निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
कथन I: भारत में, ग्रामीण क्षेत्रों में मुर्गी पालन और ऊन पालन जैसी संबद्ध कृषि गतिविधियों से होने वाली आय को किसी भी कर से छूट दी गई है।
कथन II: भारत में, ग्रामीण कृषि भूमि को आयकर अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता है।
उपरोक्त कथनों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा सही है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: ✅ विकल्प 4
आयकर अधिनियम, 1961 के अनुसार केवल भूमि की खेती जैसी मुख्य कृषि गतिविधियों से प्राप्त आय को कृषि आय माना जाता है और उस पर कर छूट मिलती है। जबकि पोल्ट्री फार्मिंग और ऊन उत्पादन जैसी सहायक गतिविधियों से प्राप्त आय कर योग्य होती है। साथ ही, ग्रामीण कृषि भूमि को पूंजीगत संपत्ति की श्रेणी में नहीं रखा गया है।
❌ कथन I गलत है: पोल्ट्री फार्मिंग, डेयरी, मत्स्य पालन और ऊन उत्पादन जैसी सहायक कृषि गतिविधियों से होने वाली आय कर-मुक्त नहीं होती, बल्कि सामान्यतः कर योग्य होती है।
✅ कथन II सही है: ग्रामीण कृषि भूमि (Rural Agricultural Land) को आयकर अधिनियम की धारा 2(14) के तहत पूंजीगत संपत्ति (Capital Asset) नहीं माना जाता। इसलिए इसकी बिक्री पर सामान्यतः पूंजीगत लाभ कर नहीं लगता।
❌ कथन II, कथन I की व्याख्या नहीं करता: कथन II भूमि की कर स्थिति से संबंधित है, जबकि कथन I सहायक कृषि गतिविधियों की आय से संबंधित है। दोनों का आपस में सीधा संबंध नहीं है।
संक्षिप्त नोट्स: कृषि आय और ग्रामीण कृषि भूमि
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भूमि की खेती से प्राप्त आय आयकर से मुक्त होती है।
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पोल्ट्री, डेयरी, मत्स्य पालन और ऊन उत्पादन से प्राप्त आय कर योग्य होती है।
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धारा 2(14) में पूंजीगत संपत्ति की परिभाषा दी गई है।
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ग्रामीण कृषि भूमि को पूंजीगत संपत्ति नहीं माना जाता।
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ग्रामीण कृषि भूमि की बिक्री पर सामान्यतः Capital Gains Tax नहीं लगता।
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शहरी कृषि भूमि को सामान्यतः पूंजीगत संपत्ति माना जाता है।
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यह छूट किसानों और कृषि गतिविधियों को संरक्षण देने के लिए दी गई है।
Question 1 of 4 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर
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