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हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित में से कौन सा प्राचीन नगर बांधों की एक श्रृंखला बनाकर और जल को जुड़े हुए जलाशयों में प्रवाहित करके जल संचयन और प्रबंधन की अपनी विस्तृत प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — धोलावीरा
गुजरात में स्थित धोलावीरा, पाँच सबसे बड़े हड़प्पा स्थलों में से एक है और अपनी असाधारण रूप से परिष्कृत जल संचयन और प्रबंधन प्रणाली के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इस नगर ने वर्षा जल को संचित और संग्रहीत करने के लिए बांधों, जलाशयों (कुल 16), नहरों और परस्पर जुड़े जल भंडारण संरचनाओं की एक श्रृंखला का निर्माण किया, जो इसे सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों में अद्वितीय बनाता है। यह विस्तृत जलीय अभियांत्रिकी लगभग 4500 वर्ष पुरानी उन्नत नगर नियोजन और जल संरक्षण तकनीकों को प्रदर्शित करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: प्रमुख हड़प्पा स्थल और उनकी विशिष्ट विशेषताएँ
| स्थल | स्थान | विशिष्ट विशेषताएँ |
|---|---|---|
| धोलावीरा | गुजरात (खादिर द्वीप, कच्छ) | • 16 जलाशयों के साथ विस्तृत जल संचयन प्रणाली • तीन-भागीय नगर विभाजन (दुर्ग, मध्य नगर, निचला नगर) • बड़ा स्टेडियम/सार्वजनिक सभा क्षेत्र • हड़प्पा लिपि के साथ सबसे प्राचीन ज्ञात साइनबोर्ड • अद्वितीय बांध और नहर प्रणाली |
| कालीबंगन | राजस्थान (घग्गर नदी) | • जुते हुए कृषि क्षेत्र का पहला साक्ष्य • अनुष्ठानिक प्रथाओं को दर्शाने वाली अग्निवेदियाँ • मिट्टी की ईंटों की स्थापत्य कला • पूर्व-हड़प्पा और हड़प्पा चरण |
| राखीगढ़ी | हरियाणा | • भारत में सबसे बड़ा हड़प्पा स्थल • उन्नत आभूषण निर्माण का साक्ष्य • बहु-कक्षीय घर और नियोजित बस्ती • आनुवंशिक निरंतरता दर्शाने वाले कंकाल |
| रोपड़ (रूपनगर) | पंजाब (सतलुज नदी) | • स्वतंत्रता के बाद उत्खनित पहला हड़प्पा स्थल (1953) • हड़प्पा और बाद की संस्कृतियों का अतिव्यापन • मिट्टी के बर्तनों और आभूषणों के साथ दफनाने की प्रथाएँ • नदी आधारित बस्ती पैटर्न |
| लोथल | गुजरात | • गोदीबाड़ा और समुद्री व्यापार केंद्र • चावल की खेती का साक्ष्य • मनका निर्माण कारखाना • अग्निवेदियाँ |
| हड़प्पा | पाकिस्तान (पंजाब) | • खोजा जाने वाला पहला स्थल (1921) • अन्नागार और किलेबंदी • विभिन्न दफन प्रकारों के साथ कब्रिस्तान R-37 • पत्थर की मूर्तियाँ और मुहरें |
निम्नलिखित में से कौन सी हड़प्पा स्थल नहीं है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — सोहगौरा
सोहगौरा एक हड़प्पा स्थल नहीं है; यह उत्तर प्रदेश में स्थित है और ब्राह्मी लिपि में प्राकृत भाषा में लिखे गए ताम्र-पत्र अभिलेख के लिए प्रसिद्ध है, जो मौर्य काल का है। अन्य तीन स्थल—चन्हूदड़ो और कोट दीजी (सिंध, पाकिस्तान में) और देसलपुर (गुजरात, भारत में)—सभी प्रामाणिक हड़प्पा स्थल हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: हड़प्पा स्थल
| स्थल | स्थान | प्रमुख विशेषताएँ |
|---|---|---|
| चन्हूदड़ो | सिंध, पाकिस्तान | मनका-निर्माण, खिलौना गाड़ियाँ, कुत्तों के पैरों के निशान; कोई दुर्ग नहीं मिला |
| कोट दीजी | सिंध, पाकिस्तान | पूर्व-हड़प्पा और हड़प्पा चरण; किलेबंदी की दीवार |
| देसलपुर | गुजरात, भारत | तटीय हड़प्पा स्थल; व्यापार के साक्ष्य |
| सोहगौरा | उत्तर प्रदेश, भारत | ब्राह्मी लिपि में मौर्य ताम्र-पत्र अभिलेख; हड़प्पा स्थल नहीं है |
ऋग्वैदिक आर्यों की संस्कृति और सिंधु घाटी के लोगों के बीच अंतर के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- ऋग्वैदिक आर्य युद्ध में कवच और हेलमेट का उपयोग करते थे जबकि सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों ने इनके उपयोग का कोई साक्ष्य नहीं छोड़ा।
- ऋग्वैदिक आर्य सोना, चाँदी और ताँबे को जानते थे जबकि सिंधु घाटी के लोग केवल ताँबा और लोहे को जानते थे।
- ऋग्वैदिक आर्यों ने घोड़े को पालतू बनाया था जबकि सिंधु घाटी के लोगों के इस जानवर के बारे में जानकार होने का कोई साक्ष्य नहीं है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 1 और 3
यह प्रश्न ऋग्वैदिक आर्य संस्कृति और सिंधु घाटी सभ्यता की तुलनात्मक समझ का परीक्षण करता है। कथन 1 और कथन 3 सही हैं, जबकि कथन 2 में धातुकर्म ज्ञान के संबंध में तथ्यात्मक त्रुटि है।
✅ कथन 1 – सही: ऋग्वैदिक आर्य 'वर्मन' (कवच) और हेलमेट जैसे सुरक्षात्मक युद्ध उपकरणों का उपयोग करते थे, जबकि सिंधु घाटी सभ्यता, जो मुख्य रूप से एक शांतिपूर्ण शहरी समाज थी, ने ऐसे सैन्य उपकरणों के पुरातात्विक साक्ष्य नहीं दिए हैं।
❌ कथन 2 – गलत: सिंधु घाटी के लोग कांस्य युग की सभ्यता के भाग थे और सोना, चाँदी, ताँबा और कांस्य (लोहा नहीं) जानते थे। ऋग्वैदिक आर्य भी सोना, चाँदी और ताँबा जानते थे लेकिन प्रारंभ में लोहा नहीं। यह कथन गलत तरीके से दावा करता है कि सिंधु घाटी के लोग केवल ताँबा और लोहा जानते थे, जो दोनों ही मामलों में तथ्यात्मक रूप से गलत है।
✅ कथन 3 – सही: ऋग्वैदिक आर्य संस्कृति में घोड़ा केंद्रीय था और ऋग्वेद में इसका व्यापक उल्लेख है, जबकि सिंधु घाटी सभ्यता में घोड़े के पालतूकरण या जागरूकता का कोई स्पष्ट, व्यापक साक्ष्य नहीं है।
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