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महत्वपूर्ण व्यक्तित्व Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: महत्वपूर्ण व्यक्तित्व
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1939 में सुभाष चंद्र बोस द्वारा फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन में निम्नलिखित में से किस कारक ने योगदान दिया?
- बोस महात्मा गांधी का विश्वास जीतने में असफल रहे।
- कांग्रेस वामपंथी एकजुट नहीं थे और बोस का समर्थन करने में विफल रहे।
- कम्युनिस्टों ने बोस के प्रयासों में उनका समर्थन नहीं किया।
- एम.एन. के समर्थक रॉय और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं ने बोस का समर्थन करने के बजाय कांग्रेस की एकता को प्राथमिकता दी।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। 1939 में बोस के INC अध्यक्ष के रूप में पुनर्निर्वाचन के बाद, गांधीजी ने अपने उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया की हार को अपनी व्यक्तिगत हार घोषित किया — जो बोस में उनके विश्वास की कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाता था।
कथन 2 — सही। त्रिपुरी संकट के दौरान कांग्रेस वाम गहरे विभाजित था। कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी, कम्युनिस्टों और रॉयवादियों ने बोस के पीछे एकजुट मोर्चा प्रस्तुत करने में असफल रहे।
कथन 3 — गलत। यद्यपि कम्युनिस्टों ने बोस के कट्टरपंथी दृष्टिकोण का सक्रिय समर्थन नहीं किया, लेकिन यह फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन का प्रत्यक्ष कारण नहीं था। उनका रुख मुख्य रूप से गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की एकता बनाए रखने के बारे में था।
कथन 4 — सही। M.N. रॉय के समर्थकों और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं ने बोस का समर्थन करने के बजाय कांग्रेस की एकता को प्राथमिकता दी। उन्होंने गोविंद बल्लभ पंत प्रस्ताव पर मतदान में भाग नहीं लिया — जिससे प्रभावी रूप से बोस का समर्थन वापस हो गया।
मुख्य निष्कर्ष: फॉरवर्ड ब्लॉक (1939) बोस के राजनीतिक अलगाव की उपज था — गांधी, कांग्रेस वाम और समाजवादी समूहों सभी ने बोस के साथ वैचारिक एकजुटता से ऊपर संगठनात्मक एकता को प्राथमिकता दी।
'राजद्रोह मेरा धर्म बन गया है' यह प्रसिद्ध कथन गांधीजी ने किस समय दिया था?
Detailed Explanation:
"Sedition has become my religion" कथन महात्मा गांधी द्वारा नमक सत्याग्रह (1930) और सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान कहा गया माना जाता है।
गांधीजी का मानना था कि जब सरकार अन्यायपूर्ण हो जाए, तो उसके विरुद्ध अहिंसक विरोध करना नैतिक कर्तव्य बन जाता है। दांडी में नमक कानून तोड़ना इसी विचार का प्रतीक था।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| चंपारण सत्याग्रह | यह नील किसानों की समस्या से जुड़ा आंदोलन था। |
| द्वितीय गोलमेज सम्मेलन | यह लंदन में संवैधानिक चर्चा थी। |
| भारत छोड़ो आंदोलन | यह 1942 में शुरू हुआ, जो काफी बाद की घटना है। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: नमक सत्याग्रह
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| वर्ष | 1930 |
| नेतृत्व | महात्मा गांधी |
| यात्रा | साबरमती आश्रम से दांडी |
| उद्देश्य | ब्रिटिश नमक कर का विरोध |
| परिणाम | सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत |
त्वरित तथ्य:
दांडी मार्च ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन का रूप दिया और पूरी दुनिया का ध्यान भारत की ओर खींचा।
निम्नलिखित में से किस घटना के बाद, गांधीजी, जिन्होंने लगातार अस्पृश्यता का विरोध किया और सभी क्षेत्रों से इसके उन्मूलन की अपील की, ने अपने राजनीतिक और सामाजिक कार्यक्रम में 'हरिजनों' के उत्थान को शामिल करने का निर्णय लिया?
Detailed Explanation:
सरल व्याख्या:
-
महात्मा गांधी अस्पृश्यता के कट्टर विरोधी थे और उन्होंने कम्यूनल अवॉर्ड (1932) में दलितों के लिए अलग निर्वाचन क्षेत्र का विरोध किया।
-
पूना पैक्ट (1932) के बाद गांधीजी ने हरिजनों के उत्थान को अपने सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा बना लिया।
-
उन्होंने हरिजन सेवक संघ की स्थापना की और 'हरिजन' पत्रिका शुरू की।
-
इसलिए सही उत्तर विकल्प A है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| गांधी-इरविन समझौता (1931) | यह सविनय अवज्ञा आंदोलन से संबंधित था, हरिजन उत्थान से नहीं। |
| भारत छोड़ो आंदोलन के समय गिरफ्तारी (1942) | यह घटना बहुत बाद की है और हरिजन अभियान से संबंधित नहीं है। |
| भारत सरकार अधिनियम, 1935 | यह संवैधानिक सुधारों से जुड़ा था, हरिजन उत्थान कार्यक्रम से नहीं। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: पूना पैक्ट (1932)
पूना पैक्ट क्या था?
-
24 सितंबर 1932 को Mahatma Gandhi और B. R. Ambedkar के बीच समझौता।
-
इसमें अलग निर्वाचन क्षेत्र की जगह संयुक्त निर्वाचन क्षेत्र में आरक्षित सीटों की व्यवस्था की गई।
महत्त्व
-
गांधीजी का आमरण अनशन समाप्त हुआ।
-
दलितों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में वृद्धि हुई।
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अस्पृश्यता विरोधी अभियान को नई दिशा मिली।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
गांधीजी ने दलितों को "हरिजन" नाम दिया और उनके उत्थान के लिए देशव्यापी अभियान चलाया।
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राजा राम मोहन राय के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. पूर्व की पारंपरिक दार्शनिक प्रणालियों के प्रति उनके मन में बहुत प्यार और सम्मान था।
II. वह चाहते थे कि उनके देशवासी तर्कसंगत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सभी पुरुषों और महिलाओं की मानवीय गरिमा और सामाजिक समानता के सिद्धांत को स्वीकार करें।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
राजा राम मोहन राय को भारतीय पुनर्जागरण का जनक कहा जाता है। उन्होंने भारतीय परंपराओं का सम्मान किया और साथ ही आधुनिक एवं वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दिया।
-
कथन I सही है: उन्हें वेदांत, उपनिषद और पूर्वी दर्शन से गहरा लगाव था।
-
कथन II सही है: उन्होंने तर्कसंगत सोच, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानव गरिमा और स्त्री-पुरुष समानता का समर्थन किया।
-
उन्होंने सती प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ संघर्ष किया।
-
अतः दोनों कथन सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
कथन-वार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| I. पूर्वी दार्शनिक परंपराओं के प्रति सम्मान | ✅ सही | वेदांत और उपनिषदों से प्रभावित थे, लेकिन सुधार के पक्षधर थे। |
| II. तर्क, विज्ञान और समानता का समर्थन | ✅ सही | आधुनिक शिक्षा, सामाजिक सुधार और महिला अधिकारों के समर्थक थे। |
राजा राम मोहन राय
राजा राम मोहन राय कौन थे?
-
भारतीय पुनर्जागरण के जनक।
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ब्रह्म सभा (1828) के संस्थापक, जो आगे चलकर ब्रह्म समाज बना।
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आधुनिक भारत के प्रमुख समाज सुधारकों में से एक।
मुख्य योगदान
-
सती प्रथा के खिलाफ आंदोलन।
-
महिलाओं के अधिकारों का समर्थन।
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आधुनिक एवं वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा।
-
प्रेस की स्वतंत्रता के समर्थक।
महत्वपूर्ण तथ्य
-
उनके प्रयासों से 1829 में सती प्रथा पर प्रतिबंध लगाया गया, जिसे Lord William Bentinck ने लागू किया।
भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- महात्मा गांधी 'अनुबंधित श्रम' की प्रथा के उन्मूलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- लॉर्ड चेम्सफोर्ड के 'युद्ध सम्मेलन' में, महात्मा गांधी ने विश्व युद्ध के लिए भारतीयों की भर्ती पर प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था।
- भारतीय लोगों द्वारा नमक कानून तोड़े जाने के परिणामस्वरूप, औपनिवेशिक शासकों द्वारा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 3
यह प्रश्न विभिन्न औपनिवेशिक युग के मुद्दों में महात्मा गांधी की भूमिका और भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलनों के प्रति ब्रिटिश प्रतिक्रियाओं के ज्ञान की परीक्षा करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि गांधी ने वास्तव में युद्ध सम्मेलन में भर्ती प्रस्ताव का समर्थन किया था, जबकि कथन 1 और 3 ऐतिहासिक तथ्यों को सटीक रूप से दर्शाते हैं।
✅ कथन 1 – सही: महात्मा गांधी ने अनुबंधित श्रम की शोषणकारी प्रथा के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चलाया, जिसे अंततः 1920 में दक्षिण अफ्रीका और भारत दोनों में श्रमिकों के अधिकारों के लिए उनके निरंतर प्रयासों के बाद समाप्त कर दिया गया।
❌ कथन 2 – गलत: 1918 में लॉर्ड चेम्सफोर्ड के युद्ध सम्मेलन में, गांधी ने वास्तव में ब्रिटिश युद्ध प्रयासों और प्रथम विश्व युद्ध के लिए भारतीयों की भर्ती पर प्रस्ताव का समर्थन किया, यह मानते हुए कि भारतीय वफादारी से राजनीतिक रियायतें और डोमिनियन स्टेटस प्राप्त होगा।
✅ कथन 3 – सही: 12 मार्च 1930 को गांधी द्वारा शुरू किए गए नमक सत्याग्रह और बाद में नमक कानूनों के व्यापक उल्लंघन के बाद, ब्रिटिश सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को अवैध घोषित कर दिया और हजारों कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: गांधी के राजनीतिक आंदोलन और ब्रिटिश प्रतिक्रियाएं
| घटना/आंदोलन | वर्ष | मुख्य तथ्य |
|---|---|---|
| अनुबंधित श्रम प्रथा | 1920 में समाप्त | गांधी ने दक्षिण अफ्रीका के दिनों से इस प्रथा के खिलाफ अभियान चलाया; प्रथा में शोषणकारी अनुबंधों के तहत उपनिवेशों में भेजे गए बंधुआ मजदूर शामिल थे |
| युद्ध सम्मेलन 1918 | अप्रैल 1918 | गांधी ने ब्रिटिश युद्ध प्रयासों का समर्थन किया; मानते थे कि सहयोग से होम रूल मिलेगा; तिलक जैसे राष्ट्रवादियों से आलोचना का सामना किया |
| नमक सत्याग्रह | मार्च-अप्रैल 1930 | दांडी मार्च (12 मार्च-6 अप्रैल); गांधी ने 6 अप्रैल को दांडी में नमक कानून तोड़ा; देशव्यापी सामूहिक सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया |
| कांग्रेस को अवैध घोषित | 1930-31 | नमक सत्याग्रह के बाद; गांधी और नेहरू सहित 60,000 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी; 1931 में गांधी-इरविन समझौते तक कांग्रेस प्रतिबंधित रही |
भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
| व्यक्ति | धारित पद |
|---|---|
| 1. सर तेज बहादुर सप्रू | अध्यक्ष, अखिल भारतीय उदारवादी संघ |
| 2. के.सी. नियोगी | संविधान सभा के सदस्य |
| 3. पी.सी. जोशी | महासचिव, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी |
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
तीनों युग्म सही सुमेलित हैं। सर तेज बहादुर सप्रू एक प्रमुख उदारवादी नेता थे जिन्होंने अखिल भारतीय उदारवादी संघ के अध्यक्ष के रूप में सेवा की। के.सी. नियोगी वास्तव में पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए संविधान सभा के सदस्य थे। पी.सी. जोशी 1935 से 1947 तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम महासचिव थे।
✅ युग्म 1 – सही: सर तेज बहादुर सप्रू अखिल भारतीय उदारवादी संघ के अध्यक्ष और एक प्रतिष्ठित उदारवादी नेता थे।
✅ युग्म 2 – सही: के.सी. नियोगी पश्चिम बंगाल से संविधान सभा के सदस्य थे।
✅ युग्म 3 – सही: पी.सी. जोशी ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम महासचिव (1935-1947) के रूप में सेवा की।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन की प्रमुख विभूतियाँ
| व्यक्ति | प्रमुख भूमिका/पद | महत्व |
|---|---|---|
| सर तेज बहादुर सप्रू (1875-1949) | अध्यक्ष, अखिल भारतीय उदारवादी संघ | प्रख्यात वकील, उदारवादी नेता, विभिन्न गोलमेज सम्मेलनों के सदस्य, उदारवादी संवैधानिक सुधार के पक्षधर |
| के.सी. नियोगी (1897-1973) | सदस्य, संविधान सभा (पश्चिम बंगाल) | नेहरू मंत्रिमंडल में राहत और पुनर्वास मंत्री, विभाजन के बाद शरणार्थी पुनर्वास पर कार्य |
| पी.सी. जोशी (1907-1980) | महासचिव, सीपीआई (1935-1947) | सीपीआई के प्रथम महासचिव, स्वतंत्रता पूर्व के महत्वपूर्ण वर्षों में पार्टी का नेतृत्व, 1947 में बी.टी. रणदिवे द्वारा प्रतिस्थापित |
- अखिल भारतीय उदारवादी संघ: 1918 में उन उदारवादी नेताओं द्वारा गठित जो संवैधानिक तरीकों और ब्रिटिश सुधारों के साथ सहयोग में विश्वास करते थे।
- संविधान सभा: 1946 में भारत के संविधान का निर्माण करने के लिए स्थापित; इसमें विभिन्न प्रांतों और रियासतों का प्रतिनिधित्व करने वाले 299 सदस्य थे।
- भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी: 1925 में स्थापित, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान ट्रेड यूनियन आंदोलनों और किसान संघर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने मैज़िनी, गैरीबाल्डी, शिवाजी और श्रीकृष्ण की जीवनियाँ लिखीं; कुछ समय अमेरिका में रहे, और केंद्रीय विधानसभा के लिए भी चुने गए। वे थे
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — लाला लाजपत राय
लाला लाजपत राय एक प्रमुख राष्ट्रवादी नेता थे जिन्होंने भारतीय युवाओं को देशभक्ति और त्याग के आदर्शों से प्रेरित करने के लिए मैज़िनी, गैरीबाल्डी, शिवाजी और श्रीकृष्ण की जीवनियाँ लिखीं। वे 1914 से 1920 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में रहे, जहाँ उन्होंने न्यूयॉर्क में भारतीय होम रूल लीग ऑफ अमेरिका (1917) की स्थापना की, और बाद में 1923 में स्वराज पार्टी के सदस्य के रूप में केंद्रीय विधान सभा के लिए चुने गए।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लाला लाजपत राय
- उपनाम: 'पंजाब केसरी' (पंजाब का शेर) और उग्रवादी लाल-बाल-पाल त्रिमूर्ति के सदस्य (लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक, बिपिन चंद्र पाल)
- साहित्यिक योगदान: मैज़िनी, गैरीबाल्डी, शिवाजी और श्रीकृष्ण की जीवनियाँ लिखीं; 'यंग इंडिया' (1916) और 'अनहैप्पी इंडिया' (1928) की रचना की
- अमेरिका प्रवास (1914-1920): न्यूयॉर्क में भारतीय होम रूल लीग ऑफ अमेरिका (1917) की स्थापना की; भारत की स्वतंत्रता के लिए अभियान चलाया
- राजनीतिक कैरियर: 1923 में स्वराज पार्टी के सदस्य के रूप में केंद्रीय विधान सभा के लिए चुने गए; साइमन कमीशन का विरोध किया
- शहादत: लाहौर में साइमन कमीशन के विरोध का नेतृत्व किया (1928); लाठीचार्ज में घायल हुए और 17 नवंबर 1928 को मृत्यु हो गई
- विरासत: उनकी मृत्यु ने स्वतंत्रता आंदोलन को गति दी; भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे क्रांतिकारियों को प्रेरित किया
निम्नलिखित में से कौन सी पार्टियाँ डॉ. बी. आर. अम्बेडकर द्वारा स्थापित की गई थीं?
- द पीज़ेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ़ इंडिया
- अखिल भारतीय अनुसूचित जाति महासंघ
- द इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: द पीज़ेंट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ़ इंडिया की स्थापना 1947 में महाराष्ट्र में केशवराव जेधे और अन्य लोगों द्वारा की गई थी, डॉ. बी. आर. अम्बेडकर द्वारा नहीं।
✅ कथन 2 – सही: अखिल भारतीय अनुसूचित जाति महासंघ की स्थापना 1942 में डॉ. अम्बेडकर द्वारा दलित समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने हेतु की गई थी।
✅ कथन 3 – सही: इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की स्थापना 1936 में बॉम्बे में डॉ. अम्बेडकर द्वारा की गई थी और इसने 1937 के चुनाव लड़े।