निम्नलिखित में से किस घटना के बाद, गांधीजी, जिन्होंने लगातार अस्पृश्यता का विरोध किया और सभी क्षेत्रों से इसके उन्मूलन की अपील की, ने अपने राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम में 'हरिजनों' के उत्थान को शामिल करने का निर्णय लिया?
Detailed Explanation:
सरल व्याख्या:
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महात्मा गांधी अस्पृश्यता के कट्टर विरोधी थे और उन्होंने कम्यूनल अवॉर्ड (1932) में दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र का विरोध किया।
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पूना पैक्ट (1932) के बाद गांधीजी ने हरिजनों के उत्थान को अपने सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा बना लिया।
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उन्होंने हरिजन सेवक संघ की स्थापना की और 'हरिजन' पत्रिका शुरू की।
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इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| गांधी-इरविन समझौता (1931) | यह सविनय अवज्ञा आंदोलन से संबंधित था, हरिजन उत्थान से नहीं। |
| भारत छोड़ो आंदोलन के समय गिरफ्तारी (1942) | यह घटना बहुत बाद की है और हरिजन अभियान से संबंधित नहीं है। |
| भारत सरकार अधिनियम, 1935 | यह संवैधानिक सुधारों से जुड़ा था, हरिजन उत्थान कार्यक्रम से नहीं। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: पूना पैक्ट (1932)
पूना पैक्ट क्या था?
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24 सितंबर 1932 को Mahatma Gandhi और B. R. Ambedkar के बीच समझौता।
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इसमें अलग निर्वाचन क्षेत्र की जगह संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र में आरक्षित सीटों की व्यवस्था की गई।
महत्त्व
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गांधीजी का आमरण अनशन समाप्त हुआ।
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दलितों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वृद्धि हुई।
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अस्पृश्यता विरोधी अभियान को नई दिशा मिली।
महत्वपूर्ण तथ्य
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गांधीजी ने दलितों को "हरिजन" नाम दिया और उनके उत्थान के लिए देशव्यापी अभियान चलाया।
Question 2 of 3 महात्मा गांधी
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