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कृषि सुधार Previous Year Questions (PYQs)
Practice solved questions for कृषि सुधार with detailed step-by-step solutions, key insights, and trend analysis for UPSC CSE PRELIMS.
Solved Previous Year Questions
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निम्नलिखित में से कौन सा राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (एनएमएसए) के तहत वर्षा आधारित क्षेत्र विकास (आरएडी) पहल का उद्देश्य है/हैं?
- वर्षा आधारित क्षेत्रों में मोनोकल्चर को प्रोत्साहित करना
- सिंचित क्षेत्रों में चावल की खेती बढ़ाना
- एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना और जलवायु संबंधी जोखिमों को कम करना
नीचे दिए गए कोड का उपयोग करके उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
कथन 1 — गलत।
RAD स्पष्ट रूप से एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS) को बढ़ावा देता है, जिसमें बहु-फसल, चक्रीय फसल, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि-वानिकी शामिल हैं। एकल फसल (मोनोकल्चर) इस योजना के मूल दर्शन के विरुद्ध है।
कथन 2 — गलत।
RAD का लक्ष्य वर्षा आधारित क्षेत्र हैं — अर्थात् वे क्षेत्र जहाँ सुनिश्चित सिंचाई उपलब्ध नहीं है। पहले से सिंचित क्षेत्रों में चावल की खेती विस्तार करना इसके दायरे से पूरी तरह बाहर है।
कथन 3 — सही।
RAD का मुख्य उद्देश्य IFS के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना और जलवायु लचीलापन (Climate Resilience) विकसित करना है, ताकि सूखा, बाढ़ और फसल विफलता जैसी स्थितियों में किसानों की आय सुरक्षित रह सके।
मुख्य बिंदु: NMSA के अंतर्गत RAD मूल रूप से जल-अल्प, वर्षा-निर्भर कृषि क्षेत्रों में विविधीकरण और लचीलेपन पर केंद्रित है — न कि एकल फसल या सिंचित क्षेत्र विस्तार पर।
निम्नलिखित में से कौन सा 'लघु कृषक वृहत क्षेत्र' (Small Farmer Large Field) की अवधारणा का सर्वोत्तम वर्णन करता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — एक क्षेत्र में कई सीमांत किसान स्वयं को समूहों में संगठित करते हैं और चयनित कृषि संक्रियाओं का समन्वय और सामंजस्य करते हैं
'लघु कृषक वृहत क्षेत्र' (SFLF) मॉडल एक सहभागी सामूहिक कार्रवाई दृष्टिकोण है जिसमें सन्निहित भूमि जोत वाले छोटे और सीमांत किसान स्वेच्छा से समूह बनाते हैं और भूमि की तैयारी, बुवाई, सिंचाई और कटाई जैसी प्रमुख कृषि संक्रियाओं को सामूहिक रूप से करते हैं। यह किसान-नेतृत्व वाला मॉडल निवेश खरीद और उत्पादन विपणन में पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं को प्राप्त करके खंडित भूमि जोत की सीमाओं को दूर करने में मदद करता है, जबकि व्यक्तिगत किसान अपनी भूमि का स्वामित्व बनाए रखते हैं। यह मॉडल वियतनाम के सफल 'वृहत क्षेत्र' दृष्टिकोण से अनुकूलित किया गया था और सीमांत किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों को संबोधित करने के लिए ओडिशा जैसे राज्यों में परीक्षण किया गया है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
• विकल्प 1 सामूहिक खेती के साथ एक शरणार्थी पुनर्वास और पुनर्वास कार्यक्रम का वर्णन करता है, SFLF मॉडल का नहीं।
• विकल्प 3 कॉर्पोरेट खेती का वर्णन करता है जहां किसान एक निश्चित अवधि के लिए एक कॉर्पोरेट निकाय को भूमि सौंप देते हैं—इसमें परिचालन नियंत्रण का नुकसान होता है, SFLF के विपरीत।
• विकल्प 4 अनुबंध खेती का वर्णन करता है जहां एक कंपनी किसानों को निवेश और तकनीकी सहायता प्रदान करती है जो कंपनी की आवश्यकताओं के लिए विशिष्ट फसलों का उत्पादन करते हैं—यह कंपनी-संचालित है, जबकि SFLF किसान-संचालित है और विशिष्ट फसल अनुबंधों के बजाय सामूहिक संक्रियाओं पर केंद्रित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: लघु कृषक वृहत क्षेत्र (SFLF) मॉडल
- उत्पत्ति: वियतनाम में सफलतापूर्वक कार्यान्वित 'वृहत क्षेत्र' मॉडल से अनुकूलित
- उद्देश्य: छोटे और सीमांत किसानों को भूमि विखंडन, कम सौदेबाजी की शक्ति और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं की कमी की बाधाओं को दूर करने में मदद करना
- प्रमुख विशेषता: सन्निहित भूमि जोत वाले किसान स्वेच्छा से चयनित कृषि संक्रियाओं को समन्वयित करने के लिए समूहों में संगठित होते हैं
- स्वामित्व: व्यक्तिगत किसान अपनी भूमि का पूर्ण स्वामित्व बनाए रखते हैं—केवल संक्रियाएं सामूहिक रूप से की जाती हैं
- समन्वित संक्रियाएं: भूमि की तैयारी, बुवाई, सिंचाई, पौध संरक्षण, कटाई और विपणन
- लाभ: निवेश खरीद में पैमाने की अर्थव्यवस्थाएं, बेहतर सौदेबाजी शक्ति, खेती की लागत में कमी, उन्नत उत्पादकता और बेहतर बाजार पहुंच
- भारत में कार्यान्वयन: सीमांत किसानों का समर्थन करने की पहल के हिस्से के रूप में ओडिशा और अन्य राज्यों में परीक्षण किया गया
- प्रकृति: किसान-नेतृत्व वाला सहभागी मॉडल, कॉर्पोरेट-संचालित या अनुबंध खेती नहीं
भारत में जलवायु-स्मार्ट कृषि की तैयारी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारत में 'जलवायु-स्मार्ट गांव' दृष्टिकोण जलवायु परिवर्तन, कृषि और खाद्य सुरक्षा (CCAFS) द्वारा संचालित एक परियोजना का हिस्सा है, जो एक अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान कार्यक्रम है।
- CCAFS की परियोजना फ्रांस में स्थित मुख्यालय वाले अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पर परामर्शदात्री समूह (CGIAR) के तहत की जाती है।
- भारत में अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) CGIAR के अनुसंधान केंद्रों में से एक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन से सही हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
भारत के जलवायु-स्मार्ट कृषि पहलों से संबंधित तीनों कथन सही हैं। जलवायु-स्मार्ट गांव दृष्टिकोण वास्तव में CCAFS परियोजना का हिस्सा है, जो फ्रांस के मोंटपेलियर में स्थित मुख्यालय वाले CGIAR के तहत संचालित होता है, और हैदराबाद में ICRISAT, 15 CGIAR अनुसंधान केंद्रों में से एक है।
✅ कथन 1 – सही: भारत में जलवायु-स्मार्ट गांव (CSV) दृष्टिकोण CCAFS (जलवायु परिवर्तन, कृषि और खाद्य सुरक्षा) कार्यक्रम के तहत लागू किया जाता है, जो सहभागी अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से कृषि समुदायों में जलवायु लचीलापन निर्माण पर केंद्रित है।
✅ कथन 2 – सही: CCAFS, CGIAR (अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पर परामर्शदात्री समूह) का एक प्रमुख अनुसंधान कार्यक्रम है, जो अनुसंधान संगठनों की एक वैश्विक साझेदारी है। CGIAR का वैश्विक मुख्यालय मोंटपेलियर, फ्रांस में स्थित है।
✅ कथन 3 – सही: ICRISAT (अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान), जिसका मुख्यालय हैदराबाद, भारत में है, CGIAR से संबद्ध 15 अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्रों में से एक है, जो शुष्क भूमि कृषि और जलवायु-लचीली फसल विकास पर केंद्रित है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: जलवायु-स्मार्ट कृषि और CGIAR प्रणाली
- जलवायु-स्मार्ट कृषि (CSA): भूदृश्य प्रबंधन के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण—फसल भूमि, पशुधन, वन और मत्स्य पालन—जो एक साथ खाद्य सुरक्षा और जलवायु चुनौतियों का समाधान करता है।
- जलवायु-स्मार्ट गांव (CSV): समुदाय-आधारित मंच जो भारत सहित कई देशों में गांव स्तर पर जलवायु-स्मार्ट कृषि पद्धतियों, प्रौद्योगिकियों और सेवाओं का परीक्षण और प्रचार करते हैं।
- CCAFS (जलवायु परिवर्तन, कृषि और खाद्य सुरक्षा): एक CGIAR अनुसंधान कार्यक्रम जो कृषि नवाचारों के माध्यम से जलवायु परिवर्तन के तहत भूख, गरीबी और पर्यावरणीय क्षरण को कम करने पर केंद्रित है।
- CGIAR (अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान पर परामर्शदात्री समूह): खाद्य सुरक्षा, गरीबी में कमी और स्थायी कृषि पर काम करने वाले 15 अनुसंधान केंद्रों की एक वैश्विक अनुसंधान साझेदारी; मुख्यालय मोंटपेलियर, फ्रांस में है।
- ICRISAT: CGIAR केंद्रों में से एक, 1972 में हैदराबाद में स्थापित, अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय कृषि पर केंद्रित, शुष्क भूमि क्षेत्रों के लिए ज्वार, बाजरा, चना और अरहर जैसी फसलों पर काम करता है।
- भारत में CSV कार्यान्वयन: हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में परिचालन स्थल, जल प्रबंधन, फसल विविधीकरण और मौसम-आधारित सलाह सहित जलवायु-लचीली प्रथाओं का प्रदर्शन करते हैं।
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: देशव्यापी 'मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना' का उद्देश्य है
- सिंचाई के अंतर्गत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना।
- मृदा की गुणवत्ता के आधार पर किसानों को दिए जाने वाले ऋण की मात्रा का आकलन करने में बैंकों को सक्षम बनाना।
- कृषि भूमि में उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण करना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 3
मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को मृदा पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी प्रदान करके उर्वरकों के संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना है। इससे कृषि भूमि में उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण करने, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करने और पर्यावरणीय क्षति को कम करने में मदद मिलती है।
❌ कथन 1 – गलत: सिंचाई के अंतर्गत कृषि योग्य क्षेत्र का विस्तार करना मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का उद्देश्य नहीं है; यह योजना मृदा पोषक प्रबंधन पर केंद्रित है, सिंचाई विस्तार पर नहीं।
❌ कथन 2 – गलत: बैंक ऋण की मात्रा का आकलन करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग नहीं करते हैं; कृषि ऋण भूमि स्वामित्व, फसल प्रकार, ऋण इतिहास और पुनर्भुगतान क्षमता जैसे कारकों पर आधारित होते हैं, न कि मृदा गुणवत्ता डेटा पर।
✅ कथन 3 – सही: यह योजना किसानों को वास्तविक मृदा पोषक आवश्यकताओं के बारे में जानकारी देकर उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग पर नियंत्रण करने, इस प्रकार विवेकपूर्ण उर्वरक प्रयोग को बढ़ावा देने और मृदा क्षरण को रोकने का लक्ष्य रखती है।
'राष्ट्रीय कृषि बाजार' (NAM) योजना को लागू करने का/के क्या लाभ है/हैं?
- यह कृषि वस्तुओं के लिए एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है।
- यह किसानों को राष्ट्रव्यापी बाजार तक पहुंच प्रदान करता है, जिसमें उनकी उपज की गुणवत्ता के अनुरूप मूल्य मिलते हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
राष्ट्रीय कृषि बाजार (e-NAM) एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है जो मौजूदा APMCs को कृषि वस्तुओं के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय बाजार में जोड़ता है। यह किसानों को गुणवत्ता मानकों के आधार पर पारदर्शी मूल्य खोज के साथ राष्ट्रव्यापी बाजारों तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उन्हें अपनी उपज के लिए बेहतर मूल्य मिल सकें।
✅ कथन 1 – सही: e-NAM वास्तव में एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक व्यापार पोर्टल है जो देश भर की कृषि मंडियों को एक ऑनलाइन मंच के माध्यम से जोड़ता है, कृषि वस्तुओं के इलेक्ट्रॉनिक व्यापार की सुविधा प्रदान करता है।
✅ कथन 2 – सही: यह योजना किसानों को उनकी स्थानीय मंडियों से परे एक व्यापक बाजार तक पहुंच प्रदान करती है, जिसमें मूल्य गुणवत्ता मानकों और वास्तविक समय मूल्य खोज के आधार पर निर्धारित होते हैं, जिससे उन्हें उनकी उपज की गुणवत्ता के अनुरूप लाभकारी मूल्य मिलते हैं।
भारत की खाद्य और पोषण सुरक्षा के संदर्भ में, विभिन्न फसलों की 'बीज प्रतिस्थापन दरों' को बढ़ाना भविष्य के खाद्य उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। लेकिन इसके व्यापक/अधिक कार्यान्वयन में क्या बाधा/बाधाएँ हैं?
- कोई राष्ट्रीय बीज नीति लागू नहीं है।
- सब्जियों के गुणवत्ता वाले बीजों और बागवानी फसलों की रोपण सामग्री की आपूर्ति में निजी क्षेत्र की बीज कंपनियों की कोई भागीदारी नहीं है।
- कम मूल्य और उच्च मात्रा वाली फसलों के मामले में गुणवत्ता वाले बीजों के संबंध में मांग-आपूर्ति अंतर है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भारत में राष्ट्रीय बीज नीति (2002) है जो बीज प्रमाणन, गुणवत्ता आश्वासन और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए रूपरेखा प्रदान करती है।
❌ कथन 2 – गलत: निजी क्षेत्र की बीज कंपनियाँ जैसे माहिको, सिन्जेंटा और नुनहेम्स सक्रिय रूप से सब्जियों और बागवानी फसलों के गुणवत्ता वाले बीजों की आपूर्ति में भाग लेती हैं, विशेष रूप से संकर किस्मों में।
✅ कथन 3 – सही: कम मूल्य, उच्च मात्रा वाली फसलों (जैसे दालें, मोटे अनाज और तिलहन) में गुणवत्ता प्रमाणित बीजों के लिए मांग-आपूर्ति अंतर मौजूद है जो कम लाभप्रदता और उनके बीज उत्पादन में सीमित निजी क्षेत्र निवेश के कारण है।
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