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डिजिटल बैंकिंग एवं भुगतान प्रणाली Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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रियल-वर्ल्ड एसेट्स (आरडब्ल्यूए) टोकनाइजेशन के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
- टोकनाइजेशन ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके वास्तविक दुनिया की संपत्तियों को डिजिटल टोकन में बदलने की प्रक्रिया है।
- वास्तविक दुनिया की संपत्तियों का टोकनीकरण वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देते हुए 24x7 पहुंच प्रदान करता है।
- वास्तविक दुनिया की संपत्तियों के टोकनीकरण से भारत में व्यक्तियों के लिए उच्च विकास निवेश के अवसरों तक पहुंच संभव हो सकेगी।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। टोकनाइज़ेशन = वास्तविक संपत्तियों (रियल एस्टेट, सोना, बॉन्ड) के स्वामित्व को डिजिटल टोकन में बदलना, ब्लॉकचेन पर।
कथन 2 — सही। पारंपरिक बाज़ारों के विपरीत (निश्चित समय, स्थान सीमा), टोकनयुक्त संपत्तियों का व्यापार 24x7, विश्व स्तर पर, तुरंत किया जा सकता है। महंगी संपत्तियों को छोटे, सस्ते हिस्सों में बाँटा जा सकता है — यही वित्तीय समावेशन है।
कथन 3 — सही। भारत में, यह उच्च-विकास क्षेत्रों (रियल एस्टेट, इन्फ्रास्ट्रक्चर) को सामान्य निवेशकों के लिए खोलता है। IFSCA (GIFT City) जैसी संस्थाएँ इसे पहले से मंज़ूरी दे रही हैं।
तीनों कथन एक ही अवधारणा के अलग-अलग लाभों का वर्णन करते हैं — कोई विरोधाभास नहीं।
निम्नलिखित में से कौन सा भारत के 'ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स' (ओएनडीसी) पहल के मुख्य उद्देश्य का सबसे अच्छा वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
विकल्प A — गलत। ONDC सरकार-नियंत्रित नहीं है — यह एक खुला, विकेंद्रीकृत बाज़ार बनाता है।
विकल्प B — गलत। ONDC Amazon/Flipkart जैसी कंपनियों की जगह नहीं लेता। बल्कि निजी ऐप्स ONDC नेटवर्क में शामिल होकर काम करते हैं।
विकल्प C — सही। ONDC का मुख्य उद्देश्य: कुछ बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों के एकाधिकार को तोड़ना — बाज़ार को खुला और इंटरऑपरेबल बनाकर, ताकि छोटे व्यवसाय, स्थानीय दुकानें और MSME सीधे ग्राहकों तक पहुँच सकें।
विकल्प D — गलत। ONDC को "ई-कॉमर्स का UPI" कहा जाता है क्योंकि यह वही खुला दर्शन अपनाता है, लेकिन यह UPI को एकमात्र भुगतान तरीका नहीं बनाता।
याद रखने की तरकीब: जैसे UPI ने एक भुगतान ऐप के एकाधिकार को तोड़ा, ONDC वही काम शॉपिंग ऐप्स के लिए करता है — बड़े प्लेटफार्मों का प्रभुत्व तोड़ना।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) और सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (डिजिटल रुपया) के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन नहीं सही है?
Detailed Explanation:
विकल्प A — सही कथन। UPI बैंक खातों में मौजूद पैसे को स्थानांतरित करता है। डिजिटल रुपया RBI द्वारा सीधे जारी डिजिटल नकद के समान है।
विकल्प B — सही कथन। UPI: तुरंत डेबिट/क्रेडिट होता है। डिजिटल रुपया: वॉलेट-से-वॉलेट हस्तांतरण तुरंत अंतिम होता है, नकद देने जैसा।
विकल्प C — सही कथन। UPI लेनदेन बैंक खातों से होकर जाता है, इसलिए बैंक स्टेटमेंट में दिखता है। डिजिटल रुपया वॉलेट-से-वॉलेट है, इसलिए व्यक्तिगत लेनदेन बैंक स्टेटमेंट में नहीं दिखता।
विकल्प D — गलत (यही उत्तर है)।
- UPI का पैसा = व्यावसायिक बैंक की जिम्मेदारी
- डिजिटल रुपया = RBI की जिम्मेदारी (क्योंकि RBI सीधे जारी करता है)
ये अलग-अलग हैं — "दोनों में जिम्मेदारी बैंकों की है" कहना गलत है।
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निम्नलिखित देशों पर विचार करें:
मैं. संयुक्त अरब अमीरात
द्वितीय. फ़्रांस
III. जर्मनी
IV. सिंगापुर
वी. बांग्लादेश
उपरोक्त देशों में भारत के अलावा ऐसे कितने देश हैं जहां यूपीआई के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापारी भुगतान स्वीकार किए जाते हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2 (केवल तीन)
भारत का UPI (Unified Payments Interface) विभिन्न देशों के भुगतान नेटवर्क के साथ साझेदारी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित हुआ है। हालांकि, अभी केवल कुछ देशों में ही UPI आधारित मर्चेंट भुगतान स्वीकार किए जाते हैं।
✅ I. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – सही: UAE में चुनिंदा व्यापारियों के यहां UPI भुगतान स्वीकार किए जाते हैं।
✅ II. फ्रांस – सही: फ्रांस में UPI भुगतान की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें Eiffel Tower जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल भी शामिल हैं।
❌ III. जर्मनी – गलत: जर्मनी में अभी UPI मर्चेंट भुगतान की आधिकारिक व्यवस्था लागू नहीं हुई है।
✅ IV. सिंगापुर – सही: सिंगापुर में UPI आधारित सीमा-पार भुगतान और मर्चेंट भुगतान उपलब्ध हैं।
❌ V. बांग्लादेश – गलत: बांग्लादेश में अभी UPI मर्चेंट भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
अतः दिए गए देशों में UAE, फ्रांस और सिंगापुर — कुल तीन देशों में UPI के तहत अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट भुगतान स्वीकार किए जाते हैं।
संक्षिप्त नोट्स: UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार
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UPI का विकास National Payments Corporation of India द्वारा किया गया है।
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यह रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है।
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UPI मर्चेंट भुगतान UAE, सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, मॉरीशस और श्रीलंका में उपलब्ध हैं।
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UPI अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।
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यह पर्यटन, प्रेषण (Remittance) और व्यापारिक भुगतानों को आसान बनाता है।
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UPI दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणालियों में से एक है।
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इसका विनियमन Reserve Bank of India द्वारा किया जाता है।
आरटीजीएस और एनईएफटी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. आरटीजीएस में, निपटान का समय तत्काल होता है जबकि एनईएफटी के मामले में, भुगतान का निपटान करने में कुछ समय लगता है।
II. आरटीजीएस में, ग्राहक से आवक लेनदेन के लिए शुल्क लिया जाता है जबकि एनईएफटी के मामले में ऐसा नहीं है।
III. आरटीजीएस के लिए परिचालन घंटे कुछ निश्चित दिनों में प्रतिबंधित हैं जबकि एनईएफटी के लिए यह सच नहीं है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (केवल I)
RTGS (Real Time Gross Settlement) और NEFT (National Electronic Funds Transfer) भारत में इलेक्ट्रॉनिक धन हस्तांतरण की प्रमुख प्रणालियाँ हैं, जिन्हें Reserve Bank of India संचालित करता है। दोनों के बीच मुख्य अंतर भुगतान निपटान (Settlement) की गति और प्रक्रिया में है।
✅ कथन I सही है: RTGS में लेन-देन रियल टाइम और व्यक्तिगत रूप से निपटाए जाते हैं, इसलिए भुगतान लगभग तुरंत हो जाता है। NEFT में लेन-देन बैचों में निपटाए जाते हैं, इसलिए कुछ समय लग सकता है।
❌ कथन II गलत है: RBI के नियमों के अनुसार RTGS और NEFT दोनों में धन प्राप्त करने (Inward Transaction) पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
❌ कथन III गलत है: वर्तमान में RTGS और NEFT दोनों 24×7×365 उपलब्ध हैं, जिसमें छुट्टियाँ और सप्ताहांत भी शामिल हैं। इसलिए RTGS के लिए अलग से सीमित कार्य समय नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: RTGS और NEFT
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RTGS का पूरा नाम Real Time Gross Settlement है।
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NEFT का पूरा नाम National Electronic Funds Transfer है।
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RTGS में भुगतान तुरंत और व्यक्तिगत रूप से निपटाया जाता है।
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NEFT में भुगतान बैच आधारित प्रणाली से निपटाया जाता है।
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दोनों प्रणालियाँ RBI द्वारा संचालित हैं।
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RTGS और NEFT दोनों 24×7×365 उपलब्ध हैं।
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दोनों में Inward Transactions पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
डिजिटल रुपये के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अपनी मौद्रिक नीति के अनुरूप जारी की गई एक संप्रभु मुद्रा है।
- यह RBI की बैलेंस शीट पर देयता के रूप में दिखाई देता है।
- यह अपने डिज़ाइन से ही मुद्रास्फीति के विरुद्ध बीमाकृत है।
- यह वाणिज्यिक बैंक मनी और नकदी के विरुद्ध स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय है।
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 4
डिजिटल रुपया (CBDC) RBI द्वारा अपनी मौद्रिक नीति ढांचे के भाग के रूप में जारी की गई एक संप्रभु मुद्रा है, जो RBI की बैलेंस शीट पर देयता के रूप में दिखाई देती है, और बैंक जमा तथा नकदी के साथ स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय है। हालांकि, इसमें मुद्रास्फीति के विरुद्ध अंतर्निहित सुरक्षा नहीं है, जिसे व्यापक मौद्रिक नीति उपायों के माध्यम से प्रबंधित किया जाता है।
✅ कथन 1 – सही: डिजिटल रुपया (ई-रुपया या CBDC) RBI द्वारा अपने मौद्रिक नीति उद्देश्यों के अनुरूप जारी की गई एक संप्रभु मुद्रा है।
✅ कथन 2 – सही: भौतिक मुद्रा की तरह, डिजिटल रुपया RBI की बैलेंस शीट पर देयता के रूप में दिखाई देता है, जो केंद्रीय बैंक पर एक दावे का प्रतिनिधित्व करता है।
❌ कथन 3 – गलत: डिजिटल रुपया डिज़ाइन द्वारा मुद्रास्फीति के विरुद्ध बीमाकृत नहीं है; इसका मूल्य मुद्रास्फीति के दबावों के अधीन है जिसे RBI की मौद्रिक नीति द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
✅ कथन 4 – सही: डिजिटल रुपया बिना किसी प्रतिबंध के वाणिज्यिक बैंक मनी और नकदी के विरुद्ध 1:1 के अनुपात में स्वतंत्र रूप से परिवर्तनीय है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: डिजिटल रुपया (CBDC)
- परिभाषा: सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा डिजिटल रूप में जारी की गई एक विधिक निविदा है, जो संप्रभु मुद्रा के डिजिटल रूप का प्रतिनिधित्व करती है।
- प्रकार: दो प्रकार—होलसेल CBDC (CBDC-W) अंतर-बैंक निपटान के लिए और रिटेल CBDC (CBDC-R) सार्वजनिक उपयोग के लिए।
- लॉन्च: पायलट परियोजनाएं 2022-23 में शुरू की गईं; होलसेल CBDC पायलट नवंबर 2022 में शुरू हुआ, रिटेल CBDC पायलट दिसंबर 2022 में शुरू हुआ।
- बैलेंस शीट उपचार: भौतिक मुद्रा नोटों की तरह RBI की बैलेंस शीट पर देयता के रूप में दर्ज किया जाता है।
- परिवर्तनीयता: भौतिक मुद्रा और बैंक जमा के साथ 1:1 परिवर्तनीयता बनाए रखता है।
- मौद्रिक नीति उपकरण: RBI के मौद्रिक नीति ढांचे का हिस्सा है, लेकिन मुद्रास्फीति से अंतर्निहित रूप से सुरक्षा प्रदान नहीं करता है।
- प्रौद्योगिकी: सुरक्षित, ट्रेसेबल लेनदेन के लिए ब्लॉकचेन और वितरित खाता बही प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है।
- लाभ: लेनदेन लागत कम करता है, वित्तीय समावेशन बढ़ाता है, ऑफलाइन लेनदेन सक्षम करता है, और मुद्रा प्रबंधन लागत कम करता है।
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- अमेरिकी डॉलर या SWIFT प्रणाली का उपयोग किए बिना डिजिटल मुद्रा में भुगतान करना संभव है।
- एक डिजिटल मुद्रा को एक शर्त के साथ वितरित किया जा सकता है जैसे कि इसे खर्च करने के लिए एक समय-सीमा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राएं (CBDCs) केंद्रीय बैंकों के बीच सीधे सीमा-पार लेनदेन को सक्षम बनाती हैं, जिसमें अमेरिकी डॉलर को मध्यस्थ के रूप में या SWIFT संदेश प्रणाली की आवश्यकता नहीं होती है। इसके अतिरिक्त, CBDCs को स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स के साथ प्रोग्राम किया जा सकता है ताकि समाप्ति तिथियां या उपयोग पर प्रतिबंध जैसी शर्तें लगाई जा सकें, जिससे वे 'प्रोग्रामेबल मनी' बन जाती हैं।
✅ कथन 1 – सही: CBDCs केंद्रीय बैंकों के बीच द्विपक्षीय व्यवस्थाओं या सामान्य प्लेटफार्मों के माध्यम से पीयर-टू-पीयर सीमा-पार भुगतान की अनुमति देते हैं, अमेरिकी डॉलर या SWIFT प्रणाली की आवश्यकता को दरकिनार करते हुए।
✅ कथन 2 – सही: CBDCs को समय-सीमित खर्च या उद्देश्य-विशिष्ट उपयोग (जैसे सब्सिडी) जैसी शर्तों के साथ प्रोग्राम किया जा सकता है, जिससे वे प्रोग्रामेबल डिजिटल मुद्रा बन जाती हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्राएं (CBDCs)
- परिभाषा: CBDCs किसी देश के केंद्रीय बैंक द्वारा जारी और विनियमित फिएट मुद्रा के डिजिटल रूप हैं, जो डिजिटल प्रारूप में कानूनी निविदा का प्रतिनिधित्व करते हैं।
- प्रकार: रिटेल CBDCs (जनता के उपयोग के लिए) और होलसेल CBDCs (वित्तीय संस्थानों और अंतर-बैंक निपटान के लिए)।
- प्रोग्रामेबिलिटी: CBDCs स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स को शामिल कर सकते हैं जो सशर्त भुगतान, समय-सीमित खर्च और उद्देश्य-विशिष्ट उपयोग प्रतिबंधों को सक्षम बनाते हैं।
- सीमा-पार लेनदेन: सीधे केंद्रीय बैंक-से-केंद्रीय बैंक निपटान को सक्षम बनाते हैं, संवाददाता बैंकिंग, SWIFT, और आरक्षित मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता को कम करते हुए।
- भारत का डिजिटल रुपया (e₹): RBI ने 2022-23 में होलसेल (e₹-W) और रिटेल (e₹-R) दोनों CBDCs के लिए पायलट परियोजनाएं शुरू कीं।
- लाभ: कम लेनदेन लागत, वित्तीय समावेशन, पारदर्शिता, वास्तविक समय निपटान, और बेहतर मौद्रिक नीति संचरण।
- चुनौतियां: गोपनीयता की चिंताएं, साइबर सुरक्षा जोखिम, वाणिज्यिक बैंकों की जमा राशि पर प्रभाव, और तकनीकी बुनियादी ढांचे की आवश्यकताएं।
निम्नलिखित में से कौन भारत में सभी एटीएम को जोड़ता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) नेशनल फाइनेंशियल स्विच (NFS) का संचालन करता है, जो भारत में साझा एटीएम का सबसे बड़ा नेटवर्क है। NFS सभी बैंकों के एटीएम को जोड़ता है, जिससे ग्राहक नकद निकासी और अन्य बैंकिंग सेवाओं के लिए किसी भी बैंक के एटीएम का उपयोग कर सकते हैं, जो देशभर में निर्बाध अंतर-बैंक एटीएम लेनदेन को सुविधाजनक बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI)
- स्थापना: NPCI को 2008 में भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए एक छत्र संगठन के रूप में निगमित किया गया था।
- स्वामित्व: यह भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के तहत भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) की एक पहल है।
- नेशनल फाइनेंशियल स्विच (NFS): 2004 में लॉन्च किया गया, NFS भारत में साझा एटीएम का सबसे बड़ा नेटवर्क है, जो बैंकों में 1 लाख से अधिक एटीएम को जोड़ता है।
- प्रमुख सेवाएं: NPCI कई भुगतान प्रणालियों का संचालन करता है जिनमें UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस), IMPS (तत्काल भुगतान सेवा), RuPay कार्ड योजना, BHIM, AePS (आधार सक्षम भुगतान प्रणाली), और NFS शामिल हैं।
- UPI: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस NPCI की प्रमुख रियल-टाइम भुगतान प्रणाली है जिसने भारत में डिजिटल भुगतान में क्रांति ला दी है।
- RuPay: भारत का अपना घरेलू कार्ड भुगतान नेटवर्क, जो Visa और Mastercard के साथ प्रतिस्पर्धा करता है, 2012 में NPCI द्वारा लॉन्च किया गया।
निम्नलिखित में से कौन सा "मर्चेंट डिस्काउंट रेट" शब्द का सबसे अच्छा वर्णन करता है, जो कभी-कभी समाचारों में देखा जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — बैंक द्वारा व्यापारी से उसके ग्राहकों से बैंक के डेबिट कार्ड के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के लिए लिया जाने वाला शुल्क।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) बैंकों या भुगतान प्रोसेसरों द्वारा व्यापारियों से डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या डिजिटल वॉलेट के माध्यम से डिजिटल भुगतान लेनदेन को सक्षम और प्रोसेस करने के लिए लिया जाने वाला शुल्क है। यह आम तौर पर लेनदेन राशि का एक प्रतिशत होता है और व्यापारी के खाते से काट लिया जाता है। यह शुल्क भुगतान बुनियादी ढांचा प्रदान करने, लेनदेन को प्रोसेस करने और संबंधित जोखिमों को वहन करने की लागत को कवर करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR)
- परिभाषा: MDR वह शुल्क है जो बैंकों/भुगतान प्रोसेसरों द्वारा व्यापारियों से ग्राहकों से कार्ड-आधारित या डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए लिया जाता है।
- घटक: इसमें आम तौर पर इंटरचेंज शुल्क (कार्ड जारी करने वाले बैंक को भुगतान), नेटवर्क शुल्क (वीजा/रुपे जैसे कार्ड नेटवर्क को भुगतान), और अधिग्रहणकर्ता मार्जिन (व्यापारी के बैंक द्वारा रखा गया) शामिल होता है।
- दर संरचना: MDR कार्ड के प्रकार (डेबिट/क्रेडिट), लेनदेन मूल्य, व्यापारी श्रेणी और उपयोग की गई भुगतान विधि के आधार पर भिन्न होता है।
- सरकारी हस्तक्षेप (2020): भारत सरकार ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने और व्यापारी लागत को कम करने के लिए रुपे डेबिट कार्ड और UPI के माध्यम से किए गए डिजिटल भुगतान पर MDR को समाप्त कर दिया।
- उद्देश्य: MDR भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के प्रतिभागियों को बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, धोखाधड़ी रोकथाम और परिचालन लागतों के लिए मुआवजा देता है।
- प्रभाव: जबकि MDR सुगम डिजिटल लेनदेन को सक्षम बनाता है, उच्च दरें छोटे व्यापारियों को डिजिटल भुगतान विधियों को अपनाने से हतोत्साहित कर सकती हैं।
डिजिटल भुगतान के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- BHIM ऐप उपयोगकर्ता को UPI-सक्षम बैंक खाते वाले किसी को भी धन हस्तांतरित करने की अनुमति देता है।
- जबकि एक चिप-पिन डेबिट कार्ड में प्रमाणीकरण के चार कारक होते हैं, BHIM ऐप में प्रमाणीकरण के केवल दो कारक होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
कथन 1 सही है क्योंकि BHIM ऐप प्राप्तकर्ता की UPI ID या QR कोड का उपयोग करके UPI-आधारित प्रत्यक्ष बैंक-से-बैंक हस्तांतरण सक्षम करता है। कथन 2 गलत है क्योंकि BHIM को प्रमाणीकरण के तीन कारकों (डिवाइस ID/मोबाइल नंबर, लिंक किया गया बैंक खाता, और UPI PIN) की आवश्यकता होती है, जबकि एक चिप-पिन डेबिट कार्ड को आमतौर पर केवल दो कारकों (कार्ड और PIN) की आवश्यकता होती है।
✅ कथन 1 – सही: BHIM ऐप UPI-सक्षम बैंक खाते वाले किसी को भी उनकी UPI ID का उपयोग करके या QR कोड स्कैन करके धन हस्तांतरित करने की अनुमति देता है।
❌ कथन 2 – गलत: BHIM ऐप में प्रमाणीकरण के तीन कारक हैं (डिवाइस ID/मोबाइल, बैंक खाता, UPI PIN), दो नहीं, जबकि चिप-पिन डेबिट कार्ड में दो कारक हैं (कार्ड स्वामित्व और PIN)।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में डिजिटल भुगतान प्रणाली
- BHIM (भारत इंटरफेस फॉर मनी): तत्काल बैंक-से-बैंक लेनदेन के लिए दिसंबर 2016 में NPCI द्वारा लॉन्च किया गया एक UPI-आधारित मोबाइल भुगतान ऐप।
- BHIM में तीन प्रमाणीकरण कारक: (1) डिवाइस ID और पंजीकृत मोबाइल नंबर, (2) लिंक किया गया बैंक खाता, (3) लेनदेन पूर्ण करने के लिए UPI PIN।
- UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस): अद्वितीय वर्चुअल पेमेंट एड्रेस (VPA) का उपयोग करके मोबाइल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतर-बैंक लेनदेन सक्षम करने वाली रियल-टाइम भुगतान प्रणाली।
- लेनदेन विधियाँ: UPI ID-आधारित हस्तांतरण, QR कोड स्कैनिंग, मोबाइल नंबर-आधारित हस्तांतरण, और भुगतान अनुरोध।
- चिप-पिन डेबिट कार्ड प्रमाणीकरण: दो कारक - भौतिक कार्ड स्वामित्व (जो आपके पास है) और PIN (जो आप जानते हैं)।
- सुरक्षा लाभ: BHIM का तीन-कारक प्रमाणीकरण पारंपरिक दो-कारक कार्ड-आधारित प्रणालियों की तुलना में उच्च सुरक्षा प्रदान करता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायता करता है।
- NPCI ने रुपे (RuPay), एक कार्ड भुगतान योजना आरंभ की है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) एक अम्ब्रेला संगठन है जिसे खुदरा भुगतान और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भुगतान अवसंरचना विकसित करके और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक भागीदारी को सक्षम करके स्थापित किया गया है। दोनों कथन NPCI की भूमिका और पहलों का सही वर्णन करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: NPCI, UPI, IMPS और RuPay जैसी नवीन भुगतान प्रणालियों को विकसित करके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, जो समाज के सभी वर्गों, जिनमें गैर-बैंकिंग और अल्प-बैंकिंग आबादी शामिल है, के लिए सस्ते और सुलभ डिजिटल भुगतान समाधान सक्षम करते हैं।
✅ कथन 2 – सही: NPCI ने 2012 में रुपे (RuPay) को भारत के घरेलू कार्ड भुगतान नेटवर्क के रूप में लॉन्च किया ताकि वीज़ा और मास्टरकार्ड जैसी अंतर्राष्ट्रीय योजनाओं का विकल्प प्रदान किया जा सके, जिससे लेन-देन लागत कम हो और स्वदेशी भुगतान अवसंरचना को बढ़ावा मिले।
निम्नलिखित में से 'यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)' के कार्यान्वयन का सबसे संभावित परिणाम कौन सा है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — ऑनलाइन भुगतान के लिए मोबाइल वॉलेट की आवश्यकता नहीं होगी।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक रियल-टाइम भुगतान प्रणाली है जो मोबाइल वॉलेट जैसे मध्यवर्ती साधनों की आवश्यकता के बिना मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सीधे बैंक-से-बैंक तत्काल हस्तांतरण को सक्षम बनाती है। उपयोगकर्ताओं को सीधे अपने बैंक खातों से भुगतान करने की अनुमति देकर, UPI ऑनलाइन लेनदेन के लिए पहले एक अलग वॉलेट में पैसे लोड करने की आवश्यकता को समाप्त कर देता है।
✅ कथन 1 – सही: UPI मोबाइल ऐप के माध्यम से सीधे बैंक-से-बैंक हस्तांतरण को सक्षम बनाता है, मध्यवर्ती मोबाइल वॉलेट की आवश्यकता को समाप्त करता है क्योंकि उपयोगकर्ता सीधे अपने बैंक खातों से भुगतान कर सकते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: जबकि UPI डिजिटल लेनदेन और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, यह लगभग दो दशकों में भौतिक मुद्रा को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं करेगा क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे लेनदेन के लिए, नकदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहती है।
❌ कथन 3 – गलत: UPI खुदरा भुगतान के लिए डिज़ाइन किया गया एक घरेलू भुगतान बुनियादी ढांचा है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह के साथ कोई सीधा कारण संबंध नहीं है, जो आर्थिक नीतियों, व्यापारिक वातावरण और नियामक ढांचे जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
❌ कथन 4 – गलत: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाएं मुख्य रूप से सब्सिडी वितरण के लिए आधार-लिंक्ड बैंक खातों और NEFT/RTGS प्रणाली का उपयोग करती हैं, UPI का नहीं, हालांकि UPI कुछ द्वितीयक लेनदेन को सुविधाजनक बना सकता है।
भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए 'पेमेंट बैंकों' की स्थापना की अनुमति दी जा रही है। इस संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- मोबाइल टेलीफोन कंपनियां और सुपरमार्केट चेन जो निवासियों के स्वामित्व और नियंत्रण में हैं, पेमेंट बैंकों के प्रवर्तक बनने के पात्र हैं।
- पेमेंट बैंक क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड दोनों जारी कर सकते हैं।
- पेमेंट बैंक ऋण देने की गतिविधियां नहीं कर सकते हैं।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 3
✅ कथन 1 – सही: मोबाइल टेलीफोन कंपनियां और सुपरमार्केट चेन जो निवासियों के स्वामित्व और नियंत्रण में हैं, RBI के दिशानिर्देशों के तहत पेमेंट बैंकों के प्रवर्तक बनने के पात्र हैं। यह प्रावधान व्यापक पहुंच और वितरण नेटवर्क वाली संस्थाओं को बिना बैंक खाते वाली आबादी के बीच वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सक्षम बनाता है।
❌ कथन 2 – गलत: पेमेंट बैंकों को केवल अपने जमा खातों से जुड़े डेबिट कार्ड और ATM कार्ड जारी करने की अनुमति है। वे क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें किसी भी ऋण गतिविधि को करने का अधिकार नहीं है, जो क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए आवश्यक है।
✅ कथन 3 – सही: पेमेंट बैंकों को RBI नियमों के तहत ऋण देने की गतिविधियां करने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है। वे केवल जमा स्वीकार कर सकते हैं (प्रति ग्राहक ₹2 लाख तक) और भुगतान/प्रेषण सेवाएं प्रदान कर सकते हैं, इस प्रकार वे केवल लेनदेन और बचत की सुविधा पर ध्यान केंद्रित करते हैं न कि ऋण सृजन पर।
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