भारत की खाद्य और पोषण सुरक्षा के संदर्भ में, विभिन्न फसलों की 'बीज प्रतिस्थापन दरों' को बढ़ाना भविष्य के खाद्य उत्पादन लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता है। लेकिन इसके व्यापक/अधिक कार्यान्वयन में क्या बाधा/बाधाएँ हैं?
- कोई राष्ट्रीय बीज नीति लागू नहीं है।
- सब्जियों के गुणवत्ता वाले बीजों और बागवानी फसलों की रोपण सामग्री की आपूर्ति में निजी क्षेत्र की बीज कंपनियों की कोई भागीदारी नहीं है।
- कम मूल्य और उच्च मात्रा वाली फसलों के मामले में गुणवत्ता वाले बीजों के संबंध में मांग-आपूर्ति अंतर है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
❌ कथन 1 – गलत: भारत में राष्ट्रीय बीज नीति (2002) है जो बीज प्रमाणन, गुणवत्ता आश्वासन और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए रूपरेखा प्रदान करती है।
❌ कथन 2 – गलत: निजी क्षेत्र की बीज कंपनियाँ जैसे माहिको, सिन्जेंटा और नुनहेम्स सक्रिय रूप से सब्जियों और बागवानी फसलों के गुणवत्ता वाले बीजों की आपूर्ति में भाग लेती हैं, विशेष रूप से संकर किस्मों में।
✅ कथन 3 – सही: कम मूल्य, उच्च मात्रा वाली फसलों (जैसे दालें, मोटे अनाज और तिलहन) में गुणवत्ता प्रमाणित बीजों के लिए मांग-आपूर्ति अंतर मौजूद है जो कम लाभप्रदता और उनके बीज उत्पादन में सीमित निजी क्षेत्र निवेश के कारण है।
Question 6 of 6 कृषि सुधार
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