कॉर्नवालिस द्वारा राजस्व संग्रह के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- राजस्व संग्रह के रैयतवारी बंदोबस्त के तहत, किसानों को खराब फसल या प्राकृतिक आपदाओं के मामले में राजस्व भुगतान से छूट दी गई थी।
- बंगाल में स्थायी बंदोबस्त के तहत, यदि जमींदार निश्चित तिथि पर या उससे पहले राज्य को अपना राजस्व देने में विफल रहता है, तो उसे उसकी जमींदारी से हटा दिया जाएगा।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ केवल 2
यह प्रश्न ब्रिटिश काल की भूमि-राजस्व व्यवस्थाओं पर आधारित है।
रैयतवाड़ी व्यवस्था में खराब फसल या प्राकृतिक आपदा होने पर कर से स्वतः छूट नहीं मिलती थी।
स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) में जमींदार को तय समय पर राजस्व जमा करना अनिवार्य था; ऐसा न करने पर उसकी जमींदारी नीलाम की जा सकती थी।
❌ कथन I गलत है: रैयतवाड़ी व्यवस्था में खराब फसल होने पर राजस्व भुगतान से कोई स्वचालित छूट नहीं थी।
✅ कथन II सही है: स्थायी बंदोबस्त में समय पर राजस्व न देने पर जमींदारी नीलाम या छीन ली जा सकती थी।
संक्षिप्त नोट्स: स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी एवं महालवाड़ी व्यवस्था
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1793 में लॉर्ड कॉर्नवालिस ने बंगाल में स्थायी बंदोबस्त लागू किया।
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इसमें राजस्व की राशि स्थायी रूप से निश्चित कर दी गई थी।
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सनसेट लॉ के अनुसार समय पर राजस्व न देने पर जमींदारी नीलाम हो सकती थी।
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रैयतवाड़ी व्यवस्था का विकास थॉमस मुनरो और अलेक्जेंडर रीड ने किया।
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इसमें सरकार का समझौता सीधे किसानों (रैयतों) से होता था।
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महालवाड़ी व्यवस्था उत्तर-पश्चिमी प्रांतों, पंजाब और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में लागू थी।
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इसमें राजस्व निर्धारण गांव या महाल के आधार पर किया जाता था।
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ब्रिटिश राजस्व व्यवस्थाओं के कारण किसानों पर अधिक कर बोझ पड़ा और ग्रामीण संकट बढ़ा।
Question 1 of 3 स्थायी बंदोबस्त, रैयतवाड़ी एवं महालवाड़ी
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