UPSC CSE Prelims
भारतीय अर्थव्यवस्था Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for भारतीय अर्थव्यवस्था in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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भारत सरकार के सागरमाला कार्यक्रम के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
मैं. सागरमाला कार्यक्रम लागत प्रभावी और टिकाऊ तटीय बुनियादी ढांचे के माध्यम से बंदरगाह आधारित आर्थिक विकास हासिल करना चाहता है। द्वितीय. सागरमाला कार्यक्रम की सफलता वैश्विक बंदरगाह रैंकिंग में सुधार के साथ-साथ तटीय और अंतर्देशीय जलमार्ग शिपिंग में महत्वपूर्ण वृद्धि में परिलक्षित होती है। तृतीय. सागरमाला 2.0 का लक्ष्य भारत को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप एक वैश्विक समुद्री नवाचार केंद्र के रूप में स्थापित करना है।
उपरोक्त कथनों में से कौन सा/से संबंध सही है/हैं?
- विवरण II कथन I में परिकल्पित रणनीतियों की प्रभावशीलता को मान्य करता है।
- विवरण III कथन I के उद्देश्यों को भविष्य-उन्मुख नवाचार ढांचे में शामिल करके विस्तारित करता है।
- कथन I आधुनिक नवाचार के बजाय केवल पारंपरिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करके कथन III का खंडन करता है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 2 (संबंध 1 और 2 सही हैं)
सरल व्याख्या:
मूल तथ्य:
- कथन I: सागरमाला = बंदरगाह-आधारित विकास (2015 में शुरू)
- कथन II: वास्तविक सफलता — तटीय शिपिंग में 118% वृद्धि, अंतर्देशीय जलमार्ग कार्गो में 700% वृद्धि, 9 भारतीय बंदरगाह वैश्विक टॉप 100 में
- कथन III: सागरमाला 2.0 = अगला चरण, स्मार्ट बंदरगाह, हरित शिपिंग, नवाचार पर केंद्रित
संबंध 1 — सही। कथन II वास्तविक आंकड़े/प्रमाण देता है कि कथन I की रणनीति वास्तव में सफल रही। इसलिए II, I को प्रमाणित करता है।
संबंध 2 — सही। कथन III बस कथन I का अगला चरण है — उसी बंदरगाह-आधारित विकास पर नवाचार और तकनीक जोड़ता है। यह विस्तार करता है, बदलता नहीं।
संबंध 3 — गलत। कथन I, कथन III से विरोधाभासी नहीं है। बुनियादी ढांचा (कथन I) ही वह आधार है जिस पर आधुनिक नवाचार (कथन III) बनाया गया है।
याद रखने की तरकीब: सागरमाला 1.0 = आधार बनाना। सागरमाला 2.0 = उस आधार पर भविष्य बनाना। कोई टकराव नहीं, केवल प्रगति।
भारत में विकलांग व्यक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2018 में भारत की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम, शिक्षा और रोजगार में आरक्षण को अनिवार्य बनाता है, पहुंच और गैर-भेदभाव सुनिश्चित करने के लिए सरकारों पर कानूनी कर्तव्य डालता है।
- सुगम्य भारत अभियान तीन प्रमुख डोमेन - निर्मित बुनियादी ढांचे, परिवहन प्रणाली और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी - में विकलांग व्यक्तियों के लिए सार्वभौमिक पहुंच प्राप्त करने पर केंद्रित है।
- राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त और विकास निगम (एनडीएफडीसी) एक सार्वजनिक क्षेत्र का संगठन है जिसे कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। दिव्यांगजन अधिकार (RPwD) अधिनियम 2018 नहीं, बल्कि 2016 में पारित किया गया था। यह संयुक्त राष्ट्र दिव्यांगजन अधिकार अभिसमय के अनुरूप है और इसमें प्रावधान है:
- सरकारी रोजगार में 4% आरक्षण
- उच्च शिक्षा में 5% आरक्षण
- सरकारों पर गैर-भेदभाव और सुगम्यता सुनिश्चित करने का कानूनी दायित्व
कथन 2 — सही। सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign) 2015 में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) द्वारा शुरू किया गया था। यह तीन प्रमुख क्षेत्रों में सार्वभौमिक सुगम्यता पर केंद्रित है:
- निर्मित अवसंरचना — बाधा-मुक्त सार्वजनिक भवन
- परिवहन प्रणाली — सुगम्य रेलवे, हवाई अड्डे और सड़कें
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी — सुगम्य सरकारी वेबसाइटें और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र
कथन 3 — गलत। NDFDC एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है जो गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत है, परंतु यह कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत स्थापित है।
मुख्य ट्रिक: यह प्रश्न सटीक तथ्यात्मक विवरण परखता है — अधिनियम का वर्ष (2016 बनाम 2018) और मंत्रालय का नाम (सामाजिक न्याय बनाम कॉर्पोरेट मामले)।
निम्नलिखित में से कौन सा राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए) के तहत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (आरएडी) पहल का उद्देश्य है/हैं?
- वर्षा आधारित क्षेत्रों में मोनोकल्चर को प्रोत्साहित करना
- सिंचित क्षेत्रों में चावल की खेती बढ़ाना
- एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना और जलवायु संबंधी जोखिमों को कम करना
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत।
RAD स्पष्ट रूप से एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) को बढ़ावा देता है, जिसमें बहु-फसल, चक्रीय फसल, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि-वानिकी शामिल हैं। एकल फसल (मोनोकल्चर) इस योजना के मूल दर्शन के विरुद्ध है।
कथन 2 — गलत।
RAD का लक्ष्य वर्षा आधारित क्षेत्र हैं — अर्थात् वे क्षेत्र जहाँ सुनिश्चित सिंचाई उपलब्ध नहीं है। पहले से सिंचित क्षेत्रों में चावल की खेती विस्तार करना इसके दायरे से पूरी तरह बाहर है।
कथन 3 — सही।
RAD का मुख्य उद्देश्य IFS के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना और जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) विकसित करना है, ताकि सूखा, बाढ़ और फसल विफलता जैसी स्थितियों में किसानों की आय सुरक्षित रह सके।
मुख्य बिंदु: NMSA के अंतर्गत RAD मूल रूप से जल-अल्प, वर्षा-निर्भर कृषि क्षेत्रों में विविधीकरण और लचीलेपन पर केंद्रित है — न कि एकल फसल या सिंचित क्षेत्र विस्तार पर।
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राष्ट्रीय गोकुल मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. यह ग्रामीण गरीबों के उन्नयन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश कम उत्पादक देशी पशु छोटे और सीमांत किसानों तथा भूमिहीन मजदूरों के पास हैं।
II. इसे देशी गाय और भैंस पालन तथा संरक्षण को वैज्ञानिक और समग्र तरीके से बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन I — सही। अधिकांश कम उत्पादक देशी पशु छोटे किसानों, सीमांत किसानों और भूमिहीन मजदूरों के पास हैं। इन पशुओं की उत्पादकता बढ़ाकर, RGM सीधे ग्रामीण गरीबों के उन्नयन में मदद करता है।
कथन II — सही। दिसंबर 2014 में शुरू, RGM का उद्देश्य वैज्ञानिक प्रजनन और आनुवंशिक उन्नयन के माध्यम से देशी गाय-भैंस नस्लों का संरक्षण और विकास करना है — एक समग्र तरीके से।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| शुरुआत | दिसंबर 2014 |
| मंत्रालय | मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय |
| उद्देश्य | देशी गाय-भैंस नस्लों का संरक्षण और विकास |
| विधि | वैज्ञानिक प्रजनन, आनुवंशिक उन्नयन, कृत्रिम गर्भाधान |
| मुख्य घटक | गोकुल ग्राम की स्थापना |
| लाभार्थी | छोटे किसान, सीमांत किसान, भूमिहीन मजदूर |
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: दुनिया के दो प्रमुख इथेनॉल उत्पादकों, यानी ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका में से, ब्राजील बाद वाले की तुलना में अधिक इथेनॉल का उत्पादन करता है।
कथन II: संयुक्त राज्य अमेरिका के विपरीत जहां मक्का इथेनॉल उत्पादन के लिए प्रमुख फीडस्टॉक है, ब्राजील में गन्ना इथेनॉल उत्पादन के लिए प्रमुख फीडस्टॉक है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और ब्राज़ील दुनिया के दो सबसे बड़े एथेनॉल उत्पादक देश हैं। लेकिन एथेनॉल उत्पादन में USA, ब्राज़ील से आगे है। दोनों देशों में एथेनॉल उत्पादन के लिए अलग-अलग प्रमुख फीडस्टॉक का उपयोग किया जाता है।
❌ कथन I गलत है: दुनिया में सबसे अधिक एथेनॉल उत्पादन संयुक्त राज्य अमेरिका करता है, न कि ब्राज़ील।
✅ कथन II सही है: USA में एथेनॉल उत्पादन के लिए मुख्य रूप से मक्का (Corn/Maize) का उपयोग होता है, जबकि ब्राज़ील में गन्ना (Sugarcane) प्रमुख फीडस्टॉक है।
संक्षिप्त नोट्स: एथेनॉल उत्पादन
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एथेनॉल एक नवीकरणीय (Renewable) जैव-ईंधन है।
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USA दुनिया का सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक है।
-
ब्राज़ील दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एथेनॉल उत्पादक है।
-
USA में मुख्य फीडस्टॉक मक्का (Corn) है।
-
ब्राज़ील में मुख्य फीडस्टॉक गन्ना (Sugarcane) है।
-
भारत में एथेनॉल मुख्यतः गन्ने की शीरा (Molasses), गन्ने के रस और खाद्यान्नों से बनाया जाता है।
-
एथेनॉल मिश्रण (Blending) से कच्चे तेल के आयात में कमी आती है।
A country’s fiscal deficit stands at ₹50,000 crores. It is receiving ₹10,000 crores through non-debt creating capital receipts. The country’s interest liabilities are ₹1,500 crores. What is the gross primary deficit?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (₹48,500 करोड़)
यह प्रश्न Primary Deficit (प्राथमिक घाटा) की गणना पर आधारित है, जो Fiscal Deficit से ब्याज भुगतान को घटाकर निकाला जाता है।
✅ Fiscal Deficit = ₹50,000 करोड़ (दिया गया है)
✅ Interest Liabilities = ₹1,500 करोड़ (दिया गया है)
✅ सूत्र:
Primary Deficit = Fiscal Deficit − Interest Payments
गणना:
= ₹50,000 करोड़ − ₹1,500 करोड़
= ₹48,500 करोड़
ध्यान दें: ₹10,000 करोड़ के Non-Debt Capital Receipts पहले से ही Fiscal Deficit की गणना में शामिल होते हैं। इसलिए इन्हें दोबारा घटाने की आवश्यकता नहीं होती।
संक्षिप्त नोट्स: Fiscal Deficit और Primary Deficit
-
Fiscal Deficit सरकार की कुल उधारी आवश्यकता को दर्शाता है।
-
Fiscal Deficit = कुल व्यय − कुल प्राप्तियां (उधारी को छोड़कर)।
-
Primary Deficit = Fiscal Deficit − Interest Payments।
-
Primary Deficit वर्तमान वर्ष की वास्तविक वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
-
कम Primary Deficit बेहतर वित्तीय अनुशासन का संकेत है।
-
यदि Primary Deficit शून्य हो, तो नई उधारी केवल पुराने ऋणों के ब्याज भुगतान के लिए ली जा रही है।
-
Non-Debt Capital Receipts में विनिवेश (Disinvestment) और ऋण वसूली (Loan Recovery) शामिल होते हैं।
निम्नलिखित देशों पर विचार करें:
मैं. संयुक्त अरब अमीरात
द्वितीय. फ़्रांस
III. जर्मनी
IV. सिंगापुर
वी. बांग्लादेश
उपरोक्त देशों में भारत के अलावा ऐसे कितने देश हैं जहां यूपीआई के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापारी भुगतान स्वीकार किए जाते हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 2 (केवल तीन)
भारत का UPI (Unified Payments Interface) विभिन्न देशों के भुगतान नेटवर्क के साथ साझेदारी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित हुआ है। हालांकि, अभी केवल कुछ देशों में ही UPI आधारित मर्चेंट भुगतान स्वीकार किए जाते हैं।
✅ I. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) – सही: UAE में चुनिंदा व्यापारियों के यहां UPI भुगतान स्वीकार किए जाते हैं।
✅ II. फ्रांस – सही: फ्रांस में UPI भुगतान की सुविधा उपलब्ध है, जिसमें Eiffel Tower जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल भी शामिल हैं।
❌ III. जर्मनी – गलत: जर्मनी में अभी UPI मर्चेंट भुगतान की आधिकारिक व्यवस्था लागू नहीं हुई है।
✅ IV. सिंगापुर – सही: सिंगापुर में UPI आधारित सीमा-पार भुगतान और मर्चेंट भुगतान उपलब्ध हैं।
❌ V. बांग्लादेश – गलत: बांग्लादेश में अभी UPI मर्चेंट भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं है।
अतः दिए गए देशों में UAE, फ्रांस और सिंगापुर — कुल तीन देशों में UPI के तहत अंतरराष्ट्रीय मर्चेंट भुगतान स्वीकार किए जाते हैं।
संक्षिप्त नोट्स: UPI का अंतरराष्ट्रीय विस्तार
-
UPI का विकास National Payments Corporation of India द्वारा किया गया है।
-
यह रियल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है।
-
UPI मर्चेंट भुगतान UAE, सिंगापुर, फ्रांस, भूटान, नेपाल, मॉरीशस और श्रीलंका में उपलब्ध हैं।
-
UPI अंतरराष्ट्रीय कार्ड नेटवर्क पर निर्भरता कम करने में मदद करता है।
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यह पर्यटन, प्रेषण (Remittance) और व्यापारिक भुगतानों को आसान बनाता है।
-
UPI दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल भुगतान प्रणालियों में से एक है।
-
इसका विनियमन Reserve Bank of India द्वारा किया जाता है।
इंटरनेशनल बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन एंड डेवलपमेंट (आईबीआरडी) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. यह मध्यम आय वाले देशों को ऋण और गारंटी प्रदान करता है।
II. यह विकासशील देशों को गरीबी कम करने में मदद करने के लिए अकेले काम करता है।
III. इसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप के पुनर्निर्माण में मदद करने के लिए की गई थी।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 3 (केवल I और III)
International Bank for Reconstruction and Development विश्व बैंक समूह की प्रमुख संस्था है। इसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पुनर्निर्माण के लिए की गई थी और आज यह विकास परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
✅ कथन I सही है: IBRD मुख्य रूप से मध्यम आय वाले देशों तथा ऋण-योग्य निम्न आय वाले देशों को ऋण और गारंटी प्रदान करता है।
❌ कथन II गलत है: गरीबी उन्मूलन के लिए IBRD अकेले कार्य नहीं करता। यह विश्व बैंक समूह की अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर काम करता है, जैसे:
-
IDA
-
IFC
-
MIGA
✅ कथन III सही है: IBRD की स्थापना 1944 में Bretton Woods Conference के दौरान हुई थी ताकि World War II के बाद यूरोप के पुनर्निर्माण में सहायता दी जा सके।
संक्षिप्त नोट्स: International Bank for Reconstruction and Development (IBRD)
-
IBRD की स्थापना 1944 में हुई थी।
-
यह World Bank Group की प्रमुख संस्था है।
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मुख्यालय: Washington, D.C.।
-
यह मध्यम आय वाले देशों को ऋण और गारंटी प्रदान करता है।
-
शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना और प्रशासनिक सुधारों को वित्तपोषित करता है।
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धन जुटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजारों का उपयोग करता है।
-
इसका प्रारंभिक उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप का पुनर्निर्माण था।
मान लीजिए कि राजस्व व्यय ₹80,000 करोड़ है और सरकार की राजस्व प्राप्तियाँ ₹60,000 करोड़ है। सरकार के बजट में ₹10,000 करोड़ की उधारी और ₹6,000 करोड़ का ब्याज भुगतान भी दिखाया गया है।
निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
I. राजस्व घाटा ₹20,000 करोड़ है।
II. राजकोषीय घाटा ₹10,000 करोड़ है.
III. प्राथमिक घाटा ₹4,000 करोड़ है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (I, II और III)
यह प्रश्न सरकारी बजट में प्रयुक्त Revenue Deficit, Fiscal Deficit और Primary Deficit की गणना पर आधारित है।
✅ कथन I सही है: Revenue Deficit = Revenue Expenditure − Revenue Receipts
= ₹80,000 करोड़ − ₹60,000 करोड़
= ₹20,000 करोड़
✅ कथन II सही है: Fiscal Deficit सरकार की कुल उधारी आवश्यकता को दर्शाता है।
दिया गया है: Borrowings = ₹10,000 करोड़
अतः Fiscal Deficit = ₹10,000 करोड़
✅ कथन III सही है: Primary Deficit = Fiscal Deficit − Interest Payments
= ₹10,000 करोड़ − ₹6,000 करोड़
= ₹4,000 करोड़
संक्षिप्त नोट्स: बजट घाटे (Budget Deficits)
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Revenue Deficit = Revenue Expenditure − Revenue Receipts
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Revenue Deficit दर्शाता है कि सरकार अपनी नियमित आय से दैनिक खर्च पूरे नहीं कर पा रही है।
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Fiscal Deficit = सरकार की कुल उधारी आवश्यकता
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Fiscal Deficit कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (उधारी को छोड़कर) के बीच का अंतर दर्शाता है।
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Primary Deficit = Fiscal Deficit − Interest Payments
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Primary Deficit वर्तमान वर्ष की वास्तविक वित्तीय स्थिति को दर्शाता है।
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शून्य Primary Deficit का अर्थ है कि नई उधारी केवल पुराने ऋणों के ब्याज भुगतान के लिए ली जा रही है।
आरटीजीएस और एनईएफटी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. आरटीजीएस में, निपटान का समय तत्काल होता है जबकि एनईएफटी के मामले में, भुगतान का निपटान करने में कुछ समय लगता है।
II. आरटीजीएस में, ग्राहक से आवक लेनदेन के लिए शुल्क लिया जाता है जबकि एनईएफटी के मामले में ऐसा नहीं है।
III. आरटीजीएस के लिए परिचालन घंटे कुछ निश्चित दिनों में प्रतिबंधित हैं जबकि एनईएफटी के लिए यह सच नहीं है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (केवल I)
RTGS (Real Time Gross Settlement) और NEFT (National Electronic Funds Transfer) भारत में इलेक्ट्रॉनिक धन हस्तांतरण की प्रमुख प्रणालियाँ हैं, जिन्हें Reserve Bank of India संचालित करता है। दोनों के बीच मुख्य अंतर भुगतान निपटान (Settlement) की गति और प्रक्रिया में है।
✅ कथन I सही है: RTGS में लेन-देन रियल टाइम और व्यक्तिगत रूप से निपटाए जाते हैं, इसलिए भुगतान लगभग तुरंत हो जाता है। NEFT में लेन-देन बैचों में निपटाए जाते हैं, इसलिए कुछ समय लग सकता है।
❌ कथन II गलत है: RBI के नियमों के अनुसार RTGS और NEFT दोनों में धन प्राप्त करने (Inward Transaction) पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
❌ कथन III गलत है: वर्तमान में RTGS और NEFT दोनों 24×7×365 उपलब्ध हैं, जिसमें छुट्टियाँ और सप्ताहांत भी शामिल हैं। इसलिए RTGS के लिए अलग से सीमित कार्य समय नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: RTGS और NEFT
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RTGS का पूरा नाम Real Time Gross Settlement है।
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NEFT का पूरा नाम National Electronic Funds Transfer है।
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RTGS में भुगतान तुरंत और व्यक्तिगत रूप से निपटाया जाता है।
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NEFT में भुगतान बैच आधारित प्रणाली से निपटाया जाता है।
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दोनों प्रणालियाँ RBI द्वारा संचालित हैं।
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RTGS और NEFT दोनों 24×7×365 उपलब्ध हैं।
-
दोनों में Inward Transactions पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. वैश्विक स्तर पर कारोबार किए जाने वाले सभी इक्विटी विकल्प अनुबंधों में भारत का हिस्सा बहुत बड़ा है, जिससे बड़ी तेजी देखी जा रही है।
II. भारत का शेयर बाजार हाल के दिनों में तेजी से बढ़ा है, यहां तक कि कुछ समय में यह हांगकांग से भी आगे निकल गया है।
III. छोटे निवेशकों को विकल्प ट्रेडिंग के जोखिमों के बारे में चेतावनी देने या इस संबंध में अपंजीकृत वित्तीय सलाहकारों पर कार्रवाई करने के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (केवल I और II)
हाल के वर्षों में भारत में शेयर बाजार और डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में तेज़ वृद्धि हुई है। साथ ही, निवेशकों की सुरक्षा और बाजार विनियमन का कार्य Securities and Exchange Board of India द्वारा किया जाता है।
✅ कथन I सही है: भारत वैश्विक स्तर पर इक्विटी ऑप्शन ट्रेडिंग का बहुत बड़ा हिस्सा रखता है, जो डेरिवेटिव्स बाजार में भारी वृद्धि को दर्शाता है।
✅ कथन II सही है: भारत का शेयर बाजार पूंजीकरण तेजी से बढ़ा और 2024 में कुछ समय के लिए Hong Kong के बाजार पूंजीकरण से भी आगे निकल गया था।
❌ कथन III गलत है: भारत में SEBI नामक नियामक संस्था मौजूद है, जो:
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निवेशकों को ऑप्शन ट्रेडिंग के जोखिमों के बारे में चेतावनी देती है।
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निवेश सलाहकारों को विनियमित करती है।
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अनधिकृत और पंजीकरण रहित वित्तीय सलाहकारों के विरुद्ध कार्रवाई करती है।
संक्षिप्त नोट्स: भारत का Equity Options Market
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भारत दुनिया के सबसे बड़े इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजारों में से एक है।
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Equity Option खरीदार को किसी परिसंपत्ति को खरीदने या बेचने का अधिकार देता है, बाध्यता नहीं।
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अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम का अर्थ हमेशा अधिक लाभ नहीं होता।
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SEBI पूंजी बाजार का प्रमुख नियामक है।
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National Stock Exchange और Bombay Stock Exchange भारत के प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं।
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भारत हाल के वर्षों में बाजार पूंजीकरण के आधार पर विश्व के शीर्ष शेयर बाजारों में शामिल हुआ।
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SEBI समय-समय पर ऑप्शन ट्रेडिंग के जोखिमों को लेकर निवेशक सलाह जारी करता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: जहां तक किसी कंपनी में निवेश से मिलने वाले रिटर्न का संबंध है, आम तौर पर बांडधारकों को स्टॉकधारकों की तुलना में अपेक्षाकृत कम जोखिम वाला माना जाता है।
कथन II: बॉन्डधारक किसी कंपनी के ऋणदाता होते हैं जबकि स्टॉकधारक इसके मालिक होते हैं।
कथन III: पुनर्भुगतान उद्देश्य के लिए, किसी कंपनी द्वारा स्टॉकधारकों की तुलना में बांडधारकों को प्राथमिकता दी जाती है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1
किसी कंपनी में निवेश के संदर्भ में बॉण्डधारक (Bondholders) आमतौर पर शेयरधारकों (Stockholders) की तुलना में कम जोखिम का सामना करते हैं, क्योंकि बॉण्ड ऋण साधन होते हैं जबकि शेयर कंपनी में स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।
✅ कथन I सही है: बॉण्डधारकों का जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है क्योंकि उन्हें निश्चित ब्याज मिलता है और कंपनी की परिसंपत्तियों पर उनका दावा शेयरधारकों से पहले होता है।
✅ कथन II सही है: बॉण्डधारक कंपनी को ऋण देने वाले (Lenders/Creditors) होते हैं, जबकि शेयरधारक कंपनी के मालिक (Owners) होते हैं।
✅ कथन III सही है: कंपनी के परिसमापन (Liquidation) या दिवालियापन की स्थिति में बॉण्डधारकों को शेयरधारकों से पहले भुगतान किया जाता है।
क्यों II और III, I की व्याख्या करते हैं: क्योंकि बॉण्डधारक लेनदार होते हैं और भुगतान में उन्हें प्राथमिकता मिलती है, इसलिए उनका निवेश अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित माना जाता है।
संक्षिप्त नोट्स: Bonds और Stocks
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Bonds ऋण साधन (Debt Instruments) होते हैं; निवेशक ऋणदाता होता है।
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Stocks (Shares) कंपनी में स्वामित्व का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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बॉण्डधारकों को निश्चित ब्याज (Fixed Interest) प्राप्त होता है।
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शेयरधारकों को लाभांश (Dividend) और पूंजी वृद्धि से लाभ मिलता है।
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परिसमापन की स्थिति में लेनदारों और बॉण्डधारकों को पहले भुगतान किया जाता है।
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बॉण्ड सामान्यतः कम जोखिम और कम प्रतिफल वाले होते हैं।
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शेयर सामान्यतः अधिक जोखिम और अधिक प्रतिफल की संभावना रखते हैं।
वर्ष 2022-23 के दौरान हल्दी के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. भारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है।
II. भारत में हल्दी की 30 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं।
III. महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु भारत में प्रमुख हल्दी उत्पादक राज्य हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4 (I, II और III)
भारत हल्दी का विश्व में सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक देश है। देश की विविध जलवायु और मिट्टी की परिस्थितियाँ हल्दी की अनेक किस्मों की खेती के लिए उपयुक्त हैं।
✅ कथन I सही है: भारत दुनिया में हल्दी का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है।
✅ कथन II सही है: भारत में हल्दी की 30 से अधिक किस्में उगाई जाती हैं, जैसे Alleppey Finger, Salem, Rajapore और Nizamabad।
✅ कथन III सही है: तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु भारत के प्रमुख हल्दी उत्पादक राज्यों में शामिल हैं।
संक्षिप्त नोट्स: भारत में हल्दी उत्पादन
-
भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और निर्यातक है।
-
हल्दी को "Indian Saffron" भी कहा जाता है।
-
हल्दी का वैज्ञानिक नाम Curcuma longa है।
-
Curcumin हल्दी का प्रमुख सक्रिय तत्व है, जो औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है।
-
प्रमुख उत्पादक राज्य: तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा।
-
भारत में हल्दी की 30 से अधिक किस्में पाई जाती हैं।
-
हल्दी का उपयोग खाद्य पदार्थों, औषधि, सौंदर्य प्रसाधन और आयुर्वेद में व्यापक रूप से किया जाता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: भारत में, ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गी पालन और ऊन पालन जैसी संबद्ध कृषि गतिविधियों से होने वाली आय को किसी भी कर से छूट दी गई है।
कथन II: भारत में, ग्रामीण कृषि भूमि को आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4
आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार केवल भूमि की खेती जैसी मुख्य कृषि गतिविधियों से प्राप्त आय को कृषि आय माना जाता है और उस पर कर छूट मिलती है। जबकि पोल्ट्री फार्मिंग और ऊन उत्पादन जैसी सहायक गतिविधियों से प्राप्त आय कर योग्य होती है। साथ ही, ग्रामीण कृषि भूमि को पूंजीगत संपत्ति की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
❌ कथन I गलत है: पोल्ट्री फार्मिंग, डेयरी, मत्स्य पालन और ऊन उत्पादन जैसी सहायक कृषि गतिविधियों से होने वाली आय कर-मुक्त नहीं होती, बल्कि सामान्यतः कर योग्य होती है।
✅ कथन II सही है: ग्रामीण कृषि भूमि (Rural Agricultural Land) को आयकर अधिनियम की धारा 2(14) के तहत पूंजीगत संपत्ति (Capital Asset) नहीं माना जाता। इसलिए इसकी बिक्री पर सामान्यतः पूंजीगत लाभ कर नहीं लगता।
❌ कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता: कथन II भूमि की कर स्थिति से संबंधित है, जबकि कथन I सहायक कृषि गतिविधियों की आय से संबंधित है। दोनों का आपस में सीधा संबंध नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: कृषि आय और ग्रामीण कृषि भूमि
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भूमि की खेती से प्राप्त आय आयकर से मुक्त होती है।
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पोल्ट्री, डेयरी, मत्स्य पालन और ऊन उत्पादन से प्राप्त आय कर योग्य होती है।
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धारा 2(14) में पूंजीगत संपत्ति की परिभाषा दी गई है।
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ग्रामीण कृषि भूमि को पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता।
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ग्रामीण कृषि भूमि की बिक्री पर सामान्यतः Capital Gains Tax नहीं लगता।
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शहरी कृषि भूमि को सामान्यतः पूंजीगत संपत्ति माना जाता है।
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यह छूट किसानों और कृषि गतिविधियों को संरक्षण देने के लिए दी गई है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. पूंजीगत प्राप्तियां देनदारी पैदा करती हैं या सरकार की संपत्ति में कमी का कारण बनती हैं।
II. उधार और विनिवेश पूंजीगत प्राप्तियां हैं।
III. ऋण पर प्राप्त ब्याज सरकार की देनदारी बनाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 1 (केवल I और II)
सरकारी प्राप्तियों को मुख्यतः राजस्व प्राप्तियाँ (Revenue Receipts) और पूंजी प्राप्तियाँ (Capital Receipts) में बाँटा जाता है। पूंजी प्राप्तियाँ या तो सरकार की देनदारियाँ बढ़ाती हैं या उसकी परिसंपत्तियों को कम करती हैं।
✅ कथन I सही है: पूंजी प्राप्तियाँ दायित्व (Liability) उत्पन्न करती हैं या सरकारी परिसंपत्तियों में कमी लाती हैं।
✅ कथन II सही है: उधार (Borrowings) और विनिवेश (Disinvestment) दोनों पूंजी प्राप्तियाँ हैं।
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उधार लेने से देनदारी बढ़ती है।
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विनिवेश से सरकारी परिसंपत्तियाँ कम होती हैं।
❌ कथन III गलत है: ऋणों पर प्राप्त ब्याज (Interest Received) एक राजस्व प्राप्ति (Revenue Receipt) है। यह सरकार की आय है, कोई देनदारी नहीं बनाता।
संक्षिप्त नोट्स: पूंजी प्राप्तियाँ और राजस्व प्राप्तियाँ
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सरकारी प्राप्तियाँ पूंजी प्राप्तियाँ और राजस्व प्राप्तियाँ में विभाजित होती हैं।
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पूंजी प्राप्तियाँ दायित्व बढ़ाती हैं या परिसंपत्तियाँ घटाती हैं।
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पूंजी प्राप्तियों के उदाहरण: उधार, ऋण वसूली, विनिवेश।
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राजस्व प्राप्तियाँ न तो दायित्व बढ़ाती हैं और न ही परिसंपत्तियाँ घटाती हैं।
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राजस्व प्राप्तियों के उदाहरण: कर, शुल्क, लाभांश, ब्याज प्राप्ति।
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उधार लेने से सार्वजनिक ऋण (Public Debt) बढ़ता है।
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विनिवेश में सार्वजनिक उपक्रमों में सरकारी हिस्सेदारी बेची जाती है।