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सामाजिक सुधारक एवं महिला मुद्दे Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित में से कौन 'आत्म-सम्मान आंदोलन' का संस्थापक था?
Detailed Explanation:
सेल्फ-रिस्पेक्ट मूवमेंट (आत्म-सम्मान आंदोलन) की शुरुआत पेरियार ई. वी. रामास्वामी नायकर ने 1925 में की थी।
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इस आंदोलन का उद्देश्य जाति-भेद, सामाजिक असमानता और ब्राह्मणवादी वर्चस्व का विरोध करना था।
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पेरियार ने तर्कवाद, महिला अधिकारों और सामाजिक समानता को बढ़ावा दिया।
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अतः सही उत्तर विकल्प A है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| डॉ. बी. आर. आंबेडकर | दलित अधिकारों के महान नेता थे, लेकिन सेल्फ-रिस्पेक्ट मूवमेंट के संस्थापक नहीं थे। |
| भास्करराव जाधव | महाराष्ट्र के गैर-ब्राह्मण आंदोलन से जुड़े थे। |
| दिनकरराव जावळकर | समाज सुधारक थे, लेकिन इस आंदोलन के संस्थापक नहीं थे। |
📝 संक्षिप्त नोट्स: सेल्फ-रिस्पेक्ट मूवमेंट
क्या था यह आंदोलन?
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1925 में E. V. Ramasamy द्वारा शुरू किया गया।
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इसका उद्देश्य समानता और आत्म-सम्मान पर आधारित समाज बनाना था।
मुख्य उद्देश्य
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जातिगत भेदभाव समाप्त करना।
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अस्पृश्यता का विरोध।
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महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देना।
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तर्कवाद और वैज्ञानिक सोच का प्रचार।
महत्वपूर्ण तथ्य
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यह आंदोलन आगे चलकर द्रविड़ आंदोलन का आधार बना और तमिलनाडु की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा।
निम्नलिखित में से कौन हिंदू फीमेल स्कूल के सचिव के रूप में जुड़े थे, जिसे बाद में बेथ्यून फीमेल स्कूल के नाम से जाना गया?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — ईश्वर चंद्र विद्यासागर
ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने हिंदू फीमेल स्कूल (1849 में स्थापित) के सचिव के रूप में कार्य किया, जिसे बाद में इसके संस्थापक जे.ई.डी. बेथ्यून के सम्मान में बेथ्यून फीमेल स्कूल का नाम दिया गया। विद्यासागर ने बंगाल में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारत में महिला उच्च शिक्षा के लिए इस अग्रणी संस्थान के प्रशासन और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: समाज सुधारक और महिला शिक्षा
| सुधारक | महिला शिक्षा और समाज सुधार में प्रमुख योगदान |
|---|---|
| ईश्वर चंद्र विद्यासागर | • हिंदू फीमेल स्कूल (बाद में बेथ्यून फीमेल स्कूल, 1849) के सचिव • विधवा पुनर्विवाह की वकालत से हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 • बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया और महिलाओं के लिए विद्यालय खोले • कुलीन बहुविवाह और बाल विवाह का विरोध किया |
| एनी बेसेंट | • सेंट्रल हिंदू कॉलेज, बनारस (1898) की स्थापना, बीएचयू की नींव • सेंट्रल हिंदू स्कूल फॉर गर्ल्स, वाराणसी की स्थापना • आईएनसी की पहली महिला अध्यक्ष (1917, कलकत्ता अधिवेशन) • तिलक के साथ ऑल इंडिया होम रूल लीग की स्थापना (1916) |
| देबेंद्रनाथ टैगोर | • तत्त्वबोधिनी सभा (1839) की स्थापना • आदि ब्रह्म समाज का नेतृत्व • ब्रह्म आंदोलन के माध्यम से तर्कवाद और समाज सुधार को बढ़ावा |
| सरोजिनी नायडू | • आईएनसी की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष (1925, कानपुर अधिवेशन) • गांधी द्वारा चुनी गई नमक सत्याग्रह की नेता (1930) • द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में गांधी के साथ • प्लेग महामारी सेवा के लिए कैसर-ए-हिंद पदक से सम्मानित |
भारतीय इतिहास के संदर्भ में, राखमाबाई मामला (1884) किस विषय के इर्द-गिर्द घूमता था?
- महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार
- सहमति की आयु
- दांपत्य अधिकारों की बहाली
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
राखमाबाई मामला (1884) एक ऐतिहासिक मुकदमा था जो बाल विवाह से संबंधित था, जिसमें राखमाबाई ने अपने पति दादाजी भिकाजी के साथ रहने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने दांपत्य अधिकारों की बहाली के लिए मुकदमा दायर किया। इस मामले ने बाल विवाह और सहमति की आयु पर राष्ट्रव्यापी बहस को जन्म दिया, जिसने अंततः सहमति आयु अधिनियम, 1891 को पारित करने में योगदान दिया।
❌ कथन 1 – गलत: यह मामला महिलाओं की शिक्षा के अधिकार के इर्द-गिर्द नहीं था; हालांकि राखमाबाई शिक्षित थीं और बाद में डॉक्टर बनीं, लेकिन कानूनी विवाद उनके वैवाहिक दायित्वों से संबंधित था।
✅ कथन 2 – सही: इस मामले ने बाल विवाह पर महत्वपूर्ण सार्वजनिक चर्चा उत्पन्न की और सीधे तौर पर सहमति आयु अधिनियम, 1891 को पारित करने को प्रभावित किया, जिसने सहमति की आयु को 10 से बढ़ाकर 12 वर्ष कर दिया।
✅ कथन 3 – सही: यह मुकदमा उनके पति द्वारा दांपत्य अधिकारों की बहाली की मांग के लिए शुरू किया गया था, जब राखमाबाई ने 11 वर्ष की आयु में हुए बाल विवाह के बाद उनके साथ रहने से इनकार कर दिया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: राखमाबाई मामला और सामाजिक सुधार
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| वर्ष | 1884-1888 |
| पक्षकार | दादाजी भिकाजी (पति) बनाम राखमाबाई (पत्नी) |
| मुख्य मुद्दा | बाल विवाह में दांपत्य अधिकारों की बहाली |
| विवाह की आयु | राखमाबाई का विवाह 11 वर्ष की आयु में हुआ; वयस्क होने पर सहवास से इनकार किया |
| न्यायालय का निर्णय | प्रारंभ में पति के पक्ष में फैसला; बाद में राखमाबाई को मुआवजा देकर सहवास से बचने की अनुमति दी गई |
| सामाजिक प्रभाव | बाल विवाह, महिलाओं के अधिकार और सहमति पर राष्ट्रीय बहस की शुरुआत |
| विधायी परिणाम | सहमति आयु अधिनियम, 1891 - सहमति की आयु 10 से बढ़ाकर 12 वर्ष की गई |
| राखमाबाई का बाद का जीवन | भारत की पहली प्रैक्टिस करने वाली महिला डॉक्टरों में से एक बनीं; लंदन में चिकित्सा की पढ़ाई की |
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