UPSC CSE Prelims
राष्ट्रीय आय एवं आर्थिक विकास Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: राष्ट्रीय आय एवं आर्थिक विकास
Topic Breakdown: Scroll →
बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- एमपीआई की गणना एल्किरे-फोस्टर पद्धति का उपयोग करके की जाती है।
- नीति आयोग द्वारा गणना की गई एमपीआई में कुल बारह संकेतक हैं।
- मातृ स्वास्थ्य और बैंक खाता नीति आयोग के एमपीआई और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के एमपीआई में सामान्य संकेतक हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन 1 — सही। भारत का राष्ट्रीय MPI और वैश्विक MPI (UNDP) दोनों एक ही पद्धति का उपयोग करते हैं — Alkire-Foster पद्धति — जो किसी व्यक्ति की एक साथ हो रही कठिनाइयों को गिनती है।
कथन 2 — सही। भारत के राष्ट्रीय MPI (NITI Aayog द्वारा) में 12 संकेतक हैं:
- 10 मानक वैश्विक संकेतक बरकरार
- भारत के लिए 2 नए संकेतक जोड़े गए
कथन 3 — गलत। यहाँ जाल है: मातृत्व स्वास्थ्य और बैंक खाता दोनों सूचकांकों में समान नहीं हैं। ये केवल भारत के राष्ट्रीय MPI में हैं — अतिरिक्त/विशिष्ट संकेतक। वैश्विक MPI (UNDP) में केवल 10 हैं, इन दोनों के बिना।
याद रखने की तरकीब: भारत का MPI = वैश्विक के 10 + भारत के विशेष 2 (मातृत्व स्वास्थ्य + बैंक खाता) = 12। ये 2 अतिरिक्त केवल भारत में हैं, UNDP के साथ साझा नहीं।
निम्नलिखित परिसंपत्तियों में निवेश पर विचार करें:
- ब्रांड मान्यता
- सूची/इन्वेंट्री
- बौद्धिक संपदा
- ग्राहकों की मेलिंग सूची
उपर्युक्त में से कितनी को अमूर्त निवेश माना जाता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल तीन
सूचीबद्ध चार परिसंपत्तियों में से तीन को अमूर्त निवेश माना जाता है: ब्रांड मान्यता, बौद्धिक संपदा, और ग्राहकों की मेलिंग सूची। ये गैर-भौतिक संपत्तियां हैं जो कानूनी अधिकारों, प्रतिष्ठा और ग्राहक संबंधों से मूल्य प्राप्त करती हैं।
✅ ब्रांड मान्यता – अमूर्त: यह एक गैर-भौतिक परिसंपत्ति है जो ब्रांड की प्रतिष्ठा, ग्राहक वफादारी और बाजार पहचान से जुड़े मूल्य का प्रतिनिधित्व करती है।
✅ बौद्धिक संपदा – अमूर्त: इसमें पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और व्यापार रहस्य शामिल हैं—कानूनी रूप से संरक्षित गैर-भौतिक संपत्तियां जो प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्रदान करती हैं।
✅ ग्राहकों की मेलिंग सूची – अमूर्त: यह आर्थिक मूल्य वाली ग्राहक संबंध परिसंपत्ति है, क्योंकि यह भौतिक रूप के बिना प्रत्यक्ष विपणन और व्यावसायिक संचार को सक्षम बनाती है।
❌ सूची/इन्वेंट्री – मूर्त: इन्वेंट्री में बिक्री या उत्पादन के लिए रखे गए भौतिक सामान और कच्चे माल शामिल हैं, जो इसे मापने योग्य भौतिक उपस्थिति के साथ एक मूर्त परिसंपत्ति बनाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: मूर्त बनाम अमूर्त परिसंपत्तियां
- मूर्त परिसंपत्तियां: भौतिक रूप वाली भौतिक संपत्तियां जिन्हें छुआ और देखा जा सकता है (जैसे, भूमि, भवन, मशीनरी, इन्वेंट्री, वाहन)।
- अमूर्त परिसंपत्तियां: गैर-भौतिक संपत्तियां जो कानूनी अधिकारों, बौद्धिक सामग्री या संबंधों से मूल्य प्राप्त करती हैं (जैसे, पेटेंट, ट्रेडमार्क, सद्भावना, ब्रांड इक्विटी, ग्राहक सूची)।
- मूल्यांकन अंतर: मूर्त संपत्तियों का मूल्यांकन भौतिक विशेषताओं के आधार पर आसान होता है, जबकि अमूर्त संपत्तियों के लिए भविष्य के आर्थिक लाभों के आकलन की आवश्यकता होती है।
- मूल्यह्रास बनाम परिशोधन: मूर्त संपत्तियां समय के साथ मूल्यह्रास होती हैं; अमूर्त संपत्तियों का परिशोधन किया जाता है (सद्भावना को छोड़कर, जिसका हानि परीक्षण किया जाता है)।
- आर्थिक महत्व: आधुनिक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में, अमूर्त संपत्तियां अक्सर कंपनी मूल्य का मूर्त संपत्तियों की तुलना में बड़ा हिस्सा बनाती हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सी गतिविधियाँ अर्थव्यवस्था में वास्तविक क्षेत्र का गठन करती हैं?
- किसान अपनी फसल की कटाई कर रहे हैं।
- टेक्सटाइल मिलें कच्चे कपास को कपड़े में परिवर्तित कर रही हैं
- एक वाणिज्यिक बैंक एक व्यापारिक कंपनी को धन उधार दे रहा है
- एक कॉर्पोरेट निकाय विदेशों में रुपया अंकित बॉन्ड जारी कर रहा है
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1 और 2
अर्थव्यवस्था का वास्तविक क्षेत्र उन गतिविधियों से बना है जिनमें वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन शामिल है, जबकि वित्तीय क्षेत्र मौद्रिक लेन-देन और वित्तीय साधनों से संबंधित है। गतिविधियाँ 1 और 2 क्रमशः कृषि और विनिर्माण में वास्तविक उत्पादन प्रक्रियाओं का प्रतिनिधित्व करती हैं, जो वास्तविक क्षेत्र का गठन करती हैं।
✅ कथन 1 – सही: किसानों द्वारा फसल की कटाई एक प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधि है जिसमें कृषि वस्तुओं का वास्तविक उत्पादन शामिल है, जो वास्तविक क्षेत्र का हिस्सा है।
✅ कथन 2 – सही: टेक्सटाइल मिलों द्वारा कच्चे कपास को कपड़े में परिवर्तित करना एक विनिर्माण/द्वितीयक क्षेत्र की गतिविधि है जिसमें भौतिक वस्तुओं का उत्पादन शामिल है, जो वास्तविक क्षेत्र का हिस्सा है।
❌ कथन 3 – गलत: वाणिज्यिक बैंक द्वारा धन उधार देना एक वित्तीय मध्यस्थता गतिविधि है जिसमें वस्तुओं या सेवाओं का उत्पादन शामिल नहीं है; यह वित्तीय क्षेत्र से संबंधित है।
❌ कथन 4 – गलत: विदेशों में बॉन्ड जारी करना पूंजी जुटाने के लिए एक वित्तीय बाजार गतिविधि है; यह वित्तीय क्षेत्र का हिस्सा है, वास्तविक क्षेत्र का नहीं।
📝 संक्षिप्त नोट्स: वास्तविक क्षेत्र बनाम वित्तीय क्षेत्र
| पहलू | वास्तविक क्षेत्र | वित्तीय क्षेत्र |
|---|---|---|
| परिभाषा | वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन से संबंधित | मौद्रिक लेन-देन और वित्तीय सेवाओं से संबंधित |
| घटक | प्राथमिक (कृषि), द्वितीयक (विनिर्माण), तृतीयक (गैर-वित्तीय सेवाएं) | बैंकिंग, बीमा, शेयर बाजार, बॉन्ड, डेरिवेटिव |
| उदाहरण | खेती, कारखाना उत्पादन, खुदरा व्यापार, परिवहन सेवाएं | बैंक ऋण, बीमा पॉलिसी, शेयर ट्रेडिंग, म्यूचुअल फंड |
| जीडीपी योगदान | मूल्य संवर्धन के माध्यम से जीडीपी में प्रत्यक्ष योगदान | वास्तविक क्षेत्र को सुविधा प्रदान करता है लेकिन वित्तीय सेवाएं प्रदान करता है |
| उत्पाद | मूर्त वस्तुएं या वास्तविक सेवाएं | वित्तीय साधन और मध्यस्थता सेवाएं |
🧐 Not Sure What to Study Next?
Get a personalised study plan based on your goals, time and revision needs.
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- क्रय शक्ति समता (PPP) विनिमय दरों की गणना विभिन्न देशों में वस्तुओं और सेवाओं की समान टोकरी की कीमतों की तुलना करके की जाती है।
- PPP डॉलर के संदर्भ में, भारत विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न क्रय शक्ति समता (PPP) और विश्व में भारत की आर्थिक रैंकिंग की समझ का परीक्षण करता है। कथन 1 PPP पद्धति को सही ढंग से परिभाषित करता है, जबकि कथन 2 में भारत की PPP रैंकिंग के बारे में पुरानी जानकारी है।
✅ कथन 1 – सही: PPP विनिमय दरों की गणना वास्तव में विभिन्न देशों में वस्तुओं और सेवाओं की समान टोकरी की कीमतों की तुलना करके की जाती है, जो विनिमय दर में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को समाप्त करती है और जीवन स्तर एवं आर्थिक उत्पादकता की अधिक सटीक तुलना प्रदान करती है।
❌ कथन 2 – गलत: PPP डॉलर के संदर्भ में भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है (चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बाद), छठी सबसे बड़ी नहीं। सांकेतिक GDP के संदर्भ में, भारत पाँचवें स्थान पर है, लेकिन प्रश्न विशेष रूप से PPP डॉलर के बारे में पूछता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: क्रय शक्ति समता (PPP)
- परिभाषा: PPP एक आर्थिक सिद्धांत और पद्धति है जो "वस्तुओं की टोकरी" दृष्टिकोण के माध्यम से विभिन्न देशों की मुद्राओं की तुलना करती है, देशों के बीच मूल्य स्तर में अंतर को समाप्त करती है।
- उद्देश्य: PPP विनिमय दरें सांकेतिक विनिमय दरों की तुलना में वास्तविक आय स्तर और जीवन स्तर की बेहतर तुलना प्रदान करती हैं, क्योंकि वे जीवन यापन की लागत में अंतर को ध्यान में रखती हैं।
- PPP बनाम सांकेतिक GDP: PPP मूल्य अंतर के लिए समायोजित करता है, जो इसे आर्थिक कल्याण की तुलना के लिए अधिक उपयुक्त बनाता है; सांकेतिक GDP बाजार विनिमय दरों का उपयोग करता है और अंतर्राष्ट्रीय क्रय शक्ति को दर्शाता है।
- भारत की वैश्विक रैंकिंग (PPP): भारत PPP GDP द्वारा तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है (चीन और अमेरिका के बाद), लेकिन सांकेतिक GDP द्वारा पाँचवीं (अमेरिका, चीन, जर्मनी और जापान के बाद)।
- PPP द्वारा सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ (2023-24): 1. चीन, 2. संयुक्त राज्य अमेरिका, 3. भारत, 4. जापान, 5. जर्मनी।
- IMF और विश्व बैंक: दोनों अंतर्राष्ट्रीय संगठन नियमित रूप से राष्ट्रों के बीच तुलनात्मक आर्थिक विश्लेषण के लिए PPP-आधारित GDP अनुमान प्रकाशित करते हैं।
एक उच्च बचत अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, पूंजी निर्माण के परिणामस्वरूप उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हो सकती है, इसका कारण है -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — उच्च पूंजी-उत्पादन अनुपात
यहाँ तक कि जब किसी अर्थव्यवस्था में उच्च बचत के कारण पर्याप्त पूंजी निर्माण होता है, यदि पूंजी-उत्पादन अनुपात (COR) उच्च है, तो इसका मतलब है कि उत्पादन की प्रत्येक इकाई के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप निवेश का GDP वृद्धि में अकुशल रूपांतरण होता है। यह अक्षमता तकनीकी पिछड़ेपन, खराब बुनियादी ढांचे, अपर्याप्त कौशल स्तर या संसाधनों के गलत आवंटन से उत्पन्न हो सकती है, जो निवेश को कम उत्पादक बनाती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
• कमजोर प्रशासनिक तंत्र कार्यान्वयन दक्षता को प्रभावित करता है लेकिन सीधे पूंजी-उत्पादन संबंध को परिभाषित नहीं करता।
• निरक्षरता मानव पूंजी की गुणवत्ता को प्रभावित करती है लेकिन यह मुख्य कारण नहीं है कि पूंजी निर्माण आनुपातिक उत्पादन उत्पन्न करने में विफल क्यों रहता है।
• उच्च जनसंख्या घनत्व रोजगार की चुनौतियां पैदा कर सकता है लेकिन सीधे यह नहीं बताता कि निवेशित पूंजी सीमित उत्पादन क्यों पैदा करती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: पूंजी-उत्पादन अनुपात और आर्थिक विकास
- पूंजी निर्माण: किसी दिए गए अवधि के दौरान अर्थव्यवस्था में पूंजीगत वस्तुओं (मशीनरी, भवन, बुनियादी ढांचा) के मौजूदा स्टॉक में शुद्ध वृद्धि।
- पूंजी-उत्पादन अनुपात (COR): उत्पादन की एक इकाई का उत्पादन करने के लिए आवश्यक पूंजी की मात्रा को मापता है। सूत्र: COR = पूंजी स्टॉक / उत्पादन (GDP)
- निम्न COR: पूंजी के कुशल उपयोग को दर्शाता है — प्रत्येक उत्पादन इकाई के लिए कम पूंजी की आवश्यकता (तीव्र विकास के लिए वांछनीय)
- उच्च COR: पूंजी के अकुशल उपयोग को दर्शाता है — प्रत्येक उत्पादन इकाई के लिए अधिक पूंजी की आवश्यकता (उच्च निवेश के बावजूद विकास धीमा करता है)
- वृद्धिशील पूंजी-उत्पादन अनुपात (ICOR): अतिरिक्त उत्पादन इकाई के लिए आवश्यक अतिरिक्त पूंजी को मापता है। विकास मॉडल और योजना में उपयोग किया जाता है।
- उच्च COR के कारण: तकनीकी अप्रचलन, खराब बुनियादी ढांचा, कौशल अंतराल, पूंजी-गहन लेकिन कम-उत्पादकता वाले क्षेत्र, नौकरशाही देरी, और क्षमता का कम उपयोग।
- नीतिगत निहितार्थ: केवल बचत और निवेश बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; निरंतर आर्थिक विकास के लिए पूंजी उपयोग की उत्पादकता और दक्षता में सुधार करना महत्वपूर्ण है।
निरपेक्ष और प्रति व्यक्ति वास्तविक GNP में वृद्धि आर्थिक विकास के उच्च स्तर का संकेत नहीं देती है, यदि -
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — गरीबी और बेरोजगारी में वृद्धि होती है।
आर्थिक वृद्धि (GNP में वृद्धि) स्वतः ही आर्थिक विकास में परिवर्तित नहीं होती यदि लाभ समान रूप से वितरित नहीं होते हैं। जब GNP बढ़ने के बावजूद गरीबी और बेरोजगारी बढ़ती है, तो यह इंगित करता है कि वृद्धि कुछ लोगों में केंद्रित है और व्यापक जनसंख्या के जीवन स्तर में सुधार करने में विफल है। सच्चे आर्थिक विकास के लिए समावेशी वृद्धि आवश्यक है जो गरीबी को कम करे, रोजगार सृजित करे और समग्र कल्याण को बढ़ाए।
📝 संक्षिप्त नोट्स: आर्थिक वृद्धि बनाम आर्थिक विकास
- आर्थिक वृद्धि: वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में मात्रात्मक वृद्धि को संदर्भित करती है, जिसे GNP, GDP और प्रति व्यक्ति आय जैसे संकेतकों द्वारा मापा जाता है।
- आर्थिक विकास: एक गुणात्मक अवधारणा जिसमें आर्थिक वृद्धि के साथ-साथ जीवन स्तर में सुधार, गरीबी और असमानता में कमी, बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा, तथा संसाधनों का सतत उपयोग शामिल है।
- मुख्य अंतर: वृद्धि विकास के लिए आवश्यक लेकिन पर्याप्त शर्त नहीं है। विकास में संरचनात्मक परिवर्तन और संसाधनों का समान वितरण निहित है।
- समावेशी वृद्धि: आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है कि वृद्धि के लाभ समाज के सभी वर्गों, विशेष रूप से गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोगों तक पहुंचें।
- विकास संकेतक: HDI (मानव विकास सूचकांक), गरीबी अनुपात, बेरोजगारी दर, साक्षरता दर, जीवन प्रत्याशा और शिशु मृत्यु दर केवल GNP की तुलना में विकास के बेहतर माप हैं।
- नीति निहितार्थ: सरकारों को वृद्धि को विकास में परिवर्तित करने के लिए रोजगार सृजन, सामाजिक कल्याण कार्यक्रम, शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर पिछले दशक में लगातार बढ़ी है।
- बाजार मूल्यों पर सकल घरेलू उत्पाद (रुपयों में) पिछले दशक में लगातार बढ़ा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: वास्तविक GDP की वृद्धि दर पिछले दशक में लगातार नहीं बढ़ी, बल्कि काफी उतार-चढ़ाव रही। भारत ने 2000 के दशक के मध्य में उच्च वृद्धि, 2008 वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान मंदी, संक्षिप्त सुधार और फिर 2012-13 के आसपास गिरावट का अनुभव किया। लगातार वृद्धि के लिए हर साल वृद्धि दर में बढ़ोतरी होनी चाहिए, जो नहीं हुई।
✅ कथन 2 – सही: बाजार मूल्यों पर GDP (रुपयों में) पिछले दशक में पूर्ण रूप से लगातार बढ़ी है। जब तक वृद्धि दर सकारात्मक रही (जो रही), नाममात्र रुपये के संदर्भ में अर्थव्यवस्था का कुल आकार प्रतिशत वृद्धि दर में उतार-चढ़ाव के बावजूद साल-दर-साल बढ़ता रहा।
किसी देश की राष्ट्रीय आय एक निश्चित अवधि के लिए निम्नलिखित के बराबर होती है:
Detailed Explanation:
राष्ट्रीय आय एक अर्थव्यवस्था में निश्चित अवधि (आमतौर पर एक वर्ष) के दौरान उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को दर्शाती है।
✅ विकल्प 4 – सही: उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मौद्रिक मूल्य राष्ट्रीय आय को सही तरीके से परिभाषित करता है, मध्यवर्ती वस्तुओं को छोड़कर दोहरी गणना से बचाता है।
❌ विकल्प 1 – गलत: नागरिकों द्वारा उत्पादन सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) को संदर्भित करता है, राष्ट्रीय आय नहीं जो भौगोलिक सीमाओं के भीतर उत्पादन को मापती है।
❌ विकल्प 2 – गलत: उपभोग + निवेश केवल पूर्ण व्यय दृष्टिकोण: Y = C + I + G + (X-M) से सरकारी व्यय (G) और शुद्ध निर्यात (X-M) को छोड़ देता है।
❌ विकल्प 3 – गलत: व्यक्तिगत आय का योग उत्पादन में उत्पन्न कॉर्पोरेट लाभ, अवितरित आय और अन्य कारक आय को छोड़ देता है।