UPSC CSE Prelims
आधुनिक इतिहास Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for आधुनिक इतिहास in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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1939 में सुभाष चंद्र बोस द्वारा फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन में निम्नलिखित में से किस कारक ने योगदान दिया?
- बोस महात्मा गांधी का विश्वास जीतने में असफल रहे।
- कांग्रेस वामपंथी एकजुट नहीं थे और बोस का समर्थन करने में विफल रहे।
- कम्युनिस्टों ने बोस के प्रयासों में उनका समर्थन नहीं किया।
- एम.एन. के समर्थक रॉय और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं ने बोस का समर्थन करने के बजाय कांग्रेस की एकता को प्राथमिकता दी।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। 1939 में बोस के INC अध्यक्ष के रूप में पुनर्निर्वाचन के बाद, गांधीजी ने अपने उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया की हार को अपनी व्यक्तिगत हार घोषित किया — जो बोस में उनके विश्वास की कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाता था।
कथन 2 — सही। त्रिपुरी संकट के दौरान कांग्रेस वाम गहरे विभाजित था। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी, कम्युनिस्टों और रॉयवादियों ने बोस के पीछे एकजुट मोर्चा प्रस्तुत करने में असफल रहे।
कथन 3 — गलत। यद्यपि कम्युनिस्टों ने बोस के कट्टरपंथी दृष्टिकोण का सक्रिय समर्थन नहीं किया, लेकिन यह फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन का प्रत्यक्ष कारण नहीं था। उनका रुख मुख्य रूप से गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की एकता बनाए रखने के बारे में था।
कथन 4 — सही। M.N. रॉय के समर्थकों और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं ने बोस का समर्थन करने के बजाय कांग्रेस की एकता को प्राथमिकता दी। उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया — जिससे प्रभावी रूप से बोस का समर्थन वापस हो गया।
मुख्य निष्कर्ष: फॉरवर्ड ब्लॉक (1939) बोस के राजनीतिक अलगाव की उपज था — गांधी, कांग्रेस वाम और समाजवादी समूहों सभी ने बोस के साथ वैचारिक एकजुटता से ऊपर संगठनात्मक एकता को प्राथमिकता दी।
1856 में अवध पर कब्जे के तुरंत बाद ब्रिटिश नीति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- तालुकदारों को उनकी संपत्ति से बेदखल कर दिया गया लेकिन उन्हें अपने हथियार और किले बनाए रखने की अनुमति दी गई।
- 1856 में एक सारांश राजस्व समझौता यह मानते हुए किया गया था कि तालुकदार बाहरी थे।
- अंग्रेज तालुकदारों को हटाकर किसानों से सीधे राजस्व लेने में विश्वास करते थे।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। अवध के ताल्लुकदार ब्रिटिश अधिग्रहण से पूर्व निजी सेनाएं और किले रखते थे। 1856 में ब्रिटिश अधिग्रहण के बाद उन्हें केवल संपत्ति से ही नहीं हटाया गया — बल्कि उन्हें निःशस्त्र भी किया गया और उनके किले पूरी तरह नष्ट कर दिए गए।
कथन 2 — सही। अवध में पहला ब्रिटिश भूमि राजस्व बंदोबस्त 1856 का सारांश बंदोबस्त (Summary Settlement) था, जो इस स्पष्ट धारणा पर आधारित था कि ताल्लुकदार "बाहरी लोग" (Interlopers) हैं जिनका भूमि पर कोई स्थायी या वंशानुगत अधिकार नहीं है।
कथन 3 — सही। Summary Settlement का प्राथमिक उद्देश्य ताल्लुकदारों को पूरी तरह बायपास करके भूमि राजस्व का बंदोबस्त सीधे वास्तविक काश्तकारों (किसानों/रैयतों) के साथ करना था। ब्रिटिश अधिकारियों का मानना था कि इससे:
- किसानों का शोषण कम होगा
- राज्य की राजस्व आय बढ़ेगी
मुख्य संबंध: इस नीति के तहत ताल्लुकदारों का अपमान और भूमि-हरण 1857 के विद्रोह के प्रमुख कारणों में से एक था — वे अपनी खोई संपत्ति और सम्मान वापस पाने के लिए विद्रोह में शामिल हुए।
निम्नलिखित दावे पर विचार करें:
समुदाय पर आधारित राजनीतिक गठबंधनों की उत्पत्ति मोंटेग-चेम्सफोर्ड सुधार, 1919 की प्रकृति में निहित थी।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन उपरोक्त दावे का समर्थन/समर्थन करता है?
- सुधारों ने अलग निर्वाचन क्षेत्रों के सिद्धांत को बरकरार रखा और बढ़ाया।
- पृथक निर्वाचन क्षेत्रों को भारतीय राष्ट्रवाद का मुकाबला करना था, जो मजबूत हो रहा था।
- वंचित वर्ग अलग निर्वाचन क्षेत्रों में निहित लाभों के इर्द-गिर्द एकजुट हुए।
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Detailed Explanation:
तीनों कथन इस Assertion का समर्थन करते हैं। मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919) ने पृथक निर्वाचन (Separate Electorates) की व्यवस्था को बनाए रखा और कई अन्य समुदायों तक इसका विस्तार किया, जिससे समुदाय आधारित राजनीति को बढ़ावा मिला।
ब्रिटिश सरकार ने इसे फूट डालो और राज करो की नीति के तहत बढ़ते राष्ट्रवादी आंदोलन को कमजोर करने के लिए इस्तेमाल किया। साथ ही, विभिन्न समुदाय और वंचित वर्ग अपने हितों और प्रतिनिधित्व के लिए संगठित होने लगे।
इसलिए विकल्प D (1, 2 और 3) सही उत्तर है।
| पृथक निर्वाचन (Separate Electorates) ऐसी व्यवस्था थी जिसमें किसी समुदाय के मतदाता केवल उसी समुदाय के उम्मीदवार को वोट दे सकते थे। यह व्यवस्था 1909 में मुसलमानों के लिए शुरू हुई और 1919 में इसका विस्तार किया गया। इससे भारत में साम्प्रदायिक राजनीति को बढ़ावा मिला। |
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हिल्टन-यंग कमीशन (1926) द्वारा निर्धारित कृत्रिम रूप से निर्धारित रुपया-स्टर्लिंग विनिमय दर को ब्रिटिश सरकार द्वारा निम्नलिखित में से किस कारण से अपनाया गया था?
Detailed Explanation:
हिल्टन-यंग आयोग (1926) ने रुपये और स्टर्लिंग के विनिमय दर को कृत्रिम रूप से 1 शिलिंग 6 पेंस प्रति रुपया पर निर्धारित करने की सिफारिश की थी।
ब्रिटिश सरकार ने इसे मुख्य रूप से होम चार्जेज़ (पेंशन, प्रशासनिक खर्च, ऋण भुगतान आदि) के लिए ब्रिटेन को धन भेजने में सुविधा और भारत की वित्तीय साख बनाए रखने के लिए अपनाया।
इसलिए विकल्प A सही उत्तर है।
| होम चार्जेज़ वे भुगतान थे जो औपनिवेशिक भारत को ब्रिटेन को करने पड़ते थे, जैसे प्रशासनिक खर्च, सेना का खर्च, पेंशन और ऋण पर ब्याज। मजबूत रुपये के कारण ब्रिटेन को स्टर्लिंग भेजने के लिए कम रुपये जुटाने पड़ते थे। हालांकि, इससे भारतीय निर्यातकों को नुकसान हुआ क्योंकि भारतीय वस्तुएँ विदेशी बाजार में महंगी हो गईं। |
एका आंदोलन और बारदोली सत्याग्रह के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
बारडोली सत्याग्रह (1928), जिसका नेतृत्व Vallabhbhai Patel ने किया था, ब्रिटिश सरकार द्वारा भूमि राजस्व में 22% वृद्धि के विरोध में चलाया गया था।
एका आंदोलन (1921–22), जिसका नेतृत्व Madari Pasi ने किया, अवध के किसानों का अत्यधिक लगान, अवैध वसूली और जमींदारों के शोषण के खिलाफ आंदोलन था।
इसलिए विकल्प C सही उत्तर है।
| एका आंदोलन अवध क्षेत्र का किसान आंदोलन था, जिसका उद्देश्य किसानों को अत्यधिक किराये और शोषण से राहत दिलाना था। |
| बारडोली सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अहिंसक किसान आंदोलन था। इसकी सफलता के बाद वल्लभभाई पटेल को "सरदार" की उपाधि मिली। |
'राजद्रोह मेरा धर्म बन गया है' यह प्रसिद्ध कथन गांधीजी ने किस समय दिया था?
Detailed Explanation:
"Sedition has become my religion" कथन महात्मा गांधी द्वारा नमक सत्याग्रह (1930) और सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान कहा गया माना जाता है।
गांधीजी का मानना था कि जब सरकार अन्यायपूर्ण हो जाए, तो उसके विरुद्ध अहिंसक विरोध करना नैतिक कर्तव्य बन जाता है। दांडी में नमक कानून तोड़ना इसी विचार का प्रतीक था।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| चंपारण सत्याग्रह | यह नील किसानों की समस्या से जुड़ा आंदोलन था। |
| द्वितीय गोलमेज सम्मेलन | यह लंदन में संवैधानिक चर्चा थी। |
| भारत छोड़ो आंदोलन | यह 1942 में शुरू हुआ, जो काफी बाद की घटना है। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: नमक सत्याग्रह
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वर्ष | 1930 |
| नेतृत्व | महात्मा गांधी |
| यात्रा | साबरमती आश्रम से दांडी |
| उद्देश्य | ब्रिटिश नमक कर का विरोध |
| परिणाम | सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत |
त्वरित तथ्य:
दांडी मार्च ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया और पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा।
निम्नलिखित फलों पर विचार करें:
I. पपीता
II. अनानास
III. अमरूद
उपरोक्त में से कितने को सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में पुर्तगालियों द्वारा भारत में पेश किया गया था?
Detailed Explanation:
16वीं–17वीं शताब्दी में पुर्तगालियों ने अमेरिका से कई फसलें और फल भारत में लाकर परिचित कराए।
-
I. पपीता ✅ – मूल रूप से मध्य अमेरिका का फल है; पुर्तगालियों द्वारा भारत लाया गया।
-
II. अनानास ✅ – दक्षिण अमेरिका का मूल फल; पुर्तगालियों ने भारत में परिचित कराया।
-
III. अमरूद ✅ – मध्य अमेरिका का मूल फल; भारत में पुर्तगालियों द्वारा लाया गया।
-
अतः तीनों फल पुर्तगालियों द्वारा भारत में लाए गए थे, इसलिए सही उत्तर विकल्प C है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय कृषि में पुर्तगालियों का योगदान
पुर्तगालियों द्वारा लाई गई प्रमुख फसलें/फल
-
पपीता
-
अनानास
-
अमरूद
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काजू
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तंबाकू
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मक्का
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टमाटर
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आलू
-
मिर्च
महत्त्व
-
ये फसलें मूल रूप से अमेरिका की थीं।
-
बाद में भारतीय कृषि और भोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गईं।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
भारतीय भोजन पर सबसे बड़ा प्रभाव मिर्च (Chilli) के आगमन का माना जाता है।
निम्नलिखित में से कौन 'आत्म-सम्मान आंदोलन' का संस्थापक था?
Detailed Explanation:
सेल्फ-रिस्पेक्ट मूवमेंट (आत्म-सम्मान आंदोलन) की शुरुआत पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर ने 1925 में की थी।
-
इस आंदोलन का उद्देश्य जाति-भेद, सामाजिक असमानता और ब्राह्मणवादी वर्चस्व का विरोध करना था।
-
पेरियार ने तर्कवाद, महिला अधिकारों और सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया।
-
अतः सही उत्तर विकल्प A है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| डॉ. बी. आर. आंबेडकर | दलित अधिकारों के महान नेता थे, लेकिन सेल्फ-रिस्पेक्ट मूवमेंट के संस्थापक नहीं थे। |
| भास्करराव जाधव | महाराष्ट्र के गैर-ब्राह्मण आंदोलन से जुड़े थे। |
| दिनकरराव जावळकर | समाज सुधारक थे, लेकिन इस आंदोलन के संस्थापक नहीं थे। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: सेल्फ-रिस्पेक्ट मूवमेंट
क्या था यह आंदोलन?
-
1925 में E. V. Ramasamy द्वारा शुरू किया गया।
-
इसका उद्देश्य समानता और आत्म-सम्मान पर आधारित समाज बनाना था।
मुख्य उद्देश्य
-
जातिगत भेदभाव समाप्त करना।
-
अस्पृश्यता का विरोध।
-
महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देना।
-
तर्कवाद और वैज्ञानिक सोच का प्रचार।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
यह आंदोलन आगे चलकर द्रविड़ आंदोलन का आधार बना और तमिलनाडु की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा।
चौरी चौरा घटना के बाद गिरफ्तार किए गए लोगों को किसने कानूनी सुरक्षा प्रदान की?
Detailed Explanation:
चौरी-चौरा घटना (1922) के बाद बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया और कई लोगों को मृत्युदंड दिया गया।
-
मदन मोहन मालवीय और उनके पुत्र कृष्णकांत ने आरोपियों की कानूनी पैरवी की।
-
उनकी दलीलों के कारण कई मृत्युदंड कम कर दिए गए और अनेक लोगों की जान बच गई।
-
इसलिए सही उत्तर विकल्प B है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| सी. आर. दास | वे प्रसिद्ध वकील और नेता थे, लेकिन इस मामले की पैरवी उन्होंने नहीं की। |
| डॉ. सैफुद्दीन किचलू और ख्वाजा हसन निजामी | इनका संबंध इस मुकदमे से नहीं था। |
| एम. ए. जिन्ना | उन्होंने चौरी-चौरा आरोपियों की कानूनी सहायता नहीं की थी। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: चौरी-चौरा घटना (1922)
क्या हुआ था?
-
4 फरवरी 1922 को उत्तर प्रदेश के चौरी-चौरा में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई।
-
भीड़ ने पुलिस थाने में आग लगा दी, जिसमें 22 पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई।
प्रभाव
-
Mahatma Gandhi ने इसे अहिंसा के सिद्धांत के विरुद्ध माना।
-
इसके बाद असहयोग आंदोलन वापस ले लिया गया।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
प्रारंभ में 172 लोगों को मृत्युदंड दिया गया था, लेकिन मदन मोहन मालवीय और कृष्णकांत की कानूनी पैरवी से अधिकांश सजाएँ कम कर दी गईं।
निम्नलिखित में से किस घटना के बाद, गांधीजी, जिन्होंने लगातार अस्पृश्यता का विरोध किया और सभी क्षेत्रों से इसके उन्मूलन की अपील की, ने अपने राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम में 'हरिजनों' के उत्थान को शामिल करने का निर्णय लिया?
Detailed Explanation:
सरल व्याख्या:
-
महात्मा गांधी अस्पृश्यता के कट्टर विरोधी थे और उन्होंने कम्यूनल अवॉर्ड (1932) में दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र का विरोध किया।
-
पूना पैक्ट (1932) के बाद गांधीजी ने हरिजनों के उत्थान को अपने सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा बना लिया।
-
उन्होंने हरिजन सेवक संघ की स्थापना की और 'हरिजन' पत्रिका शुरू की।
-
इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| गांधी-इरविन समझौता (1931) | यह सविनय अवज्ञा आंदोलन से संबंधित था, हरिजन उत्थान से नहीं। |
| भारत छोड़ो आंदोलन के समय गिरफ्तारी (1942) | यह घटना बहुत बाद की है और हरिजन अभियान से संबंधित नहीं है। |
| भारत सरकार अधिनियम, 1935 | यह संवैधानिक सुधारों से जुड़ा था, हरिजन उत्थान कार्यक्रम से नहीं। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: पूना पैक्ट (1932)
पूना पैक्ट क्या था?
-
24 सितंबर 1932 को Mahatma Gandhi और B. R. Ambedkar के बीच समझौता।
-
इसमें अलग निर्वाचन क्षेत्र की जगह संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र में आरक्षित सीटों की व्यवस्था की गई।
महत्त्व
-
गांधीजी का आमरण अनशन समाप्त हुआ।
-
दलितों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वृद्धि हुई।
-
अस्पृश्यता विरोधी अभियान को नई दिशा मिली।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
गांधीजी ने दलितों को "हरिजन" नाम दिया और उनके उत्थान के लिए देशव्यापी अभियान चलाया।
असहयोग कार्यक्रम के संबंध में निम्नलिखित विषयों पर विचार करें:
I. क़ानून-अदालतों और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार
II. कठोर अहिंसा का पालन
III. सार्वजनिक रूप से उपयोग किए बिना उपाधियों और सम्मानों को बनाए रखना
IV. विवादों के निपटारे के लिए पंचायतों की स्थापना
उपरोक्त में से कितने असहयोग कार्यक्रम के भाग थे?
Detailed Explanation:
असहयोग आंदोलन (1920) का उद्देश्य ब्रिटिश शासन के खिलाफ बहिष्कार, अहिंसा और स्वावलंबन के माध्यम से संघर्ष करना था।
-
कथन I सही है: अदालतों और विदेशी कपड़ों का बहिष्कार आंदोलन का प्रमुख हिस्सा था।
-
कथन II सही है: गांधीजी ने कड़ी अहिंसा पर जोर दिया।
-
कथन III गलत है: लोगों से ब्रिटिश उपाधियाँ और सम्मान त्यागने को कहा गया था, उन्हें रखने को नहीं।
-
कथन IV सही है: विवादों के निपटारे के लिए पंचायतों की स्थापना को बढ़ावा दिया गया।
-
अतः I, II और IV सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: असहयोग कार्यक्रम
मुख्य उद्देश्य
-
शांतिपूर्ण तरीके से स्वराज प्राप्त करना।
-
ब्रिटिश संस्थाओं से सहयोग वापस लेना।
मुख्य कार्यक्रम
-
स्कूल, कॉलेज, अदालत और चुनावों का बहिष्कार।
-
विदेशी कपड़ों का बहिष्कार और खादी का प्रचार।
-
उपाधियों और सम्मानों का त्याग।
-
राष्ट्रीय शिक्षा संस्थानों और पंचायतों की स्थापना।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
यह आंदोलन Mahatma Gandhi के नेतृत्व में शुरू हुआ और स्वतंत्रता आंदोलन का पहला बड़ा जनआंदोलन बना।
असहयोग आंदोलन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- कांग्रेस ने सभी वैध और शांतिपूर्ण तरीकों से 'स्वराज' की प्राप्ति को अपना उद्देश्य घोषित किया।
- इसे अगले चरण के लिए सविनय अवज्ञा और करों का भुगतान न करने के साथ चरणों में लागू किया जाना था, केवल अगर 'स्वराज' एक वर्ष के भीतर नहीं आया और सरकार ने दमन का सहारा लिया।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 सही है: कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन (1920) में शांतिपूर्ण और वैध तरीकों से स्वराज प्राप्त करना लक्ष्य घोषित किया गया।
कथन 2 सही है: असहयोग आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से चलाने की योजना थी। यदि स्वराज नहीं मिलता और सरकार दमन करती, तो अगले चरण में सविनय अवज्ञा और कर न देने का कार्यक्रम शुरू किया जा सकता था।
अतः दोनों कथन सही हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: असहयोग आंदोलन (1920–22)
असहयोग आंदोलन क्या था?
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Mahatma Gandhi द्वारा 1920 में शुरू किया गया।
-
इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के विरुद्ध शांतिपूर्ण असहयोग के माध्यम से स्वराज प्राप्त करना था।
मुख्य कार्यक्रम
-
सरकारी स्कूल, कॉलेज, अदालत और चुनावों का बहिष्कार।
-
उपाधियों और सम्मान का त्याग।
-
विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और स्वदेशी का प्रचार।
आंदोलन वापस क्यों लिया गया?
-
1922 के Chauri Chaura Incident के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया।
राजा राम मोहन राय के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. पूर्व की पारंपरिक दार्शनिक प्रणालियों के प्रति उनके मन में बहुत प्यार और सम्मान था।
II. वह चाहते थे कि उनके देशवासी तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सभी पुरुषों और महिलाओं की मानवीय गरिमा और सामाजिक समानता के सिद्धांत को स्वीकार करें।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
राजा राम मोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। उन्होंने भारतीय परंपराओं का सम्मान किया और साथ ही आधुनिक एवं वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया।
-
कथन I सही है: उन्हें वेदांत, उपनिषद और पूर्वी दर्शन से गहरा लगाव था।
-
कथन II सही है: उन्होंने तर्कसंगत सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानव गरिमा और स्त्री-पुरुष समानता का समर्थन किया।
-
उन्होंने सती प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया।
-
अतः दोनों कथन सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. पूर्वी दार्शनिक परंपराओं के प्रति सम्मान | ✅ सही | वेदांत और उपनिषदों से प्रभावित थे, लेकिन सुधार के पक्षधर थे। |
| II. तर्क, विज्ञान और समानता का समर्थन | ✅ सही | आधुनिक शिक्षा, सामाजिक सुधार और महिला अधिकारों के समर्थक थे। |
राजा राम मोहन राय
राजा राम मोहन राय कौन थे?
-
भारतीय पुनर्जागरण के जनक।
-
ब्रह्म सभा (1828) के संस्थापक, जो आगे चलकर ब्रह्म समाज बना।
-
आधुनिक भारत के प्रमुख समाज सुधारकों में से एक।
मुख्य योगदान
-
सती प्रथा के खिलाफ आंदोलन।
-
महिलाओं के अधिकारों का समर्थन।
-
आधुनिक एवं वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा।
-
प्रेस की स्वतंत्रता के समर्थक।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
उनके प्रयासों से 1829 में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया गया, जिसे Lord William Bentinck ने लागू किया।
कॉर्नवालिस द्वारा राजस्व संग्रह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- राजस्व संग्रह के रैयतवारी बंदोबस्त के तहत, किसानों को खराब फसल या प्राकृतिक आपदाओं के मामले में राजस्व भुगतान से छूट दी गई थी।
- बंगाल में स्थायी बंदोबस्त के तहत, यदि जमींदार निश्चित तिथि पर या उससे पहले राज्य को अपना राजस्व देने में विफल रहता है, तो उसे उसकी जमींदारी से हटा दिया जाएगा।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल 2
यह प्रश्न ब्रिटिश काल की भूमि-राजस्व व्यवस्थाओं पर आधारित है।
रैयतवाड़ी व्यवस्था में खराब फसल या प्राकृतिक आपदा होने पर कर से स्वतः छूट नहीं मिलती थी।
स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) में जमींदार को तय समय पर राजस्व जमा करना अनिवार्य था; ऐसा न करने पर उसकी जमींदारी नीलाम की जा सकती थी।
❌ कथन I गलत है: रैयतवाड़ी व्यवस्था में खराब फसल होने पर राजस्व भुगतान से कोई स्वचालित छूट नहीं थी।
✅ कथन II सही है: स्थायी बंदोबस्त में समय पर राजस्व न देने पर जमींदारी नीलाम या छीन ली जा सकती थी।
संक्षिप्त नोट्स: स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी एवं महालवाड़ी व्यवस्था
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1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस ने बंगाल में स्थायी बंदोबस्त लागू किया।
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इसमें राजस्व की राशि स्थायी रूप से निश्चित कर दी गई थी।
-
सनसेट लॉ के अनुसार समय पर राजस्व न देने पर जमींदारी नीलाम हो सकती थी।
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रैयतवाड़ी व्यवस्था का विकास थॉमस मुनरो और अलेक्जेंडर रीड ने किया।
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इसमें सरकार का समझौता सीधे किसानों (रैयतों) से होता था।
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महालवाड़ी व्यवस्था उत्तर-पश्चिमी प्रांतों, पंजाब और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में लागू थी।
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इसमें राजस्व निर्धारण गांव या महाल के आधार पर किया जाता था।
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ब्रिटिश राजस्व व्यवस्थाओं के कारण किसानों पर अधिक कर बोझ पड़ा और ग्रामीण संकट बढ़ा।
निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
| Party | Its Leader |
|---|---|
| 1. भारतीय जनसंघ | डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी |
| 2. सोशलिस्ट पार्टी | सी. राजगोपालाचारी |
| 3. कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी | जगजीवन राम |
| 4. स्वतंत्र पार्टी | आचार्य नरेंद्र देव |
उपरोक्त में से कितने सही सुमेलित हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल दो (Option B)
यह प्रश्न भारत के प्रमुख राजनीतिक दलों और उनके संस्थापकों/नेताओं से संबंधित है।
✅ युग्म 1 सही है: भारतीय जनसंघ – डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की थी।
❌ युग्म 2 गलत है: सोशलिस्ट पार्टी – सी. राजगोपालाचारी
सी. राजगोपालाचारी सोशलिस्ट पार्टी के नहीं, बल्कि स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक थे।
✅ युग्म 3 सही है: कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी – जगजीवन राम
जगजीवन राम ने 1977 में कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी (CFD) की स्थापना की थी।
❌ युग्म 4 गलत है: स्वतंत्र पार्टी – आचार्य नरेंद्र देव
आचार्य नरेंद्र देव समाजवादी आंदोलन के प्रमुख नेता थे। स्वतंत्र पार्टी की स्थापना उन्होंने नहीं की थी।
संक्षिप्त नोट्स: भारत के राजनीतिक दल और नेता
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भारतीय जनसंघ (1951) की स्थापना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी।
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स्वतंत्र पार्टी (1959) की स्थापना C. Rajagopalachari ने की थी।
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आचार्य नरेंद्र देव भारतीय समाजवादी आंदोलन के प्रमुख विचारक थे।
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कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी (1977) की स्थापना Jagjivan Ram ने की थी।
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बाद में कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी का विलय जनता पार्टी में हो गया।
-
भारतीय जनसंघ आगे चलकर 1980 में Bharatiya Janata Party के रूप में विकसित हुआ।
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समाजवादी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में जयप्रकाश नारायण, आचार्य नरेंद्र देव और राम मनोहर लोहिया शामिल थे।