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वित्तीय समावेशन Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for वित्तीय समावेशन with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित में से कौन सा भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-सूचकांक) के तीन प्रमुख उप-सूचकांकों का सही प्रतिनिधित्व करता है?
Detailed Explanation:
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वर्ष 2021 में Financial Inclusion Index (FI-Index) शुरू किया, जिससे देश में वित्तीय समावेशन के स्तर को मापा जाता है।
FI-Index के तीन प्रमुख उप-सूचकांक हैं:
-
Access (35%) – बैंक शाखाओं, ATM और डिजिटल वित्तीय सुविधाओं की उपलब्धता।
-
Usage (45%) – बचत, ऋण, बीमा, निवेश और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं का वास्तविक उपयोग।
-
Quality (20%) – वित्तीय साक्षरता, उपभोक्ता संरक्षण और सेवाओं की गुणवत्ता।
-
अतः सही उत्तर विकल्प (C) Access, Usage and Quality है।
अन्य विकल्प गलत क्यों हैं?
| विकल्प | क्या दर्शाता है | यह क्यों नहीं? |
|---|---|---|
| Credit access, Insurance depth, Pension coverage | वित्तीय क्षेत्रों से संबंधित | आधिकारिक उप-सूचकांक नहीं |
| Banking access, GDP contribution, Financial literacy | मिश्रित संकेतक | GDP योगदान FI-Index का हिस्सा नहीं |
| Access, Usage, Quality | RBI के आधिकारिक उप-सूचकांक | ✅ सही उत्तर |
| Access, Affordability, Transparency | वित्तीय अवधारणाएँ | RBI द्वारा निर्धारित उप-सूचकांक नहीं |
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
- स्वयं सहायता समूह (SHG) कार्यक्रम मूल रूप से भारतीय स्टेट बैंक द्वारा आर्थिक रूप से वंचितों को सूक्ष्म ऋण प्रदान करके शुरू किया गया था।
- एक SHG में, समूह के सभी सदस्य उस ऋण के लिए जिम्मेदारी लेते हैं जो एक व्यक्तिगत सदस्य लेता है।
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक SHGs का समर्थन करते हैं।
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल दो
यह प्रश्न स्वयं सहायता समूह (SHG) कार्यक्रम, इसकी उत्पत्ति, कार्यप्रणाली और संस्थागत समर्थन के बारे में ज्ञान का परीक्षण करता है। तीन कथनों में से, दो सही हैं जबकि एक में प्रारंभिक संस्था के संबंध में तथ्यात्मक अशुद्धि है।
❌ कथन 1 – गलत: SHG कार्यक्रम मूल रूप से 1991-1992 में नाबार्ड द्वारा शुरू किया गया था, न कि भारतीय स्टेट बैंक द्वारा। RBI ने 1993 में SHGs को बचत बैंक खाते खोलने की अनुमति दी।
✅ कथन 2 – सही: एक SHG में, ऋण समूह को समग्र रूप से दिए जाते हैं, और सभी सदस्य व्यक्तिगत सदस्यों द्वारा लिए गए किसी भी ऋण की चुकौती के लिए सामूहिक जिम्मेदारी साझा करते हैं।
✅ कथन 3 – सही: क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) और अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (SCBs) दोनों ही माइक्रो ATMs में दोहरी प्रमाणीकरण सक्षम करने के लिए वित्तीय समावेशन कोष योजना सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से SHGs का सक्रिय रूप से समर्थन करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: स्वयं सहायता समूह (SHGs)
- उत्पत्ति: नाबार्ड ने 1991-1992 में SHG-बैंक लिंकेज कार्यक्रम शुरू किया, जिससे यह भारत में SHG आंदोलन का अग्रणी बन गया।
- RBI की भूमिका: 1993 में, RBI ने SHGs को बचत बैंक खाते खोलने की अनुमति दी, जिससे उन्हें औपचारिक रूप से बैंकिंग प्रणाली में एकीकृत किया गया।
- संरचना: आमतौर पर समरूप पृष्ठभूमि के 10-20 सदस्य जो बचत जमा करते हैं और पारस्परिक ऋण सहायता प्रदान करते हैं।
- सामूहिक जिम्मेदारी: ऋण समूह को स्वीकृत किए जाते हैं, और सभी सदस्य चुकौती के लिए सामूहिक रूप से जिम्मेदार होते हैं।
- संस्थागत समर्थन: वाणिज्यिक बैंक, RRBs, सहकारी बैंक और नाबार्ड SHGs को वित्तीय और क्षमता निर्माण सहायता प्रदान करते हैं।
- फोकस: मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की महिलाओं को लक्षित करता है, वित्तीय समावेशन और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।
- DAY-NRLM: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन SHGs का समर्थन करने वाला प्रमुख कार्यक्रम है।
एक अर्थव्यवस्था में मुद्रा गुणक निम्नलिखित में से किसके साथ बढ़ता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — लोगों की बैंकिंग आदत में वृद्धि।
मुद्रा गुणक आरक्षित अनुपात और नकदी बनाम जमा के रूप में रखी गई धनराशि के अनुपात पर निर्भर करता है। जब अधिक लोग नकदी रखने के बजाय बैंकों में धन जमा करते हैं, तो बैंकों को उधार देने के लिए अधिक आरक्षित राशि प्राप्त होती है, जो ऋण सृजन प्रक्रिया को बढ़ाती है और मुद्रा गुणक को बढ़ाती है।
❌ विकल्प 1 – गलत: नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में वृद्धि बैंकों की उधार देने की क्षमता को कम करती है क्योंकि उन्हें RBI के पास अधिक आरक्षित राशि रखनी होती है, जिससे मुद्रा गुणक घटता है।
❌ विकल्प 2 – गलत: सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) में वृद्धि के लिए बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों जैसी तरल संपत्तियों में अधिक जमा रखना आवश्यक होता है, जिससे उनकी उधार देने की क्षमता कम हो जाती है और इस प्रकार मुद्रा गुणक घटता है।
✅ विकल्प 3 – सही: अधिक बैंकिंग आदतों का अर्थ है कि बैंकिंग प्रणाली में अधिक जमा प्रवाहित होती है, जिससे बैंक अधिक उधार दे सकते हैं और अतिरिक्त ऋण सृजित कर सकते हैं, जिससे मुद्रा गुणक बढ़ता है।
❌ विकल्प 4 – गलत: जनसंख्या वृद्धि अकेले मुद्रा गुणक को प्रभावित नहीं करती है जब तक कि इसके साथ बैंकिंग पहुंच या जमा संग्रहण में वृद्धि न हो।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मुद्रा गुणक
- परिभाषा: मुद्रा गुणक कुल मुद्रा आपूर्ति और मौद्रिक आधार (आरक्षित राशि) का अनुपात है, जो दर्शाता है कि ऋण सृजन के माध्यम से मुद्रा आपूर्ति कितनी विस्तारित हो सकती है।
- सूत्र: मुद्रा गुणक = 1 / आरक्षित अनुपात (केवल आरक्षित आवश्यकताओं पर विचार करते हुए सरलीकृत संस्करण)
- मुद्रा गुणक बढ़ाने वाले कारक: कम CRR/SLR, उच्च जमा अनुपात (अधिक बैंकिंग आदतें), कम मुद्रा-जमा अनुपात
- मुद्रा गुणक घटाने वाले कारक: उच्च CRR/SLR, नकद रखने की प्राथमिकता, बैंकों में जनता का कम विश्वास
- नकद आरक्षित अनुपात (CRR): शुद्ध मांग और समय देनदारियों (NDTL) का प्रतिशत जो बैंकों को RBI के पास नकद आरक्षित के रूप में बनाए रखना चाहिए; वर्तमान में लगभग 4.5%
- सांविधिक तरलता अनुपात (SLR): NDTL का प्रतिशत जो बैंकों को सरकारी प्रतिभूतियों, सोना या नकदी जैसी तरल संपत्तियों में बनाए रखना चाहिए; वर्तमान में लगभग 18%
- ऋण सृजन: वह प्रक्रिया जिसके द्वारा बैंक क्रमिक उधार चक्रों के माध्यम से जमा को गुणा करते हैं, जो आरक्षित आवश्यकताओं और जनता की नकदी प्राथमिकताओं द्वारा सीमित होती है
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- कृषि क्षेत्र को अल्पकालिक ऋण वितरण के संदर्भ में, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCBs) अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की तुलना में अधिक ऋण वितरित करते हैं।
- DCCBs के सबसे महत्वपूर्ण कार्यों में से एक प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों को धन उपलब्ध कराना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
कथन 1 गलत है क्योंकि भारत में अल्पकालिक कृषि ऋण वितरण में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (SCBs) का वर्चस्व है, जो कुल ऋण का लगभग 75-80% हिस्सा वितरित करते हैं, जो जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (DCCBs) से काफी अधिक है। कथन 2 सही है क्योंकि DCCBs अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना (STCCS) में मध्यवर्ती स्तर का निर्माण करते हैं और उनके प्राथमिक कार्यों में से एक जमीनी स्तर पर प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) को धन उपलब्ध कराना है।
❌ कथन 1 – गलत: SCBs अल्पकालिक कृषि ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा (75-80%) वितरित करते हैं, जो DCCBs के योगदान से कहीं अधिक है।
✅ कथन 2 – सही: DCCBs जिला स्तर पर मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं और गांव स्तर पर संचालित PACS को धन प्रदान करते हैं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में कृषि ऋण संरचना
| घटक | विवरण |
|---|---|
| अल्पकालिक सहकारी ऋण संरचना (STCCS) | त्रि-स्तरीय प्रणाली: राज्य सहकारी बैंक (StCBs) → जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCBs) → प्राथमिक कृषि सहकारी समितियाँ (PACS) |
| कृषि ऋण वितरण हिस्सेदारी | अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक: ~75-80% क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक: ~15-20% सहकारी बैंक (DCCBs सहित): ~5-10% |
| PACS (प्राथमिक कृषि सहकारी समितियाँ) | जमीनी स्तर की सहकारी समितियाँ जो किसानों को सीधे ऋण प्रदान करती हैं; भारत में कुल ~1 लाख PACS |
| DCCBs के कार्य | • जिला स्तर पर जमा राशि एकत्र करना • PACS को धन उपलब्ध कराना • StCBs और PACS के बीच कड़ी के रूप में कार्य करना • कृषि और संबद्ध गतिविधियों को वित्तपोषित करना |
| दीर्घकालिक ऋण संरचना | राज्य सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (SCARDBs) → प्राथमिक सहकारी कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (PCARDBs) |
सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण (Service Area Approach) किसके दायरे में लागू किया गया था?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — अग्रणी बैंक योजना
सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण (SAA) को अग्रणी बैंक योजना के क्षेत्र दृष्टिकोण के एक सुधरे हुए संस्करण के रूप में लागू किया गया था। SAA के तहत, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक/आरआरबी शाखा को नियोजित और व्यवस्थित विकास के लिए 15-25 गांवों की सेवा के लिए नामित किया जाता है, जो बैंक ऋण, उत्पादन, उत्पादकता और आय वृद्धि के बीच प्रभावी संबंध सुनिश्चित करता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: अग्रणी बैंक योजना और सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| अग्रणी बैंक योजना | गाडगिल अध्ययन समूह और नरीमन समिति की सिफारिश पर 1969 में शुरू की गई; प्रत्येक जिले में बैंकिंग गतिविधियों का समन्वय करना इसका उद्देश्य है |
| सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण (SAA) | अप्रैल 1989 में अग्रणी बैंक योजना के क्षेत्र दृष्टिकोण में सुधार के रूप में शुरू किया गया |
| कवरेज | प्रत्येक बैंक शाखा को व्यापक बैंकिंग सेवाओं के लिए ग्रामीण/अर्ध-शहरी क्षेत्रों में 15-25 गांव आवंटित किए जाते हैं |
| उद्देश्य | नियोजित विकास सुनिश्चित करना, उत्पादन के साथ ऋण संबंध, और नामित सेवा क्षेत्रों में ऋण अंतराल को रोकना |
| जिम्मेदारी | नामित शाखा अपने सेवा क्षेत्र की सभी बैंकिंग आवश्यकताओं को पूरा करती है जिसमें जमा संग्रहण, ऋण वितरण और वित्तीय समावेशन शामिल है |
| समन्वय | अग्रणी बैंक व्यापक ग्रामीण विकास के लिए अन्य बैंकों, सरकारी एजेंसियों और जिला प्राधिकरणों के साथ समन्वय करता है |
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