UPSC CSE Prelims
कल्याणकारी कार्यक्रम Previous Year Questions (PYQs)
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Solved Previous Year Questions
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भारत में विकलांग व्यक्तियों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2018 में भारत की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम, शिक्षा और रोजगार में आरक्षण को अनिवार्य बनाता है, पहुंच और गैर-भेदभाव सुनिश्चित करने के लिए सरकारों पर कानूनी कर्तव्य डालता है।
- सुगम्य भारत अभियान तीन प्रमुख डोमेन - निर्मित बुनियादी ढांचे, परिवहन प्रणाली और सूचना और संचार प्रौद्योगिकी - में विकलांग व्यक्तियों के लिए सार्वभौमिक पहुंच प्राप्त करने पर केंद्रित है।
- राष्ट्रीय दिव्यांगजन वित्त और विकास निगम (एनडीएफडीसी) एक सार्वजनिक क्षेत्र का संगठन है जिसे कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय द्वारा विकलांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के बीच उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए एक गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में स्थापित किया गया है।
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत। दिव्यांगजन अधिकार (RPwD) अधिनियम 2018 नहीं, बल्कि 2016 में पारित किया गया था। यह संयुक्त राष्ट्र दिव्यांगजन अधिकार अभिसमय के अनुरूप है और इसमें प्रावधान है:
- सरकारी रोजगार में 4% आरक्षण
- उच्च शिक्षा में 5% आरक्षण
- सरकारों पर गैर-भेदभाव और सुगम्यता सुनिश्चित करने का कानूनी दायित्व
कथन 2 — सही। सुगम्य भारत अभियान (Accessible India Campaign) 2015 में दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (DEPwD) द्वारा शुरू किया गया था। यह तीन प्रमुख क्षेत्रों में सार्वभौमिक सुगम्यता पर केंद्रित है:
- निर्मित अवसंरचना — बाधा-मुक्त सार्वजनिक भवन
- परिवहन प्रणाली — सुगम्य रेलवे, हवाई अड्डे और सड़कें
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी — सुगम्य सरकारी वेबसाइटें और डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र
कथन 3 — गलत। NDFDC एक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है जो गैर-लाभकारी कंपनी के रूप में पंजीकृत है, परंतु यह कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत स्थापित है।
मुख्य ट्रिक: यह प्रश्न सटीक तथ्यात्मक विवरण परखता है — अधिनियम का वर्ष (2016 बनाम 2018) और मंत्रालय का नाम (सामाजिक न्याय बनाम कॉर्पोरेट मामले)।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
I. यह ग्रामीण गरीबों के उन्नयन के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अधिकांश कम उत्पादक देशी पशु छोटे और सीमांत किसानों तथा भूमिहीन मजदूरों के पास हैं।
II. इसे देशी गाय और भैंस पालन तथा संरक्षण को वैज्ञानिक और समग्र तरीके से बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
कथन I — सही। अधिकांश कम उत्पादक देशी पशु छोटे किसानों, सीमांत किसानों और भूमिहीन मजदूरों के पास हैं। इन पशुओं की उत्पादकता बढ़ाकर, RGM सीधे ग्रामीण गरीबों के उन्नयन में मदद करता है।
कथन II — सही। दिसंबर 2014 में शुरू, RGM का उद्देश्य वैज्ञानिक प्रजनन और आनुवंशिक उन्नयन के माध्यम से देशी गाय-भैंस नस्लों का संरक्षण और विकास करना है — एक समग्र तरीके से।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| शुरुआत | दिसंबर 2014 |
| मंत्रालय | मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय |
| उद्देश्य | देशी गाय-भैंस नस्लों का संरक्षण और विकास |
| विधि | वैज्ञानिक प्रजनन, आनुवंशिक उन्नयन, कृत्रिम गर्भाधान |
| मुख्य घटक | गोकुल ग्राम की स्थापना |
| लाभार्थी | छोटे किसान, सीमांत किसान, भूमिहीन मजदूर |
भारत में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- सीएसआर नियम निर्दिष्ट करते हैं कि जो व्यय कंपनी या उसके कर्मचारियों को सीधे लाभ पहुंचाते हैं उन्हें सीएसआर गतिविधियां नहीं माना जाएगा।
- सीएसआर नियम सीएसआर गतिविधियों पर न्यूनतम खर्च निर्दिष्ट नहीं करते हैं।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
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जनसांख्यिकीय लाभांश के पूर्ण लाभ प्राप्त करने के लिए भारत को क्या करना चाहिए?
Detailed Explanation:
जनसांख्यिकीय लाभांश का अर्थ आर्थिक विकास की संभावना है जब कार्यशील आयु वर्ग की जनसंख्या (15-64 वर्ष) गैर-कार्यशील आयु वर्ग से अधिक हो।
कौशल विकास को बढ़ावा देना इस बड़े कार्यबल को उत्पादक और रोजगार योग्य मानव पूंजी में बदलने के लिए आवश्यक है। पर्याप्त तकनीकी और व्यावसायिक कौशल के बिना, बड़ी कार्यशील जनसंख्या आर्थिक विकास के बजाय बेरोजगारी और सामाजिक अस्थिरता की ओर ले जाती है। सामाजिक सुरक्षा योजनाएं सुरक्षा जाल प्रदान करती हैं लेकिन उत्पादकता नहीं बढ़ातीं। शिशु मृत्यु दर कम करना भविष्य की जनसांख्यिकी को प्रभावित करता है, वर्तमान कार्यबल की गुणवत्ता को नहीं। केवल उच्च शिक्षा का निजीकरण सभी आर्थिक क्षेत्रों में कौशल-आधारित रोजगार सुनिश्चित नहीं करता।
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