UPSC Prelims 2026 Question Paper
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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के वित्तपोषण में एम1एक्सचेंज की भूमिका के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- M1xchange एमएसएमई को संपार्श्विक आधारित ऋण प्रदान करता है।
- M1xchange एमएसएमई के लिए चालान और विनिमय बिलों में छूट की सुविधा प्रदान करता है।
- M1xchange एमएसएमई के लिए क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। M1xchange वित्तपोषण गारंटी-मुक्त है। फंडिंग खरीदार की साख पर निर्भर करती है, MSME की संपत्ति पर नहीं।
कथन 2 — सही। M1xchange का मुख्य कार्य: MSMEs को उनके इनवॉइस/बिल को डिस्काउंट करके जल्दी भुगतान दिलाना — बैंकों/NBFC की बोली के माध्यम से।
कथन 3 — गलत। M1xchange क्रेडिट रेटिंग एजेंसी नहीं है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियाँ (CRISIL, ICRA) SEBI द्वारा नियंत्रित अलग संस्थाएँ हैं। M1xchange RBI द्वारा नियंत्रित है।
TReDS और M1xchange
TReDS क्या है? Trade Receivables Discounting System — RBI द्वारा नियंत्रित एक इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म जो MSMEs को उनके अदा न किए गए इनवॉइस पर शीघ्र भुगतान दिलाता है।
यह कैसे काम करता है:
- MSME बड़े खरीदार को सामान बेचती है
- MSME इनवॉइस TReDS पर अपलोड करती है
- बैंक/NBFC उस इनवॉइस को डिस्काउंट पर खरीदने की बोली लगाते हैं
- MSME को तुरंत नकद मिलता है
- बाद में खरीदार पूरी राशि वित्तदाता को चुकाता है
मुख्य विशेषताएँ:
- गारंटी-मुक्त वित्तपोषण
- बिना सहारा (Without Recourse) — जोखिम वित्तदाता पर
- बैंक ऋण पर निर्भरता कम
भारत में प्रमुख TReDS प्लेटफॉर्म:
- M1xchange
- RXIL
- Invoicemart
नियामक: RBI
एक ई-कॉमर्स राजस्व मॉडल जहां विक्रेता के पास मूल्य निर्धारण पर नियंत्रण होता है, लेकिन वह उत्पादों को स्टॉक में नहीं रखता है और इसके बजाय ग्राहक के ऑर्डर और शिपमेंट विवरण को तीसरे पक्ष के आपूर्तिकर्ता को स्थानांतरित करता है, जो फिर सीधे ग्राहक को माल भेजता है, उसे कहा जाता है:
Detailed Explanation:
ड्रॉपशिपिंग = विक्रेता कीमत तय करता है और ऑर्डर लेता है, लेकिन कभी सामान स्टॉक नहीं करता। जब कोई खरीदता है, विक्रेता ऑर्डर तीसरे पक्ष के सप्लायर को भेज देता है, जो सीधे ग्राहक को सामान भेजता है।
अन्य विकल्प गलत क्यों:
| विकल्प | वास्तविक अर्थ | यह क्यों नहीं |
|---|---|---|
| एफिलिएट रेवेन्यू | किसी और के उत्पाद को बढ़ावा देकर कमीशन कमाना | कीमत नियंत्रण नहीं |
| ट्रांज़ैक्शन फीस | लेनदेन कराने के लिए शुल्क लेना | उत्पाद बेचने/भेजने से संबंधित नहीं |
| एजेंसी मॉडल | सेवाएँ देकर कमाई (मार्केटिंग, डिज़ाइन) | भौतिक सामान से संबंधित नहीं |
ई-कॉमर्स रेवेन्यू मॉडल
| मॉडल | मुख्य विचार |
|---|---|
| ड्रॉपशिपिंग | कोई इन्वेंटरी नहीं; विक्रेता ऑर्डर सप्लायर को भेजता है; कीमत नियंत्रण विक्रेता के पास |
| एफिलिएट रेवेन्यू | बिक्री बढ़ाने पर कमीशन |
| ट्रांज़ैक्शन फीस | लेनदेन सुगम बनाने के लिए शुल्क |
| एजेंसी मॉडल | सेवाओं के लिए शुल्क, उत्पाद नहीं |
| सब्सक्रिप्शन मॉडल | निरंतर भुगतान (Netflix, SaaS) |
| होलसेल मॉडल | थोक में खरीद, खुदरा में बिक्री (इन्वेंटरी रखती है) |
एक बांड जिसकी आय का उपयोग केवल पर्यावरण और सामाजिक दोनों परियोजनाओं के संयोजन को वित्त या पुनर्वित्त करने के लिए किया जाता है, उसे कहा जाता है:
Detailed Explanation:
सस्टेनेबिलिटी बॉन्ड वह बॉन्ड है जिसकी राशि का उपयोग पर्यावरणीय (Green) और सामाजिक (Social) दोनों प्रकार की परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए किया जाता है।
-
Green Bond केवल पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए होता है।
-
Social Bond केवल सामाजिक परियोजनाओं के लिए होता है।
-
Sustainability Bond दोनों प्रकार की परियोजनाओं को वित्त प्रदान करता है।
-
Sovereign Bond सरकार द्वारा जारी ऋण-पत्र होता है और इसका उपयोग किसी विशेष पर्यावरणीय या सामाजिक उद्देश्य तक सीमित नहीं होता।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (C) Sustainability Bond है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | वास्तविक अर्थ | यह क्यों नहीं? |
|---|---|---|
| Green Bond | केवल पर्यावरणीय परियोजनाओं के लिए धन जुटाता है | सामाजिक परियोजनाएँ शामिल नहीं |
| Social Bond | केवल सामाजिक परियोजनाओं के लिए धन जुटाता है | पर्यावरणीय परियोजनाएँ शामिल नहीं |
| Sustainability Bond | पर्यावरणीय और सामाजिक दोनों परियोजनाओं के लिए | ✅ सही उत्तर |
| Sovereign Bond | सरकार द्वारा जारी ऋण-पत्र | धन का उपयोग किसी विशेष उद्देश्य तक सीमित नहीं |
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निम्नलिखित में से कौन सा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-सूचकांक) के तीन प्रमुख उप-सूचकांकों का सही प्रतिनिधित्व करता है?
Detailed Explanation:
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वर्ष 2021 में Financial Inclusion Index (FI-Index) शुरू किया, जिससे देश में वित्तीय समावेशन के स्तर को मापा जाता है।
FI-Index के तीन प्रमुख उप-सूचकांक हैं:
-
Access (35%) – बैंक शाखाओं, ATM और डिजिटल वित्तीय सुविधाओं की उपलब्धता।
-
Usage (45%) – बचत, ऋण, बीमा, निवेश और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं का वास्तविक उपयोग।
-
Quality (20%) – वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता संरक्षण और सेवाओं की गुणवत्ता।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (C) Access, Usage and Quality है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | क्या दर्शाता है | यह क्यों नहीं? |
|---|---|---|
| Credit access, Insurance depth, Pension coverage | वित्तीय क्षेत्रों से संबंधित | आधिकारिक उप-सूचकांक नहीं |
| Banking access, GDP contribution, Financial literacy | मिश्रित संकेतक | GDP योगदान FI-Index का हिस्सा नहीं |
| Access, Usage, Quality | RBI के आधिकारिक उप-सूचकांक | ✅ सही उत्तर |
| Access, Affordability, Transparency | वित्तीय अवधारणाएँ | RBI द्वारा निर्धारित उप-सूचकांक नहीं |
ताई-अहोम साम्राज्य द्वारा निर्मित और यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में अंकित मोइदाम के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
- उन्होंने सेना के किले के रूप में काम किया।
- वे रॉयल्स और नोबल्स के मनोरंजन केंद्र थे।
- वे रॉयल्स और रईसों की कब्रगाह थे।
- वे रॉयल्स और नोबल्स के युद्ध अभ्यास केंद्र थे।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
मोइडम (Moidam/Maidam) असम के ताई-अहोम साम्राज्य के पारंपरिक समाधि-स्थल (Burial Mounds) थे।
-
कथन 1 गलत है: मोइडम सैन्य किले नहीं थे।
-
कथन 2 गलत है: ये राजाओं और कुलीनों के मनोरंजन केंद्र नहीं थे।
-
कथन 3 सही है: मोइडम अहोम राजाओं, रानियों और कुलीनों के दफन स्थल थे।
-
कथन 4 गलत है: ये सैन्य प्रशिक्षण या युद्ध अभ्यास केंद्र नहीं थे।
-
अतः केवल कथन 3 सही है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
अन्य कथन गलत क्यों हैं?
| कथन | कारण |
|---|---|
| सैन्य किले | मोइडम धार्मिक एवं अंतिम संस्कार से जुड़े स्मारक थे। |
| मनोरंजन केंद्र | इनके ऐसे उपयोग का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। |
| युद्ध अभ्यास केंद्र | ये दफन स्थल थे, सैन्य प्रशिक्षण स्थल नहीं। |
प्रारंभिक बौद्ध प्रतिमा विज्ञान में एक खाली सीट क्या दर्शाती है?
Detailed Explanation:
प्रारंभिक बौद्ध कला में बुद्ध को मानव रूप में नहीं दर्शाया जाता था। उनकी उपस्थिति और जीवन की घटनाओं को विभिन्न प्रतीकों द्वारा दिखाया जाता था।
-
खाली आसन (Empty Seat / Vajrasana) बुद्ध के ध्यान और ज्ञान प्राप्ति का प्रतीक है।
-
धर्मचक्र (Wheel) बुद्ध के प्रथम उपदेश का प्रतीक है।
-
स्तूप (Stupa) महापरिनिर्वाण का प्रतीक है।
-
बिना सवार का घोड़ा (Kanthaka) महाभिनिष्क्रमण (महान त्याग) का प्रतीक है।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (A) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | सही प्रतीक |
|---|---|
| प्रथम उपदेश | धर्मचक्र (Wheel) |
| महापरिनिर्वाण | स्तूप |
| महाभिनिष्क्रमण | बिना सवार का घोड़ा |
| ध्यान | खाली आसन (Vajrasana) ✅ |
निम्नलिखित में से किस मंदिर में नागर शैली का शिखर है?
- मालेगिट्टी शिवालय, बादामी
- हुचिमल्लीगुडी मंदिर, ऐहोल
- दशावतार मंदिर, देवगढ़
- विरुपाक्ष मंदिर, पत्तदकल
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
नागर शैली की पहचान इसकी घुमावदार (Curvilinear) शिखर से होती है और यह मुख्यतः उत्तर भारत में विकसित हुई।
-
कथन 1 गलत है: मालेगिट्टी शिवालय, बादामी द्रविड़ शैली का मंदिर है, इसमें नागर शैली का शिखर नहीं है।
-
कथन 2 सही है: हुचिमल्लिगुड़ी मंदिर, ऐहोल में नागर शैली का घुमावदार शिखर पाया जाता है।
-
कथन 3 सही है: दशावतार मंदिर, देवगढ़ नागर शैली के सबसे प्राचीन उदाहरणों में से एक है।
-
कथन 4 गलत है: विरुपाक्ष मंदिर, पट्टडकल द्रविड़ शैली का मंदिर है और इसमें पिरामिडाकार विमाना है।
-
अतः कथन 2 और 3 सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
नागर एवं द्रविड़ मंदिर वास्तुकला
| विशेषता | नागर शैली | द्रविड़ शैली |
|---|---|---|
| क्षेत्र | उत्तर भारत | दक्षिण भारत |
| शिखर | घुमावदार (Curvilinear) | पिरामिडाकार (Vimana) |
| शीर्ष भाग | आमलक एवं कलश | स्तूपिका |
| उदाहरण | दशावतार मंदिर, खजुराहो मंदिर | बृहदेश्वर मंदिर, विरुपाक्ष मंदिर |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
ऐहोल को "भारतीय मंदिर वास्तुकला की जननी (Cradle of Indian Temple Architecture)" कहा जाता है।
-
पट्टडकल में नागर और द्रविड़ दोनों शैलियों के मंदिर मिलते हैं।
-
दशावतार मंदिर, देवगढ़ गुप्तकालीन नागर शैली का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
याद रखने की ट्रिक:
👉 Nagara = North = Curved Shikhara
👉 Dravida = South = Pyramid Tower
बाघ गुफाओं में हॉलिसलास्या पेंटिंग दर्शाती है:
Detailed Explanation:
मध्य प्रदेश की बाघ गुफाओं में स्थित हल्लिसालस्य (Hallisalasya) चित्रकला एक आनंदमय लोक नृत्य को दर्शाती है।
-
इसमें महिलाओं को गोल घेरे में नृत्य करते हुए और लकड़ी की छोटी छड़ियाँ बजाते हुए दिखाया गया है।
-
यह दृश्य आधुनिक डांडिया या गरबा की याद दिलाता है।
-
साथ में महिला संगीतकार हुडुक्का (ढोल) और मंजीरे/झांझ बजाती हुई दिखाई गई हैं।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (A) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| बुद्ध की ध्यान मुद्रा | यह धार्मिक चित्र नहीं बल्कि लोक जीवन का दृश्य है। |
| कैलाश पर शिव-पार्वती | यह विषय एलोरा/एलिफेंटा जैसी हिंदू गुफाओं से संबंधित है। |
| समुद्र मंथन | हल्लिसालस्य चित्र में यह दृश्य नहीं दर्शाया गया है। |
| आनंदमय लोक नृत्य | चित्र में महिलाओं का समूह नृत्य दर्शाया गया है। ✅ |
संक्षिप्त नोट्स: बाघ गुफाएँ (Revision)
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | धार जिला, मध्य प्रदेश |
| काल | 5वीं–6वीं शताब्दी ई. (गुप्त काल) |
| प्रकार | शैल-कट बौद्ध विहार |
| प्रसिद्ध गुफा | गुफा 4 – रंग महल |
| विशेषता | भित्ति चित्र एवं भित्तिचित्र कला |
| हल्लिसालस्य चित्र | लोक नृत्य का जीवंत दृश्य |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
बाघ गुफाएँ अपनी सुंदर भित्ति चित्रकला के लिए प्रसिद्ध हैं।
-
यहाँ धार्मिक विषयों के साथ-साथ सामाजिक जीवन के दृश्य भी चित्रित किए गए हैं।
-
हल्लिसालस्य चित्र गुप्तकालीन संगीत, नृत्य और समाज की झलक प्रस्तुत करता है।
जैन धर्म में मान्यता प्राप्त जीवन के अस्तित्व के चार मुख्य रूपों में से, निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?
Detailed Explanation:
जैन धर्म के अनुसार आत्मा अपने कर्मों के आधार पर जन्म-मृत्यु के चक्र (संसार) में घूमती रहती है। जैन धर्म में चार मुख्य गतियाँ (Four Gatis) मानी गई हैं:
-
देव गति – देवता/स्वर्गीय प्राणी
-
मनुष्य गति – मानव
-
तिर्यंच गति – पशु, पक्षी, वनस्पति आदि
-
नारकी गति – नरक के प्राणी
-
यक्ष इन चार गतियों में शामिल नहीं हैं।
-
यक्षों को शासन देवता (Attendant Deities) माना जाता है और वे व्यंतर देवों की श्रेणी में आते हैं।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (B) यक्ष है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| देव | चार गतियों में शामिल हैं। |
| मनुष्य | चार गतियों में शामिल हैं। |
| तिर्यंच | चार गतियों में शामिल हैं। |
| यक्ष | चार मुख्य गतियों में शामिल नहीं हैं। ✅ |
जैन धर्म की चार गतियाँ
| गति | अर्थ |
|---|---|
| देव गति | स्वर्गीय प्राणी |
| मनुष्य गति | मानव |
| तिर्यंच गति | पशु, पक्षी, वनस्पति आदि |
| नारकी गति | नरक के प्राणी |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
मोक्ष केवल मनुष्य जन्म से ही प्राप्त किया जा सकता है।
-
आत्मा कर्मों के अनुसार विभिन्न गतियों में जन्म लेती है।
-
जैन धर्म का प्रमुख सिद्धांत अहिंसा है, क्योंकि प्रत्येक जीव में आत्मा होती है।
निम्नलिखित कर्नाटक संगीत रागों में से कौन सा हिंदुस्तानी संगीत में राग बिलावल के समान है?
Detailed Explanation:
भारतीय शास्त्रीय संगीत की दो प्रमुख परंपराएँ हैं—हिंदुस्तानी संगीत और कर्नाटक संगीत। दोनों में कई रागों के समान स्वरक्रम मिलते हैं।
-
धीरा शंकराभरणम् कर्नाटक संगीत का राग है, जो हिंदुस्तानी संगीत के राग बिलावल के समकक्ष माना जाता है।
-
दोनों में सभी शुद्ध स्वर प्रयुक्त होते हैं।
-
यह स्वरक्रम Western Major Scale के समान है।
-
Nat Bhairavi, Kamavardhini और Hanumatodi बिलावल के समकक्ष नहीं हैं।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (D) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | हिंदुस्तानी समकक्ष | कारण |
|---|---|---|
| Nat Bhairavi | आसावरी थाट | बिलावल नहीं |
| Kamavardhini | पूर्वी थाट | अलग स्वरक्रम |
| Hanumatodi | भैरवी थाट | बिलावल से भिन्न |
| Dheera Shankarabharanam | बिलावल थाट | ✅ सही उत्तर |
अमरावती स्तूप और इसकी उभरी हुई मूर्तिकला पर निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह निचली कृष्णा घाटी में स्थित था।
- भारत में यह आकार में साँची स्तूप के बाद दूसरे स्थान पर था।
- अमरावती मूर्तिकला शैली ने बाद के दक्षिण भारतीय मूर्तिकला पर स्थायी प्रभाव डाला और इसके उत्पादों को श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया में ले जाया गया।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
अमरावती स्तूप (महा चैत्य) प्राचीन भारत का एक महत्वपूर्ण बौद्ध स्मारक था।
-
कथन 1 सही है: यह वर्तमान आंध्र प्रदेश के कृष्णा नदी के निचले घाटी क्षेत्र में स्थित था।
-
कथन 2 गलत है: अमरावती स्तूप सांची स्तूप से भी बड़ा था, इसलिए यह सांची के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्तूप नहीं था।
-
कथन 3 सही है: अमरावती कला शैली का प्रभाव दक्षिण भारत, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैला।
-
अतः कथन 1 और 3 सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
कथनवार विश्लेषण
| कथन | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| यह कृष्णा घाटी के निचले भाग में स्थित था। | ✅ सही | आंध्र प्रदेश में कृष्णा नदी के किनारे स्थित था। |
| आकार में यह केवल सांची स्तूप से छोटा था। | ❌ गलत | अमरावती स्तूप सांची स्तूप से बड़ा था। |
| इसकी कला का प्रभाव दक्षिण भारत, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया पर पड़ा। | ✅ सही | व्यापार और सांस्कृतिक संपर्कों के माध्यम से इसका प्रभाव फैला। |
अमरावती स्तूप एवं अमरावती कला शैली
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| स्थान | अमरावती, आंध्र प्रदेश |
| नदी घाटी | कृष्णा नदी की निचली घाटी |
| काल | मुख्यतः सातवाहन काल |
| अन्य नाम | महा चैत्य |
| निर्माण सामग्री | श्वेत चूना पत्थर |
| कला शैली | अमरावती (आंध्र) कला शैली |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
यह अपने सुंदर उत्कीर्णन (Relief Sculptures) के लिए प्रसिद्ध है।
-
यहाँ बुद्ध के जीवन और जातक कथाओं का चित्रण मिलता है।
-
अमरावती कला का प्रभाव बाद की पल्लव, चोल, श्रीलंकाई और दक्षिण-पूर्व एशियाई कला पर पड़ा।
फिल्म 'बूंग' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- फिल्म ने हाल ही में बच्चों और पारिवारिक फिल्म श्रेणी में ब्रिटिश एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन आर्ट्स (बाफ्टा) पुरस्कार जीता है।
- फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है।
- बच्चों और पारिवारिक फिल्म श्रेणी में बाफ्टा पुरस्कार जीतने वाली यह पहली भारतीय फिल्म है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
'बूंग (Boong)' एक मणिपुरी भाषा की फिल्म है जिसने BAFTA Awards में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
-
कथन 1 सही है: Boong ने Best Children's and Family Film श्रेणी में BAFTA पुरस्कार जीता।
-
कथन 2 सही है: इस फिल्म का निर्देशन लक्ष्मीप्रिया देवी ने किया है।
-
कथन 3 सही है: यह इस श्रेणी में BAFTA जीतने वाली पहली भारतीय फिल्म बनी।
-
अतः तीनों कथन सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (A) है।
कर्नाटक के प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर ने इसका प्रतिनिधित्व किया:
Detailed Explanation:
पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर (1910–1992) कर्नाटक के प्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायक थे और उन्हें
-
उन्होंने उस्ताद मंजी खान और उस्ताद भुरजी खान से प्रशिक्षण प्राप्त किया, जो इस घराने के संस्थापक उस्ताद अल्लादिया खान के पुत्र थे।
-
वे दुर्लभ और जटिल रागों की प्रस्तुति के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (D) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| घराना | कारण |
|---|---|
| आगरा घराना | मंसूर इससे संबंधित नहीं थे। |
| ग्वालियर घराना | प्रारंभिक प्रशिक्षण मिला था, लेकिन बाद में जयपुर-अतरौली शैली अपनाई। |
| पटियाला घराना | यह घराना मंसूर से संबंधित नहीं है। |
| जयपुर-अतरौली घराना | मंसूर इसी घराने के प्रमुख गायक थे। ✅ |
जयपुर-अतरौली घराना
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| संस्थापक | उस्ताद अल्लादिया खान |
| संगीत परंपरा | हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत |
| विशेषता | दुर्लभ राग, जटिल तानें और लयकारी |
| प्रमुख गायक | पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर |
| गायन शैली | खुली आवाज़ और गहन राग विस्तार |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
जयपुर-अतरौली घराना हिंदुस्तानी संगीत के प्रमुख घरानों में से एक है।
-
यह घराना विशेष रूप से दुर्लभ रागों के संरक्षण और प्रस्तुति के लिए प्रसिद्ध है।
-
पंडित मल्लिकार्जुन मंसूर ने इस शैली को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
नदियों के प्राचीन और आधुनिक नामों का निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही ढंग से सुमेलित है/हैं?
- वितस्ता : चिनाब
- असिक्नी : झेलम
- परुष्णी : रवि
- यव्यावती : ब्यास
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
ऋग्वेद में वर्णित कई नदियों के प्राचीन नाम आज बदल चुके हैं।
-
युग्म 1 गलत है: वितस्ता = झेलम, न कि चिनाब।
-
युग्म 2 गलत है: असिक्नी = चिनाब, न कि झेलम।
-
युग्म 3 सही है: परुष्णी = रावी।
-
युग्म 4 गलत है: ब्यास का प्राचीन नाम विपाशा था, यव्यावती नहीं।
-
अतः केवल युग्म 3 सही है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
युग्मवार विश्लेषण
| प्राचीन नाम | आधुनिक नाम | स्थिति |
|---|---|---|
| वितस्ता | झेलम | ❌ प्रश्न में गलत मिलान |
| असिक्नी | चिनाब | ❌ प्रश्न में गलत मिलान |
| परुष्णी | रावी | ✅ सही |
| यव्यावती | ब्यास | ❌ गलत (ब्यास = विपाशा) |
ऋग्वैदिक नदियाँ
| प्राचीन नाम | आधुनिक नदी |
|---|---|
| सिंधु | इंडस |
| वितस्ता | झेलम |
| असिक्नी | चिनाब |
| परुष्णी | रावी |
| विपाशा | ब्यास |
| शुतुद्री | सतलुज |
| सरस्वती | घग्घर-हकरा (अनेक विद्वानों के अनुसार) |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
परुष्णी (रावी) नदी के किनारे ऋग्वेद में वर्णित प्रसिद्ध दशराज्ञ युद्ध (Battle of Ten Kings) लड़ा गया था।
-
इस युद्ध में राजा सुदास विजयी हुए थे।
निम्नलिखित में से किस पाठ में क्षेत्र-पत्नी ('क्षेत्र की मालकिन') शब्द की उत्पत्ति हुई है?
Detailed Explanation:
क्षेत्र-पत्नी (Kshetra-patni) का अर्थ है "खेत की स्वामिनी"।
-
अथर्ववेद में क्षेत्र-पत्नी का उल्लेख एक ऐसी देवी के रूप में मिलता है जो उर्वरता, कृषि और समृद्धि से जुड़ी हुई है।
-
ऋग्वेद में क्षेत्रपति (खेत के स्वामी) का उल्लेख मिलता है, लेकिन क्षेत्र-पत्नी का नहीं।
-
अष्टाध्यायी और अर्थशास्त्र बाद के ग्रंथ हैं, इसलिए इस शब्द का मूल स्रोत नहीं हैं।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (B) अथर्ववेद है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| ऋग्वेद | इसमें क्षेत्रपति का उल्लेख है, क्षेत्र-पत्नी का नहीं। |
| अथर्ववेद | क्षेत्र-पत्नी शब्द का मूल स्रोत। ✅ |
| अष्टाध्यायी | पाणिनि का व्याकरण ग्रंथ है। |
| अर्थशास्त्र | राज्य, अर्थव्यवस्था और प्रशासन से संबंधित ग्रंथ है। |
भारत में स्थानीय-मूल्य प्रणाली के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- भारत में स्थान-मूल्य प्रणाली का सबसे पहला अभिलेखीय उपयोग गुजरात की मनकानी प्लेटों में पाया जाता है (595 ई. - 596 ई.)।
- नौवीं शताब्दी में, पूरे भारत में शिलालेखों में स्थान-मूल्य सामान्य हो गए।
- स्थान-मूल्य सातवीं शताब्दी की शुरुआत में दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत शिलालेखों में पाए गए हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। भारत में स्थानमान प्रणाली का सबसे प्राचीन शिलालेखीय प्रमाण मांकणी ताम्रपत्र, गुजरात (AD 595-596) में मिलता है।
कथन 2 — सही। हालांकि स्थानमान/शून्य की अवधारणा पहले से थी (आर्यभट्ट के ग्रंथों में), लेकिन रोज़मर्रा के शिलालेखों में इसे फैलने में समय लगा। यह 9वीं सदी तक ही पूरे भारत में सामान्य हुआ (जैसे ग्वालियर का चतुर्भुज मंदिर शिलालेख, 876 CE)।
कथन 3 — सही। भारत की स्थानमान प्रणाली दक्षिण-पूर्व एशिया में तेज़ी से फैली। कंबोडिया, सुमात्रा, जावा में 7वीं सदी के संस्कृत शिलालेखों में इसके प्रमाण मिले हैं।
स्थानमान प्रणाली और शून्य
| घटना | समय | विवरण |
|---|---|---|
| भारत में सबसे पुराना प्रमाण | AD 595-596 | मांकणी ताम्रपत्र, गुजरात |
| दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रसार | 7वीं सदी | कंबोडिया, सुमात्रा, जावा |
| भारत में सामान्य हुआ | 9वीं सदी | ग्वालियर शिलालेख (876 CE) |
| गणितीय अवधारणा | इससे पहले | आर्यभट्ट के ग्रंथों में |
महत्व:
- भारत को शून्य और दशमलव स्थानमान प्रणाली के आविष्कार का श्रेय जाता है
- यह बाद में अरब जगत और फिर यूरोप तक पहुँची ("हिंदू-अरबी अंक प्रणाली" नाम)
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
मैं. पाली ग्रंथों में सिक्कों का पहला निश्चित संदर्भ मिलता है, उदाहरण के लिए, कहपना, निक्खा, कम्सा, और काकनिका। द्वितीय. पाली ग्रंथों के साहित्यिक साक्ष्य की पुष्टि कई स्थलों से मिले पंच-चिह्नित सिक्कों के पुरातात्विक साक्ष्य से होती है, जिनमें से अधिकांश चांदी के बने होते हैं।
उपरोक्त कथन निम्नलिखित में से किससे संबद्ध हैं?
- शहरी जीवन का उद्भव
- मुद्रा अर्थव्यवस्था में संक्रमण
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
पाली ग्रंथों में
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शहरी जीवन का उदय: सिक्कों ने व्यापार, बाजार और नगरों के विकास को बढ़ावा दिया।
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मुद्रा अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण: वस्तु-विनिमय (Barter) की जगह धीरे-धीरे मुद्रा आधारित लेन-देन शुरू हुआ।
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अतः ये कथन शहरी जीवन के उदय तथा मुद्रा अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण दोनों से संबंधित हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
दोनों विकासों से संबंध
| विकास | सिक्कों का योगदान |
|---|---|
| शहरी जीवन का उदय | व्यापार, बाजार और नगरों के विकास को बढ़ावा मिला। |
| मुद्रा अर्थव्यवस्था | वस्तु-विनिमय की जगह मुद्रा आधारित लेन-देन शुरू हुआ। |
पंच-चिह्नित सिक्के
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| काल | लगभग 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व |
| धातु | मुख्यतः चाँदी |
| प्रकार | भारत के सबसे प्राचीन सिक्के |
| रूप | अनियमित आकार, जिन पर विभिन्न चिह्न अंकित होते थे |
| संबंधित काल | महाजनपद और द्वितीय नगरीकरण |
महत्वपूर्ण तथ्य
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पाली ग्रंथों में सिक्कों का प्रारंभिक साहित्यिक उल्लेख मिलता है।
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पंच-चिह्नित सिक्के भारत की सबसे पुरानी मुद्रा प्रणाली माने जाते हैं।
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इनके उपयोग से व्यापार, कर-व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई।
ऋग्वैदिक काल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. कुओं से सिंचाई ने कृषि को बाढ़ के मैदानों और नदी के किनारे की पट्टियों से दूर वर्तमान पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों में विस्तारित करने की अनुमति दी, जहां भूमिगत जल स्तर सतह के काफी करीब था।
II. कुओं से पानी निकालने के लिए ड्राफ्ट-एनिमल पावर का उपयोग किया गया।
निम्नलिखित में से कौन सी जानकारी उपरोक्त कथनों का समर्थन/समर्थन करती है?
- ऋग्वेद में पानी निकालने के लिए अश्म चक्र (पत्थर की चरखी वाला पहिया) और अहवा (लकड़ी की बाल्टी) के इस्तेमाल का प्रमाण मिलता है।
- ऋग्वेद में परशु/कुलिश (कुल्हाड़ी) और दत्र/श्रेणी (दरांती) जैसे उपकरणों के उपयोग का उल्लेख किया गया है।
- जमीन जोतने और गाड़ियाँ खींचने के लिए ऋग्वेद से भी पहले बैल के उपयोग का इतिहास है।
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Detailed Explanation:
प्रश्न यह पूछता है कि ऋग्वैदिक काल में
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सूचना 1 सही है: ऋग्वेद में अश्म चक्र (पत्थर की चरखी) और अहव (लकड़ी की बाल्टी) का उल्लेख मिलता है, जो कुओं से पानी निकालने की तकनीक को दर्शाता है।
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सूचना 3 सही है: बैलों का उपयोग हल चलाने और गाड़ियाँ खींचने में होता था, इसलिए उनसे कुओं से पानी निकालना भी संभव था।
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सूचना 2 गलत है: कुल्हाड़ी (परशु) और हँसिया (दात्र) कृषि उपकरण हैं, लेकिन सिंचाई या पानी निकालने से सीधे संबंधित नहीं हैं।
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अतः केवल 1 और 3 कथनों का समर्थन करते हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
ऋग्वैदिक कृषि
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मुख्य व्यवसाय | कृषि और पशुपालन |
| सिंचाई स्रोत | कुएँ और नदियाँ |
| जल निकालने के साधन | अश्म चक्र और अहव |
| पशु-शक्ति | बैल |
| कृषि उपकरण | हल, कुल्हाड़ी, हँसिया |
महत्वपूर्ण तथ्य
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कुओं की सिंचाई ने कृषि को नदी तटों से बाहर तक फैलाने में मदद की।
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बैलों का उपयोग खेती, परिवहन और जल निकालने में किया जाता था।
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उत्तर वैदिक काल में कृषि और सिंचाई तकनीकों का और अधिक विकास हुआ।
हड़प्पा शहरों में पुरातात्विक खोजों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. घरों में तकली-चक्रों का प्रचलन तो व्यापक है, परंतु चरखों का अभाव है।
II. स्नातक स्तर की पढ़ाई के साथ पूर्ण वजन और माप तराजू की खोज की गई है।
III. यहां अपेक्षाकृत विशाल आंगनों के आसपास, बड़े हिस्से में पक्की ईंटों से बने घर हैं, जिनमें अपने स्वयं के कुएं, स्नान मंच और बड़े कमरे हैं।
उपरोक्त कथनों से निम्नलिखित में से कौन सा निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
- कथन I से पता चलता है कि कताई घर पर किया जाने वाला एक श्रमसाध्य कार्य था।
- कथन II से पता चलता है कि हड़प्पावासियों के पास कितना वैज्ञानिक ज्ञान था।
- विवरण III एक सामान्य संपत्ति प्रणाली के उद्भव का सुझाव देता है।
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Detailed Explanation:
हड़प्पा सभ्यता के पुरातात्त्विक साक्ष्य उनके समाज, तकनीकी ज्ञान और आर्थिक व्यवस्था के बारे में जानकारी देते हैं।
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अनुमान 1 सही है: बड़ी संख्या में स्पिंडल-व्हॉर्ल (तकली के चक्र) मिलने और चरखे के अभाव से पता चलता है कि सूत कातना घरों में हाथ से किया जाता था, जो मेहनत वाला कार्य था।
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अनुमान 2 सही है: मानकीकृत बाट और माप-स्केल हड़प्पावासियों के उन्नत वैज्ञानिक और गणितीय ज्ञान को दर्शाते हैं।
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अनुमान 3 गलत है: निजी कुएँ, स्नान मंच और बड़े घर निजी संपत्ति का संकेत देते हैं, न कि सामूहिक संपत्ति व्यवस्था का।
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अतः केवल अनुमान 1 और 2 सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (A) है।
हड़प्पा नगरों की विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्पिंडल-व्हॉर्ल | वस्त्र निर्माण और सूत कातने का प्रमाण |
| मानकीकृत बाट | व्यापार और लेन-देन में सुविधा |
| माप-स्केल | सटीक माप और वैज्ञानिक सोच |
| पक्की ईंटों के मकान | उन्नत नगर नियोजन |
| निजी कुएँ और स्नानघर | स्वच्छता और निजी स्वामित्व |
महत्वपूर्ण तथ्य
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हड़प्पा सभ्यता विश्व की सबसे विकसित प्राचीन नगरीय सभ्यताओं में से एक थी।
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इनके बाट-तौल पूरे क्षेत्र में लगभग समान मानकों पर आधारित थे।
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मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धोलावीरा और लोथल उत्कृष्ट नगर नियोजन के उदाहरण हैं।
प्रारंभिक ऐतिहासिक तमिलकम में राजा और उसके राजवंश की निम्नलिखित में से कौन सी जोड़ी सही ढंग से सुमेलित नहीं है?
- सेनगुट्टुवन: चेरा
- उदियानजेरल : चोल
- नेदुंजेलियन: पंड्या
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Detailed Explanation:
प्रश्न में पूछा गया है कि प्रारम्भिक तमिलकम के राजा और उनके वंश का कौन-सा युग्म गलत मिलान है।
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युग्म 1 सही है: सेंगुट्टुवन चेरा वंश के प्रसिद्ध शासक थे।
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युग्म 2 गलत है: उदियनजेरल (उथियन चेरलाथन) चेरा वंश से संबंधित थे, चोल वंश से नहीं।
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युग्म 3 सही है: नेडुंजेलियन पांड्य वंश के प्रसिद्ध शासक थे।
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अतः केवल युग्म 2 गलत है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
युग्म-वार विश्लेषण
| युग्म | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| सेंगुट्टुवन : चेरा | ✅ सही | प्रसिद्ध चेरा शासक, कन्नगी (पट्टिनी) परंपरा से जुड़े। |
| उदियनजेरल : चोल | ❌ गलत | उदियनजेरल चेरा वंश के शासक थे। |
| नेडुंजेलियन : पांड्य | ✅ सही | संगम साहित्य में वर्णित प्रसिद्ध पांड्य राजा। |
संगम काल के प्रमुख वंश
| वंश | प्रमुख शासक |
|---|---|
| चेरा | सेंगुट्टुवन, उदियनजेरल |
| चोल | करिकाल चोल, नलंकिल्ली |
| पांड्य | नेडुंजेलियन, मुदुकुडुमी पेरुवलुथि |
महत्वपूर्ण तथ्य
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संगम काल (लगभग 300 ई.पू.–300 ई.) की जानकारी मुख्यतः संगम साहित्य से मिलती है।
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तमिलकम के तीन प्रमुख वंश थे — चेरा, चोल और पांड्य।
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सेंगुट्टुवन का उल्लेख प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य शिलप्पदिकारम् में मिलता है।
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नेडुंजेलियन तलैयालंगानम के युद्ध में विजय के लिए प्रसिद्ध हैं।
UPSC Prelims 2026 Questions Paper - Subject-wise Question Distribution
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
19 Qs (19%)भारतीय अर्थव्यवस्था
18 Qs (18%)अंतरराष्ट्रीय संबंध
11 Qs (11%)प्राचीन इतिहास
9 Qs (9%)पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
8 Qs (8%)भारतीय राजव्यवस्था
8 Qs (8%)भारतीय कला और संस्कृति
7 Qs (7%)आधुनिक इतिहास
5 Qs (5%)भारत का भूगोल
5 Qs (5%)विश्व भूगोल
4 Qs (4%)नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा एवं अभिरुचि
3 Qs (3%)समसामयिकी
2 Qs (2%)आंतरिक सुरक्षा
1 Qs (1%)UPSC Prelims 2026 Question Paper - FAQs & Analysis
Q1 How many total questions were asked in UPSC Prelims 2026?
Q2 What is the subject-wise question breakdown for UPSC Prelims 2026?
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: 19 questions (19%)
- भारतीय अर्थव्यवस्था: 18 questions (18%)
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: 11 questions (11%)
- प्राचीन इतिहास: 9 questions (9%)
- पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी: 8 questions (8%)
- भारतीय राजव्यवस्था: 8 questions (8%)
- भारतीय कला और संस्कृति: 7 questions (7%)
- आधुनिक इतिहास: 5 questions (5%)
- भारत का भूगोल: 5 questions (5%)
- विश्व भूगोल: 4 questions (4%)
- नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा एवं अभिरुचि: 3 questions (3%)
- समसामयिकी: 2 questions (2%)
- आंतरिक सुरक्षा: 1 questions (1%)