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क्रिप्स मिशन Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- संविधान सभा में प्रांतीय विधानसभाओं के साथ-साथ रियासतों द्वारा मनोनीत सदस्य होंगे।
- कोई भी प्रांत, जो नए संविधान को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है, उसे अपनी भावी स्थिति के संबंध में ब्रिटेन के साथ एक अलग समझौता करने का अधिकार होगा।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
क्रिप्स मिशन (1942) ने संवैधानिक व्यवस्थाओं का प्रस्ताव दिया था जिसमें नए संविधान को स्वीकार न करने वाले प्रांतों के लिए प्रावधान शामिल थे। कथन 2 सही है क्योंकि यह इस प्रस्ताव को सटीक रूप से दर्शाता है, जबकि कथन 1 में संविधान सभा की संरचना के संबंध में एक सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण त्रुटि है।
❌ कथन 1 – गलत: क्रिप्स मिशन ने प्रस्ताव दिया था कि संविधान सभा के सदस्य प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित होंगे, लेकिन रियासतों के मामले में शासकों द्वारा मनोनीत होंगे। कथन में दोनों के लिए "मनोनीत" शब्द का उपयोग किया गया है, जो प्रांतीय विधानसभाओं के लिए तथ्यात्मक रूप से गलत है।
✅ कथन 2 – सही: मिशन ने स्पष्ट रूप से उन प्रांतों को अनुमति दी जो नए संविधान को स्वीकार नहीं करते, उन्हें अपनी भावी स्थिति के संबंध में ब्रिटेन के साथ अलग समझौते पर हस्ताक्षर करने का अधिकार था, जिससे उन्हें बाहर निकलने का प्रावधान मिला।
📝 संक्षिप्त नोट्स: क्रिप्स मिशन (1942)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| पृष्ठभूमि | ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल द्वारा मार्च 1942 में भेजा गया, सर स्टैफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय सहयोग सुरक्षित करने के लिए |
| मुख्य प्रस्ताव | • युद्ध के बाद भारत के लिए डोमिनियन स्टेटस • प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा निर्वाचित और रियासती शासकों द्वारा मनोनीत सदस्यों के साथ संविधान निर्माण निकाय • प्रांत बाहर निकल सकते थे और अलग संघ बना सकते थे • युद्ध के दौरान रक्षा पर ब्रिटिश नियंत्रण |
| अस्वीकृति का कारण | • कांग्रेस युद्ध के बाद के वादों के बजाय तत्काल सत्ता हस्तांतरण चाहती थी • मुस्लिम लीग ने समूहीकरण सूत्र पर आपत्ति की • युद्ध के दौरान सत्ता का कोई वास्तविक हस्तांतरण नहीं • बाहर निकलने के खंड में विभाजन का अंतर्निहित प्रावधान |
| गांधी की टिप्पणी | इसे "दिवालिया बैंक पर पोस्ट-डेटेड चेक" कहा |
| महत्व | भारत की स्वतंत्रता के अधिकार की पहली ब्रिटिश स्वीकृति; रियासतों के महत्व को मान्यता; विभाजन के सिद्धांत को स्वीकार किया |
सर स्टैफोर्ड क्रिप्स की योजना में परिकल्पना की गई थी कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — भारत को डोमिनियन का दर्जा दिया जाना चाहिए
मार्च 1942 के क्रिप्स मिशन, जिसका नेतृत्व सर स्टैफोर्ड क्रिप्स ने किया था, में प्रस्तावित किया गया कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन का दर्जा दिया जाएगा और संविधान सभा के माध्यम से अपना संविधान बनाने का अधिकार दिया जाएगा। योजना में यह परिकल्पना थी कि जो प्रांत भारतीय संघ में शामिल नहीं होना चाहते, वे अपने संविधान के साथ अलग संघ बना सकते हैं। हालांकि, योजना में तत्काल पूर्ण स्वतंत्रता या विभाजन का वादा नहीं था; बल्कि युद्ध के बाद कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जैसा डोमिनियन दर्जा दिया गया, जिससे भारत ब्रिटिश राष्ट्रमंडल में रह सके। कांग्रेस और मुस्लिम लीग दोनों ने प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया—कांग्रेस ने तत्काल स्वतंत्रता की मांग की, जबकि लीग को अलग संघों से संबंधित प्रावधान अपर्याप्त लगे। मिशन अंततः युद्ध प्रयासों के लिए भारतीय सहयोग सुरक्षित करने में विफल रहा।
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