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भारत शासन अधिनियम Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित दावे पर विचार करें:
समुदाय पर आधारित राजनीतिक गठबंधनों की उत्पत्ति मोंटेग-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919 की प्रकृति में निहित थी।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन उपरोक्त दावे का समर्थन/समर्थन करता है?
- सुधारों ने अलग निर्वाचन क्षेत्रों के सिद्धांत को बरकरार रखा और बढ़ाया।
- पृथक निर्वाचन क्षेत्रों को भारतीय राष्ट्रवाद का मुकाबला करना था, जो मजबूत हो रहा था।
- वंचित वर्ग अलग निर्वाचन क्षेत्रों में निहित लाभों के इर्द-गिर्द एकजुट हुए।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
तीनों कथन इस Assertion का समर्थन करते हैं। मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919) ने पृथक निर्वाचन (Separate Electorates) की व्यवस्था को बनाए रखा और कई अन्य समुदायों तक इसका विस्तार किया, जिससे समुदाय आधारित राजनीति को बढ़ावा मिला।
ब्रिटिश सरकार ने इसे फूट डालो और राज करो की नीति के तहत बढ़ते राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर करने के लिए इस्तेमाल किया। साथ ही, विभिन्न समुदाय और वंचित वर्ग अपने हितों और प्रतिनिधित्व के लिए संगठित होने लगे।
इसलिए विकल्प D (1, 2 और 3) सही उत्तर है।
| पृथक निर्वाचन (Separate Electorates) ऐसी व्यवस्था थी जिसमें किसी समुदाय के मतदाता केवल उसी समुदाय के उम्मीदवार को वोट दे सकते थे। यह व्यवस्था 1909 में मुसलमानों के लिए शुरू हुई और 1919 में इसका विस्तार किया गया। इससे भारत में साम्प्रदायिक राजनीति को बढ़ावा मिला। |
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- इसमें ब्रिटिश भारतीय प्रांतों और रियासतों के संघ पर आधारित एक अखिल भारतीय संघ की स्थापना का प्रावधान था।
- रक्षा और विदेशी मामलों को संघीय विधायिका के नियंत्रण में रखा गया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल 1 (Option A)
भारत शासन अधिनियम, 1935 ब्रिटिश शासन द्वारा लागू किया गया सबसे व्यापक संवैधानिक सुधार था। इसने अखिल भारतीय संघ (All India Federation) का प्रस्ताव दिया, लेकिन महत्वपूर्ण विषयों पर ब्रिटिश नियंत्रण बनाए रखा।
✅ कथन I सही है: इस अधिनियम ने ब्रिटिश भारतीय प्रांतों और देशी रियासतों के संघ के रूप में All India Federation का प्रावधान किया था। लेकिन पर्याप्त रियासतों के शामिल न होने के कारण यह लागू नहीं हो सका।
❌ कथन II गलत है: रक्षा (Defence) और विदेश मामले (Foreign Affairs) संघीय विधानमंडल के अधीन नहीं थे। ये गवर्नर-जनरल के नियंत्रण में आरक्षित विषय थे।
संक्षिप्त नोट्स: भारत शासन अधिनियम, 1935
-
यह भारत के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा पारित सबसे बड़ा अधिनियम था।
-
इसमें All India Federation का प्रस्ताव दिया गया था।
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प्रांतों में Provincial Autonomy (प्रांतीय स्वायत्तता) लागू की गई।
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केंद्र में Dyarchy (द्वैध शासन) का प्रावधान किया गया, लेकिन लागू नहीं हुआ।
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1937 में Federal Court की स्थापना की गई।
-
शक्तियों को Federal, Provincial और Concurrent Lists में बाँटा गया।
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Separate Electorates की व्यवस्था को जारी रखा गया।
-
इसके कई प्रावधान बाद में भारतीय संविधान, 1950 का आधार बने।
भारत सरकार अधिनियम 1919 में, प्रांतीय सरकार के कार्यों को "आरक्षित" और "हस्तांतरित" विषयों में विभाजित किया गया था। निम्नलिखित में से किन्हें "आरक्षित" विषयों के रूप में माना गया था?
- न्याय प्रशासन
- स्थानीय स्वशासन
- भू-राजस्व
- पुलिस
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1, 3 और 4
भारत सरकार अधिनियम 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन की व्यवस्था शुरू की, जिसमें विषयों को 'आरक्षित' (गवर्नर और कार्यकारी परिषद द्वारा नियंत्रित) और 'हस्तांतरित' (भारतीय मंत्रियों द्वारा प्रशासित) में विभाजित किया गया। आरक्षित विषयों को अधिक महत्वपूर्ण माना गया और इनमें न्याय प्रशासन, भू-राजस्व और पुलिस शामिल थे, जबकि स्थानीय स्वशासन एक हस्तांतरित विषय था।
✅ कथन 1 – सही: न्याय प्रशासन गवर्नर के नियंत्रण में एक आरक्षित विषय था।
❌ कथन 2 – गलत: स्थानीय स्वशासन एक हस्तांतरित विषय था, जो भारतीय मंत्रियों द्वारा प्रशासित था।
✅ कथन 3 – सही: भू-राजस्व एक आरक्षित विषय था, क्योंकि यह एक महत्वपूर्ण वित्तीय मामला था।
✅ कथन 4 – सही: पुलिस एक आरक्षित विषय था, जो कानून और व्यवस्था से संबंधित था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत सरकार अधिनियम 1919 के तहत द्वैध शासन
| श्रेणी | आरक्षित विषय | हस्तांतरित विषय |
|---|---|---|
| नियंत्रण | गवर्नर व कार्यकारी परिषद (ब्रिटिश अधिकारी) | गवर्नर व भारतीय मंत्री (निर्वाचित) |
| प्रकृति | महत्वपूर्ण/संवेदनशील मामले | कम महत्वपूर्ण/राष्ट्र-निर्माण गतिविधियाँ |
| उदाहरण | कानून और व्यवस्था, पुलिस, न्याय, भू-राजस्व, सिंचाई, वित्त | शिक्षा, जनस्वास्थ्य, स्थानीय स्वशासन, लोक निर्माण, कृषि, आबकारी |
| मंत्रियों की जवाबदेही | कार्यकारी परिषद विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी नहीं | भारतीय मंत्री प्रांतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी |
| उद्देश्य | प्रमुख क्षेत्रों पर ब्रिटिश नियंत्रण बनाए रखना | शासन में भारतीयों की क्रमिक भागीदारी |
- द्वैध शासन का शाब्दिक अर्थ है 'दोहरी सरकार' - मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919) के भाग के रूप में शुरू किया गया
- भारतीय नेताओं ने इस व्यवस्था की आलोचना की क्योंकि इसने अधिकार का विभाजन किया और व्यवहार में अकार्यकारी थी
- भारत सरकार अधिनियम 1935 द्वारा समाप्त किया गया, जिसने प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत की
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को मताधिकार देने की सिफारिश की।
- 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने महिलाओं को विधानमंडल में आरक्षित सीटें प्रदान कीं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
1919 के मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने सीमित निर्वाचन सुधार शुरू किए लेकिन 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को सार्वभौमिक मताधिकार प्रदान नहीं किया। हालांकि, 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने स्पष्ट रूप से प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों दोनों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का प्रावधान किया, जो महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
❌ कथन 1 – गलत: मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधारों ने 21 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं को मताधिकार देने की सिफारिश नहीं की; मताधिकार संपत्ति, आय और शिक्षा योग्यताओं के आधार पर प्रतिबंधित रहा।
✅ कथन 2 – सही: 1935 के भारत सरकार अधिनियम ने महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने के लिए प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में उनके लिए आरक्षित सीटें शुरू कीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संवैधानिक सुधार (1919-1935)
| विशेषता | भारत सरकार अधिनियम, 1919 | भारत सरकार अधिनियम, 1935 |
|---|---|---|
| निर्वाचन सुधार | प्रतिबंधित आधार पर मताधिकार का विस्तार (संपत्ति, आय, शिक्षा); महिलाओं के लिए सार्वभौमिक मताधिकार नहीं | प्रांतीय और केंद्रीय विधानमंडलों में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें |
| प्रांतीय प्रशासन | द्वैध शासन की शुरुआत (हस्तांतरित और आरक्षित विषय) | द्वैध शासन समाप्त; प्रांतीय स्वायत्तता की शुरुआत |
| केंद्रीय विधानमंडल | द्विसदनीय विधानमंडल की स्थापना | संघीय संरचना का प्रस्ताव (कभी लागू नहीं हुआ) |
| विषयों का विभाजन | केंद्रीय और प्रांतीय सूचियाँ | संघीय, प्रांतीय और समवर्ती सूचियाँ |
| सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व | पृथक निर्वाचक मंडल जारी | महिलाओं सहित अधिक समुदायों तक विस्तारित |
| न्यायिक पहलू | - | भारत के संघीय न्यायालय की स्थापना |
भारत सरकार अधिनियम 1935 द्वारा स्थापित संघ में, अवशिष्ट शक्तियाँ किसे दी गई थीं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — गवर्नर जनरल
भारत सरकार अधिनियम 1935 के तहत, अवशिष्ट शक्तियाँ (जो संघीय, प्रांतीय या समवर्ती सूची में शामिल नहीं थीं) गवर्नर जनरल में निहित थीं। उन्हें यह निर्णय लेने का अधिकार था कि ऐसे विषयों पर कौन सा विधानमंडल शक्ति का प्रयोग करेगा। यह 1935 अधिनियम की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी जो वर्तमान संविधान से भिन्न थी, जहाँ अनुच्छेद 248 के तहत अवशिष्ट शक्तियाँ संघ की संसद में निहित हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत सरकार अधिनियम, 1935 - विधायी शक्तियाँ
| विशेषता | भारत सरकार अधिनियम, 1935 | भारत का संविधान (1950) |
|---|---|---|
| विधायी सूचियाँ | तीन सूचियाँ: संघीय, प्रांतीय, समवर्ती | तीन सूचियाँ: संघ, राज्य, समवर्ती |
| अवशिष्ट शक्तियाँ | गवर्नर जनरल में निहित | संघ की संसद में निहित (अनुच्छेद 248) |
| संघीय सूची | 59 विषय (केंद्र) | संघ सूची: प्रारंभ में 97 विषय |
| प्रांतीय सूची | 54 विषय (प्रांत) | राज्य सूची: प्रारंभ में 66 विषय |
| समवर्ती सूची | 36 विषय (दोनों) | समवर्ती सूची: प्रारंभ में 47 विषय |
| संघ की प्रकृति | संघीय प्रणाली प्रस्तावित (पूर्णतः लागू नहीं हुई) | सशक्त केंद्र के साथ अर्ध-संघीय |
भारतीय इतिहास के संदर्भ में, "द्वैध शासन (Dyarchy)" का सिद्धांत किसे संदर्भित करता है -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — प्रांतों को सौंपे गए विषयों का दो श्रेणियों में विभाजन।
द्वैध शासन को भारत सरकार अधिनियम, 1919 द्वारा प्रांतीय स्तर पर दोहरे शासन की व्यवस्था के रूप में लागू किया गया था। इस व्यवस्था के तहत, प्रांतीय विषयों को दो श्रेणियों में बांटा गया: 'आरक्षित' विषय (गवर्नर और उनकी कार्यकारी परिषद द्वारा नियंत्रित) और 'हस्तांतरित' विषय (विधानमंडल के प्रति जवाबदेह भारतीय मंत्रियों द्वारा नियंत्रित)। यह उत्तरदायी सरकार का एक प्रयोग था, हालांकि इसे सीमित सफलता मिली।
मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड प्रस्ताव किससे संबंधित थे -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — संवैधानिक सुधार
मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड प्रस्ताव (1918) ब्रिटिश भारत में संवैधानिक सुधारों के लिए सिफारिशें थीं, जो एडविन मांटेग्यू (भारत के राज्य सचिव) और लॉर्ड चेम्सफोर्ड (भारत के वायसराय) द्वारा प्रस्तुत की गई थीं। इन प्रस्तावों ने भारत सरकार अधिनियम 1919 का आधार बनाया, जिसने प्रांतों में द्वैध शासन प्रणाली (विषयों को हस्तांतरित और आरक्षित श्रेणियों में विभाजित करना) शुरू की, केंद्र में द्विसदनीय विधानमंडल (राज्य परिषद और विधान सभा) स्थापित किया, पहली बार प्रत्यक्ष चुनाव शुरू किए (हालांकि सीमित मताधिकार के साथ), और प्रांतीय तथा केंद्रीय बजट को अलग किया। इन सुधारों का उद्देश्य भारत में उत्तरदायी सरकार की क्रमिक शुरुआत करना था।
भारत सरकार अधिनियम 1919 ने स्पष्ट रूप से परिभाषित किया -
Detailed Explanation:
भारत सरकार अधिनियम 1919 (जिसे मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार भी कहा जाता है) ने विषयों को केंद्रीय सूची और प्रांतीय सूची में विभाजित करके केंद्र और प्रांतीय सरकारों के अधिकार क्षेत्र को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया, जिससे प्रांतों पर केंद्रीय नियंत्रण कम हुआ।
इस अधिनियम ने प्रांतीय स्तर पर द्वैध शासन की शुरुआत की, जिसमें प्रांतीय विषयों को हस्तांतरित विषयों (गवर्नर द्वारा विधान परिषद के प्रति जवाबदेह मंत्रियों के साथ प्रशासित) और आरक्षित विषयों (गवर्नर द्वारा कार्यकारी परिषद के साथ प्रशासित) में विभाजित किया गया।
निम्नलिखित में से कौन सी भारत सरकार अधिनियम, 1919 की प्रमुख विशेषता/विशेषताएं है/हैं?
- प्रांतों की कार्यकारी सरकार में द्वैध शासन की शुरुआत
- मुसलमानों के लिए पृथक सांप्रदायिक निर्वाचक मंडलों की शुरुआत
- केंद्र द्वारा प्रांतों को विधायी अधिकार का हस्तांतरण
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: भारत सरकार अधिनियम, 1919 ने प्रांतों में द्वैध शासन की शुरुआत की, जिसमें विषयों को आरक्षित (गवर्नर और कार्यकारी परिषद द्वारा नियंत्रित) और हस्तांतरित (निर्वाचित भारतीय मंत्रियों द्वारा नियंत्रित) में विभाजित किया गया।
❌ कथन 2 – गलत: मुसलमानों के लिए पृथक सांप्रदायिक निर्वाचक मंडल की शुरुआत मॉर्ले-मिंटो सुधार (भारत सरकार अधिनियम, 1909) द्वारा की गई थी, 1919 के अधिनियम द्वारा नहीं।
✅ कथन 3 – सही: 1919 के अधिनियम ने केंद्र में द्विसदनीयता और अधिक विधायी शक्तियों के साथ विस्तारित प्रांतीय विधानमंडलों के माध्यम से प्रांतीय विधायी हस्तांतरण की शुरुआत की।
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Frequently Asked Questions
Common questions about भारत शासन अधिनियम in UPSC CSE PRELIMS