॉबर्ट सेवेल, जेम्स बर्गेस और वाल्टर इलियट—प्रमुख पुरातत्वविद् और शोधकर्ता थे जिन्होंने औपनिवेशिक भारत, विशेष रूप से दक्षिण भारत में पुरातात्विक उत्खनन और दस्तावेजीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे अमरावती, नागार्जुनकोंडा और पल्लावरम जैसे बौद्ध और प्राचीन भारतीय धरोहर स्थलों की खोज और संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
📝 संक्षिप्त नोट्स: औपनिवेशिक भारत में ब्रिटिश पुरातत्वविद्
| पुरातत्वविद् | काल | प्रमुख योगदान |
|---|---|---|
| अलेक्जेंडर रिया | 1858-1924 | मुख्यतः दक्षिण भारत में कार्य किया; तमिलनाडु में पल्लावरम की पहाड़ियों से एक ताबूत की खोज की |
| ए. एच. लॉन्गहर्स्ट | 1876-1955 | पुरातत्वविद् और कला इतिहासकार; नागार्जुनकोंडा में व्यवस्थित उत्खनन का निर्देशन किया (1927-1931) |
| रॉबर्ट सेवेल | 1845-1925 | मद्रास प्रेसीडेंसी में सिविल सेवक; अमरावती बौद्ध स्तूप पर पुरातात्विक कार्य किया |
| जेम्स बर्गेस | 1832-1916 | इंडियन एंटिक्वेरी की स्थापना (1872); भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक (1886-89) |
| वाल्टर इलियट | 1803-1887 | अमरावती स्थल का दौरा (1854); दक्षिण भारतीय बौद्ध कला को समझने के लिए महत्वपूर्ण मूर्ति पैनल एकत्र किए |
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निम्नलिखित में से किस एक अधिनियम द्वारा बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत का गवर्नर जनरल नामित किया गया?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1833 का चार्टर अधिनियम
1833 का चार्टर अधिनियम एक ऐतिहासिक कानून था जिसने ब्रिटिश भारत में प्रशासनिक नियंत्रण को केंद्रीकृत किया। इसने बंगाल के गवर्नर जनरल को भारत के गवर्नर जनरल के रूप में पुनः नामित किया, जिससे उन्हें भारत में ब्रिटिश क्षेत्रीय अधिकारों पर एकीकृत नागरिक और सैन्य शक्तियों के साथ संपूर्ण अधिकार प्रदान किया गया। लॉर्ड विलियम बेंटिंक इस अधिनियम के तहत भारत के पहले गवर्नर जनरल बने, जिसने बॉम्बे और मद्रास के गवर्नरों की विधायी शक्तियों को भी समाप्त कर दिया और संपूर्ण ब्रिटिश भारत के लिए विशेष विधायी अधिकार गवर्नर जनरल में निहित कर दिया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: चार्टर अधिनियम और संवैधानिक विकास
| अधिनियम | वर्ष | प्रमुख प्रावधान |
|---|---|---|
| रेगुलेटिंग एक्ट | 1773 | बंगाल के गवर्नर जनरल का पद सृजित (वारेन हेस्टिंग्स); कलकत्ता में सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना |
| पिट्स इंडिया एक्ट | 1784 | दोहरी सरकार प्रणाली की स्थापना; बोर्ड ऑफ कंट्रोल का गठन |
| चार्टर अधिनियम | 1793 | कंपनी के व्यापार एकाधिकार को 20 वर्षों के लिए विस्तारित; बोर्ड ऑफ कंट्रोल सदस्यों के वेतन में वृद्धि |
| चार्टर अधिनियम | 1813 | चाय और चीन व्यापार को छोड़कर कंपनी के व्यापार एकाधिकार की समाप्ति; शिक्षा को बढ़ावा |
| चार्टर अधिनियम | 1833 | बंगाल का गवर्नर जनरल भारत का गवर्नर जनरल बना; कंपनी के वाणिज्यिक कार्यों की समाप्ति; भारतीयों के लिए सिविल सेवाएं खोली गईं |
| चार्टर अधिनियम | 1853 | विधायी और कार्यकारी कार्यों को पृथक किया; सिविल सेवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षा की शुरुआत |
भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- डच ने गजपति शासकों द्वारा उन्हें दी गई भूमि पर पूर्वी तट पर अपनी फैक्ट्रियाँ/गोदाम स्थापित किए।
- अल्फांसो डी अल्बुकर्क ने बीजापुर सल्तनत से गोवा पर कब्जा किया।
- अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने विजयनगर साम्राज्य के एक प्रतिनिधि से पट्टे पर ली गई भूमि पर मद्रास में एक फैक्ट्री स्थापित की।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
यह प्रश्न मध्यकाल और प्रारंभिक आधुनिक काल के दौरान भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों की स्थापना के ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन 2 और 3 ऐतिहासिक रूप से सटीक हैं, जबकि कथन 1 में कालानुक्रमिक असंभवता है।
❌ कथन 1 – गलत: डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) का गठन 1602 में हुआ था, जबकि ओडिशा का गजपति राजवंश 1541 तक पहले ही पतन हो चुका था। डचों ने गोलकुंडा सल्तनत और स्थानीय नायकों जैसे अन्य शासकों से भूमि अनुदान प्राप्त किया, गजपति शासकों से नहीं।
✅ कथन 2 – सही: अल्फांसो डी अल्बुकर्क ने 1510 में बीजापुर सल्तनत के युसूफ आदिल शाह से गोवा पर कब्जा किया, जिससे इस क्षेत्र में 450 से अधिक वर्षों तक पुर्तगाली प्रभुत्व स्थापित हुआ।
✅ कथन 3 – सही: 1639 में, फ्रांसिस डे ने चंद्रगिरि के दमरला वेंकटपति नायक से मद्रास (मद्रासपट्टनम) में भूमि के लिए पट्टा प्राप्त किया, जो पतनशील विजयनगर साम्राज्य के प्रतिनिधि थे। इसके बाद यहाँ फोर्ट सेंट जॉर्ज का निर्माण किया गया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियाँ
| कंपनी/शक्ति | स्थापना वर्ष | प्रमुख बस्तियाँ | अनुदान/क्षेत्र प्राप्तकर्ता |
|---|---|---|---|
| पुर्तगाली | सर्वप्रथम आगमन (1498) | गोवा (1510), दमन, दीव | गोवा बीजापुर सल्तनत से कब्जा |
| डच (VOC) | 1602 | पुलिकट, नागपट्टिनम, कोच्चि | गोलकुंडा सल्तनत, स्थानीय नायक |
| अंग्रेज (EIC) | 1600 | मद्रास (1639), बंबई (1668), कलकत्ता (1690) | चंद्रगिरि नायक, पुर्तगाली, बंगाल नवाब |
| फ्रांसीसी | 1664 | पांडिचेरी (1674), चंदननगर | बीजापुर, बंगाल शासक |
| डेनिश | 1616 | ट्रैंकेबार (1620), सेरामपुर | तंजावुर के नायक |
- गजपति राजवंश: ओडिशा और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों पर शासन; 16वीं शताब्दी के मध्य तक पतन (अंतिम शासक काखरुआ देव, 1541)।
- विजयनगर साम्राज्य: तालीकोटा के युद्ध (1565) के बाद, चंद्रगिरि, मदुरै और तंजावुर सहित नायक राज्यों में विखंडित हो गया।
- अल्फांसो डी अल्बुकर्क: भारत में पुर्तगाली गवर्नर (1509-1515); रणनीतिक मास्टरमाइंड जिन्होंने गोवा, मलक्का और होर्मुज पर कब्जा किया।
भारत सरकार अधिनियम 1919 में, प्रांतीय सरकार के कार्यों को "आरक्षित" और "हस्तांतरित" विषयों में विभाजित किया गया था। निम्नलिखित में से किन्हें "आरक्षित" विषयों के रूप में माना गया था?
- न्याय प्रशासन
- स्थानीय स्वशासन
- भू-राजस्व
- पुलिस
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1, 3 और 4
भारत सरकार अधिनियम 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन की व्यवस्था शुरू की, जिसमें विषयों को 'आरक्षित' (गवर्नर और कार्यकारी परिषद द्वारा नियंत्रित) और 'हस्तांतरित' (भारतीय मंत्रियों द्वारा प्रशासित) में विभाजित किया गया। आरक्षित विषयों को अधिक महत्वपूर्ण माना गया और इनमें न्याय प्रशासन, भू-राजस्व और पुलिस शामिल थे, जबकि स्थानीय स्वशासन एक हस्तांतरित विषय था।
✅ कथन 1 – सही: न्याय प्रशासन गवर्नर के नियंत्रण में एक आरक्षित विषय था।
❌ कथन 2 – गलत: स्थानीय स्वशासन एक हस्तांतरित विषय था, जो भारतीय मंत्रियों द्वारा प्रशासित था।
✅ कथन 3 – सही: भू-राजस्व एक आरक्षित विषय था, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण वित्तीय मामला था।
✅ कथन 4 – सही: पुलिस एक आरक्षित विषय था, जो कानून और व्यवस्था से संबंधित था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत सरकार अधिनियम 1919 के तहत द्वैध शासन
| श्रेणी | आरक्षित विषय | हस्तांतरित विषय |
|---|---|---|
| नियंत्रण | गवर्नर व कार्यकारी परिषद (ब्रिटिश अधिकारी) | गवर्नर व भारतीय मंत्री (निर्वाचित) |
| प्रकृति | महत्वपूर्ण/संवेदनशील मामले | कम महत्वपूर्ण/राष्ट्र-निर्माण गतिविधियाँ |
| उदाहरण | कानून और व्यवस्था, पुलिस, न्याय, भू-राजस्व, सिंचाई, वित्त | शिक्षा, जनस्वास्थ्य, स्थानीय स्वशासन, लोक निर्माण, कृषि, आबकारी |
| मंत्रियों की जवाबदेही | कार्यकारी परिषद विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी नहीं | भारतीय मंत्री प्रांतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी |
| उद्देश्य | प्रमुख क्षेत्रों पर ब्रिटिश नियंत्रण बनाए रखना | शासन में भारतीयों की क्रमिक भागीदारी |
- द्वैध शासन का शाब्दिक अर्थ है 'दोहरी सरकार' - मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919) के भाग के रूप में शुरू किया गया
- भारतीय नेताओं ने इस व्यवस्था की आलोचना की क्योंकि इसने अधिकार का विभाजन किया और व्यवहार में अकार्यकारी थी
- भारत सरकार अधिनियम 1935 द्वारा समाप्त किया गया, जिसने प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की
क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संविधान सभा में प्रांतीय विधानसभाओं के साथ-साथ रियासतों द्वारा मनोनीत सदस्य होंगे।
- कोई भी प्रांत, जो नए संविधान को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, उसे अपनी भावी स्थिति के संबंध में ब्रिटेन के साथ एक अलग समझौता करने का अधिकार होगा।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
क्रिप्स मिशन (1942) ने संवैधानिक व्यवस्थाओं का प्रस्ताव दिया था जिसमें नए संविधान को स्वीकार न करने वाले प्रांतों के लिए प्रावधान शामिल थे। कथन 2 सही है क्योंकि यह इस प्रस्ताव को सटीक रूप से दर्शाता है, जबकि कथन 1 में संविधान सभा की संरचना के संबंध में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण त्रुटि है।
❌ कथन 1 – गलत: क्रिप्स मिशन ने प्रस्ताव दिया था कि संविधान सभा के सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित होंगे, लेकिन रियासतों के मामले में शासकों द्वारा मनोनीत होंगे। कथन में दोनों के लिए "मनोनीत" शब्द का उपयोग किया गया है, जो प्रांतीय विधानसभाओं के लिए तथ्यात्मक रूप से गलत है।
✅ कथन 2 – सही: मिशन ने स्पष्ट रूप से उन प्रांतों को अनुमति दी जो नए संविधान को स्वीकार नहीं करते, उन्हें अपनी भावी स्थिति के संबंध में ब्रिटेन के साथ अलग समझौते पर हस्ताक्षर करने का अधिकार था, जिससे उन्हें बाहर निकलने का प्रावधान मिला।
📝 संक्षिप्त नोट्स: क्रिप्स मिशन (1942)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| पृष्ठभूमि | ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल द्वारा मार्च 1942 में भेजा गया, सर स्टैफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सहयोग सुरक्षित करने के लिए |
| मुख्य प्रस्ताव | • युद्ध के बाद भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस • प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित और रियासती शासकों द्वारा मनोनीत सदस्यों के साथ संविधान निर्माण निकाय • प्रांत बाहर निकल सकते थे और अलग संघ बना सकते थे • युद्ध के दौरान रक्षा पर ब्रिटिश नियंत्रण |
| अस्वीकृति का कारण | • कांग्रेस युद्ध के बाद के वादों के बजाय तत्काल सत्ता हस्तांतरण चाहती थी • मुस्लिम लीग ने समूहीकरण सूत्र पर आपत्ति की • युद्ध के दौरान सत्ता का कोई वास्तविक हस्तांतरण नहीं • बाहर निकलने के खंड में विभाजन का अंतर्निहित प्रावधान |
| गांधी की टिप्पणी | इसे "दिवालिया बैंक पर पोस्ट-डेटेड चेक" कहा |
| महत्व | भारत की स्वतंत्रता के अधिकार की पहली ब्रिटिश स्वीकृति; रियासतों के महत्व को मान्यता; विभाजन के सिद्धांत को स्वीकार किया |
निम्नलिखित स्वतंत्रता सेनानियों पर विचार कीजिए:
- बरिन्द्र कुमार घोष
- जोगेश चन्द्र चटर्जी
- रास बिहारी बोस
उपर्युक्त में से कौन ग़दर पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़े थे?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — केवल 3
दिए गए स्वतंत्रता सेनानियों में से केवल रास बिहारी बोस ग़दर पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़े थे। उन्होंने भारत में ग़दर आंदोलन के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों को जारी रखने के लिए जापान भाग गए।
❌ कथन 1 – गलत: बरिन्द्र कुमार घोष बंगाल में युगांतर क्रांतिकारी समूह और अलीपुर बम केस से जुड़े थे, ग़दर पार्टी से नहीं।
❌ कथन 2 – गलत: जोगेश चन्द्र चटर्जी बंगाल के एक क्रांतिकारी थे लेकिन ग़दर पार्टी के साथ उनका कोई दस्तावेजी संबंध नहीं था।
✅ कथन 3 – सही: रास बिहारी बोस ग़दर आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों का समन्वय किया और बाद में जापान में एक प्रमुख नेता बने।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ग़दर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन
| क्रांतिकारी आंदोलन | प्रमुख व्यक्तित्व | क्षेत्र/आधार | मुख्य गतिविधियाँ |
|---|---|---|---|
| ग़दर पार्टी (1913) | लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा, रास बिहारी बोस | अमेरिका, कनाडा (प्रवासी भारतीय) | सशस्त्र विद्रोह के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने का लक्ष्य; ग़दर विद्रोह (1915) |
| युगांतर (1906) | बरिन्द्र कुमार घोष, बाघा जतिन, अरबिंदो घोष | बंगाल | क्रांतिकारी गतिविधियाँ, अलीपुर बम केस (1908) |
| अनुशीलन समिति | प्रमथनाथ मित्र, जोगेश चन्द्र चटर्जी | बंगाल | क्रांतिकारी प्रशिक्षण, सशस्त्र प्रतिरोध |
- रास बिहारी बोस: दिल्ली-लाहौर षड्यंत्र (1912) के मास्टरमाइंड, लॉर्ड हार्डिंग की हत्या का प्रयास; पंजाब और बंगाल में ग़दर आंदोलन का समन्वय; बाद में जापान भाग गए और भारतीय राष्ट्रीय सेना के गठन में मदद की।
- बरिन्द्र कुमार घोष: अरबिंदो घोष के छोटे भाई; युगांतर साप्ताहिक के संस्थापक; अलीपुर बम केस में शामिल; बाद में आध्यात्मिक हो गए।
- जोगेश चन्द्र चटर्जी: अनुशीलन समिति के सदस्य; बंगाल की क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल; ग़दर पार्टी से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं।
निम्नलिखित में से कौन 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' से संबंधित है, जो प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों का अंग्रेजी में अनुवाद है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — मोहनदास करमचंद गांधी
मोहनदास करमचंद गांधी ने 1930 में यरवदा जेल में अपने कारावास के दौरान संस्कृत और अन्य भारतीय भाषाओं से प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों के संग्रह का अंग्रेजी में अनुवाद किया। यह कार्य 1934 में लंदन में 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' शीर्षक के तहत प्रकाशित हुआ।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
बाल गंगाधर तिलक: वे अपनी कृति 'गीता रहस्य' के लिए प्रसिद्ध हैं, जिसे उन्होंने मांडले में कारावास के दौरान (1908-1914) लिखा था, और 'द आर्कटिक होम इन द वेदास' के लिए भी जाने जाते हैं। वे 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' से संबंधित नहीं हैं।
जवाहरलाल नेहरू: उनके प्रमुख साहित्यिक योगदानों में 'द डिस्कवरी ऑफ इंडिया' और 'ग्लिम्प्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री' शामिल हैं, जो दोनों उनके विभिन्न कारावास के दौरान लिखी गईं, लेकिन 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' नहीं।
सरोजिनी नायडू: 'भारत कोकिला' के रूप में जानी जाने वाली, वे एक विपुल कवयित्री थीं जिनकी कृतियों में 'द गोल्डन थ्रेशोल्ड', 'द बर्ड ऑफ टाइम', और 'द ब्रोकन विंग' शामिल हैं, लेकिन वे 'सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन' के अनुवाद से संबंधित नहीं हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा जेल साहित्य
| नेता | साहित्यिक कृति | जेल/वर्ष | विषय |
|---|---|---|---|
| महात्मा गांधी | सॉन्ग्स फ्रॉम प्रिजन | यरवदा जेल, 1930 | प्राचीन भारतीय धार्मिक गीतों का अनुवाद |
| बाल गंगाधर तिलक | गीता रहस्य | मांडले जेल, 1908-1914 | भगवद गीता पर टीका |
| जवाहरलाल नेहरू | डिस्कवरी ऑफ इंडिया | अहमदनगर किला, 1942-1946 | भारतीय इतिहास और संस्कृति |
| जवाहरलाल नेहरू | ग्लिम्प्सेज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री | विभिन्न जेलें, 1930-1933 | बेटी को विश्व इतिहास पर पत्र |
| विनायक दामोदर सावरकर | कमला; प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 | सेल्युलर जेल, अंडमान | कविता और इतिहास |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को मताधिकार देने की सिफारिश की।
- 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने महिलाओं को विधानमंडल में आरक्षित सीटें प्रदान कीं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने सीमित निर्वाचन सुधार शुरू किए लेकिन 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को सार्वभौमिक मताधिकार प्रदान नहीं किया। हालांकि, 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने स्पष्ट रूप से प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों दोनों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान किया, जो महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
❌ कथन 1 – गलत: मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को मताधिकार देने की सिफारिश नहीं की; मताधिकार संपत्ति, आय और शिक्षा योग्यताओं के आधार पर प्रतिबंधित रहा।
✅ कथन 2 – सही: 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में उनके लिए आरक्षित सीटें शुरू कीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संवैधानिक सुधार (1919-1935)
| विशेषता | भारत सरकार अधिनियम, 1919 | भारत सरकार अधिनियम, 1935 |
|---|---|---|
| निर्वाचन सुधार | प्रतिबंधित आधार पर मताधिकार का विस्तार (संपत्ति, आय, शिक्षा); महिलाओं के लिए सार्वभौमिक मताधिकार नहीं | प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें |
| प्रांतीय प्रशासन | द्वैध शासन की शुरुआत (हस्तांतरित और आरक्षित विषय) | द्वैध शासन समाप्त; प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत |
| केंद्रीय विधानमंडल | द्विसदनीय विधानमंडल की स्थापना | संघीय संरचना का प्रस्ताव (कभी लागू नहीं हुआ) |
| विषयों का विभाजन | केंद्रीय और प्रांतीय सूचियाँ | संघीय, प्रांतीय और समवर्ती सूचियाँ |
| सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व | पृथक निर्वाचक मंडल जारी | महिलाओं सहित अधिक समुदायों तक विस्तारित |
| न्यायिक पहलू | - | भारत के संघीय न्यायालय की स्थापना |
निम्नलिखित में से कौन हिंदू फीमेल स्कूल के सचिव के रूप में जुड़े थे, जिसे बाद में बेथ्यून फीमेल स्कूल के नाम से जाना गया?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — ईश्वर चंद्र विद्यासागर
ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने हिंदू फीमेल स्कूल (1849 में स्थापित) के सचिव के रूप में कार्य किया, जिसे बाद में इसके संस्थापक जे.ई.डी. बेथ्यून के सम्मान में बेथ्यून फीमेल स्कूल का नाम दिया गया। विद्यासागर ने बंगाल में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारत में महिला उच्च शिक्षा के लिए इस अग्रणी संस्थान के प्रशासन और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: समाज सुधारक और महिला शिक्षा
| सुधारक | महिला शिक्षा और समाज सुधार में प्रमुख योगदान |
|---|---|
| ईश्वर चंद्र विद्यासागर | • हिंदू फीमेल स्कूल (बाद में बेथ्यून फीमेल स्कूल, 1849) के सचिव • विधवा पुनर्विवाह की वकालत से हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 • बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया और महिलाओं के लिए विद्यालय खोले • कुलीन बहुविवाह और बाल विवाह का विरोध किया |
| एनी बेसेंट | • सेंट्रल हिंदू कॉलेज, बनारस (1898) की स्थापना, बीएचयू की नींव • सेंट्रल हिंदू स्कूल फॉर गर्ल्स, वाराणसी की स्थापना • आईएनसी की पहली महिला अध्यक्ष (1917, कलकत्ता अधिवेशन) • तिलक के साथ ऑल इंडिया होम रूल लीग की स्थापना (1916) |
| देबेंद्रनाथ टैगोर | • तत्त्वबोधिनी सभा (1839) की स्थापना • आदि ब्रह्म समाज का नेतृत्व • ब्रह्म आंदोलन के माध्यम से तर्कवाद और समाज सुधार को बढ़ावा |
| सरोजिनी नायडू | • आईएनसी की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष (1925, कानपुर अधिवेशन) • गांधी द्वारा चुनी गई नमक सत्याग्रह की नेता (1930) • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में गांधी के साथ • प्लेग महामारी सेवा के लिए कैसर-ए-हिंद पदक से सम्मानित |
आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — रवींद्रनाथ टैगोर ने यहां राष्ट्रगान का बंगाली से अंग्रेजी में अनुवाद किया।
आंध्र प्रदेश का मदनपल्ले भारतीय इतिहास में एक विशिष्ट स्थान रखता है क्योंकि यहां रवींद्रनाथ टैगोर ने 'जन गण मन' का बंगाली से अंग्रेजी में अनुवाद किया था। फरवरी 1919 में मदनपल्ले के बेसेंट थियोसोफिकल कॉलेज में अपने प्रवास के दौरान, टैगोर ने "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" शीर्षक से अनुवाद प्रस्तुत किया।
❌ विकल्प 1 – गलत: पिंगली वेंकय्या ने तिरंगे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज की रूपरेखा तैयार की लेकिन इसे बेजवाड़ा (अब विजयवाड़ा) में INC सत्र में महात्मा गांधी को प्रस्तुत किया, मदनपल्ले में नहीं।
❌ विकल्प 2 – गलत: पट्टाभि सीतारमैया आंध्र प्रदेश में एक प्रमुख नेता थे और कांग्रेस अध्यक्ष रहे, लेकिन उन्होंने मदनपल्ले से भारत छोड़ो आंदोलन का नेतृत्व नहीं किया।
✅ विकल्प 3 – सही: रवींद्रनाथ टैगोर ने 1919 में मदनपल्ले में अपने प्रवास के दौरान जन गण मन का बंगाली से अंग्रेजी में "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" के रूप में अनुवाद किया।
❌ विकल्प 4 – गलत: थियोसोफिकल सोसाइटी की स्थापना न्यूयॉर्क (1875) में हुई थी और इसका अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय अड्यार, चेन्नई (1882) में स्थानांतरित किया गया, मदनपल्ले में नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जन गण मन और राष्ट्रीय प्रतीक
- रचना: जन गण मन मूल रूप से 1911 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाली में रचित किया गया था।
- पहला प्रदर्शन: इसे पहली बार 27 दिसंबर 1911 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता सत्र में गाया गया था।
- अंग्रेजी अनुवाद: टैगोर ने फरवरी 1919 में आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में इसका अंग्रेजी में "द मॉर्निंग सॉन्ग ऑफ इंडिया" के रूप में अनुवाद किया।
- राष्ट्रगान के रूप में अंगीकरण: संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को जन गण मन को भारत के राष्ट्रगान के रूप में अपनाया।
- अवधि: पूर्ण संस्करण में पांच छंद हैं; संक्षिप्त संस्करण का आधिकारिक बजाने का समय लगभग 52 सेकंड है।
- नोबेल पुरस्कार: रवींद्रनाथ टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया, वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय बने।
सत्रहवीं शताब्दी की पहली तिमाही में, निम्नलिखित में से किसमें/किन में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की फैक्ट्री/फैक्ट्रियां स्थित थी/थीं?
1. ब्रोच
2. चिकाकोल
3. त्रिचिनोपोली
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न 17वीं शताब्दी की पहली तिमाही (1600-1625) में स्थापित प्रारंभिक अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की फैक्ट्रियों के ज्ञान का परीक्षण करता है। उल्लिखित तीन स्थानों में से केवल ब्रोच में इस अवधि के दौरान एक कार्यशील अंग्रेजी फैक्ट्री थी।
✅ कथन 1 – सही: ब्रोच (भरूच, गुजरात) को 1616-1617 में एक अंग्रेजी फैक्ट्री के रूप में स्थापित किया गया था, जो सूरत फैक्ट्री (1613) की स्थापना के तुरंत बाद था, जिससे यह पश्चिमी तट पर प्रारंभिक व्यापारिक केंद्रों में से एक बन गया।
❌ कथन 2 – गलत: चिकाकोल (श्रीकाकुलम, आंध्र प्रदेश) 17वीं शताब्दी की पहली तिमाही में अंग्रेजी फैक्ट्री नहीं थी; पूर्वी तट पर अंग्रेजी उपस्थिति मुख्य रूप से मसूलीपट्टनम (1611 में स्थापित) में थी।
❌ कथन 3 – गलत: त्रिचिनोपोली (तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु) में 17वीं शताब्दी की शुरुआत में अंग्रेजी फैक्ट्री नहीं थी; यह केवल 18वीं शताब्दी के मध्य में अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच कर्नाटक युद्धों के दौरान रणनीतिक महत्व प्राप्त किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रारंभिक अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की फैक्ट्रियां (17वीं शताब्दी)
| काल | फैक्ट्री/स्थान | स्थापना वर्ष | महत्व |
|---|---|---|---|
| पहली तिमाही (1600-1625) | सूरत | 1613 | भारत में पहली स्थायी अंग्रेजी फैक्ट्री; मुगल व्यापार का प्रवेश द्वार |
| मसूलीपट्टनम | 1611 | पूर्वी तट पर पहली अंग्रेजी फैक्ट्री; वस्त्र व्यापार केंद्र | |
| अहमदाबाद | 1618 | महत्वपूर्ण वस्त्र विनिर्माण केंद्र | |
| ब्रोच (भरूच) | 1616-1617 | पश्चिमी तट की फैक्ट्री; वस्त्र और नील का व्यापार | |
| दूसरी तिमाही (1625-1650) | आर्मागन | 1626 | दक्षिण-पूर्वी तट पर पहली फैक्ट्री (वर्तमान चेन्नई के पास) |
| बालासोर | 1633 | पूर्वी तट; बंगाल व्यापार तक पहुंच | |
| फोर्ट सेंट जॉर्ज (मद्रास) | 1639 | कोरोमंडल तट पर प्रमुख किलेबंद बस्ती | |
| बाद में (1650 के बाद) | हुगली/कलकत्ता | 1651/1690 | बंगाल तक पहुंच; फोर्ट विलियम 1696 में स्थापित |
भारतीय इतिहास में 8 अगस्त 1942 के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा भारत छोड़ो प्रस्ताव को अपनाया गया।
8 अगस्त 1942 को, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) ने बॉम्बे में ऐतिहासिक भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित किया, जिसने महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक चरण था, जिसमें भारत से तत्काल ब्रिटिश वापसी की मांग की गई थी।
✅ विकल्प 1 – सही: 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे (अब मुंबई) में AICC द्वारा भारत छोड़ो प्रस्ताव वास्तव में अपनाया गया था।
❌ विकल्प 2 – गलत: वायसराय की कार्यकारी परिषद का विस्तार 1940 के अगस्त प्रस्ताव का हिस्सा था, 8 अगस्त 1942 से संबंधित नहीं।
❌ विकल्प 3 – गलत: कांग्रेस मंत्रिमंडलों ने द्वितीय विश्व युद्ध के प्रकोप के बाद अक्टूबर-नवंबर 1939 में सात प्रांतों में इस्तीफा दिया था, 1942 में नहीं।
❌ विकल्प 4 – गलत: डोमिनियन दर्जे का प्रस्ताव करने वाला क्रिप्स मिशन मार्च 1942 में आया था, 8 अगस्त 1942 को नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| तिथि | 8 अगस्त 1942 (प्रस्ताव अपनाया गया) |
| स्थान | बॉम्बे (गोवालिया टैंक मैदान) |
| नेता | महात्मा गांधी |
| नारा | "करो या मरो" |
| मुख्य मांग | भारत में ब्रिटिश शासन का तत्काल अंत |
| सरकारी प्रतिक्रिया | 9 अगस्त 1942 को शीर्ष कांग्रेस नेताओं की तत्काल गिरफ्तारी |
| चरित्र | व्यापक हिंसा और तोड़फोड़ के साथ स्वतःस्फूर्त जन आंदोलन |
| समानांतर सरकारें | बलिया (उत्तर प्रदेश), सतारा (महाराष्ट्र), मिदनापुर (बंगाल) में स्थापित |
औपनिवेशिक भारत के संदर्भ में, शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों को किस रूप में याद किया जाता है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — भारतीय राष्ट्रीय सेना के अधिकारी
शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के वरिष्ठ अधिकारी थे, जिसे आजाद हिंद फौज के नाम से भी जाना जाता है, जिसका नेतृत्व नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया था। उन्हें 1945-46 के ऐतिहासिक लाल किला परीक्षण (INA परीक्षण) के लिए प्रसिद्ध रूप से याद किया जाता है, जहाँ अंग्रेजों द्वारा उन पर 'सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ने' के आरोप में सैन्य न्यायालय में मुकदमा चलाया गया था। इन परीक्षणों ने पूरे भारत में बड़े पैमाने पर राष्ट्रवादी प्रदर्शनों को जन्म दिया और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भूलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू और जवाहरलाल नेहरू जैसे कानूनी विद्वानों वाली एक INA रक्षा समिति का गठन किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लाल किला परीक्षण और INA
- भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA): 1942 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा दक्षिण पूर्व एशिया में भारतीय युद्ध बंदियों और प्रवासियों से ब्रिटिश शासन से लड़ने के लिए गठित।
- लाल किला परीक्षण (नवंबर 1945 - मई 1946): दिल्ली के लाल किले में INA अधिकारियों का सैन्य न्यायालय। पहले मुकदमे में तीन अधिकारी थे जो विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे - शाहनवाज खान (मुस्लिम), प्रेम कुमार सहगल (हिंदू), और गुरबख्श सिंह ढिल्लों (सिख)।
- आरोप: सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ना, हत्या और हत्या में सहयोग।
- सार्वजनिक प्रतिक्रिया: पूरे भारत में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, हड़तालें और विरोध; हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों को राष्ट्रवादी उत्साह में एकजुट किया।
- रक्षा समिति: भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में; इसमें तेज बहादुर सप्रू, जवाहरलाल नेहरू और कैलाश नाथ काटजू शामिल थे।
- परिणाम: तीनों को आजीवन निर्वासन की सजा सुनाई गई, लेकिन सार्वजनिक दबाव के कारण कमांडर-इन-चीफ ने सजा माफ कर दी। परीक्षणों ने भारत छोड़ने के ब्रिटिश निर्णय को तेज किया।
- विरासत: INA परीक्षणों ने प्रदर्शित किया कि अंग्रेज अब भारतीय सशस्त्र बलों की वफादारी पर भरोसा नहीं कर सकते थे और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।