जब भारतीय रिज़र्व बैंक सांविधिक तरलता अनुपात में 50 आधार अंकों की कमी करता है, तो निम्नलिखित में से क्या होने की संभावना है?
Detailed Explanation:
सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) वह न्यूनतम प्रतिशत है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और समय देनदारियों (NDTL) का तरल परिसंपत्तियों (नकदी, सोना, सरकारी प्रतिभूतियां) में बनाए रखना होता है।
✅ कथन 3 – सही: SLR में 50 आधार अंकों की कमी करने से सरकारी प्रतिभूतियों में बंधी निधियां मुक्त होती हैं, जिससे बैंकों के पास ऋण योग्य निधियां बढ़ती हैं और वे उधार को प्रोत्साहित करने के लिए ऋण दरों में कटौती कर सकते हैं।
❌ कथन 1 – गलत: SLR में कमी एक मौद्रिक नीति साधन है जिसका मध्यम प्रभाव होता है; GDP वृद्धि कई कारकों पर निर्भर करती है, एक नीतिगत बदलाव से 'भारी' वृद्धि नहीं होती।
❌ कथन 2 – गलत: विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ब्याज दर अंतर, इक्विटी बाजार रिटर्न और वैश्विक स्थितियों पर प्रतिक्रिया देते हैं, घरेलू SLR समायोजन पर नहीं।
❌ कथन 4 – गलत: SLR में कमी से ऋण देने के लिए निधियां जारी होकर बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ती है, घटती नहीं।
Question 13 of 15 भारत की बैंकिंग संरचना
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