UPSC Prelims 2026 Question Paper
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निम्नलिखित में से कौन सा भारत में विवो द्वारा प्रमाणित वनों की कटाई और वन क्षरण से उत्सर्जन को कम करने (आरईडीडी+) परियोजना की पहली योजना है?
Detailed Explanation:
मेघालय की यह परियोजना भारत की पहली REDD+ परियोजना है, जो Plan Vivo मानक के अंतर्गत प्रमाणित है।
मुख्य तथ्य:
- स्थान: पूर्वी खासी हिल्स, मेघालय
- प्रबंधन: 10 खासी जनजातीय राज्यों का संघ ("Synjuk")
- कार्य: पवित्र वनों की रक्षा और क्षरित वनों की बहाली
अन्य विकल्प गलत क्यों:
- उत्तराखंड — केवल तैयारी कार्य किया, पहला प्रमाणित नहीं
- ICFRE-ICIMOD — एक बड़ा क्षेत्रीय कार्यक्रम, एक प्रमाणित परियोजना नहीं
- सिक्किम — अच्छा कार्य, पर पहला नहीं
राइन्कोस्टाइलिस रेटुसा (फॉक्सटेल ऑर्किड) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- यह एक एपिफाइटिक ऑर्किड है।
- यह प्रजाति उत्तर-पूर्व भारत के लिए स्थानिक है।
- यह अरुणाचल प्रदेश और असम का राज्य फूल है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। यह एक एपिफाइटिक ऑर्किड है — पेड़ के तने/शाखाओं पर उगता है, सहारे के लिए पेड़ का उपयोग करता है और हवा से नमी लेता है। यह परजीवी नहीं है, पेड़ को नुकसान नहीं पहुँचाता।
कथन 2 — गलत। यह केवल पूर्वोत्तर भारत में ही नहीं पाया जाता। यह पूरे उष्णकटिबंधीय एशिया में मिलता है — चीन, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड आदि। भारत में भी यह ओडिशा, आंध्र प्रदेश, अंडमान-निकोबार में भी पाया जाता है।
कथन 3 — सही। यह असम और अरुणाचल प्रदेश दोनों का राज्य फूल है। असम में इसे कोपौ फूल कहा जाता है — बिहू नृत्य और शादियों में महत्वपूर्ण।
मंगोलिया से प्रत्येक वर्ष नागालैंड की दोयांग झील में अमूर फाल्कन्स के आगमन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह दर्शाता है कि निरंतर स्थानीय संरक्षण प्रयास अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षियों के आगमन और सुरक्षा में कैसे योगदान दे सकते हैं।
- यह उन्नत ट्रैकिंग तकनीकों की वैश्विक सफलता को दर्शाता है जो प्रवासी पक्षियों को उनके पड़ाव स्थलों पर वापस ले जाती है।
- यह पुष्टि करता है कि अमूर फाल्कन्स ने अनुकूल आवास परिवर्तनों के कारण भारत में स्थायी निवास के लिए अनुकूलित किया है।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। डोयांग झील एक संरक्षण की सफलता की कहानी है। पहले बड़ी संख्या में बाज़ों का शिकार होता था। NGO, वन विभाग और स्थानीय समुदायों के प्रयासों से शिकार पूरी तरह बंद हो गया। नागालैंड को अब "फाल्कन कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड" कहा जाता है।
कथन 2 — गलत। ट्रैकिंग डिवाइस (सोलर ट्रांसमीटर) केवल वैज्ञानिकों के लिए डेटा एकत्र करते हैं — वे पक्षियों को मार्गदर्शन नहीं देते। बाज़ अपने प्राकृतिक तरीकों से रास्ता खोजते हैं, तकनीक से नहीं।
कथन 3 — गलत। बाज़ भारत के स्थायी निवासी नहीं हैं — वे लंबी दूरी के प्रवासी पक्षी हैं। वे साइबेरिया/उत्तरी चीन में प्रजनन करते हैं, फिर सर्दियों में दक्षिणी अफ्रीका उड़ान भरते हैं — लगभग 22,000 किमी की यात्रा। डोयांग झील केवल एक अस्थायी विश्राम स्थल है।
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पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत संस्थानों का एक मंच, NIRANTAR (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च एंड एप्लीकेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज टू ट्रांसफॉर्म, एडाप्ट एंड बिल्ड रेजिलिएंस) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
- पारिस्थितिकी तंत्र सर्वेक्षण और विश्लेषण इस मंच के अंतर्गत एक कार्यक्षेत्र है, जिसका प्रमुख संस्थान भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, कोलकाता है।
- पारिस्थितिकी तंत्र सेवा का अनुसंधान और प्रबंधन इस मंच के अंतर्गत एक कार्यक्षेत्र है, जिसका प्रमुख संस्थान केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली है।
- क्षमता विकास सहायता इस मंच के अंतर्गत एक कार्यक्षेत्र है, जिसका प्रमुख संस्थान भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल है।
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Detailed Explanation:
NIRANTAR पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक मंच है, जिसमें 4 विषयगत खंड हैं।
कथन 1 — सही। Ecosystem Survey & Analysis खंड → BSI, कोलकाता द्वारा नेतृत्व।
कथन 2 — गलत। Research and Management of Ecosystem Service खंड → ICFRE, देहरादून द्वारा नेतृत्व — Central Zoo Authority नहीं। CZA केवल भागीदार संस्थान है।
कथन 3 — सही। Capacity Development Support खंड → IIFM, भोपाल द्वारा नेतृत्व।
जलवायु लचीलेपन के संदर्भ में मैंग्रोव पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए निम्नलिखित में से कौन सा तर्क सबसे अच्छा है?
- मैंग्रोव ज्वारीय ऊर्जा को कम करते हैं और मीठे पानी का भंडारण करते हैं, जिससे वे खारे मुहाने वाले क्षेत्रों में धान की खेती के लिए आदर्श स्थान बन जाते हैं।
- उनकी नमक-संवेदनशील जड़ें समुद्री जल को फ़िल्टर करती हैं, जिससे मैंग्रोव तटीय भूमि को मीठे पानी के जलीय कृषि क्षेत्रों में परिवर्तित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ज्वारीय लहरों को झेलने और बायोमास संसाधनों की पेशकश करके, मैंग्रोव ग्रामीण समुदायों के लिए प्राकृतिक जैव-ढाल और आजीविका आधार दोनों के रूप में कार्य करते हैं।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। मैंग्रोव मीठा पानी जमा नहीं करते और धान की खेती के लिए उपयुक्त नहीं हैं। वास्तव में, धान के खेत बनाने के लिए मैंग्रोव को साफ करना ही उनके विनाश का एक मुख्य कारण है।
कथन 2 — गलत। मैंग्रोव हैलोफाइट हैं — यानी उनकी जड़ें नमक-सहनशील हैं, नमक-संवेदनशील नहीं। झींगा पालन के लिए मैंग्रोव साफ करना उनके लिए एक बड़ा खतरा है।
कथन 3 — सही। मैंग्रोव प्राकृतिक जैव-कवच के रूप में कार्य करते हैं:
- उनकी जड़ें ज्वारीय ऊर्जा कम करती हैं और तूफानों से तटों की रक्षा करती हैं
- वे तटीय समुदायों को जीवन-यापन के संसाधन देते हैं — लकड़ी, शहद, मछली प्रजनन
पश्चिमी हूलॉक गिबन्स के संबंध में, निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- उत्तर-पूर्व भारत में एक अभयारण्य इस वानर प्रजाति का घर है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) की लाल सूची में लुप्तप्राय के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
- उनके पास विशेष ब्रैचिएशन है और वे पेड़ों के बीच आसानी से झूल सकते हैं।
- उनके पास गोरिल्ला की तरह मजबूत और भारी निर्माण है, फिर भी वे उल्लेखनीय रूप से फुर्तीले पेड़ पर चढ़ने वाले हैं।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। असम में होलोंगापार गिब्बन अभयारण्य इस प्रजाति के लिए समर्पित है। पश्चिमी हूलॉक गिब्बन को IUCN रेड लिस्ट में संकटग्रस्त (Endangered) के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
कथन 2 — सही। ये ब्रैकिएशन के माध्यम से चलते हैं — अपनी लंबी बाहों का उपयोग करके एक शाखा से दूसरी शाखा पर तेज़ी से झूलते हैं।
कथन 3 — गलत। गिब्बन "छोटे वनमानुष" (Lesser Apes) हैं, गोरिल्ला जैसे नहीं। ये छोटे, पतले और हल्के होते हैं — केवल 6 से 9 किलोग्राम। उनका हल्का शरीर ही उन्हें इतनी फुर्ती से झूलने में मदद करता है।
जलवायु परिवर्तन पर भारत की प्रतिक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत की दीर्घकालिक निम्न उत्सर्जन विकास रणनीति (एलटी-एलईडीएस) 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है।
II. दिसंबर, 2024 में प्रस्तुत भारत की चौथी द्विवार्षिक अद्यतन रिपोर्ट (बीयूआर-4) में 2019 की तुलना में 2020 में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 8% की कमी दर्ज की गई।
III. जलवायु-लचीला विकास आवश्यक रूप से उत्सर्जन कटौती लक्ष्यों की त्वरित और अल्पकालिक उपलब्धि पर निर्भर करता है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से संबंध सही है/हैं?
- कथन I अनुभवजन्य रूप से कथन II द्वारा समर्थित है।
- कथन III कथन I में निहित दृष्टिकोण का खंडन करता है।
- विवरण I और कथन III मिलकर दीर्घकालिक स्थिरता का आधार स्थापित करते हैं।
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Detailed Explanation:
कथन I — सही। LT-LEDS भारत की 2070 तक नेट-ज़ीरो की रणनीति है।
कथन II — भ्रामक। 2020 में उत्सर्जन में 8% की कमी हुई, लेकिन यह कोविड लॉकडाउन के कारण था, असली नीतिगत सफलता नहीं।
कथन III — सही। वास्तविक जलवायु लचीलापन के लिए अभी तत्काल कार्रवाई आवश्यक है, सिर्फ लंबी अवधि की योजना नहीं।
संबंध 2 — सही: कथन III (तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता) कथन I (2070 का लंबी अवधि लक्ष्य) के दृष्टिकोण से विरोधाभासी है।
याद रखने योग्य बात: लंबी अवधि की योजना और तत्काल कार्रवाई की मांग में तनाव है। कोविड से जुड़ी उत्सर्जन कमी असली नीतिगत सफलता नहीं है।
हरित हाइड्रोजन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- यह कार्बन कैप्चर और स्टोरेज (सीसीएस) के साथ संयुक्त प्राकृतिक गैस सुधार से प्राप्त डीकार्बोनाइज्ड हाइड्रोजन है।
- यह नवीकरणीय ऊर्जा द्वारा उत्पन्न बिजली के साथ पानी के इलेक्ट्रोलिसिस का उपयोग करके उत्पादित किया जाता है।
- भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक लगभग 50 एमएमटी वार्षिक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी लाना है।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। यह ब्लू हाइड्रोजन का वर्णन है, ग्रीन हाइड्रोजन का नहीं। ब्लू हाइड्रोजन प्राकृतिक गैस + कार्बन कैप्चर (CCS) से बनती है।
कथन 2 — सही। ग्रीन हाइड्रोजन = नवीकरणीय बिजली (सौर/पवन) से पानी का इलेक्ट्रोलिसिस। यह शून्य-उत्सर्जन प्रक्रिया है।
कथन 3 — सही। भारत के राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य:
- 2030 तक 5 MMT/वर्ष उत्पादन क्षमता
- इससे वार्षिक ~50 MMT ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी
- साथ ही 6 लाख+ रोजगार सृजन
याद रखने की तरकीब:
- हरा (Green) = नवीकरणीय बिजली + पानी (स्वच्छ)
- नीला (Blue) = प्राकृतिक गैस + कार्बन कैप्चर
- ग्रे (Grey) = प्राकृतिक गैस, कोई कार्बन कैप्चर नहीं (गंदा)
भारत सरकार के सागरमाला कार्यक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
मैं. सागरमाला कार्यक्रम लागत प्रभावी और टिकाऊ तटीय बुनियादी ढांचे के माध्यम से बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास हासिल करना चाहता है। द्वितीय. सागरमाला कार्यक्रम की सफलता वैश्विक बंदरगाह रैंकिंग में सुधार के साथ-साथ तटीय और अंतर्देशीय जलमार्ग शिपिंग में महत्वपूर्ण वृद्धि में परिलक्षित होती है। तृतीय. सागरमाला 2.0 का लक्ष्य भारत को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप एक वैश्विक समुद्री नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से संबंध सही है/हैं?
- विवरण II कथन I में परिकल्पित रणनीतियों की प्रभावशीलता को मान्य करता है।
- विवरण III कथन I के उद्देश्यों को भविष्य-उन्मुख नवाचार ढांचे में शामिल करके विस्तारित करता है।
- कथन I आधुनिक नवाचार के बजाय केवल पारंपरिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करके कथन III का खंडन करता है।
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Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 2 (संबंध 1 और 2 सही हैं)
सरल व्याख्या:
मूल तथ्य:
- कथन I: सागरमाला = बंदरगाह-आधारित विकास (2015 में शुरू)
- कथन II: वास्तविक सफलता — तटीय शिपिंग में 118% वृद्धि, अंतर्देशीय जलमार्ग कार्गो में 700% वृद्धि, 9 भारतीय बंदरगाह वैश्विक टॉप 100 में
- कथन III: सागरमाला 2.0 = अगला चरण, स्मार्ट बंदरगाह, हरित शिपिंग, नवाचार पर केंद्रित
संबंध 1 — सही। कथन II वास्तविक आंकड़े/प्रमाण देता है कि कथन I की रणनीति वास्तव में सफल रही। इसलिए II, I को प्रमाणित करता है।
संबंध 2 — सही। कथन III बस कथन I का अगला चरण है — उसी बंदरगाह-आधारित विकास पर नवाचार और तकनीक जोड़ता है। यह विस्तार करता है, बदलता नहीं।
संबंध 3 — गलत। कथन I, कथन III से विरोधाभासी नहीं है। बुनियादी ढांचा (कथन I) ही वह आधार है जिस पर आधुनिक नवाचार (कथन III) बनाया गया है।
याद रखने की तरकीब: सागरमाला 1.0 = आधार बनाना। सागरमाला 2.0 = उस आधार पर भविष्य बनाना। कोई टकराव नहीं, केवल प्रगति।
विझिंजम अंतर्राष्ट्रीय बंदरगाह किस तरह से भारत की समुद्री व्यापार और रसद नीति में एक संरचनात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है?
- तटीय शिपिंग पर निर्भरता को कम करने और विदेशी सहयोग की आवश्यकता को खत्म करने के लिए विशेष रूप से घरेलू कार्गो हब के रूप में कार्य करके।
- समुद्री विरासत स्थल के रूप में केरल की छवि को बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से यात्री क्रूज पर्यटन और विरासत शिपिंग पर ध्यान केंद्रित करके।
- विदेशी ट्रांस-शिपमेंट बंदरगाहों पर निर्भरता कम करने, राजस्व प्रतिधारण बढ़ाने और क्षेत्रीय समुद्री व्यापार में भारत को पुनर्स्थापित करने के लिए अपने प्राकृतिक गहरे ड्राफ्ट और रणनीतिक स्थान का लाभ उठाकर।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। विझिंजम एक अंतर्राष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट हब है, केवल घरेलू कार्गो बंदरगाह नहीं। इसे तटीय शिपिंग की आवश्यकता है और यह विदेशी सहयोग को आमंत्रित करता है — समाप्त नहीं करता।
कथन 2 — गलत। क्रूज़ टर्मिनल है, लेकिन बंदरगाह का मुख्य फोकस कंटेनर ट्रांसशिपमेंट है, पर्यटन नहीं।
कथन 3 — सही। विझिंजम की ताकत:
- गहरा प्राकृतिक ड्राफ्ट (18-24 मीटर) — बड़े जहाज़ों (ULCS) को संभाल सकता है
- स्थान — प्रमुख ईस्ट-वेस्ट शिपिंग मार्ग से केवल 10 नॉटिकल मील दूर
- लक्ष्य: कोलंबो, सिंगापुर, जेबेल अली का व्यापार वापस लाना
- लाभ: भारत को वार्षिक $200-400 मिलियन की बचत
वैश्विक कपड़ा उद्योग में एरी सिल्क के लिए ओइको-टेक्स प्रमाणन प्राप्त करने का सबसे महत्वपूर्ण निहितार्थ निम्नलिखित में से कौन सा/से है?
- यह भारतीय निर्यातकों को उच्च-स्तरीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की अनुमति देता है जो रसायन-मुक्त उत्पादों को प्राथमिकता देते हैं।
- यह पुष्टि करता है कि एरी सिल्क अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और गुणवत्ता मानकों को पूरा करता है, जिससे प्रीमियम पर्यावरण-जागरूक बाजारों में प्रवेश संभव हो जाता है।
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Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। Oeko-Tex प्रमाणन साबित करता है कि रेशम हानिकारक रसायनों से मुक्त है। यह भारतीय निर्यातकों को उच्च-स्तरीय वैश्विक बाज़ारों में प्रतिस्पर्धा करने में मदद करता है।
कथन 2 — सही। यह प्रमाणन पुष्टि करता है कि एरी सिल्क अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यावरण और गुणवत्ता मानकों को पूरा करता है। इसके GI टैग और "पीस सिल्क" (रेशम कीट को नहीं मारा जाता) की प्रतिष्ठा के साथ, यह यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे प्रीमियम पर्यावरण-अनुकूल बाज़ारों में प्रवेश दिलाता है।
दोनों कथन एक ही लाभ के दो पहलू हैं — प्रमाणन = विश्वास = बाज़ार में प्रवेश।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (डिजिटल रुपया) के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन नहीं सही है?
Detailed Explanation:
विकल्प A — सही कथन। UPI बैंक खातों में मौजूद पैसे को स्थानांतरित करता है। डिजिटल रुपया RBI द्वारा सीधे जारी डिजिटल नकद के समान है।
विकल्प B — सही कथन। UPI: तुरंत डेबिट/क्रेडिट होता है। डिजिटल रुपया: वॉलेट-से-वॉलेट हस्तांतरण तुरंत अंतिम होता है, नकद देने जैसा।
विकल्प C — सही कथन। UPI लेनदेन बैंक खातों से होकर जाता है, इसलिए बैंक स्टेटमेंट में दिखता है। डिजिटल रुपया वॉलेट-से-वॉलेट है, इसलिए व्यक्तिगत लेनदेन बैंक स्टेटमेंट में नहीं दिखता।
विकल्प D — गलत (यही उत्तर है)।
- UPI का पैसा = व्यावसायिक बैंक की जिम्मेदारी
- डिजिटल रुपया = RBI की जिम्मेदारी (क्योंकि RBI सीधे जारी करता है)
ये अलग-अलग हैं — "दोनों में जिम्मेदारी बैंकों की है" कहना गलत है।
निम्नलिखित में से कौन सा भारत के 'ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स' (ओएनडीसी) पहल के मुख्य उद्देश्य का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
विकल्प A — गलत। ONDC सरकार-नियंत्रित नहीं है — यह एक खुला, विकेंद्रीकृत बाज़ार बनाता है।
विकल्प B — गलत। ONDC Amazon/Flipkart जैसी कंपनियों की जगह नहीं लेता। बल्कि निजी ऐप्स ONDC नेटवर्क में शामिल होकर काम करते हैं।
विकल्प C — सही। ONDC का मुख्य उद्देश्य: कुछ बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ना — बाज़ार को खुला और इंटरऑपरेबल बनाकर, ताकि छोटे व्यवसाय, स्थानीय दुकानें और MSME सीधे ग्राहकों तक पहुँच सकें।
विकल्प D — गलत। ONDC को "ई-कॉमर्स का UPI" कहा जाता है क्योंकि यह वही खुला दर्शन अपनाता है, लेकिन यह UPI को एकमात्र भुगतान तरीका नहीं बनाता।
याद रखने की तरकीब: जैसे UPI ने एक भुगतान ऐप के एकाधिकार को तोड़ा, ONDC वही काम शॉपिंग ऐप्स के लिए करता है — बड़े प्लेटफार्मों का प्रभुत्व तोड़ना।
निम्नलिखित में से कौन राजकोषीय नीति के संदर्भ में 'क्राउडिंग आउट इफ़ेक्ट' का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 2 — सरकारी उधारी से ब्याज दरें बढ़ती हैं, जिससे निजी निवेश घटता है
सरल व्याख्या:
विकल्प A — गलत। यह विपरीत अवधारणा "Crowding In Effect" का वर्णन करता है — जो मंदी के दौरान होता है जब सरकारी खर्च निजी निवेश को भी बढ़ाता है।
विकल्प B — सही। Crowding Out ऐसे काम करता है:
- सरकार घाटे का बजट बनाती है → बाज़ार से भारी उधार लेती है
- अधिक उधारकर्ता एक ही धन-पूल के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं
- इससे ब्याज दरें बढ़ती हैं
- ऊँची ब्याज दरें निजी व्यवसायों के लिए कर्ज महंगा बनाती हैं
- इसलिए निजी निवेश घट जाता है
विकल्प C — गलत। अधिक कर का मतलब है लोगों के पास कम पैसा → निवेश घटना, बढ़ना नहीं।
विकल्प D — गलत। सरकारी खर्च मांग को बढ़ाता है। Crowding out का मतलब है शुद्ध प्रभाव कम हो सकता है, शून्य नहीं।
याद रखने की तरकीब: सरकार बहुत अधिक उधार लेती है → ब्याज दरें बढ़ती हैं → निजी क्षेत्र कर्ज बाज़ार से "बाहर धकेल दिया जाता है" (crowded out)।
विमानन क्षेत्र में बीमा के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
- 'एविएशन हल इंश्योरेंस' बॉडी, इंजन और ऑन-बोर्ड उपकरण सहित भौतिक विमान को कवर करता है।
- भारत सहित 130 से अधिक देशों द्वारा 1999 में अपनाए गए मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत, एयरलाइंस प्रत्येक मृत यात्री के परिवार/नामांकित व्यक्ति को परिवार से गलती साबित करने की आवश्यकता के बिना मुआवजा देने के लिए सख्ती से उत्तरदायी हैं।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। एविएशन हल इंश्योरेंस विमान की भौतिक संरचना को कवर करता है — बॉडी (फ्यूज़लेज), पंख, इंजन, और ऑनबोर्ड उपकरण। इसे मशीन का बीमा समझें, यात्रियों का नहीं।
कथन 2 — सही। मॉन्ट्रियल कन्वेंशन (1999) — भारत समेत 130+ देशों द्वारा हस्ताक्षरित — कहता है:
- एक निश्चित सीमा तक मृत्यु/चोट के दावों के लिए, एयरलाइन स्वचालित रूप से जिम्मेदार है
- परिवार को दोष साबित करने की आवश्यकता नहीं
- इसे "strict liability" कहा जाता है — उस सीमा तक मुआवज़ा निश्चित है
याद रखने की तरकीब:
- हल इंश्योरेंस = विमान की बॉडी का बीमा (मशीन)
- मॉन्ट्रियल कन्वेंशन = यात्रियों के लिए स्वचालित मुआवज़ा (दोष साबित किए बिना)
रियल-वर्ल्ड एसेट्स (आरडब्ल्यूए) टोकनाइजेशन के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- टोकनाइजेशन ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके वास्तविक दुनिया की संपत्तियों को डिजिटल टोकन में बदलने की प्रक्रिया है।
- वास्तविक दुनिया की संपत्तियों का टोकनीकरण वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हुए 24x7 पहुंच प्रदान करता है।
- वास्तविक दुनिया की संपत्तियों के टोकनीकरण से भारत में व्यक्तियों के लिए उच्च विकास निवेश के अवसरों तक पहुंच संभव हो सकेगी।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। टोकनाइज़ेशन = वास्तविक संपत्तियों (रियल एस्टेट, सोना, बॉन्ड) के स्वामित्व को डिजिटल टोकन में बदलना, ब्लॉकचेन पर।
कथन 2 — सही। पारंपरिक बाज़ारों के विपरीत (निश्चित समय, स्थान सीमा), टोकनयुक्त संपत्तियों का व्यापार 24x7, विश्व स्तर पर, तुरंत किया जा सकता है। महंगी संपत्तियों को छोटे, सस्ते हिस्सों में बाँटा जा सकता है — यही वित्तीय समावेशन है।
कथन 3 — सही। भारत में, यह उच्च-विकास क्षेत्रों (रियल एस्टेट, इन्फ्रास्ट्रक्चर) को सामान्य निवेशकों के लिए खोलता है। IFSCA (GIFT City) जैसी संस्थाएँ इसे पहले से मंज़ूरी दे रही हैं।
तीनों कथन एक ही अवधारणा के अलग-अलग लाभों का वर्णन करते हैं — कोई विरोधाभास नहीं।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- एमपीआई की गणना एल्किरे-फोस्टर पद्धति का उपयोग करके की जाती है।
- नीति आयोग द्वारा गणना की गई एमपीआई में कुल बारह संकेतक हैं।
- मातृ स्वास्थ्य और बैंक खाता नीति आयोग के एमपीआई और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के एमपीआई में सामान्य संकेतक हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। भारत का राष्ट्रीय MPI और वैश्विक MPI (UNDP) दोनों एक ही पद्धति का उपयोग करते हैं — Alkire-Foster पद्धति — जो किसी व्यक्ति की एक साथ हो रही कठिनाइयों को गिनती है।
कथन 2 — सही। भारत के राष्ट्रीय MPI (NITI Aayog द्वारा) में 12 संकेतक हैं:
- 10 मानक वैश्विक संकेतक बरकरार
- भारत के लिए 2 नए संकेतक जोड़े गए
कथन 3 — गलत। यहाँ जाल है: मातृत्व स्वास्थ्य और बैंक खाता दोनों सूचकांकों में समान नहीं हैं। ये केवल भारत के राष्ट्रीय MPI में हैं — अतिरिक्त/विशिष्ट संकेतक। वैश्विक MPI (UNDP) में केवल 10 हैं, इन दोनों के बिना।
याद रखने की तरकीब: भारत का MPI = वैश्विक के 10 + भारत के विशेष 2 (मातृत्व स्वास्थ्य + बैंक खाता) = 12। ये 2 अतिरिक्त केवल भारत में हैं, UNDP के साथ साझा नहीं।
भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- एनबीएफसी डिमांड डिपॉजिट स्वीकार नहीं कर सकते।
- भारत में कार्यरत सभी एनबीएफसी को RBI के साथ पंजीकृत होना होगा।
- एनबीएफसी भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा हैं और स्वयं आहरित चेक जारी कर सकते हैं।
- जमा स्वीकार करने वाली एनबीएफसी के जमाकर्ताओं के लिए जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) की जमा बीमा सुविधा उपलब्ध नहीं है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। NBFC डिमांड डिपॉज़िट नहीं ले सकते।
कथन 2 — गलत। सभी NBFC RBI के साथ पंजीकृत नहीं होतीं।
कथन 3 — गलत। NBFC भुगतान प्रणाली का हिस्सा नहीं हैं, चेक जारी नहीं कर सकतीं।
कथन 4 — सही। DICGC बीमा केवल बैंकों के लिए है, NBFC के लिए नहीं।
NBFC पर संक्षिप्त नोट्स (रिवीजन के लिए)
NBFC क्या है? कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत एक कंपनी, जो उधार, निवेश, लीजिंग आदि करती है — लेकिन बैंक नहीं है।
बैंक से प्रमुख अंतर:
| विशेषता | बैंक | NBFC |
|---|---|---|
| डिमांड डिपॉज़िट | ✅ अनुमति | ❌ नहीं |
| स्वयं चेक जारी | ✅ हाँ | ❌ नहीं |
| भुगतान प्रणाली का हिस्सा | ✅ हाँ | ❌ नहीं |
| DICGC बीमा | ✅ हाँ (₹5 लाख) | ❌ नहीं |
| CRR/SLR अनिवार्य | ✅ हाँ | ❌ नहीं |
| नियामक | RBI (हमेशा) | RBI या SEBI/IRDAI/MCA/राज्य सरकार |
NBFC के नियामक (RBI के अलावा):
- SEBI → वेंचर कैपिटल फंड्स
- IRDAI → बीमा कंपनियाँ
- कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय → निधि कंपनियाँ
- राज्य सरकारें → चिट फंड
NBFC के प्रकार:
- AFC, IFC, माइक्रोफाइनेंस NBFC, हाउसिंग फाइनेंस कंपनी आदि
महत्व:
- बैंकों से वंचित क्षेत्रों तक पहुँच (ग्रामीण, MSME)
- आसान कागज़ी कार्रवाई, तेज़ ऋण
- वित्तीय समावेशन में योगदान
भारत में विभिन्न समितियों के संदर्भ में, निम्नलिखित विवरणों पर विचार करें:
| Sl. No. | समिति | उद्देश्य | संगठन जिसके तहत इसका गठन किया गया था |
|---|---|---|---|
| 1. | आर.एन. मल्होत्रा समिति | भारत में बीमा क्षेत्र के व्यापक सुधार | भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) |
| 2. | एल.सी. गुप्ता समिति | भारत में डेरिवेटिव ट्रेडिंग की शुरुआत के लिए एक रोडमैप तैयार करना | भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) |
| 3. | उर्जित आर. पटेल समिति | आवास क्षेत्र को बैंक ऋण देने में सुधार के लिए एक रोडमैप तैयार करना | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) |
| 4. | Y.H. मालेगाम समिति | भारत में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में सुधारों के लिए एक रोडमैप तैयार करना | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) |
उपरोक्त पंक्तियों में से किस पंक्ति में सभी विवरण सही ढंग से मेल खाते हैं?
Detailed Explanation:
पंक्ति 1 — गलत। R.N. मल्होत्रा समिति (1993) भारत सरकार द्वारा बनाई गई, IRDAI द्वारा नहीं। वास्तव में IRDAI की स्थापना (1999) इसी समिति की सिफारिशों से हुई — तो IRDAI इससे पहले इसे कैसे बना सकती थी!
पंक्ति 2 — सही। L.C. गुप्ता समिति (1996), SEBI द्वारा, डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए।
पंक्ति 3 — गलत। उर्जित पटेल समिति (2013), RBI द्वारा — लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य था मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क सुधार, हाउसिंग सेक्टर नहीं।
पंक्ति 4 — सही। Y.H. मालेगाम समिति (2010), RBI द्वारा, माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र सुधार के लिए।
महत्वपूर्ण समितियाँ
| समिति | वर्ष | द्वारा गठित | वास्तविक उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| R.N. मल्होत्रा | 1993 | भारत सरकार | बीमा सुधार → IRDAI की स्थापना |
| L.C. गुप्ता | 1996 | SEBI | डेरिवेटिव ट्रेडिंग रोडमैप |
| उर्जित पटेल | 2013 | RBI | मॉनेटरी पॉलिसी सुधार; MPC की सिफारिश |
| Y.H. मालेगाम | 2010 | RBI | माइक्रोफाइनेंस नियमन |
| नरसिंहम समिति I | 1991 | भारत सरकार | बैंकिंग सुधार |
| नरसिंहम समिति II | 1998 | भारत सरकार | बैंकिंग सुधार (चरण 2) |
सामान्य जाल पैटर्न:
- समिति किसने बनाई (सरकार बनाम नियामक) में गड़बड़ी
- वास्तविक उद्देश्य को मिलते-जुलते उद्देश्य से बदलना
क्राउडफंडिंग के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है/हैं?
- क्राउडफंडिंग एक विशिष्ट परियोजना के लिए वेब-आधारित प्लेटफॉर्म या सोशल नेटवर्किंग साइट के माध्यम से कई निवेशकों से धन (छोटी राशि) का आग्रह है।
- छोटे और मध्यम उद्यम (एसएमई) कठोर प्रक्रियाओं से गुजरे बिना पूंजी की कम लागत पर धन जुटाने में सक्षम हैं।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। क्राउडफंडिंग (SEBI परिभाषा) = वेबसाइट/सोशल मीडिया के माध्यम से कई लोगों से छोटी राशि एकत्र करना, किसी विशेष परियोजना के लिए।
कथन 2 — सही। SMEs और स्टार्टअप्स के लिए क्राउडफंडिंग देती है:
- सस्ता वित्त पोषण (बैंक ऋण की तुलना में)
- कम कागज़ी कार्रवाई, गारंटी की आवश्यकता नहीं
- बड़े निवेशकों को इक्विटी हिस्सेदारी देने की ज़रूरत नहीं
क्राउडफंडिंग
परिभाषा (SEBI): वेब/सोशल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई निवेशकों से छोटी राशि की मांग, किसी विशेष परियोजना के लिए।
प्रकार:
| प्रकार | अर्थ |
|---|---|
| दान-आधारित | कोई वापसी नहीं (आपदा राहत) |
| पुरस्कार-आधारित | बदले में उत्पाद/लाभ |
| इक्विटी-आधारित | निवेशकों को शेयर |
| ऋण-आधारित (P2P) | ब्याज के साथ वापसी |
लाभ:
- सस्ता वित्त पोषण
- कम कागज़ी कार्रवाई
- वित्तीय समावेशन
जोखिम:
- नियमन की कमी
- धोखाधड़ी का खतरा
- भारत में इक्विटी क्राउडफंडिंग पर SEBI की सतर्कता
UPSC Prelims 2026 Questions Paper - Subject-wise Question Distribution
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
19 Qs (19%)भारतीय अर्थव्यवस्था
18 Qs (18%)अंतरराष्ट्रीय संबंध
11 Qs (11%)प्राचीन इतिहास
9 Qs (9%)भारतीय राजव्यवस्था
8 Qs (8%)पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी
8 Qs (8%)भारतीय कला और संस्कृति
7 Qs (7%)भारत का भूगोल
5 Qs (5%)आधुनिक इतिहास
5 Qs (5%)विश्व भूगोल
4 Qs (4%)नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा एवं अभिरुचि
3 Qs (3%)समसामयिकी
2 Qs (2%)आंतरिक सुरक्षा
1 Qs (1%)UPSC Prelims 2026 Question Paper - FAQs & Analysis
Q1 How many total questions were asked in UPSC Prelims 2026?
Q2 What is the subject-wise question breakdown for UPSC Prelims 2026?
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी: 19 questions (19%)
- भारतीय अर्थव्यवस्था: 18 questions (18%)
- अंतरराष्ट्रीय संबंध: 11 questions (11%)
- प्राचीन इतिहास: 9 questions (9%)
- भारतीय राजव्यवस्था: 8 questions (8%)
- पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी: 8 questions (8%)
- भारतीय कला और संस्कृति: 7 questions (7%)
- भारत का भूगोल: 5 questions (5%)
- आधुनिक इतिहास: 5 questions (5%)
- विश्व भूगोल: 4 questions (4%)
- नीतिशास्त्र, सत्यनिष्ठा एवं अभिरुचि: 3 questions (3%)
- समसामयिकी: 2 questions (2%)
- आंतरिक सुरक्षा: 1 questions (1%)