प्राचीन भारत की वैज्ञानिक प्रगति के संदर्भ में, नीचे दिए गए कथनों में से कौन से सही हैं?
- विभिन्न प्रकार के विशेष शल्य चिकित्सा उपकरण पहली शताब्दी ईस्वी तक सामान्य उपयोग में थे।
- मानव शरीर में आंतरिक अंगों का प्रत्यारोपण तीसरी शताब्दी ईस्वी की शुरुआत तक शुरू हो गया था।
- कोण की ज्या (साइन) की अवधारणा 5वीं शताब्दी ईस्वी में ज्ञात थी।
- चक्रीय चतुर्भुज की अवधारणा 7वीं शताब्दी ईस्वी में ज्ञात थी।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सुश्रुत संहिता (6वीं शताब्दी ईसा पूर्व) में 120 से अधिक शल्य चिकित्सा उपकरणों का वर्णन है जिनमें चाकू, संदंश और सुई शामिल हैं; ये पहली शताब्दी ईस्वी तक सामान्य उपयोग में थे।
❌ कथन 2 – गलत: प्राचीन भारत में आंतरिक अंग प्रत्यारोपण का कोई प्रमाण नहीं है; यद्यपि त्वचा प्रत्यारोपण और पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा की जाती थी, अंग प्रत्यारोपण के लिए आधुनिक प्रतिरक्षादमनकारी तकनीक चाहिए जो तीसरी शताब्दी ईस्वी में उपलब्ध नहीं थी।
✅ कथन 3 – सही: आर्यभट्ट ने अपनी आर्यभटीय (499 ईस्वी) में ज्या (साइन फलन) की अवधारणा प्रस्तुत की और विस्तृत त्रिकोणमितीय सारणियाँ दीं।
✅ कथन 4 – सही: ब्रह्मगुप्त ने ब्रह्मस्फुटसिद्धांत (628 ईस्वी) में चक्रीय चतुर्भुजों पर प्रमेय दिए, जिनमें उनके क्षेत्रफल के लिए प्रसिद्ध सूत्र शामिल है।
Question 1 of 1 चिकित्सा विज्ञान
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