निम्नलिखित में से कौन सा संगम कविताओं में उल्लिखित 'वट्टकिरुतल' की प्रथा की व्याख्या करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — युद्ध में पराजित राजा द्वारा भूखे रहकर आत्महत्या करने की अनुष्ठानिक प्रथा
'वट्टकिरुतल' (जिसे 'वटक्किरुथल' भी लिखा जाता है) संगम साहित्य में उल्लिखित एक अनुष्ठानिक प्रथा थी जिसमें पराजित राजा अपने सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए मृत्यु तक उपवास करता था। यह प्रथा प्राचीन तमिल समाज की योद्धा नैतिकता को दर्शाती थी, जहां सम्मान के साथ मृत्यु को पराजय और बंदी बनाए जाने के अपमान से बेहतर माना जाता था। यह शब्द शाब्दिक रूप से 'उत्तर की ओर मुख करके बैठना' का अर्थ रखता है और इसमें राजा मृत्यु तक भोजन और पानी से परहेज करता था, जो सम्मान की संहिता के प्रति उसकी परम प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: संगम साहित्य और समाज
- संगम काल: लगभग 300 ईसा पूर्व से 300 ईस्वी के बीच रचित प्राचीन तमिल साहित्य को संदर्भित करता है, जिसका नाम तमिल कवियों की पौराणिक 'संगम' (सभा) के नाम पर रखा गया है।
- योद्धा संस्कृति: संगम कविताएं, विशेष रूप से 'पुरनानूरु' (पट्टुप्पट्टु संग्रहों में से एक) में, युद्ध, वीरता और तमिल राजाओं और योद्धाओं के बीच सम्मान की संहिता का व्यापक वर्णन है।
- वट्टकिरुतल: उपवास द्वारा अनुष्ठानिक आत्महत्या, जो पराजित राजाओं या योद्धाओं द्वारा अपमान से बचने के लिए की जाती थी; उत्तर की ओर मुख करके बैठना मृत्यु की दिशा माना जाता था।
- सामाजिक मूल्य: सम्मान, साहस और आत्म-सम्मान सर्वोपरि थे; शत्रुओं द्वारा बंदी बनाया जाना या समर्पण को मृत्यु से भी बदतर माना जाता था।
- अन्य संगम प्रथाएं: संगम ग्रंथों में 'सती' (हालांकि कम सामान्य), वीर पत्थर (नाडु काल), और योद्धाओं के लिए विस्तृत अंत्येष्टि संस्कार जैसी विभिन्न प्रथाओं का उल्लेख है।
Question 2 of 3 संगम साहित्य
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