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मौर्य प्रशासन Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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अशोक के शिलालेखों से पता चलता है कि 'प्रदेशिका', 'राजुका' और 'युक्ता' महत्वपूर्ण अधिकारी थे
Detailed Explanation:
ये तीन अधिकारी अशोक के शासनकाल में जिला (प्रदेश) स्तर पर साथ काम करते थे:
| अधिकारी | भूमिका |
|---|---|
| प्रादेशिक | जिला प्रशासन का प्रमुख |
| राजुक | राजस्व संग्रह और न्यायिक मामले संभालता था |
| युक्त | अधीनस्थ अधिकारी — लेखा-जोखा और सहायता |
मौर्य प्रशासन अधिकारी
| अधिकारी | स्तर | कार्य |
|---|---|---|
| प्रादेशिक | जिला | जिला प्रशासन प्रमुख |
| राजुक | जिला | राजस्व + न्यायिक कार्य |
| युक्त | जिला | अधीनस्थ; लेखा-जोखा |
| अमात्य | केंद्र/प्रांत | उच्च अधिकारी/मंत्री |
| महामात्त | केंद्र | विशेष अधिकारी (धम्म महामात्त) |
मौर्य प्रशासनिक संरचना (ऊपर से नीचे):
- राजा (केंद्र)
- प्रांत — राजकुमार/राज्यपाल प्रमुख
- जिला (प्रदेश/आहार) — प्रादेशिक, राजुक, युक्त
- गाँव — ग्रामणी
कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन सा/से सही है/हैं?
एक व्यक्ति न्यायिक दंड के परिणामस्वरूप दास बन सकता था।
यदि कोई दासी अपने स्वामी का पुत्र उत्पन्न करती थी, तो वह कानूनी रूप से स्वतंत्र हो जाती थी।
यदि किसी दासी से उत्पन्न पुत्र का पिता उसका स्वामी था, तो पुत्र को स्वामी के पुत्र की कानूनी स्थिति प्राप्त होती थी।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
कौटिल्य के अर्थशास्त्र के अनुसार, दासता से संबंधित कानूनों के संदर्भ में कथन 2 और 3 सही हैं। अर्थशास्त्र ने दासों, विशेष रूप से उन दासियों के लिए प्रगतिशील प्रावधान किए थे जो अपने स्वामियों के बच्चों को जन्म देती थीं।
❌ कथन 1 – गलत: अर्थशास्त्र के अनुसार न्यायिक दंड के परिणामस्वरूप कोई व्यक्ति दास नहीं बन सकता था। कौटिल्य ने दासता को दंड के रूप में स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया था।
✅ कथन 2 – सही: यदि कोई दासी अपने स्वामी का पुत्र उत्पन्न करती थी, तो अर्थशास्त्र के प्रावधानों के अनुसार वह कानूनी रूप से स्वतंत्रता की हकदार थी।
✅ कथन 3 – सही: किसी दासी से उत्पन्न और उसके स्वामी द्वारा जनित पुत्र को स्वामी के पुत्र की कानूनी स्थिति प्रदान की गई थी, जिसमें सभी संबद्ध अधिकार और विशेषाधिकार शामिल थे।
📝 संक्षिप्त नोट्स: कौटिल्य के अर्थशास्त्र में दासता
- प्रगतिशील प्रकृति: अर्थशास्त्र में समकालीन व्यवस्थाओं की तुलना में दासता पर अपेक्षाकृत प्रगतिशील कानून थे, जिनमें दासों के लिए स्पष्ट सुरक्षा थी।
- दासता के स्रोत: व्यक्ति जन्म (यदि किसी दास से जन्म), संकट के दौरान स्वैच्छिक आत्म-विक्रय, युद्ध में बंदी बनाने, या ऋण बंधन के परिणामस्वरूप दास बन सकते थे—लेकिन न्यायिक दंड के माध्यम से नहीं।
- न्यायिक दासता का निषेध: कौटिल्य ने स्पष्ट रूप से दासता को अपराधों के दंड के रूप में बनाने पर रोक लगाई, जो इसे अन्य प्राचीन कानूनी व्यवस्थाओं से अलग करता था।
- दासियों के अधिकार: दासियां जो अपने स्वामियों के बच्चों को जन्म देती थीं, स्वतंत्रता प्राप्त करती थीं, और उनके बच्चे वैध उत्तराधिकारियों की कानूनी स्थिति का आनंद लेते थे।
- अस्थायी प्रकृति: दासता के कई रूप (विशेष रूप से ऋण दासता) अस्थायी थे, जिनमें मुक्ति और छुटकारे के प्रावधान थे।
- आर्य दासता: कौटिल्य ने आर्य (देशी) दासों, जिन्हें अधिक सुरक्षा प्राप्त थी, और दास दासों (विदेशी/युद्ध बंदी) के बीच अंतर किया।
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