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क्रांतिकारी राष्ट्रवाद Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: क्रांतिकारी राष्ट्रवाद
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निम्नलिखित स्वतंत्रता सेनानियों पर विचार कीजिए:
- बरिन्द्र कुमार घोष
- जोगेश चन्द्र चटर्जी
- रास बिहारी बोस
उपर्युक्त में से कौन ग़दर पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़े थे?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — केवल 3
दिए गए स्वतंत्रता सेनानियों में से केवल रास बिहारी बोस ग़दर पार्टी से सक्रिय रूप से जुड़े थे। उन्होंने भारत में ग़दर आंदोलन के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और बाद में अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों को जारी रखने के लिए जापान भाग गए।
❌ कथन 1 – गलत: बरिन्द्र कुमार घोष बंगाल में युगांतर क्रांतिकारी समूह और अलीपुर बम केस से जुड़े थे, ग़दर पार्टी से नहीं।
❌ कथन 2 – गलत: जोगेश चन्द्र चटर्जी बंगाल के एक क्रांतिकारी थे लेकिन ग़दर पार्टी के साथ उनका कोई दस्तावेजी संबंध नहीं था।
✅ कथन 3 – सही: रास बिहारी बोस ग़दर आंदोलन में एक प्रमुख व्यक्ति थे, जिन्होंने भारत में क्रांतिकारी गतिविधियों का समन्वय किया और बाद में जापान में एक प्रमुख नेता बने।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ग़दर पार्टी और क्रांतिकारी आंदोलन
| क्रांतिकारी आंदोलन | प्रमुख व्यक्तित्व | क्षेत्र/आधार | मुख्य गतिविधियाँ |
|---|---|---|---|
| ग़दर पार्टी (1913) | लाला हरदयाल, सोहन सिंह भकना, करतार सिंह सराभा, रास बिहारी बोस | अमेरिका, कनाडा (प्रवासी भारतीय) | सशस्त्र विद्रोह के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने का लक्ष्य; ग़दर विद्रोह (1915) |
| युगांतर (1906) | बरिन्द्र कुमार घोष, बाघा जतिन, अरबिंदो घोष | बंगाल | क्रांतिकारी गतिविधियाँ, अलीपुर बम केस (1908) |
| अनुशीलन समिति | प्रमथनाथ मित्र, जोगेश चन्द्र चटर्जी | बंगाल | क्रांतिकारी प्रशिक्षण, सशस्त्र प्रतिरोध |
- रास बिहारी बोस: दिल्ली-लाहौर षड्यंत्र (1912) के मास्टरमाइंड, लॉर्ड हार्डिंग की हत्या का प्रयास; पंजाब और बंगाल में ग़दर आंदोलन का समन्वय; बाद में जापान भाग गए और भारतीय राष्ट्रीय सेना के गठन में मदद की।
- बरिन्द्र कुमार घोष: अरबिंदो घोष के छोटे भाई; युगांतर साप्ताहिक के संस्थापक; अलीपुर बम केस में शामिल; बाद में आध्यात्मिक हो गए।
- जोगेश चन्द्र चटर्जी: अनुशीलन समिति के सदस्य; बंगाल की क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल; ग़दर पार्टी से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं।
औपनिवेशिक भारत के संदर्भ में, शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों को किस रूप में याद किया जाता है
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — भारतीय राष्ट्रीय सेना के अधिकारी
शाहनवाज खान, प्रेम कुमार सहगल और गुरबख्श सिंह ढिल्लों भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) के वरिष्ठ अधिकारी थे, जिसे आजाद हिंद फौज के नाम से भी जाना जाता है, जिसका नेतृत्व नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने किया था। उन्हें 1945-46 के ऐतिहासिक लाल किला परीक्षण (INA परीक्षण) के लिए प्रसिद्ध रूप से याद किया जाता है, जहाँ अंग्रेजों द्वारा उन पर 'सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ने' के आरोप में सैन्य न्यायालय में मुकदमा चलाया गया था। इन परीक्षणों ने पूरे भारत में बड़े पैमाने पर राष्ट्रवादी प्रदर्शनों को जन्म दिया और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण मोड़ बन गया, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भूलाभाई देसाई, तेज बहादुर सप्रू और जवाहरलाल नेहरू जैसे कानूनी विद्वानों वाली एक INA रक्षा समिति का गठन किया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लाल किला परीक्षण और INA
- भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA): 1942 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा दक्षिण पूर्व एशिया में भारतीय युद्ध बंदियों और प्रवासियों से ब्रिटिश शासन से लड़ने के लिए गठित।
- लाल किला परीक्षण (नवंबर 1945 - मई 1946): दिल्ली के लाल किले में INA अधिकारियों का सैन्य न्यायालय। पहले मुकदमे में तीन अधिकारी थे जो विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व करते थे - शाहनवाज खान (मुस्लिम), प्रेम कुमार सहगल (हिंदू), और गुरबख्श सिंह ढिल्लों (सिख)।
- आरोप: सम्राट के विरुद्ध युद्ध छेड़ना, हत्या और हत्या में सहयोग।
- सार्वजनिक प्रतिक्रिया: पूरे भारत में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन, हड़तालें और विरोध; हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों को राष्ट्रवादी उत्साह में एकजुट किया।
- रक्षा समिति: भूलाभाई देसाई के नेतृत्व में; इसमें तेज बहादुर सप्रू, जवाहरलाल नेहरू और कैलाश नाथ काटजू शामिल थे।
- परिणाम: तीनों को आजीवन निर्वासन की सजा सुनाई गई, लेकिन सार्वजनिक दबाव के कारण कमांडर-इन-चीफ ने सजा माफ कर दी। परीक्षणों ने भारत छोड़ने के ब्रिटिश निर्णय को तेज किया।
- विरासत: INA परीक्षणों ने प्रदर्शित किया कि अंग्रेज अब भारतीय सशस्त्र बलों की वफादारी पर भरोसा नहीं कर सकते थे और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ग़दर (ग़दर) था एक
Detailed Explanation:
ग़दर पार्टी भारतीयों की एक क्रांतिकारी संस्था थी जिसका मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को, कैलिफोर्निया में था, जो 1913 में बनी।
लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाखना द्वारा स्थापित, इसका उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त करना था, जिसे मुख्यतः उत्तरी अमेरिका में भारतीय प्रवासियों (सिख, हिंदू, मुस्लिम) का समर्थन प्राप्त था।
✅ विकल्प 1 – सही: ग़दर को सैन फ्रांसिस्को में मुख्यालय वाली क्रांतिकारी संस्था के रूप में सही पहचानता है।
❌ विकल्प 2 – गलत: सिंगापुर मुख्यालय नहीं था; यह सैन फ्रांसिस्को था।
❌ विकल्प 3 – गलत: बर्लिन, बर्लिन समिति जैसे अन्य क्रांतिकारी समूहों से जुड़ा था, ग़दर से नहीं।
❌ विकल्प 4 – गलत: ग़दर साम्यवादी आंदोलन नहीं था, और ताशकंद इसका मुख्यालय नहीं था।
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एनी बेसेंट थीं:
- होम रूल आंदोलन शुरू करने के लिए जिम्मेदार
- थियोसोफिकल सोसायटी की संस्थापक
- एक बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही कथन/कथनों का चयन कीजिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: एनी बेसेंट ने सितंबर 1916 में मद्रास में होम रूल लीग की स्थापना की, जो ब्रिटिश साम्राज्य के भीतर भारत के लिए स्वशासन की मांग करती थी, तिलक की होम रूल लीग (अप्रैल 1916) के साथ।
❌ कथन 2 – गलत: थियोसोफिकल सोसायटी की स्थापना 1875 में न्यूयॉर्क में मैडम एच.पी. ब्लावत्स्की और कर्नल एच.एस. ऑलकॉट द्वारा की गई थी। एनी बेसेंट 1907 में इसकी अध्यक्ष बनीं लेकिन संस्थापक नहीं थीं।
✅ कथन 3 – सही: एनी बेसेंट 1917 में कलकत्ता अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गईं, यह पद संभालने वाली पहली महिला बनीं।