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मुद्रा का विकास एवं कार्य Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित में से कौन सा कथन वैध मुद्रा (legal tender money) के अर्थ का सही वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — वह मुद्रा जिसे लेनदार अपने दावों के निपटान में स्वीकार करने के लिए बाध्य है
वैध मुद्रा भुगतान का कोई भी रूप है जो कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है और जिसे लेनदार ऋण या वित्तीय दायित्व के निपटान के लिए स्वीकार करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। वैध मुद्रा की परिभाषित विशेषता लेनदार पर कानूनी बाध्यता है—यदि कोई देनदार दावे के निपटान के लिए वैध मुद्रा प्रस्तुत करता है, तो लेनदार इसे अस्वीकार नहीं कर सकता और बाद में ऋण के भुगतान न करने के लिए मुकदमा नहीं कर सकता।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं:
❌ विकल्प 1 – गलत: यह 'वैध मुद्रा' को कानूनी कार्यवाही में उपयोग की जाने वाली मुद्रा के रूप में गलत व्याख्या करता है, जो सही परिभाषा नहीं है।
❌ विकल्प 3 – गलत: चेक, ड्राफ्ट और विनिमय पत्र 'विश्वासपूर्ण मुद्रा' हैं जिनकी स्वीकृति पक्षों के बीच विश्वास पर निर्भर करती है; लेनदार उन्हें स्वीकार करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं और नकद भुगतान पर जोर दे सकते हैं।
❌ विकल्प 4 – गलत: वैध मुद्रा में धात्विक सिक्के और कागजी मुद्रा नोट दोनों शामिल हैं; इसे केवल धात्विक मुद्रा के रूप में परिभाषित करना अपूर्ण है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वैध मुद्रा
- परिभाषा: वैध मुद्रा भुगतान का वह रूप है जिसे किसी क्षेत्राधिकार में ऋण और दायित्वों के निपटान के लिए कानून द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए।
- भारत में: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी मुद्रा नोट और भारत सरकार द्वारा जारी सिक्के भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 और सिक्का अधिनियम, 2011 के तहत वैध मुद्रा हैं।
- कानूनी बाध्यता: लेनदार ऋण निपटान के लिए प्रस्तुत वैध मुद्रा को अस्वीकार नहीं कर सकता; अस्वीकृति के परिणामस्वरूप देनदार दायित्व से मुक्त हो सकता है।
- सिक्कों पर सीमाएं: सिक्का अधिनियम, 2011 के तहत, सिक्के केवल निश्चित सीमाओं तक वैध मुद्रा हैं (जैसे, ₹10 और उससे कम मूल्य के सिक्कों के लिए ₹1,000)।
- बैंक मुद्रा बनाम वैध मुद्रा: चेक, ड्राफ्ट और विनिमय पत्र वैध मुद्रा नहीं हैं क्योंकि उनकी स्वीकृति स्वैच्छिक है और पारस्परिक विश्वास (विश्वासपूर्ण मुद्रा) पर आधारित है।
- विमुद्रीकरण का प्रभाव: जब मुद्रा का विमुद्रीकरण किया जाता है (जैसे 2016 में), वे नोट निर्दिष्ट तिथि से वैध मुद्रा नहीं रहते।
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