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प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
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भारत में स्थानीय-मूल्य प्रणाली के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- भारत में स्थान-मूल्य प्रणाली का सबसे पहला अभिलेखीय उपयोग गुजरात की मनकानी प्लेटों में पाया जाता है (595 ई. - 596 ई.)।
- नौवीं शताब्दी में, पूरे भारत में शिलालेखों में स्थान-मूल्य सामान्य हो गए।
- स्थान-मूल्य सातवीं शताब्दी की शुरुआत में दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत शिलालेखों में पाए गए हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। भारत में स्थानमान प्रणाली का सबसे प्राचीन शिलालेखीय प्रमाण मांकणी ताम्रपत्र, गुजरात (AD 595-596) में मिलता है।
कथन 2 — सही। हालांकि स्थानमान/शून्य की अवधारणा पहले से थी (आर्यभट्ट के ग्रंथों में), लेकिन रोज़मर्रा के शिलालेखों में इसे फैलने में समय लगा। यह 9वीं सदी तक ही पूरे भारत में सामान्य हुआ (जैसे ग्वालियर का चतुर्भुज मंदिर शिलालेख, 876 CE)।
कथन 3 — सही। भारत की स्थानमान प्रणाली दक्षिण-पूर्व एशिया में तेज़ी से फैली। कंबोडिया, सुमात्रा, जावा में 7वीं सदी के संस्कृत शिलालेखों में इसके प्रमाण मिले हैं।
स्थानमान प्रणाली और शून्य
| घटना | समय | विवरण |
|---|---|---|
| भारत में सबसे पुराना प्रमाण | AD 595-596 | मांकणी ताम्रपत्र, गुजरात |
| दक्षिण-पूर्व एशिया में प्रसार | 7वीं सदी | कंबोडिया, सुमात्रा, जावा |
| भारत में सामान्य हुआ | 9वीं सदी | ग्वालियर शिलालेख (876 CE) |
| गणितीय अवधारणा | इससे पहले | आर्यभट्ट के ग्रंथों में |
महत्व:
- भारत को शून्य और दशमलव स्थानमान प्रणाली के आविष्कार का श्रेय जाता है
- यह बाद में अरब जगत और फिर यूरोप तक पहुँची ("हिंदू-अरबी अंक प्रणाली" नाम)
प्राचीन भारत की वैज्ञानिक प्रगति के संदर्भ में, नीचे दिए गए कथनों में से कौन से सही हैं?
- विभिन्न प्रकार के विशेष शल्य चिकित्सा उपकरण पहली शताब्दी ईस्वी तक सामान्य उपयोग में थे।
- मानव शरीर में आंतरिक अंगों का प्रत्यारोपण तीसरी शताब्दी ईस्वी की शुरुआत तक शुरू हो गया था।
- कोण की ज्या (साइन) की अवधारणा 5वीं शताब्दी ईस्वी में ज्ञात थी।
- चक्रीय चतुर्भुज की अवधारणा 7वीं शताब्दी ईस्वी में ज्ञात थी।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सुश्रुत संहिता (6वीं शताब्दी ईसा पूर्व) में 120 से अधिक शल्य चिकित्सा उपकरणों का वर्णन है जिनमें चाकू, संदंश और सुई शामिल हैं; ये पहली शताब्दी ईस्वी तक सामान्य उपयोग में थे।
❌ कथन 2 – गलत: प्राचीन भारत में आंतरिक अंग प्रत्यारोपण का कोई प्रमाण नहीं है; यद्यपि त्वचा प्रत्यारोपण और पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा की जाती थी, अंग प्रत्यारोपण के लिए आधुनिक प्रतिरक्षादमनकारी तकनीक चाहिए जो तीसरी शताब्दी ईस्वी में उपलब्ध नहीं थी।
✅ कथन 3 – सही: आर्यभट्ट ने अपनी आर्यभटीय (499 ईस्वी) में ज्या (साइन फलन) की अवधारणा प्रस्तुत की और विस्तृत त्रिकोणमितीय सारणियाँ दीं।
✅ कथन 4 – सही: ब्रह्मगुप्त ने ब्रह्मस्फुटसिद्धांत (628 ईस्वी) में चक्रीय चतुर्भुजों पर प्रमेय दिए, जिनमें उनके क्षेत्रफल के लिए प्रसिद्ध सूत्र शामिल है।
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