UPSC CSE Prelims
भारत की बैंकिंग संरचना Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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भारत में विभिन्न समितियों के संदर्भ में, निम्नलिखित विवरणों पर विचार करें:
| Sl. No. | समिति | उद्देश्य | संगठन जिसके तहत इसका गठन किया गया था |
|---|---|---|---|
| 1. | आर.एन. मल्होत्रा समिति | भारत में बीमा क्षेत्र के व्यापक सुधार | भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) |
| 2. | एल.सी. गुप्ता समिति | भारत में डेरिवेटिव ट्रेडिंग की शुरुआत के लिए एक रोडमैप तैयार करना | भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) |
| 3. | उर्जित आर. पटेल समिति | आवास क्षेत्र को बैंक ऋण देने में सुधार के लिए एक रोडमैप तैयार करना | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) |
| 4. | Y.H. मालेगाम समिति | भारत में माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में सुधारों के लिए एक रोडमैप तैयार करना | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) |
उपरोक्त पंक्तियों में से किस पंक्ति में सभी विवरण सही ढंग से मेल खाते हैं?
Detailed Explanation:
पंक्ति 1 — गलत। R.N. मल्होत्रा समिति (1993) भारत सरकार द्वारा बनाई गई, IRDAI द्वारा नहीं। वास्तव में IRDAI की स्थापना (1999) इसी समिति की सिफारिशों से हुई — तो IRDAI इससे पहले इसे कैसे बना सकती थी!
पंक्ति 2 — सही। L.C. गुप्ता समिति (1996), SEBI द्वारा, डेरिवेटिव ट्रेडिंग के लिए।
पंक्ति 3 — गलत। उर्जित पटेल समिति (2013), RBI द्वारा — लेकिन इसका वास्तविक उद्देश्य था मॉनेटरी पॉलिसी फ्रेमवर्क सुधार, हाउसिंग सेक्टर नहीं।
पंक्ति 4 — सही। Y.H. मालेगाम समिति (2010), RBI द्वारा, माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र सुधार के लिए।
महत्वपूर्ण समितियाँ
| समिति | वर्ष | द्वारा गठित | वास्तविक उद्देश्य |
|---|---|---|---|
| R.N. मल्होत्रा | 1993 | भारत सरकार | बीमा सुधार → IRDAI की स्थापना |
| L.C. गुप्ता | 1996 | SEBI | डेरिवेटिव ट्रेडिंग रोडमैप |
| उर्जित पटेल | 2013 | RBI | मॉनेटरी पॉलिसी सुधार; MPC की सिफारिश |
| Y.H. मालेगाम | 2010 | RBI | माइक्रोफाइनेंस नियमन |
| नरसिंहम समिति I | 1991 | भारत सरकार | बैंकिंग सुधार |
| नरसिंहम समिति II | 1998 | भारत सरकार | बैंकिंग सुधार (चरण 2) |
सामान्य जाल पैटर्न:
- समिति किसने बनाई (सरकार बनाम नियामक) में गड़बड़ी
- वास्तविक उद्देश्य को मिलते-जुलते उद्देश्य से बदलना
भारत में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- एनबीएफसी डिमांड डिपॉजिट स्वीकार नहीं कर सकते।
- भारत में कार्यरत सभी एनबीएफसी को RBI के साथ पंजीकृत होना होगा।
- एनबीएफसी भुगतान और निपटान प्रणाली का हिस्सा हैं और स्वयं आहरित चेक जारी कर सकते हैं।
- जमा स्वीकार करने वाली एनबीएफसी के जमाकर्ताओं के लिए जमा बीमा और क्रेडिट गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) की जमा बीमा सुविधा उपलब्ध नहीं है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। NBFC डिमांड डिपॉज़िट नहीं ले सकते।
कथन 2 — गलत। सभी NBFC RBI के साथ पंजीकृत नहीं होतीं।
कथन 3 — गलत। NBFC भुगतान प्रणाली का हिस्सा नहीं हैं, चेक जारी नहीं कर सकतीं।
कथन 4 — सही। DICGC बीमा केवल बैंकों के लिए है, NBFC के लिए नहीं।
NBFC पर संक्षिप्त नोट्स (रिवीजन के लिए)
NBFC क्या है? कंपनी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत एक कंपनी, जो उधार, निवेश, लीजिंग आदि करती है — लेकिन बैंक नहीं है।
बैंक से प्रमुख अंतर:
| विशेषता | बैंक | NBFC |
|---|---|---|
| डिमांड डिपॉज़िट | ✅ अनुमति | ❌ नहीं |
| स्वयं चेक जारी | ✅ हाँ | ❌ नहीं |
| भुगतान प्रणाली का हिस्सा | ✅ हाँ | ❌ नहीं |
| DICGC बीमा | ✅ हाँ (₹5 लाख) | ❌ नहीं |
| CRR/SLR अनिवार्य | ✅ हाँ | ❌ नहीं |
| नियामक | RBI (हमेशा) | RBI या SEBI/IRDAI/MCA/राज्य सरकार |
NBFC के नियामक (RBI के अलावा):
- SEBI → वेंचर कैपिटल फंड्स
- IRDAI → बीमा कंपनियाँ
- कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय → निधि कंपनियाँ
- राज्य सरकारें → चिट फंड
NBFC के प्रकार:
- AFC, IFC, माइक्रोफाइनेंस NBFC, हाउसिंग फाइनेंस कंपनी आदि
महत्व:
- बैंकों से वंचित क्षेत्रों तक पहुँच (ग्रामीण, MSME)
- आसान कागज़ी कार्रवाई, तेज़ ऋण
- वित्तीय समावेशन में योगदान
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
कथन-I: सिंडिकेटेड ऋण देना उधारकर्ता की चूक के जोखिम को कई ऋणदाताओं में फैलाता है।
कथन-II: सिंडिकेटेड ऋण धन की एक निश्चित राशि/एकमुश्त राशि हो सकती है, लेकिन यह क्रेडिट लाइन नहीं हो सकती।
उपर्युक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — कथन-I सही है, लेकिन कथन-II गलत है
सिंडिकेटेड ऋण देना एक वित्तीय व्यवस्था है जहां कई ऋणदाता सामूहिक रूप से एक उधारकर्ता को ऋण प्रदान करते हैं, जिससे सभी भाग लेने वाले ऋणदाताओं के बीच ऋण जोखिम वितरित हो जाता है। कथन-II गलत है क्योंकि सिंडिकेटेड ऋण विभिन्न रूप ले सकते हैं जिनमें न केवल निश्चित राशि वाले सावधि ऋण बल्कि रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधाएं (क्रेडिट लाइन) भी शामिल हैं, जिससे उधारकर्ताओं को लचीलापन मिलता है।
✅ कथन-I – सही: सिंडिकेटेड ऋण देना स्वाभाविक रूप से उधारकर्ता की चूक के जोखिम को कई ऋणदाताओं में फैलाता है क्योंकि प्रत्येक ऋणदाता कुल ऋण राशि का केवल एक हिस्सा योगदान करता है।
❌ कथन-II – गलत: सिंडिकेटेड ऋण निश्चित राशि/एकमुश्त धन के साथ-साथ रिवॉल्विंग क्रेडिट लाइन भी हो सकते हैं, जो उधारकर्ताओं को विभिन्न वित्तपोषण विकल्प प्रदान करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: सिंडिकेटेड ऋण
- परिभाषा: ऋणदाताओं के एक समूह (सिंडिकेट) द्वारा एक एकल उधारकर्ता को दिया गया ऋण, आमतौर पर बड़े पैमाने पर वित्तपोषण आवश्यकताओं के लिए।
- लीड एरेंजर: एक या अधिक बैंक लीड एरेंजर के रूप में कार्य करते हैं जो ऋण की संरचना करते हैं, शर्तों पर बातचीत करते हैं और अन्य ऋणदाताओं के साथ समन्वय करते हैं।
- प्रकार: सावधि ऋण (एक बार में वितरित निश्चित राशि) या रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधाएं (क्रेडिट लाइन जिसे निकाला, चुकाया और पुनः निकाला जा सकता है) हो सकते हैं।
- जोखिम वितरण: प्रत्येक ऋणदाता ऋण जोखिम का केवल आनुपातिक हिस्सा वहन करता है, जिससे यह बड़े ऋणों के लिए आकर्षक बन जाता है।
- सामान्य उपयोग: बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, कॉर्पोरेट अधिग्रहण, बड़े पूंजीगत व्यय और मौजूदा ऋण का पुनर्वित्त।
- लाभ: बड़ी ऋण राशियों तक पहुंच, ऋणदाताओं के लिए जोखिम का विविधीकरण, और उधारकर्ताओं के लिए प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण।
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'बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB)' के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
- RBI के गवर्नर BBB के अध्यक्ष होते हैं।
- BBB सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के चयन की अनुशंसा करता है।
- BBB सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को रणनीतियाँ और पूंजी जुटाने की योजनाएँ विकसित करने में सहायता करता है।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) 2016 में स्थापित एक स्वायत्त निकाय था, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की अनुशंसा करने और रणनीतिक योजना में उनकी सहायता करने के लिए बनाया गया था। कथन 1 गलत है क्योंकि BBB का नेतृत्व सरकार द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र अध्यक्ष करते थे, न कि RBI गवर्नर। कथन 2 और 3 सही हैं क्योंकि ये BBB के मुख्य उद्देश्य थे।
❌ कथन 1 – गलत: BBB का नेतृत्व केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक स्वतंत्र अध्यक्ष करते थे, न कि RBI गवर्नर।
✅ कथन 2 – सही: BBB सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों (पूर्णकालिक निदेशक और गैर-कार्यकारी अध्यक्ष) के चयन के लिए उम्मीदवारों की अनुशंसा करता था।
✅ कथन 3 – सही: BBB PSBs को व्यावसायिक रणनीतियाँ, पूंजी जुटाने की योजनाएँ तैयार करने और कॉर्पोरेट प्रशासन में सुधार में सहायता करता था।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) और FSIB
- बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB): सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रशासन को व्यावसायिक बनाने के लिए फरवरी 2016 में एक स्वायत्त निकाय के रूप में स्थापित किया गया।
- अध्यक्ष: सरकार द्वारा नियुक्त स्वतंत्र विशेषज्ञ (प्रथम अध्यक्ष: विनोद राय, पूर्व CAG)।
- मुख्य कार्य: PSBs के CMD और पूर्णकालिक निदेशकों के चयन की अनुशंसा; बैंकों को रणनीति निर्माण, पूंजी जुटाने और प्रशासन सुधार में सहायता; प्रदर्शन सुधार पर PSB बोर्डों से संवाद।
- FSIB द्वारा प्रतिस्थापित: जुलाई 2022 में, सरकार ने BBB को विस्तृत अधिदेश के साथ वित्तीय सेवा संस्थान ब्यूरो (FSIB) से प्रतिस्थापित किया।
- FSIB के कार्य: PSBs, सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के लिए नियुक्तियों की अनुशंसा; प्रदर्शन मैट्रिक्स तैयार करना; बोर्ड संरचना पर अनुशंसा।
- FSIB की संरचना: अध्यक्ष (स्वतंत्र विशेषज्ञ) और सदस्य जिनमें सरकारी अधिकारी और स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल हैं।
भारत में 'शहरी सहकारी बैंकों' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
वे राज्य सरकारों द्वारा गठित स्थानीय बोर्डों द्वारा पर्यवेक्षित और विनियमित होते हैं।
वे इक्विटी शेयर और पूर्वाधिकार शेयर जारी कर सकते हैं।
उन्हें 1966 में एक संशोधन के माध्यम से बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के दायरे में लाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
यह प्रश्न भारत में शहरी सहकारी बैंकों की नियामक संरचना और शक्तियों के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। कथन 1 गलत है क्योंकि शहरी सहकारी बैंक संयुक्त रूप से RBI और राज्य सरकारों द्वारा विनियमित होते हैं, न कि केवल राज्य सरकारों द्वारा गठित स्थानीय बोर्डों द्वारा। कथन 2 और 3 उनकी पूंजी जुटाने की शक्तियों और विधायी इतिहास के संबंध में सही हैं।
❌ कथन 1 – गलत: शहरी सहकारी बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और संबंधित राज्य सरकारों द्वारा दोहरे नियंत्रण संरचना के तहत संयुक्त रूप से विनियमित होते हैं, न कि केवल राज्य सरकारों द्वारा गठित स्थानीय बोर्डों द्वारा। बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 ने शहरी सहकारी बैंकों पर RBI की नियामक निगरानी को और मजबूत किया।
✅ कथन 2 – सही: शहरी सहकारी बैंक पूंजी जुटाने के लिए इक्विटी शेयर और पूर्वाधिकार शेयर जारी कर सकते हैं, जैसा कि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 के तहत अनुमति दी गई है, RBI की मंजूरी के अधीन, जो उन्हें अपने पूंजी आधार को मजबूत करने में मदद करता है।
✅ कथन 3 – सही: शहरी सहकारी बैंकों को 1966 में एक संशोधन के माध्यम से बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के दायरे में लाया गया था, जिसने RBI को उनके बैंकिंग संचालन पर नियामक शक्तियां दीं जबकि प्रशासनिक नियंत्रण राज्य सहकारी कानूनों के साथ बना रहा।
📝 संक्षिप्त नोट्स: शहरी सहकारी बैंक (UCBs)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| परिभाषा | शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में काम करने वाली प्राथमिक सहकारी ऋण समितियां, जो छोटे व्यवसायों, कारीगरों और मध्यम वर्ग को बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं प्रदान करती हैं |
| दोहरा विनियमन | RBI (बैंकिंग संचालन) और राज्य सरकारों/केंद्रीय रजिस्ट्रार (सहकारी समिति अधिनियमों के तहत प्रशासनिक और प्रबंधन पहलू) दोनों द्वारा विनियमित |
| विधायी इतिहास | बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 में 1966 का संशोधन शहरी सहकारी बैंकों को बैंकिंग कार्यों के लिए RBI के नियामक दायरे में लाया |
| 2020 संशोधन | बैंकिंग विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2020 ने शहरी सहकारी बैंकों पर RBI की शक्तियों को बढ़ाया जिसमें बोर्डों का अधिक्रमण, निदेशकों को हटाना, और विलय/पुनर्निर्माण शक्तियां शामिल हैं |
| पूंजी जुटाना | RBI की मंजूरी से इक्विटी शेयर, पूर्वाधिकार शेयर और असुरक्षित डिबेंचर जारी कर सकते हैं (2020 संशोधन के बाद) |
| प्रकार | अनुसूचित शहरी सहकारी बैंक (RBI की दूसरी अनुसूची में सूचीबद्ध) और गैर-अनुसूचित शहरी सहकारी बैंक |
| महत्व | वित्तीय समावेशन के लिए महत्वपूर्ण, शहरी क्षेत्रों में वाणिज्यिक बैंकों के विकल्प के रूप में काम करते हैं, लघु-स्तरीय उद्योगों और स्व-नियोजित व्यक्तियों का समर्थन करते हैं |
भारत में किसी फर्म के "ब्याज कवरेज अनुपात" (Interest Coverage Ratio) शब्द का क्या महत्व है?
- यह एक फर्म के वर्तमान जोखिम को समझने में मदद करता है जिसे बैंक ऋण देने जा रहा है।
- यह एक फर्म के उभरते जोखिम का मूल्यांकन करने में मदद करता है जिसे बैंक ऋण देने जा रहा है।
- ऋण लेने वाली फर्म का ब्याज कवरेज अनुपात का स्तर जितना अधिक होगा, अपने ऋण की सेवा करने की उसकी क्षमता उतनी ही खराब होगी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
ब्याज कवरेज अनुपात (ICR) एक प्रमुख वित्तीय मीट्रिक है जिसका उपयोग बैंकों और लेनदारों द्वारा किसी फर्म की अपनी परिचालन आय से ब्याज दायित्वों को पूरा करने की क्षमता का आकलन करने के लिए किया जाता है। यह वर्तमान साख योग्यता और उधार लेने वाली फर्म के उभरते वित्तीय जोखिमों दोनों का मूल्यांकन करने में मदद करता है।
✅ कथन 1 – सही: ICR वर्तमान जोखिम को समझने में मदद करता है क्योंकि यह दर्शाता है कि क्या फर्म के पास वर्तमान में ब्याज भुगतान को कवर करने के लिए पर्याप्त आय है; कम ICR ऋण सेवा में तत्काल कठिनाई का संकेत देता है।
✅ कथन 2 – सही: ICR उभरते जोखिमों का मूल्यांकन करने में भी मदद करता है; समय के साथ ICR में गिरावट की प्रवृत्ति बढ़ते वित्तीय तनाव और भविष्य में संभावित डिफॉल्ट जोखिम को दर्शाती है।
❌ कथन 3 – गलत: उच्च ICR ऋण सेवा की बेहतर क्षमता को दर्शाता है, खराब नहीं; इसका मतलब है कि फर्म के पास ब्याज दायित्वों को पूरा करने के लिए आरामदायक आय कुशन है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: ब्याज कवरेज अनुपात (ICR)
- परिभाषा: ICR = ब्याज और कर से पूर्व आय (EBIT) ÷ ब्याज व्यय। यह मापता है कि कंपनी अपने परिचालन लाभ से कितनी बार अपने ब्याज दायित्वों का भुगतान कर सकती है।
- व्याख्या: 2.5 या उससे अधिक का ICR आमतौर पर स्वस्थ माना जाता है, जिसका अर्थ है कि कंपनी अपने ब्याज दायित्वों का कम से कम 2.5 गुना कमाती है।
- जोखिम मूल्यांकन: 1.5 से नीचे का ICR आमतौर पर जोखिमपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यह ब्याज भुगतान को आराम से कवर करने के लिए अपर्याप्त आय बफर को दर्शाता है।
- बैंकिंग उपयोग: बैंक ऋण पात्रता और ब्याज दरों को निर्धारित करने के लिए क्रेडिट मूल्यांकन में एक महत्वपूर्ण मापदंड के रूप में ICR का उपयोग करते हैं; कम ICR ऋण अस्वीकृति या उच्च ब्याज दरों का कारण बन सकता है।
- प्रवृत्ति विश्लेषण: गिरती हुई ICR प्रवृत्ति बिगड़ते वित्तीय स्वास्थ्य और बढ़ते डिफॉल्ट जोखिम का संकेत देती है, भले ही वर्तमान अनुपात स्वीकार्य प्रतीत हो।
- सीमा: ICR मूलधन पुनर्भुगतान दायित्वों को ध्यान में नहीं रखता; यह केवल ब्याज का भुगतान करने की क्षमता को मापता है, कुल ऋण सेवा क्षमता को नहीं।
भारत में एक वाणिज्यिक बैंक की परिसंपत्तियों में निम्नलिखित में से क्या शामिल नहीं है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — जमा राशियाँ
जमा राशियाँ एक वाणिज्यिक बैंक के लिए देयताएं हैं, परिसंपत्तियां नहीं। वे उस धन का प्रतिनिधित्व करती हैं जो ग्राहकों ने बैंक में रखा है, जिसे बैंक मांग पर या एक निर्दिष्ट समय पर वापस करने के लिए बाध्य है। इसके विपरीत, अग्रिम (ऋण), निवेश, और मांग पर तथा अल्प सूचना पर उधार दी गई राशि सभी परिसंपत्तियां हैं क्योंकि वे बैंक के स्वामित्व वाले संसाधनों या उसे देय धन का प्रतिनिधित्व करती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बैंक तुलन पत्र - परिसंपत्तियां बनाम देयताएं
| परिसंपत्तियां (बैंक का स्वामित्व) | देयताएं (बैंक का दायित्व) |
|---|---|
| नकदी: हाथ में और RBI के पास मुद्रा | जमा राशियाँ: मांग जमा, बचत जमा, सावधि जमा |
| RBI के पास शेष: वैधानिक आरक्षित निधि (CRR) | उधार: RBI, अन्य बैंकों और वित्तीय संस्थानों से |
| अन्य बैंकों के पास शेष: अंतर-बैंक जमा | अन्य देयताएं: देय बिल, प्रावधान |
| मांग पर और अल्प सूचना पर राशि: अन्य बैंकों को अल्पकालिक उधार | पूंजी और आरक्षित निधि: शेयर पूंजी, आरक्षित निधि और अधिशेष |
| निवेश: सरकारी प्रतिभूतियां, बांड, शेयर | |
| अग्रिम/ऋण: ग्राहकों को ऋण, ओवरड्राफ्ट, नकद साख | |
| स्थिर परिसंपत्तियां: बैंक परिसर, उपकरण, फर्नीचर |
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अध्यक्ष का चयन किसके द्वारा किया जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — बैंक बोर्ड ब्यूरो
भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अध्यक्षों का चयन बैंक बोर्ड ब्यूरो (BBB) द्वारा किया जाता है, जो पी.जे. नायक समिति रिपोर्ट (2014) की सिफारिशों के आधार पर 2016 में स्थापित एक स्वायत्त निकाय है। BBB सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) और राज्य के स्वामित्व वाली वित्तीय संस्थानों में निदेशक मंडल और शीर्ष प्रबंधन पदों पर नियुक्तियों के लिए उम्मीदवारों की सिफारिश करने के लिए जिम्मेदार है, जिससे चयन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और व्यावसायिकता आती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: बैंक बोर्ड ब्यूरो
- स्थापना: बैंक बोर्ड ब्यूरो की स्थापना 28 फरवरी 2016 को भारत सरकार द्वारा एक स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी।
- उत्पत्ति: यह PSBs में शासन सुधारों पर पी.जे. नायक समिति रिपोर्ट (2014) की सिफारिशों के आधार पर गठित किया गया था।
- मुख्य कार्य: PSBs के पूर्णकालिक निदेशकों और गैर-कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति के लिए व्यक्तियों की सिफारिश करना; बैंकों को रणनीति और पूंजी जुटाने की योजनाएं विकसित करने में सहायता करना; बैंक बोर्डों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना।
- संरचना: BBB में बैंकिंग और वित्त क्षेत्रों के प्रतिष्ठित पेशेवर शामिल हैं, जिनमें पूर्व RBI गवर्नर, बैंकर और उद्योग विशेषज्ञ शामिल हैं।
- उद्देश्य: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और वित्तीय संस्थानों में शासन में सुधार, व्यावसायिकता बढ़ाना और योग्यता-आधारित चयन सुनिश्चित करना।
- स्थिति: BBB एक स्वायत्त निकाय के रूप में कार्य करता है लेकिन सरकार को सिफारिशें प्रदान करता है, जो अंतिम नियुक्तियां करती है।
निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए:
- भारत के किसी राज्य में पहली लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार का गठन।
- भारत के तत्कालीन सबसे बड़े बैंक, 'इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया' का नाम बदलकर 'स्टेट बैंक ऑफ इंडिया' कर दिया गया।
- एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया और यह राष्ट्रीय वाहक बन गया।
- गोआ स्वतंत्र भारत का हिस्सा बन गया।
उपर्युक्त घटनाओं का सही कालानुक्रमिक क्रम निम्नलिखित में से कौन सा है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — 3 - 2 - 1 - 4
इन ऐतिहासिक घटनाओं का सही कालानुक्रमिक क्रम उनकी घटना की तिथियों द्वारा निर्धारित होता है: एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण (1953), इम्पीरियल बैंक का नाम बदलकर SBI (1955), केरल में पहली लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित कम्युनिस्ट सरकार (1957), और गोवा का भारत में एकीकरण (1961)।
कालानुक्रमिक विश्लेषण:
घटना 3 – एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण (1953): एयर कॉर्पोरेशन अधिनियम, 1953 के बाद एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण किया गया, जब भारत सरकार ने टाटा समूह से बहुमत हिस्सेदारी अधिग्रहित की और इसे राष्ट्रीय वाहक बनाया।
घटना 2 – इम्पीरियल बैंक का नाम बदलकर SBI (1955): गोरेवाला समिति की सिफारिशों के आधार पर, भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम पारित किया गया, और 1 जुलाई, 1955 को इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया का आधिकारिक रूप से नाम बदलकर भारतीय स्टेट बैंक कर दिया गया।
घटना 1 – पहली कम्युनिस्ट सरकार (1957): 1957 के केरल विधानसभा चुनावों में, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने बहुमत जीता, और ई.एम.एस. नंबूदरीपाद ने सरकार बनाई, जो किसी भी भारतीय राज्य में पहली लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित कम्युनिस्ट सरकार थी।
घटना 4 – गोवा का एकीकरण (1961): 19 दिसंबर, 1961 को ऑपरेशन विजय के माध्यम से गोवा को पुर्तगाली शासन से मुक्त कराया गया और बाद में 12वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1962 द्वारा इसे केंद्र शासित प्रदेश के रूप में भारत में शामिल किया गया।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वतंत्रता के बाद के मील के पत्थर (1950-60 का दशक)
| वर्ष | घटना | महत्व |
|---|---|---|
| 1953 | एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण | एयर कॉर्पोरेशन अधिनियम, 1953; राष्ट्रीय वाहक की स्थापना |
| 1955 | भारतीय स्टेट बैंक का गठन | इम्पीरियल बैंक का नाम बदला गया; गोरेवाला समिति (अखिल भारतीय ग्रामीण ऋण सर्वेक्षण समिति) की सिफारिशों के आधार पर |
| 1957 | पहली कम्युनिस्ट सरकार | केरल - ई.एम.एस. नंबूदरीपाद के नेतृत्व में CPI; विश्वभर में पहली लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित कम्युनिस्ट सरकार |
| 1961 | गोवा मुक्ति | ऑपरेशन विजय (19 दिसंबर); पुर्तगाली शासन के 451 वर्षों का अंत |
| 1962 | गोवा का संवैधानिक एकीकरण | 12वां संवैधानिक संशोधन अधिनियम; केंद्र शासित प्रदेश का दर्जा |
| 1987 | गोवा को राज्य का दर्जा | गोवा भारत का 25वां राज्य बना (30 मई) |
भारत में लघु वित्त बैंकों (Small Finance Banks - SFBs) की स्थापना का उद्देश्य क्या है?
- लघु व्यवसाय इकाइयों को ऋण प्रदान करना
- लघु और सीमांत किसानों को ऋण प्रदान करना
- युवा उद्यमियों को विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
लघु वित्त बैंकों (SFBs) की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जनसंख्या के असेवित और अल्पसेवित वर्गों को बुनियादी बैंकिंग सेवाएं प्रदान करके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए की गई थी। इनका प्राथमिक उद्देश्य लघु व्यवसाय इकाइयों, लघु और सीमांत किसानों, सूक्ष्म और लघु उद्योगों तथा असंगठित क्षेत्र की इकाइयों को ऋण प्रदान करना है।
✅ कथन 1 – सही: SFBs विशेष रूप से वित्तीय समावेशन के अपने मुख्य उद्देश्य के भाग के रूप में लघु व्यवसाय इकाइयों को ऋण सुविधाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
✅ कथन 2 – सही: लघु और सीमांत किसानों को ऋण प्रदान करना कृषि और ग्रामीण विकास को समर्थन देने के लिए SFBs के प्राथमिक उद्देश्यों में से एक है।
❌ कथन 3 – गलत: यद्यपि SFBs युवा उद्यमियों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचा सकते हैं, उनका प्राथमिक उद्देश्य विशेष रूप से युवा उद्यमियों को ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना नहीं है; यह MUDRA या स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाओं के साथ अधिक संरेखित है।
RBI द्वारा घोषित 'मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR)' का/के उद्देश्य क्या है/हैं?
- ये दिशानिर्देश बैंकों द्वारा अग्रिमों पर ब्याज दरें निर्धारित करने के लिए अपनाई गई पद्धति में पारदर्शिता सुधारने में मदद करते हैं
- ये दिशानिर्देश बैंक ऋण की उपलब्धता और ऐसी ब्याज दरें सुनिश्चित करने में मदद करते हैं जो उधारकर्ताओं के साथ-साथ बैंकों के लिए भी उचित हों
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
✅ कथन 1 – सही: MCLR ढांचा बैंकों को उधार दरें निर्धारित करने के लिए एक मानकीकृत, पारदर्शी पद्धति अपनाने का आदेश देता है। बैंकों को अपने MCLR गणना घटकों (निधियों की सीमांत लागत, परिचालन लागत, अवधि प्रीमियम और नकारात्मक वहन) को सार्वजनिक रूप से प्रकट करना होता है, जो पहले की आधार दर प्रणाली की तुलना में पारदर्शिता में सुधार करता है।
✅ कथन 2 – सही: MCLR उधार दरों को निधियों की वास्तविक सीमांत लागत से जोड़कर निष्पक्षता सुनिश्चित करता है, जिससे उधारकर्ताओं को नीति दर परिवर्तनों का तेज़ संचरण संभव होता है। यह उधारकर्ता हितों (जब RBI दरें घटाता है तो कम दरें) और बैंक व्यवहार्यता (लागत कवर करना और उचित मार्जिन बनाए रखना) के बीच संतुलन बनाता है, जिससे ऋण की उपलब्धता और उचित मूल्य निर्धारण दोनों सुनिश्चित होते हैं।
'कोर बैंकिंग सॉल्यूशन' शब्द कभी-कभी समाचारों में देखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन इस शब्द का सर्वोत्तम वर्णन करता है/करते हैं?
- यह एक बैंक की शाखाओं की नेटवर्किंग है जो ग्राहकों को अपने खाते किसी भी शाखा से संचालित करने में सक्षम बनाती है, चाहे उन्होंने अपने खाते कहीं भी खोले हों।
- यह कम्प्यूटरीकरण के माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों पर RBI के नियंत्रण को बढ़ाने का प्रयास है।
- यह एक विस्तृत प्रक्रिया है जिसके द्वारा भारी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों वाले बैंक को किसी अन्य बैंक द्वारा अधिग्रहित किया जाता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
✅ कथन 1 – सही: कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) एक केंद्रीकृत बैंकिंग प्रणाली है जो बैंक की सभी शाखाओं को नेटवर्क करती है, जिससे ग्राहक अपने खाते नेटवर्क की किसी भी शाखा से संचालित कर सकते हैं और बैंकिंग लेनदेन कर सकते हैं, चाहे खाता मूल रूप से कहीं भी खोला गया हो। यह बैंक के नेटवर्क के भीतर 'कभी भी, कहीं भी' बैंकिंग प्रदान करता है।
❌ कथन 2 – गलत: CBS वाणिज्यिक बैंकों पर RBI के नियंत्रण को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। यह व्यक्तिगत बैंकों द्वारा अपनाया गया एक आंतरिक बैंकिंग सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है जो परिचालन दक्षता बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और ग्राहक सेवा वितरण में सुधार के लिए है।
❌ कथन 3 – गलत: CBS दैनिक बैंकिंग कार्यों जैसे जमा, निकासी और खाता प्रबंधन के प्रबंधन के लिए केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर बुनियादी ढांचे को संदर्भित करता है। इसका बैंक अधिग्रहण या गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) के समाधान की प्रक्रियाओं से कोई संबंध नहीं है।
जब भारतीय रिज़र्व बैंक सांविधिक तरलता अनुपात में 50 आधार अंकों की कमी करता है, तो निम्नलिखित में से क्या होने की संभावना है?
Detailed Explanation:
सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) वह न्यूनतम प्रतिशत है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और समय देनदारियों (NDTL) का तरल परिसंपत्तियों (नकदी, सोना, सरकारी प्रतिभूतियां) में बनाए रखना होता है।
✅ कथन 3 – सही: SLR में 50 आधार अंकों की कमी करने से सरकारी प्रतिभूतियों में बंधी निधियां मुक्त होती हैं, जिससे बैंकों के पास ऋण योग्य निधियां बढ़ती हैं और वे उधार को प्रोत्साहित करने के लिए ऋण दरों में कटौती कर सकते हैं।
❌ कथन 1 – गलत: SLR में कमी एक मौद्रिक नीति साधन है जिसका मध्यम प्रभाव होता है; GDP वृद्धि कई कारकों पर निर्भर करती है, एक नीतिगत बदलाव से 'भारी' वृद्धि नहीं होती।
❌ कथन 2 – गलत: विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ब्याज दर अंतर, इक्विटी बाजार रिटर्न और वैश्विक स्थितियों पर प्रतिक्रिया देते हैं, घरेलू SLR समायोजन पर नहीं।
❌ कथन 4 – गलत: SLR में कमी से ऋण देने के लिए निधियां जारी होकर बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ती है, घटती नहीं।
निम्नलिखित तरल परिसंपत्तियों पर विचार कीजिए:
- बैंकों के पास मांग जमा
- बैंकों के पास सावधि जमा
- बैंकों के पास बचत जमा
- मुद्रा
इनके घटते क्रम में तरलता का सही क्रम है
Detailed Explanation:
तरलता का अर्थ है किसी परिसंपत्ति को बिना मूल्य हानि के नकद में बदलने की सुगमता और गति।
मुद्रा सबसे अधिक तरल परिसंपत्ति है क्योंकि यह पहले से ही नकद रूप में होती है।
मांग जमा को किसी भी समय मांग पर बिना सूचना या जुर्माने के निकाला जा सकता है, जो इसे अत्यधिक तरल बनाता है।
बचत जमा को निकाला जा सकता है लेकिन पूर्व सूचना या निकासी सीमा की आवश्यकता हो सकती है, जो इसे मध्यम तरल बनाता है।
सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) की एक निश्चित परिपक्वता अवधि होती है और समय से पहले निकासी पर जुर्माना लगता है, जो इसे सबसे कम तरल बनाता है।
तरलता का घटता क्रम: मुद्रा (4) > मांग जमा (1) > बचत जमा (3) > सावधि जमा (2) = 4-1-3-2
भारत में बैंकों द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending) में निम्नलिखित को ऋण देना शामिल है:
Detailed Explanation:
प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (PSL) के तहत बैंकों को समायोजित शुद्ध बैंक ऋण (ANBC) का 40% निर्धारित क्षेत्रों को आवंटित करना अनिवार्य है, जिसमें कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ, सूक्ष्म और लघु उद्यम, कमजोर वर्ग (निम्न आय समूह, शिक्षा के लिए छात्र, आवास), निर्यात ऋण, नवीकरणीय ऊर्जा और सामाजिक बुनियादी ढाँचा शामिल हैं।
तीनों विकल्प – कृषि, सूक्ष्म और लघु उद्यम, और कमजोर वर्ग – स्पष्ट रूप से RBI के PSL दिशानिर्देशों में शामिल हैं, इसलिए विकल्प 4 सही उत्तर है।
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