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संगम साहित्य Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for संगम साहित्य with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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प्रारंभिक ऐतिहासिक तमिलकम में राजा और उसके राजवंश की निम्नलिखित में से कौन सी जोड़ी सही ढंग से सुमेलित नहीं है?
- सेनगुट्टुवन: चेरा
- उदियानजेरल : चोल
- नेदुंजेलियन: पंड्या
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
प्रश्न में पूछा गया है कि प्रारम्भिक तमिलकम के राजा और उनके वंश का कौन-सा युग्म गलत मिलान है।
-
युग्म 1 सही है: सेंगुट्टुवन चेरा वंश के प्रसिद्ध शासक थे।
-
युग्म 2 गलत है: उदियनजेरल (उथियन चेरलाथन) चेरा वंश से संबंधित थे, चोल वंश से नहीं।
-
युग्म 3 सही है: नेडुंजेलियन पांड्य वंश के प्रसिद्ध शासक थे।
-
अतः केवल युग्म 2 गलत है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
युग्म-वार विश्लेषण
| युग्म | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| सेंगुट्टुवन : चेरा | ✅ सही | प्रसिद्ध चेरा शासक, कन्नगी (पट्टिनी) परंपरा से जुड़े। |
| उदियनजेरल : चोल | ❌ गलत | उदियनजेरल चेरा वंश के शासक थे। |
| नेडुंजेलियन : पांड्य | ✅ सही | संगम साहित्य में वर्णित प्रसिद्ध पांड्य राजा। |
संगम काल के प्रमुख वंश
| वंश | प्रमुख शासक |
|---|---|
| चेरा | सेंगुट्टुवन, उदियनजेरल |
| चोल | करिकाल चोल, नलंकिल्ली |
| पांड्य | नेडुंजेलियन, मुदुकुडुमी पेरुवलुथि |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
संगम काल (लगभग 300 ई.पू.–300 ई.) की जानकारी मुख्यतः संगम साहित्य से मिलती है।
-
तमिलकम के तीन प्रमुख वंश थे — चेरा, चोल और पांड्य।
-
सेंगुट्टुवन का उल्लेख प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य शिलप्पदिकारम् में मिलता है।
-
नेडुंजेलियन तलैयालंगानम के युद्ध में विजय के लिए प्रसिद्ध हैं।
निम्नलिखित में से कौन सा संगम कविताओं में उल्लिखित 'वट्टकिरुतल' की प्रथा की व्याख्या करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — युद्ध में पराजित राजा द्वारा भूखे रहकर आत्महत्या करने की अनुष्ठानिक प्रथा
'वट्टकिरुतल' (जिसे 'वटक्किरुथल' भी लिखा जाता है) संगम साहित्य में उल्लिखित एक अनुष्ठानिक प्रथा थी जिसमें पराजित राजा अपने सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए मृत्यु तक उपवास करता था। यह प्रथा प्राचीन तमिल समाज की योद्धा नैतिकता को दर्शाती थी, जहां सम्मान के साथ मृत्यु को पराजय और बंदी बनाए जाने के अपमान से बेहतर माना जाता था। यह शब्द शाब्दिक रूप से 'उत्तर की ओर मुख करके बैठना' का अर्थ रखता है और इसमें राजा मृत्यु तक भोजन और पानी से परहेज करता था, जो सम्मान की संहिता के प्रति उसकी परम प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संगम साहित्य और समाज
- संगम काल: लगभग 300 ईसा पूर्व से 300 ईस्वी के बीच रचित प्राचीन तमिल साहित्य को संदर्भित करता है, जिसका नाम तमिल कवियों की पौराणिक 'संगम' (सभा) के नाम पर रखा गया है।
- योद्धा संस्कृति: संगम कविताएं, विशेष रूप से 'पुरनानूरु' (पट्टुप्पट्टु संग्रहों में से एक) में, युद्ध, वीरता और तमिल राजाओं और योद्धाओं के बीच सम्मान की संहिता का व्यापक वर्णन है।
- वट्टकिरुतल: उपवास द्वारा अनुष्ठानिक आत्महत्या, जो पराजित राजाओं या योद्धाओं द्वारा अपमान से बचने के लिए की जाती थी; उत्तर की ओर मुख करके बैठना मृत्यु की दिशा माना जाता था।
- सामाजिक मूल्य: सम्मान, साहस और आत्म-सम्मान सर्वोपरि थे; शत्रुओं द्वारा बंदी बनाया जाना या समर्पण को मृत्यु से भी बदतर माना जाता था।
- अन्य संगम प्रथाएं: संगम ग्रंथों में 'सती' (हालांकि कम सामान्य), वीर पत्थर (नाडु काल), और योद्धाओं के लिए विस्तृत अंत्येष्टि संस्कार जैसी विभिन्न प्रथाओं का उल्लेख है।
प्राचीन दक्षिण भारत में संगम साहित्य के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — वर्ण का सामाजिक वर्गीकरण संगम कवियों को ज्ञात था।
प्राचीन दक्षिण भारत के संगम साहित्य (लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी) में वर्ण व्यवस्था के संदर्भ मिलते हैं, जो यह दर्शाता है कि संगम कवि इस सामाजिक वर्गीकरण से परिचित थे। ये ग्रंथ उस काल की सामाजिक संरचनाओं, जिसमें सामाजिक स्तरीकरण भी शामिल है, के बारे में मूल्यवान जानकारी प्रदान करते हैं।
❌ विकल्प 1 – गलत: संगम कविताओं में भौतिक संस्कृति के व्यापक संदर्भ हैं, जिनमें व्यापार, कृषि, शहरी जीवन, शिल्प और दैनिक वस्तुएं शामिल हैं।
✅ विकल्प 2 – सही: वर्ण व्यवस्था संगम कवियों को ज्ञात थी और उनके कार्यों में इसका संदर्भ मिलता है, यद्यपि तमिल समाज का अपना विशिष्ट सामाजिक संगठन था।
❌ विकल्प 3 – गलत: संगम साहित्य में योद्धा नैतिकता, वीरता, साहस और सैन्य कौशल का बार-बार महिमामंडन किया गया है, विशेष रूप से पुरम (बाहरी) कविताओं में।
❌ विकल्प 4 – गलत: संगम साहित्य में अलौकिक और जादुई शक्तियों के संदर्भ सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं के भाग के रूप में शामिल हैं, न कि स्पष्ट रूप से अतार्किक के रूप में वर्णित।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संगम साहित्य
- काल: लगभग तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी, जो तमिल साहित्य के शास्त्रीय काल को दर्शाता है।
- संग्रह: आठ संकलन (एट्टुथोकई) और दस गीत (पट्टुपट्टु) शामिल हैं, जिनमें अनेक कवियों की 2,000 से अधिक कविताएं हैं।
- दो मुख्य श्रेणियां: अकम (आंतरिक/प्रेम कविता) जो व्यक्तिगत और रोमांटिक विषयों से संबंधित है, और पुरम (बाहरी/वीर कविता) जो युद्ध, वीरता और सार्वजनिक जीवन से संबंधित है।
- सामाजिक संरचना: स्वदेशी तमिल सामाजिक विभाजनों के साथ वर्ण व्यवस्था के संदर्भ; विभिन्न व्यावसायिक समूहों और सामाजिक वर्गों का उल्लेख।
- भौतिक संस्कृति: व्यापार (अंतर्देशीय और विदेशी दोनों), कृषि, शहरी केंद्रों, शिल्प, आभूषणों और दैनिक जीवन का समृद्ध विवरण।
- योद्धा नैतिकता: मार्शल वीरता का व्यापक महिमामंडन, योद्धाओं के लिए आचार संहिता, और युद्ध में वीर मृत्यु की अवधारणा।
- धार्मिक संदर्भ: विभिन्न देवताओं, अनुष्ठानों और अलौकिक तत्वों का उल्लेख जो प्राचीन तमिल समाज के सांस्कृतिक ढांचे में एकीकृत थे।
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