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भारतीय राष्ट्रवाद का उदय Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: भारतीय राष्ट्रवाद का उदय
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निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- राधाकांत देब: ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन के प्रथम अध्यक्ष
- गजुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी: मद्रास महाजन सभा के संस्थापक
- सुरेंद्रनाथ बनर्जी: इंडियन एसोसिएशन के संस्थापक
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से सही सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 3
✅ कथन 1 – सही: राधाकांत देब वास्तव में ब्रिटिश इंडियन एसोसिएशन के प्रथम अध्यक्ष थे, जिसका गठन अक्टूबर 1851 में कलकत्ता में लैंडहोल्डर्स सोसाइटी और बंगाल ब्रिटिश इंडिया सोसाइटी के विलय से हुआ था।
❌ कथन 2 – गलत: गजुलु लक्ष्मीनरसु चेट्टी ने 1852 में मद्रास नेटिव एसोसिएशन की स्थापना की थी, मद्रास महाजन सभा की नहीं। मद्रास महाजन सभा की स्थापना बाद में मई 1884 में एम. वीरराघवाचारियार, जी. सुब्रमण्यम अय्यर और पी. आनंदचार्लू द्वारा की गई थी।
✅ कथन 3 – सही: सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने आनंदमोहन बोस के साथ मिलकर 1876 में इंडियन एसोसिएशन (इंडियन नेशनल एसोसिएशन) की स्थापना की थी। यह कांग्रेस-पूर्व काल के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रवादी संगठनों में से एक था जिसका उद्देश्य राजनीतिक मुद्दों पर जनमत तैयार करना था।
कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसने ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार और करों की चोरी की वकालत की।
- यह सर्वहारा वर्ग की तानाशाही स्थापित करना चाहती थी।
- इसने अल्पसंख्यकों और उत्पीड़ित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल की वकालत की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (CSP) ने जमींदारी उन्मूलन और समाजवादी पुनर्गठन पर ध्यान केंद्रित किया, नीति के रूप में कर चोरी की वकालत नहीं की।
❌ कथन 2 – गलत: CSP की स्थापना 1934 में लोकतांत्रिक समाजवाद के सिद्धांतों पर हुई थी और इसने स्पष्ट रूप से सर्वहारा वर्ग की तानाशाही को अस्वीकार किया, कांग्रेस के लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर काम किया।
❌ कथन 3 – गलत: CSP ने पृथक निर्वाचन मंडल का विरोध किया और संयुक्त निर्वाचन मंडल की वकालत की, यह मानते हुए कि अल्पसंख्यकों और उत्पीड़ित वर्गों की समस्याओं को आर्थिक और सामाजिक सुधारों के माध्यम से संबोधित किया जाना चाहिए।
महारानी विक्टोरिया की घोषणा (1858) का/के उद्देश्य क्या था/थे?
- भारतीय राज्यों को हड़पने की किसी भी मंशा को अस्वीकार करना
- भारतीय प्रशासन को ब्रिटिश क्राउन के अधीन रखना
- ईस्ट इंडिया कंपनी के भारत के साथ व्यापार को विनियमित करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: 1858 की घोषणा में स्पष्ट रूप से भारतीय रियासतों को हड़पने की किसी भी मंशा को अस्वीकार किया गया, जिससे शासकों को आश्वासन दिया गया कि उनके क्षेत्रों का सम्मान किया जाएगा।
✅ कथन 2 – सही: घोषणा ने भारतीय प्रशासन को ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित किया, वायसराय के माध्यम से प्रत्यक्ष शासन स्थापित किया।
❌ कथन 3 – गलत: ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार को विनियमित करना घोषणा का उद्देश्य नहीं था; 1858 तक कंपनी अपना व्यापार एकाधिकार खो चुकी थी और घोषणा प्रशासनिक हस्तांतरण पर केंद्रित थी, व्यावसायिक विनियमन पर नहीं।
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