जैन धर्म में मान्यता प्राप्त जीवन के अस्तित्व के चार मुख्य रूपों में से, निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?
Detailed Explanation:
जैन धर्म के अनुसार आत्मा अपने कर्मों के आधार पर जन्म-मृत्यु के चक्र (संसार) में घूमती रहती है। जैन धर्म में चार मुख्य गतियाँ (Four Gatis) मानी गई हैं:
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देव गति – देवता/स्वर्गीय प्राणी
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मनुष्य गति – मानव
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तिर्यंच गति – पशु, पक्षी, वनस्पति आदि
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नारकी गति – नरक के प्राणी
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यक्ष इन चार गतियों में शामिल नहीं हैं।
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यक्षों को शासन देवता (Attendant Deities) माना जाता है और वे व्यंतर देवों की श्रेणी में आते हैं।
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अतः सही उत्तर विकल्प (B) यक्ष है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| देव | चार गतियों में शामिल हैं। |
| मनुष्य | चार गतियों में शामिल हैं। |
| तिर्यंच | चार गतियों में शामिल हैं। |
| यक्ष | चार मुख्य गतियों में शामिल नहीं हैं। ✅ |
जैन धर्म की चार गतियाँ
| गति | अर्थ |
|---|---|
| देव गति | स्वर्गीय प्राणी |
| मनुष्य गति | मानव |
| तिर्यंच गति | पशु, पक्षी, वनस्पति आदि |
| नारकी गति | नरक के प्राणी |
महत्वपूर्ण तथ्य
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मोक्ष केवल मनुष्य जन्म से ही प्राप्त किया जा सकता है।
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आत्मा कर्मों के अनुसार विभिन्न गतियों में जन्म लेती है।
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जैन धर्म का प्रमुख सिद्धांत अहिंसा है, क्योंकि प्रत्येक जीव में आत्मा होती है।
Question 1 of 3 जैन धर्म
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