UPSC Prelims 2026
प्राचीन इतिहास Previous Year Questions (PYQs)
Explore 9 solved UPSC Prelims 2026 प्राचीन इतिहास questions with detailed step-by-step bilingual solutions, option analysis, and answer keys.
प्रारंभिक बौद्ध प्रतिमा विज्ञान में एक खाली सीट क्या दर्शाती है?
Detailed Explanation:
प्रारंभिक बौद्ध कला में बुद्ध को मानव रूप में नहीं दर्शाया जाता था। उनकी उपस्थिति और जीवन की घटनाओं को विभिन्न प्रतीकों द्वारा दिखाया जाता था।
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खाली आसन (Empty Seat / Vajrasana) बुद्ध के ध्यान और ज्ञान प्राप्ति का प्रतीक है।
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धर्मचक्र (Wheel) बुद्ध के प्रथम उपदेश का प्रतीक है।
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स्तूप (Stupa) महापरिनिर्वाण का प्रतीक है।
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बिना सवार का घोड़ा (Kanthaka) महाभिनिष्क्रमण (महान त्याग) का प्रतीक है।
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अतः सही उत्तर विकल्प (A) है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | सही प्रतीक |
|---|---|
| प्रथम उपदेश | धर्मचक्र (Wheel) |
| महापरिनिर्वाण | स्तूप |
| महाभिनिष्क्रमण | बिना सवार का घोड़ा |
| ध्यान | खाली आसन (Vajrasana) ✅ |
जैन धर्म में मान्यता प्राप्त जीवन के अस्तित्व के चार मुख्य रूपों में से, निम्नलिखित में से कौन सा शामिल नहीं है?
Detailed Explanation:
जैन धर्म के अनुसार आत्मा अपने कर्मों के आधार पर जन्म-मृत्यु के चक्र (संसार) में घूमती रहती है। जैन धर्म में चार मुख्य गतियाँ (Four Gatis) मानी गई हैं:
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देव गति – देवता/स्वर्गीय प्राणी
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मनुष्य गति – मानव
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तिर्यंच गति – पशु, पक्षी, वनस्पति आदि
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नारकी गति – नरक के प्राणी
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यक्ष इन चार गतियों में शामिल नहीं हैं।
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यक्षों को शासन देवता (Attendant Deities) माना जाता है और वे व्यंतर देवों की श्रेणी में आते हैं।
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अतः सही उत्तर विकल्प (B) यक्ष है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| देव | चार गतियों में शामिल हैं। |
| मनुष्य | चार गतियों में शामिल हैं। |
| तिर्यंच | चार गतियों में शामिल हैं। |
| यक्ष | चार मुख्य गतियों में शामिल नहीं हैं। ✅ |
जैन धर्म की चार गतियाँ
| गति | अर्थ |
|---|---|
| देव गति | स्वर्गीय प्राणी |
| मनुष्य गति | मानव |
| तिर्यंच गति | पशु, पक्षी, वनस्पति आदि |
| नारकी गति | नरक के प्राणी |
महत्वपूर्ण तथ्य
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मोक्ष केवल मनुष्य जन्म से ही प्राप्त किया जा सकता है।
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आत्मा कर्मों के अनुसार विभिन्न गतियों में जन्म लेती है।
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जैन धर्म का प्रमुख सिद्धांत अहिंसा है, क्योंकि प्रत्येक जीव में आत्मा होती है।
नदियों के प्राचीन और आधुनिक नामों का निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही ढंग से सुमेलित है/हैं?
- वितस्ता : चिनाब
- असिक्नी : झेलम
- परुष्णी : रवि
- यव्यावती : ब्यास
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
ऋग्वेद में वर्णित कई नदियों के प्राचीन नाम आज बदल चुके हैं।
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युग्म 1 गलत है: वितस्ता = झेलम, न कि चिनाब।
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युग्म 2 गलत है: असिक्नी = चिनाब, न कि झेलम।
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युग्म 3 सही है: परुष्णी = रावी।
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युग्म 4 गलत है: ब्यास का प्राचीन नाम विपाशा था, यव्यावती नहीं।
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अतः केवल युग्म 3 सही है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
युग्मवार विश्लेषण
| प्राचीन नाम | आधुनिक नाम | स्थिति |
|---|---|---|
| वितस्ता | झेलम | ❌ प्रश्न में गलत मिलान |
| असिक्नी | चिनाब | ❌ प्रश्न में गलत मिलान |
| परुष्णी | रावी | ✅ सही |
| यव्यावती | ब्यास | ❌ गलत (ब्यास = विपाशा) |
ऋग्वैदिक नदियाँ
| प्राचीन नाम | आधुनिक नदी |
|---|---|
| सिंधु | इंडस |
| वितस्ता | झेलम |
| असिक्नी | चिनाब |
| परुष्णी | रावी |
| विपाशा | ब्यास |
| शुतुद्री | सतलुज |
| सरस्वती | घग्घर-हकरा (अनेक विद्वानों के अनुसार) |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
परुष्णी (रावी) नदी के किनारे ऋग्वेद में वर्णित प्रसिद्ध दशराज्ञ युद्ध (Battle of Ten Kings) लड़ा गया था।
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इस युद्ध में राजा सुदास विजयी हुए थे।
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निम्नलिखित में से किस पाठ में क्षेत्र-पत्नी ('क्षेत्र की मालकिन') शब्द की उत्पत्ति हुई है?
Detailed Explanation:
क्षेत्र-पत्नी (Kshetra-patni) का अर्थ है "खेत की स्वामिनी"।
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अथर्ववेद में क्षेत्र-पत्नी का उल्लेख एक ऐसी देवी के रूप में मिलता है जो उर्वरता, कृषि और समृद्धि से जुड़ी हुई है।
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ऋग्वेद में क्षेत्रपति (खेत के स्वामी) का उल्लेख मिलता है, लेकिन क्षेत्र-पत्नी का नहीं।
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अष्टाध्यायी और अर्थशास्त्र बाद के ग्रंथ हैं, इसलिए इस शब्द का मूल स्रोत नहीं हैं।
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अतः सही उत्तर विकल्प (B) अथर्ववेद है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | कारण |
|---|---|
| ऋग्वेद | इसमें क्षेत्रपति का उल्लेख है, क्षेत्र-पत्नी का नहीं। |
| अथर्ववेद | क्षेत्र-पत्नी शब्द का मूल स्रोत। ✅ |
| अष्टाध्यायी | पाणिनि का व्याकरण ग्रंथ है। |
| अर्थशास्त्र | राज्य, अर्थव्यवस्था और प्रशासन से संबंधित ग्रंथ है। |
भारत में स्थानीय-मूल्य प्रणाली के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- भारत में स्थान-मूल्य प्रणाली का सबसे पहला अभिलेखीय उपयोग गुजरात की मनकानी प्लेटों में पाया जाता है (595 ई. - 596 ई.)।
- नौवीं शताब्दी में, पूरे भारत में शिलालेखों में स्थान-मूल्य सामान्य हो गए।
- स्थान-मूल्य सातवीं शताब्दी की शुरुआत में दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत शिलालेखों में पाए गए हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। भारत में स्थानमान प्रणाली का सबसे प्राचीन शिलालेखीय प्रमाण मांकणी ताम्रपत्र, गुजरात (AD 595-596) में मिलता है।
कथन 2 — सही। हालांकि स्थानमान/शून्य की अवधारणा पहले से थी (आर्यभट्ट के ग्रंथों में), लेकिन रोज़मर्रा के शिलालेखों में इसे फैलने में समय लगा। यह 9वीं सदी तक ही पूरे भारत में सामान्य हुआ (जैसे ग्वालियर का चतुर्भुज मंदिर शिलालेख, 876 CE)।
कथन 3 — सही। भारत की स्थानमान प्रणाली दक्षिण-पूर्व एशिया में तेज़ी से फैली। कंबोडिया, सुमात्रा, जावा में 7वीं सदी के संस्कृत शिलालेखों में इसके प्रमाण मिले हैं।
स्थानमान प्रणाली और शून्य
| घटना | समय | विवरण |
|---|---|---|
| भारत में सबसे पुराना प्रमाण | AD 595-596 | मांकणी ताम्रपत्र, गुजरात |
| दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रसार | 7वीं सदी | कंबोडिया, सुमात्रा, जावा |
| भारत में सामान्य हुआ | 9वीं सदी | ग्वालियर शिलालेख (876 CE) |
| गणितीय अवधारणा | इससे पहले | आर्यभट्ट के ग्रंथों में |
महत्व:
- भारत को शून्य और दशमलव स्थानमान प्रणाली के आविष्कार का श्रेय जाता है
- यह बाद में अरब जगत और फिर यूरोप तक पहुँची ("हिंदू-अरबी अंक प्रणाली" नाम)
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
मैं. पाली ग्रंथों में सिक्कों का पहला निश्चित संदर्भ मिलता है, उदाहरण के लिए, कहपना, निक्खा, कम्सा, और काकनिका। द्वितीय. पाली ग्रंथों के साहित्यिक साक्ष्य की पुष्टि कई स्थलों से मिले पंच-चिह्नित सिक्कों के पुरातात्विक साक्ष्य से होती है, जिनमें से अधिकांश चांदी के बने होते हैं।
उपरोक्त कथन निम्नलिखित में से किससे संबद्ध हैं?
- शहरी जीवन का उद्भव
- मुद्रा अर्थव्यवस्था में संक्रमण
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
पाली ग्रंथों में
-
शहरी जीवन का उदय: सिक्कों ने व्यापार, बाजार और नगरों के विकास को बढ़ावा दिया।
-
मुद्रा अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण: वस्तु-विनिमय (Barter) की जगह धीरे-धीरे मुद्रा आधारित लेन-देन शुरू हुआ।
-
अतः ये कथन शहरी जीवन के उदय तथा मुद्रा अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण दोनों से संबंधित हैं। इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
दोनों विकासों से संबंध
| विकास | सिक्कों का योगदान |
|---|---|
| शहरी जीवन का उदय | व्यापार, बाजार और नगरों के विकास को बढ़ावा मिला। |
| मुद्रा अर्थव्यवस्था | वस्तु-विनिमय की जगह मुद्रा आधारित लेन-देन शुरू हुआ। |
पंच-चिह्नित सिक्के
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| काल | लगभग 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व |
| धातु | मुख्यतः चाँदी |
| प्रकार | भारत के सबसे प्राचीन सिक्के |
| रूप | अनियमित आकार, जिन पर विभिन्न चिह्न अंकित होते थे |
| संबंधित काल | महाजनपद और द्वितीय नगरीकरण |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
पाली ग्रंथों में सिक्कों का प्रारंभिक साहित्यिक उल्लेख मिलता है।
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पंच-चिह्नित सिक्के भारत की सबसे पुरानी मुद्रा प्रणाली माने जाते हैं।
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इनके उपयोग से व्यापार, कर-व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि हुई।
ऋग्वैदिक काल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. कुओं से सिंचाई ने कृषि को बाढ़ के मैदानों और नदी के किनारे की पट्टियों से दूर वर्तमान पंजाब और हरियाणा के मैदानी इलाकों में विस्तारित करने की अनुमति दी, जहां भूमिगत जल स्तर सतह के काफी करीब था।
II. कुओं से पानी निकालने के लिए ड्राफ्ट-एनिमल पावर का उपयोग किया गया।
निम्नलिखित में से कौन सी जानकारी उपरोक्त कथनों का समर्थन/समर्थन करती है?
- ऋग्वेद में पानी निकालने के लिए अश्म चक्र (पत्थर की चरखी वाला पहिया) और अहवा (लकड़ी की बाल्टी) के इस्तेमाल का प्रमाण मिलता है।
- ऋग्वेद में परशु/कुलिश (कुल्हाड़ी) और दत्र/श्रेणी (दरांती) जैसे उपकरणों के उपयोग का उल्लेख किया गया है।
- जमीन जोतने और गाड़ियाँ खींचने के लिए ऋग्वेद से भी पहले बैल के उपयोग का इतिहास है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
प्रश्न यह पूछता है कि ऋग्वैदिक काल में
-
सूचना 1 सही है: ऋग्वेद में अश्म चक्र (पत्थर की चरखी) और अहव (लकड़ी की बाल्टी) का उल्लेख मिलता है, जो कुओं से पानी निकालने की तकनीक को दर्शाता है।
-
सूचना 3 सही है: बैलों का उपयोग हल चलाने और गाड़ियाँ खींचने में होता था, इसलिए उनसे कुओं से पानी निकालना भी संभव था।
-
सूचना 2 गलत है: कुल्हाड़ी (परशु) और हँसिया (दात्र) कृषि उपकरण हैं, लेकिन सिंचाई या पानी निकालने से सीधे संबंधित नहीं हैं।
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अतः केवल 1 और 3 कथनों का समर्थन करते हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (C) है।
ऋग्वैदिक कृषि
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मुख्य व्यवसाय | कृषि और पशुपालन |
| सिंचाई स्रोत | कुएँ और नदियाँ |
| जल निकालने के साधन | अश्म चक्र और अहव |
| पशु-शक्ति | बैल |
| कृषि उपकरण | हल, कुल्हाड़ी, हँसिया |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
कुओं की सिंचाई ने कृषि को नदी तटों से बाहर तक फैलाने में मदद की।
-
बैलों का उपयोग खेती, परिवहन और जल निकालने में किया जाता था।
-
उत्तर वैदिक काल में कृषि और सिंचाई तकनीकों का और अधिक विकास हुआ।
हड़प्पा शहरों में पुरातात्विक खोजों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. घरों में तकली-चक्रों का प्रचलन तो व्यापक है, परंतु चरखों का अभाव है।
II. स्नातक स्तर की पढ़ाई के साथ पूर्ण वजन और माप तराजू की खोज की गई है।
III. यहां अपेक्षाकृत विशाल आंगनों के आसपास, बड़े हिस्से में पक्की ईंटों से बने घर हैं, जिनमें अपने स्वयं के कुएं, स्नान मंच और बड़े कमरे हैं।
उपरोक्त कथनों से निम्नलिखित में से कौन सा निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
- कथन I से पता चलता है कि कताई घर पर किया जाने वाला एक श्रमसाध्य कार्य था।
- कथन II से पता चलता है कि हड़प्पावासियों के पास कितना वैज्ञानिक ज्ञान था।
- विवरण III एक सामान्य संपत्ति प्रणाली के उद्भव का सुझाव देता है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
हड़प्पा सभ्यता के पुरातात्त्विक साक्ष्य उनके समाज, तकनीकी ज्ञान और आर्थिक व्यवस्था के बारे में जानकारी देते हैं।
-
अनुमान 1 सही है: बड़ी संख्या में स्पिंडल-व्हॉर्ल (तकली के चक्र) मिलने और चरखे के अभाव से पता चलता है कि सूत कातना घरों में हाथ से किया जाता था, जो मेहनत वाला कार्य था।
-
अनुमान 2 सही है: मानकीकृत बाट और माप-स्केल हड़प्पावासियों के उन्नत वैज्ञानिक और गणितीय ज्ञान को दर्शाते हैं।
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अनुमान 3 गलत है: निजी कुएँ, स्नान मंच और बड़े घर निजी संपत्ति का संकेत देते हैं, न कि सामूहिक संपत्ति व्यवस्था का।
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अतः केवल अनुमान 1 और 2 सही हैं, इसलिए सही उत्तर विकल्प (A) है।
हड़प्पा नगरों की विशेषताएँ
| विशेषता | महत्व |
|---|---|
| स्पिंडल-व्हॉर्ल | वस्त्र निर्माण और सूत कातने का प्रमाण |
| मानकीकृत बाट | व्यापार और लेन-देन में सुविधा |
| माप-स्केल | सटीक माप और वैज्ञानिक सोच |
| पक्की ईंटों के मकान | उन्नत नगर नियोजन |
| निजी कुएँ और स्नानघर | स्वच्छता और निजी स्वामित्व |
महत्वपूर्ण तथ्य
-
हड़प्पा सभ्यता विश्व की सबसे विकसित प्राचीन नगरीय सभ्यताओं में से एक थी।
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इनके बाट-तौल पूरे क्षेत्र में लगभग समान मानकों पर आधारित थे।
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मोहनजोदड़ो, हड़प्पा, धोलावीरा और लोथल उत्कृष्ट नगर नियोजन के उदाहरण हैं।
प्रारंभिक ऐतिहासिक तमिलकम में राजा और उसके राजवंश की निम्नलिखित में से कौन सी जोड़ी सही ढंग से सुमेलित नहीं है?
- सेनगुट्टुवन: चेरा
- उदियानजेरल : चोल
- नेदुंजेलियन: पंड्या
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
प्रश्न में पूछा गया है कि प्रारम्भिक तमिलकम के राजा और उनके वंश का कौन-सा युग्म गलत मिलान है।
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युग्म 1 सही है: सेंगुट्टुवन चेरा वंश के प्रसिद्ध शासक थे।
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युग्म 2 गलत है: उदियनजेरल (उथियन चेरलाथन) चेरा वंश से संबंधित थे, चोल वंश से नहीं।
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युग्म 3 सही है: नेडुंजेलियन पांड्य वंश के प्रसिद्ध शासक थे।
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अतः केवल युग्म 2 गलत है, इसलिए सही उत्तर विकल्प (B) है।
युग्म-वार विश्लेषण
| युग्म | स्थिति | कारण |
|---|---|---|
| सेंगुट्टुवन : चेरा | ✅ सही | प्रसिद्ध चेरा शासक, कन्नगी (पट्टिनी) परंपरा से जुड़े। |
| उदियनजेरल : चोल | ❌ गलत | उदियनजेरल चेरा वंश के शासक थे। |
| नेडुंजेलियन : पांड्य | ✅ सही | संगम साहित्य में वर्णित प्रसिद्ध पांड्य राजा। |
संगम काल के प्रमुख वंश
| वंश | प्रमुख शासक |
|---|---|
| चेरा | सेंगुट्टुवन, उदियनजेरल |
| चोल | करिकाल चोल, नलंकिल्ली |
| पांड्य | नेडुंजेलियन, मुदुकुडुमी पेरुवलुथि |
महत्वपूर्ण तथ्य
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संगम काल (लगभग 300 ई.पू.–300 ई.) की जानकारी मुख्यतः संगम साहित्य से मिलती है।
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तमिलकम के तीन प्रमुख वंश थे — चेरा, चोल और पांड्य।
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सेंगुट्टुवन का उल्लेख प्रसिद्ध तमिल महाकाव्य शिलप्पदिकारम् में मिलता है।
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नेडुंजेलियन तलैयालंगानम के युद्ध में विजय के लिए प्रसिद्ध हैं।
UPSC Prelims 2026 - प्राचीन इतिहास Chapter-wise Distribution
वैदिक काल
3 Qs (33.3%)धार्मिक आंदोलन
2 Qs (22.2%)महाजनपद काल
1 Qs (11.1%)प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
1 Qs (11.1%)संगम काल एवं दक्षिण भारत
1 Qs (11.1%)सिंधु घाटी सभ्यता
1 Qs (11.1%)UPSC Prelims 2026 - प्राचीन इतिहास Questions FAQs
Q1 How many प्राचीन इतिहास questions were asked in UPSC Prelims 2026?
Q2 What is the chapter-wise question distribution for प्राचीन इतिहास in UPSC Prelims 2026?
- वैदिक काल: 3 questions (33.3%)
- धार्मिक आंदोलन: 2 questions (22.2%)
- महाजनपद काल: 1 questions (11.1%)
- प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: 1 questions (11.1%)
- संगम काल एवं दक्षिण भारत: 1 questions (11.1%)
- सिंधु घाटी सभ्यता: 1 questions (11.1%)