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स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for स्वदेशी एवं बहिष्कार आंदोलन with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस घोषित किया गया है।
कथन-II: 1905 में इसी दिन स्वदेशी आंदोलन शुरू किया गया था।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — कथन-I और कथन-II दोनों सही हैं तथा कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या है
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस प्रतिवर्ष 7 अगस्त को हथकरघा बुनकरों को सम्मानित करने और भारत के हथकरघा उद्योग को उजागर करने के लिए मनाया जाता है। यह तिथि विशेष रूप से 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की स्मृति में चुनी गई थी, जिसका उद्देश्य बंगाल के विभाजन के विरोध में घरेलू उत्पादों और उत्पादन प्रक्रियाओं को पुनर्जीवित करना था।
✅ कथन-I – सही: 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस घोषित किया गया है, जिसे पहली बार 2015 में मनाया गया था।
✅ कथन-II – सही: स्वदेशी आंदोलन 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में शुरू किया गया था।
चूंकि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस की तिथि जानबूझकर स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत की स्मृति में चुनी गई थी, इसलिए कथन-II, कथन-I की सही व्याख्या करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वदेशी आंदोलन (1905-1908)
- शुरुआत की तिथि: 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता टाउन हॉल में लॉर्ड कर्जन द्वारा घोषित बंगाल विभाजन के जवाब में
- उद्देश्य: ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार और भारतीय निर्मित उत्पादों (स्वदेशी वस्तुओं) को आर्थिक राष्ट्रवाद के रूप में बढ़ावा देना
- प्रमुख विशेषताएं: विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी उद्योगों (विशेषकर हथकरघा वस्त्र) को बढ़ावा, स्वदेशी स्टोर की स्थापना और जन-भागीदारी
- नेता: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल, अरबिंदो घोष
- विधियां: सार्वजनिक सभाएं, जुलूस, स्वदेशी समितियों का गठन, स्वदेशी या देशी वस्तुओं का उपयोग, और राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना
- प्रभाव: समाज के विभिन्न वर्गों को शामिल करने वाला पहला जन आंदोलन; भविष्य के जन आंदोलनों की नींव रखी और स्वदेशी उद्योगों, विशेषकर हथकरघा को बढ़ावा दिया
- राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: 2015 में भारत सरकार द्वारा स्थापित, 7 अगस्त को हथकरघा बुनकरों के योगदान और स्वदेशी भावना का सम्मान करने के लिए मनाया जाता है
स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- इसने देशी कारीगर शिल्प और उद्योगों के पुनरुद्धार में योगदान दिया।
- स्वदेशी आंदोलन के भाग के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
स्वदेशी आंदोलन (1905-1911) का उद्देश्य विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार करके स्वदेशी उद्योगों और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था। दोनों कथन इस आंदोलन के प्रमुख पहलुओं को सही ढंग से प्रस्तुत करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: स्वदेशी आंदोलन ने देशी कारीगर शिल्प और उद्योगों के पुनरुद्धार को प्रेरित किया, जिसमें हथकरघा बुनाई, रेशम उद्योग और कुटीर उद्योग शामिल थे, तथा नए सूती मिलों और वस्त्र इकाइयों की स्थापना हुई।
✅ कथन 2 – सही: राष्ट्रीय शिक्षा परिषद की स्थापना 1906 में बंगाल में स्वदेशी आंदोलन के भाग के रूप में की गई थी, जिसका उद्देश्य राष्ट्रवादी शिक्षा प्रदान करना और ब्रिटिश नियंत्रण से स्वतंत्र विज्ञान, प्रौद्योगिकी और औद्योगिक शिक्षा को बढ़ावा देना था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वदेशी आंदोलन (1905-1911)
- पृष्ठभूमि: लॉर्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन (1905) के विरोध में शुरू किया गया, जिसका उद्देश्य सांप्रदायिक आधार पर बंगाल को विभाजित करना था।
- आर्थिक पहलू: ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार, स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा, हथकरघा और कुटीर उद्योगों का पुनरुद्धार, स्वदेशी दुकानों और बैंकों की स्थापना।
- शैक्षिक पहल: राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (1906), बंगाल राष्ट्रीय कॉलेज की स्थापना जिसके प्राचार्य अरबिंदो थे, तकनीकी और औद्योगिक शिक्षा को बढ़ावा।
- सांस्कृतिक पुनरुद्धार: भारतीय कला, साहित्य, संगीत को प्रोत्साहन; दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों का उपयोग; राष्ट्रीय त्योहारों का उत्सव।
- प्रमुख नेता: बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल (लाल-बाल-पाल), अरबिंदो घोष, रवींद्रनाथ टैगोर (प्रारंभ में)।
- प्रभाव: राष्ट्रवादी भावना को मजबूत किया, जनसाधारण की राजनीति की नींव रखी, आत्मनिर्भरता और आर्थिक राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।
- सीमाएं: बंगाल से बाहर सीमित जनसमर्थन, किसानों और मजदूरों की महत्वपूर्ण भागीदारी नहीं, 1908 के बाद धीरे-धीरे कमजोर हुआ।
'स्वदेशी' और 'बहिष्कार' को संघर्ष के तरीकों के रूप में पहली बार किस दौरान अपनाया गया -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — बंगाल विभाजन के विरोध में आंदोलन
'स्वदेशी' (देशी वस्तुओं का उपयोग) और 'बहिष्कार' (ब्रिटिश वस्तुओं और संस्थाओं का) को पहली बार राजनीतिक संघर्ष के संगठित तरीकों के रूप में बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन (1905-1911) के दौरान अपनाया गया। जब लॉर्ड कर्जन ने 1905 में हिंदुओं और मुसलमानों को विभाजित करने के लिए बंगाल का विभाजन किया, तो इससे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। सुरेंद्रनाथ बनर्जी, बिपिन चंद्र पाल और लाला लाजपत राय जैसे नेताओं ने लोगों को ब्रिटिश कपड़ों का बहिष्कार करने, देशी उद्योगों को बढ़ावा देने और स्वदेशी उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। इस आंदोलन ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में याचिका से जन-जुटाव की ओर बदलाव को चिह्नित किया। हालांकि पहले के नेताओं ने कभी-कभी देशी वस्तुओं को बढ़ावा दिया था, लेकिन राजनीतिक हथियार के रूप में स्वदेशी और बहिष्कार का व्यवस्थित उपयोग इस आंदोलन से शुरू हुआ। होम रूल आंदोलन (1916), असहयोग आंदोलन (1920) और साइमन कमीशन विरोध (1928) बहुत बाद में आए और इन तरीकों को तब अपनाया जब वे पहले से ही स्थापित हो चुके थे।
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रॉलेट सत्याग्रह के संदर्भ में, निम्नलिखित में कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- रॉलेट एक्ट 'देशद्रोह समिति' की सिफारिशों पर आधारित था
- रॉलेट सत्याग्रह में गांधीजी ने होम रूल लीग का उपयोग करने का प्रयास किया
- साइमन कमीशन के विरुद्ध प्रदर्शन रॉलेट सत्याग्रह के साथ ही हुए
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: रॉलेट एक्ट (1919) न्यायमूर्ति सिडनी रॉलेट की अध्यक्षता वाली देशद्रोह समिति की सिफारिशों पर आधारित था, जिसने क्रांतिकारी गतिविधियों की जांच की और निवारक नजरबंदी शक्तियों की सिफारिश की।
✅ कथन 2 – सही: गांधी ने रॉलेट सत्याग्रह (1919) के लिए समर्थन जुटाने हेतु होम रूल लीग (एनी बेसेंट और तिलक द्वारा संचालित) के संगठनात्मक नेटवर्क का उपयोग करने का प्रयास किया, हालांकि यह मुख्य साधन नहीं था।
❌ कथन 3 – गलत: साइमन कमीशन के विरुद्ध प्रदर्शन 1928 में हुए, जबकि रॉलेट सत्याग्रह 1919 में हुआ – दोनों में लगभग 9 वर्ष का अंतर था, ये एक साथ नहीं हुए।
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