UPSC CSE Prelims
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी Previous Year Questions (PYQs)
Solved Previous Year Questions (PYQs) for विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी in UPSC CSE Prelims in English & Hindi Medium.
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पहचान मंच 'आधार' खुले "एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs)" प्रदान करता है। इसका क्या अर्थ है?
- इसे किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में एकीकृत किया जा सकता है।
- आईरिस का उपयोग करके ऑनलाइन प्रमाणीकरण संभव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
आधार के लिए खुले एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (APIs) की उपलब्धता डेवलपर्स और संगठनों को विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अनुप्रयोगों में आधार-आधारित प्रमाणीकरण और सत्यापन सेवाओं को एकीकृत करने में सक्षम बनाती है। यह वास्तुकला डिजाइन प्लेटफार्मों में निर्बाध एकीकरण की अनुमति देता है और बायोमेट्रिक सत्यापन सहित कई प्रमाणीकरण विधियों का समर्थन करता है।
✅ कथन 1 – सही: खुले APIs आधार को किसी भी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे स्मार्टफोन, टैबलेट, प्वाइंट ऑफ सेल (PoS) टर्मिनलों और अन्य डिजिटल प्लेटफार्मों में एकीकृत करने की अनुमति देते हैं, जिससे डेवलपर्स आधार-सक्षम अनुप्रयोग बना सकते हैं।
✅ कथन 2 – सही: आधार की बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली आईरिस स्कैन (फिंगरप्रिंट्स और चेहरे की पहचान के साथ) का उपयोग करके ऑनलाइन प्रमाणीकरण का समर्थन करती है, जो उपलब्ध APIs के माध्यम से सुरक्षित पहचान सत्यापन को संभव बनाती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: आधार और APIs
- आधार: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा बायोमेट्रिक और जनसांख्यिकीय डेटा के आधार पर सभी भारतीय निवासियों को जारी किया गया 12 अंकों का अद्वितीय पहचान नंबर।
- खुले APIs: एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस जो तीसरे पक्ष के डेवलपर्स को स्वामित्व की आवश्यकता के बिना अपने अनुप्रयोगों और उपकरणों में आधार सेवाओं को एकीकृत करने की अनुमति देते हैं।
- प्रमाणीकरण विधियाँ: आधार जनसांख्यिकीय (नाम, आयु, पता), वन-टाइम पासवर्ड (OTP), और बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट, आईरिस, चेहरे की पहचान) सहित कई प्रमाणीकरण मोड का समर्थन करता है।
- e-KYC सेवाएँ: आधार APIs बैंकिंग, टेलीकॉम और अन्य क्षेत्रों में तत्काल सत्यापन के लिए इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर (e-KYC) सेवाओं को सक्षम बनाते हैं।
- एकीकरण क्षमताएँ: APIs मोबाइल ऐप्स, वेब पोर्टल्स, ATMs, PoS उपकरणों और IoT-सक्षम उपकरणों सहित विविध प्लेटफार्मों में एकीकरण की सुविधा प्रदान करते हैं।
- सुरक्षा विशेषताएँ: सभी API लेनदेन एन्क्रिप्टेड हैं और उपयोगकर्ता गोपनीयता की रक्षा और अनधिकृत पहुँच को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हैं।
जब सुबह आपके स्मार्टफोन का अलार्म बजता है, तो आप जाग जाते हैं और इसे बंद करने के लिए टैप करते हैं जिससे आपका गीजर स्वचालित रूप से चालू हो जाता है। आपके बाथरूम में स्मार्ट मिरर दिन के मौसम को दिखाता है और आपके ओवरहेड टैंक में पानी के स्तर को भी इंगित करता है। जब आप नाश्ता बनाने के लिए अपने रेफ्रिजरेटर से कुछ किराने का सामान लेते हैं, तो यह इसमें स्टॉक की कमी को पहचानता है और ताजा किराने की वस्तुओं की आपूर्ति के लिए ऑर्डर देता है। जब आप अपने घर से बाहर निकलते हैं और दरवाजा बंद करते हैं, तो सभी लाइट, पंखे, गीजर और एसी मशीनें स्वचालित रूप से बंद हो जाती हैं। कार्यालय के रास्ते में, आपकी कार आपको आगे यातायात की भीड़ के बारे में चेतावनी देती है और एक वैकल्पिक मार्ग सुझाती है, और यदि आप किसी बैठक के लिए देर से हैं, तो यह आपके कार्यालय को तदनुसार संदेश भेजती है। उभरती संचार प्रौद्योगिकियों के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन सा शब्द उपरोक्त परिदृश्य पर सबसे अच्छा लागू होता है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — इंटरनेट ऑफ थिंग्स
यह परिदृश्य एक परस्पर जुड़े पारिस्थितिकी तंत्र का वर्णन करता है जहां रोजमर्रा के उपकरण (स्मार्टफोन, गीजर, स्मार्ट मिरर, रेफ्रिजरेटर, कार, आदि) स्वायत्त रूप से एक-दूसरे के साथ संचार करते हैं, नेटवर्क पर डेटा का आदान-प्रदान करते हैं, और प्रत्यक्ष मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता के बिना ट्रिगर्स के आधार पर स्वचालित कार्य करते हैं। यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) की परिभाषित विशेषता है, जो सेंसर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्क कनेक्टिविटी से युक्त भौतिक वस्तुओं को डेटा एकत्र करने और आदान-प्रदान करने के लिए जोड़ती है।
अन्य विकल्प क्यों गलत हैं:
❌ विकल्प 1 – बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल: BGP एक राउटिंग प्रोटोकॉल है जिसका उपयोग इंटरनेट पर स्वायत्त प्रणालियों के बीच राउटिंग जानकारी का आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता है; यह उपकरण अंतर-संचार से संबंधित नहीं है।
❌ विकल्प 3 – इंटरनेट प्रोटोकॉल: IP नेटवर्क पर पैकेट को संबोधित करने और रूट करने के लिए एक मूलभूत प्रोटोकॉल है, लेकिन वर्णित बुद्धिमान उपकरण-से-उपकरण संचार को शामिल नहीं करता है।
❌ विकल्प 4 – वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क: VPN सार्वजनिक नेटवर्क पर सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड कनेक्शन बनाने के लिए एक तकनीक है, न कि स्मार्ट उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम करने के लिए।
📝 संक्षिप्त नोट्स: इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
- परिभाषा: IoT सेंसर, सॉफ्टवेयर और कनेक्टिविटी से युक्त भौतिक वस्तुओं का एक नेटवर्क है जो उन्हें स्वायत्त रूप से डेटा एकत्र करने, आदान-प्रदान करने और कार्य करने में सक्षम बनाता है।
- प्रमुख घटक: सेंसर/उपकरण, कनेक्टिविटी (वाई-फाई, ब्लूटूथ, सेल्युलर), डेटा प्रोसेसिंग प्लेटफॉर्म, और उपयोगकर्ता इंटरफेस।
- अनुप्रयोग: स्मार्ट होम (स्वचालित प्रकाश व्यवस्था, थर्मोस्टैट्स), स्मार्ट सिटी (यातायात प्रबंधन, कचरा प्रबंधन), स्वास्थ्य सेवा (पहनने योग्य स्वास्थ्य मॉनिटर), कृषि (सटीक खेती), और औद्योगिक स्वचालन।
- लाभ: बढ़ी हुई दक्षता, रीयल-टाइम निगरानी, भविष्य कहनेवाला रखरखाव, ऊर्जा संरक्षण, और उन्नत उपयोगकर्ता सुविधा।
- चुनौतियां: सुरक्षा कमजोरियां, गोपनीयता संबंधी चिंताएं, विभिन्न उपकरणों/मानकों के बीच अंतर-संचालनीयता मुद्दे, और डेटा प्रबंधन जटिलता।
- भारत में उदाहरण: स्मार्ट सिटी मिशन, सटीक कृषि पहल, कनेक्टेड वाहन, और बिजली वितरण के लिए स्मार्ट ग्रिड परियोजनाएं।
भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- IRNSS के तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षा में और चार उपग्रह भूतुल्यकाली कक्षा में हैं।
- IRNSS संपूर्ण भारत और इसकी सीमाओं से लगभग 5500 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र को कवर करता है।
- भारत की 2019 के मध्य तक पूर्ण वैश्विक कवरेज के साथ अपनी स्वयं की उपग्रह नौवहन प्रणाली होगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
IRNSS (भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली), जिसे NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन) के नाम से भी जाना जाता है, भारत की स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है। तीन कथनों में से केवल पहला कथन IRNSS के उपग्रह विन्यास का सही वर्णन करता है।
✅ कथन 1 – सही: IRNSS के तीन उपग्रह भूस्थिर कक्षाओं में (भूमध्य रेखा के ऊपर निश्चित बिंदुओं पर स्थित) और चार उपग्रह भूतुल्यकाली कक्षाओं में (लगभग 29° झुकाव पर आनत भूतुल्यकाली कक्षाएँ) हैं।
❌ कथन 2 – गलत: IRNSS संपूर्ण भारत को कवर करता है और इसकी सीमाओं से लगभग 1500 किमी तक विस्तृत है (प्राथमिक सेवा क्षेत्र), न कि 5500 वर्ग किमी। विस्तारित सेवा क्षेत्र 30°दक्षिण से 50°उत्तर अक्षांश और 30°पूर्व से 130°पूर्व देशांतर तक एक बहुत बड़े क्षेत्र को कवर करता है।
❌ कथन 3 – गलत: IRNSS/NavIC एक क्षेत्रीय नौवहन प्रणाली है, वैश्विक नौवहन प्रणाली नहीं। यह केवल भारत और आसपास के क्षेत्रों पर कवरेज प्रदान करता है। भारत के पास 2019 तक या वर्तमान में पूर्ण वैश्विक कवरेज के साथ कोई उपग्रह नौवहन प्रणाली नहीं है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: IRNSS/NavIC
- पूर्ण नाम: भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (IRNSS), परिचालन नाम NavIC (नेविगेशन विद इंडियन कॉन्स्टेलेशन)
- नक्षत्रमंडल: कुल 7 उपग्रह - 3 भूस्थिर कक्षा (GEO) में और 4 भूतुल्यकाली कक्षा (GSO) में
- प्राथमिक सेवा क्षेत्र: भारत और इसकी सीमा से 1500 किमी तक विस्तृत क्षेत्र
- विस्तारित सेवा क्षेत्र: 30°दक्षिण से 50°उत्तर अक्षांश और 30°पूर्व से 130°पूर्व देशांतर के बीच का क्षेत्र
- परिचालन शुरू: 2018 (सभी 7 उपग्रह परिचालनात्मक हो गए)
- अनुप्रयोग: स्थलीय, हवाई और समुद्री नौवहन, आपदा प्रबंधन, वाहन ट्रैकिंग, बेड़ा प्रबंधन, मोबाइल फोन के साथ एकीकरण, सटीक समय, मानचित्रण और भूगणितीय डेटा संग्रहण
- प्रशासित द्वारा: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)
- भूमि खंड: हासन और भोपाल में IRNSS अंतरिक्ष यान नियंत्रण सुविधा (IRSCF), कई स्थानों पर IRNSS रेंज और अखंडता निगरानी स्टेशन (IRIMS), और नौवहन नियंत्रण केंद्र
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"3D प्रिंटिंग" का निम्नलिखित में से किसमें अनुप्रयोग है?
- मिठाई की वस्तुओं की तैयारी
- बायोनिक कानों का निर्माण
- ऑटोमोटिव उद्योग
- पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा
- डेटा प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियाँ
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2, 3, 4 और 5
3D प्रिंटिंग (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) ने डिजिटल फाइलों से जटिल त्रि-आयामी वस्तुओं के निर्माण को सक्षम बनाकर कई उद्योगों में क्रांति ला दी है। उल्लिखित सभी पाँच अनुप्रयोग—मिठाई की वस्तुएँ, बायोनिक कान, ऑटोमोटिव पार्ट्स, पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा प्रत्यारोपण, और डेटा प्रसंस्करण हार्डवेयर के लिए विशेष घटक—3D प्रिंटिंग प्रौद्योगिकी के सुप्रलेखित उपयोग हैं।
✅ कथन 1 – सही: 3D प्रिंटिंग का उपयोग खाद्य उद्योग में सटीक डिज़ाइन के साथ चॉकलेट और कैंडी जैसी जटिल और अनुकूलित मिठाई की वस्तुओं को बनाने के लिए किया जाता है।
✅ कथन 2 – सही: शोधकर्ताओं ने श्रवण दोष वाले लोगों के लिए एकीकृत इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ बायोनिक कान बनाने के लिए 3D प्रिंटिंग का सफलतापूर्वक उपयोग किया है।
✅ कथन 3 – सही: ऑटोमोटिव उद्योग तीव्र प्रोटोटाइपिंग, कस्टम पार्ट्स निर्माण और वाहन घटकों के उत्पादन के लिए व्यापक रूप से 3D प्रिंटिंग का उपयोग करता है।
✅ कथन 4 – सही: 3D प्रिंटिंग का व्यापक रूप से पुनर्निर्माण शल्य चिकित्सा में रोगी-विशिष्ट प्रत्यारोपण, कृत्रिम अंग और व्यक्तिगत शरीर रचना के अनुरूप शल्य चिकित्सा मार्गदर्शिकाएँ बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।
✅ कथन 5 – सही: 3D प्रिंटिंग का उपयोग डेटा प्रसंस्करण प्रौद्योगिकियों और कंप्यूटर सिस्टम के लिए विशेष घटकों और हार्डवेयर पार्ट्स के निर्माण के लिए किया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: 3D प्रिंटिंग (एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग)
- परिभाषा: 3D प्रिंटिंग डिजिटल फाइल से परत-दर-परत सामग्री जोड़कर त्रि-आयामी ठोस वस्तुओं को बनाने की प्रक्रिया है, इसलिए इसे एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग कहा जाता है।
- बुनियादी प्रक्रिया: इसमें डिजिटल मॉडल बनाने के लिए कंप्यूटर-एडेड डिज़ाइन (CAD) सॉफ्टवेयर शामिल है, जिसे फिर पतली परतों में काटा जाता है और प्लास्टिक, धातु, सिरेमिक या यहां तक कि जैविक सामग्री जैसी विभिन्न सामग्रियों का उपयोग करके प्रिंट किया जाता है।
- चिकित्सा अनुप्रयोग: कस्टम कृत्रिम अंग, दंत प्रत्यारोपण, शल्य चिकित्सा उपकरण, शल्य चिकित्सा योजना के लिए शारीरिक मॉडल, बायो-प्रिंटेड ऊतक और अंग (प्रायोगिक चरण), और रोगी-विशिष्ट प्रत्यारोपण।
- औद्योगिक अनुप्रयोग: ऑटोमोटिव और एयरोस्पेस उद्योगों में तीव्र प्रोटोटाइपिंग, जटिल पार्ट्स का निर्माण, टूलिंग, और अंतिम-उपयोग घटकों का उत्पादन।
- उपभोक्ता अनुप्रयोग: अनुकूलित आभूषण, खिलौने, घरेलू वस्तुएँ, फैशन एक्सेसरीज़, और व्यक्तिगत उत्पाद।
- उभरते अनुप्रयोग: खाद्य प्रिंटिंग (चॉकलेट, पास्ता, पिज्जा), निर्माण (3D प्रिंटेड घर), बायोप्रिंटिंग (अंग और ऊतक), और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण।
- लाभ: डिज़ाइन लचीलापन, अपशिष्ट में कमी, अनुकूलन, तीव्र प्रोटोटाइपिंग, और पारंपरिक निर्माण से असंभव जटिल ज्यामिति बनाने की क्षमता।
भारत में विकसित आनुवंशिक रूप से संशोधित सरसों (GM सरसों) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- GM सरसों में एक मृदा जीवाणु के जीन होते हैं जो पौधे को कीटों की एक विस्तृत विविधता के प्रति कीट-प्रतिरोध का गुण प्रदान करते हैं।
- GM सरसों में ऐसे जीन होते हैं जो पौधे को पर-परागण और संकरण की अनुमति देते हैं।
- GM सरसों को IARI और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2
GM सरसों (DMH-11) ब्रैसिका जुन्सिया की एक आनुवंशिक रूप से संशोधित संकर किस्म है जिसे दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स द्वारा विकसित किया गया है। इसे बार्नेज-बारस्टार जीनों के साथ पर-परागण और संकरण को सक्षम बनाने के लिए इंजीनियर किया गया है ताकि उपज बढ़ाई जा सके, कीट-प्रतिरोध के लिए नहीं।
❌ कथन 1 – गलत: GM सरसों में कीट-प्रतिरोध के लिए जीन नहीं होते हैं; इसे मृदा जीवाणु के Bt जीनों के बजाय बार्नेज-बारस्टार जीन प्रणाली का उपयोग करके संकरण के लिए इंजीनियर किया गया है।
✅ कथन 2 – सही: GM सरसों में जीन (बार्नेज, बारस्टार, और बार जीन) होते हैं जो पर-परागण और संकरण को सुगम बनाते हैं, जिससे संकर बीज उत्पादन संभव होता है।
❌ कथन 3 – गलत: GM सरसों को दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स (CGMCP) द्वारा विकसित किया गया था, न कि IARI और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से।
📝 संक्षिप्त नोट्स: GM सरसों (DMH-11)
- पूरा नाम: धारा मस्टर्ड हाइब्रिड-11 (DMH-11), ब्रैसिका जुन्सिया की एक आनुवंशिक रूप से संशोधित किस्म।
- विकासकर्ता: सेंटर फॉर जेनेटिक मैनिपुलेशन ऑफ क्रॉप प्लांट्स (CGMCP), दिल्ली विश्वविद्यालय, प्रो. दीपक पेंटल के नेतृत्व में।
- आनुवंशिक संशोधन: नर बंध्यता और प्रजनन क्षमता बहाली के लिए मृदा जीवाणु Bacillus amyloliquefaciens से लिए गए बार्नेज-बारस्टार जीन प्रणाली का उपयोग करता है।
- उद्देश्य: स्वाभाविक रूप से स्व-परागित सरसों में पर-परागण को सक्षम बनाकर उच्च उपज देने वाले संकर उत्पन्न करना; उपज में 25-30% की वृद्धि।
- प्रमुख जीन: बार जीन (शाकनाशी सहिष्णुता), बार्नेज जीन (नर बंध्यता), बारस्टार जीन (प्रजनन क्षमता बहाली)।
- Bt फसल नहीं: Bt कपास/बैंगन के विपरीत, GM सरसों में कीट-प्रतिरोध गुण नहीं हैं; यह विशुद्ध रूप से संकर विकास के लिए है।
- नियामक स्थिति: 2017 में GEAC (आनुवंशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति) द्वारा अनुमोदित लेकिन सार्वजनिक और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
निम्नलिखित में से किन क्षेत्रों में GPS तकनीक का उपयोग किया जा सकता है?
- मोबाइल फोन संचालन
- बैंकिंग संचालन
- पावर ग्रिड को नियंत्रित करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली है जो सटीक भू-स्थान और समय की जानकारी प्रदान करती है, जो इसे केवल नेविगेशन से परे विविध अनुप्रयोगों में उपयोगी बनाती है।
✅ कथन 1 – सही: GPS मोबाइल फोन संचालन के लिए स्थान ट्रैकिंग, नेविगेशन ऐप्स और राइड-हेलिंग और फूड डिलीवरी जैसी स्थान-आधारित सेवाओं के लिए अभिन्न है।
✅ कथन 2 – सही: GPS बैंकिंग लेनदेन के लिए सटीक समय-मुद्रांकन प्रदान करता है, जो बैंकिंग नेटवर्क में सटीक रिकॉर्ड-कीपिंग और समन्वयन सुनिश्चित करता है, और ATM स्थान सेवाओं को सक्षम बनाता है।
✅ कथन 3 – सही: GPS माप के लिए सटीक समय मुद्रांक प्रदान करके पावर ग्रिड संचालन को समन्वयित करने के लिए महत्वपूर्ण है, जो ग्रिड स्थिरता और ब्लैकआउट को रोकने के लिए आवश्यक है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: GPS तकनीक के अनुप्रयोग
- GPS (ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम): अमेरिकी सरकार के स्वामित्व वाली एक उपग्रह-आधारित नेविगेशन प्रणाली, जिसमें पृथ्वी की परिक्रमा करने वाले 24+ उपग्रह शामिल हैं।
- प्राथमिक कार्य: पृथ्वी पर कहीं भी GPS रिसीवर को भू-स्थान (अक्षांश, देशांतर, ऊंचाई) और सटीक समय की जानकारी प्रदान करता है।
- समय अनुप्रयोग: GPS उपग्रह परमाणु घड़ियां ले जाते हैं जो नैनोसेकंड-स्तर की समय सटीकता प्रदान करती हैं, जो दूरसंचार, बैंकिंग, पावर ग्रिड और स्टॉक मार्केट के लिए महत्वपूर्ण है।
- नेविगेशन उपयोग: विमानन, समुद्री, वाहन नेविगेशन, सर्वेक्षण, मानचित्रण और सैन्य अभियान।
- स्थान-आधारित सेवाएं: मोबाइल ऐप, आपातकालीन सेवाएं (911/112), संपत्ति ट्रैकिंग, कृषि (सटीक खेती), और मौसम पूर्वानुमान।
- अन्य वैश्विक प्रणालियां: GLONASS (रूस), Galileo (यूरोपीय संघ), BeiDou (चीन), और NavIC/IRNSS (भारत की क्षेत्रीय प्रणाली)।
निम्नलिखित जोड़ियों पर विचार करें:
| शब्द कभी-कभी समाचारों में देखे जाते हैं | संदर्भ/विषय |
|---|---|
| 1. Belle II experiment | Artificial Intelligence |
| 2. Blockchain technology | Digital/Cryptocurrency |
| 3. CRISPR — Cas9 | Particle Physics |
ऊपर दी गई जोड़ियों में से कौन सी जोड़ी सही ढंग से सुमेलित है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर केवल 2 (विकल्प 2) है। Belle II एक कण भौतिकी (Particle Physics) प्रयोग है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संबंधित नहीं। Blockchain डिजिटल/क्रिप्टोकरेंसी की मुख्य तकनीक है। CRISPR-Cas9 एक जीन संपादन (Gene Editing) तकनीक है, कण भौतिकी से संबंधित नहीं।
Blockchain एक विकेंद्रीकृत डिजिटल लेजर तकनीक है, जिसमें लेन-देन सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से दर्ज किए जाते हैं। इसका सबसे प्रसिद्ध उपयोग Bitcoin जैसी क्रिप्टोकरेंसी में होता है, लेकिन इसका उपयोग बैंकिंग, सप्लाई चेन और डिजिटल पहचान जैसे क्षेत्रों में भी किया जाता है।
कभी-कभी समाचारों में देखा जाने वाला "टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD)" क्या है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर अमेरिका की एंटी-मिसाइल प्रणाली (विकल्प 3) है। THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) अमेरिका द्वारा विकसित एक मिसाइल रक्षा प्रणाली है, जो कम, मध्यम और मध्यम-दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों को उनकी अंतिम उड़ान अवस्था में नष्ट करती है।
THAAD बैलिस्टिक मिसाइलों को पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर और बाहर दोनों जगह रोकने में सक्षम है। यह अमेरिका की प्रमुख मिसाइल रक्षा प्रणाली है और दक्षिण कोरिया तथा सऊदी अरब जैसे देशों में भी तैनात की गई है।
हाल ही में समाचारों में उल्लिखित 'वाना क्राई, पेट्या और इटरनल ब्लू' शब्द किससे संबंधित हैं
Detailed Explanation:
सही उत्तर साइबर हमले (विकल्प 3) है। WannaCry और Petya ऐसे रैनसमवेयर हैं जो कंप्यूटर का डेटा स्थिर करके फिर उसे पैसे के लिए पैसे मांगते हैं। EternalBlue एक साइबर एक्सप्लॉइट था, जिसका उपयोग WannaCry हमलों को फैलाने के लिए किया गया था।
रैनसमवेयर एक प्रकार का मैलवेयर है, जो कंप्यूटर के स्वामित्व को लॉक या सुरक्षा प्रदान करता है और उन्हें वापस वर्चुअलाइजेशन के रूप में मांगता है। WannaCry (2017) दुनिया के सबसे बड़े साइबर हमले में एक और दावा किया गया था कि साइबर सुरक्षा के ढांचे को उजागर किया गया था।
निम्नलिखित घटनाओं पर विचार करें:
- प्रकाश गुरुत्वाकर्षण से प्रभावित होता है।
- ब्रह्मांड लगातार विस्तार कर रहा है।
- पदार्थ अपने आस-पास के स्थान-समय को विकृत करता है।
उपरोक्त में से कौन सा अल्बर्ट आइंस्टीन के सापेक्षता के सामान्य सिद्धांत की भविष्यवाणी/भविष्यवाणियां है/हैं, जिसकी अक्सर मीडिया में चर्चा होती है?
Detailed Explanation:
सही उत्तर 1, 2 और 3 (विकल्प 3) है। आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत के अनुसार गुरुत्वाकर्षण प्रकाश को मोड़ सकता है, द्रव्य (Matter) अपने आसपास के स्पेस-टाइम को वक्र बना देता है, और इसी सिद्धांत से ब्रह्मांड के फैलने की संभावना भी सामने आई, जिसे बाद में प्रमाणित किया गया।
सामान्य सापेक्षता सिद्धांत (1915) के अनुसार गुरुत्वाकर्षण कोई बल नहीं, बल्कि द्रव्य और ऊर्जा द्वारा स्पेस-टाइम में पैदा हुई वक्रता है। इसी सिद्धांत से गुरुत्वीय लेंसिंग, ब्लैक होल, गुरुत्वीय तरंगें और फैलता हुआ ब्रह्मांड जैसी घटनाओं की भविष्यवाणी हुई।
भारत के उपग्रह प्रक्षेपण वाहनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार करें:
- पीएसएलवी पृथ्वी संसाधनों की निगरानी के लिए उपयोगी उपग्रहों को लॉन्च करते हैं जबकि जीएसएलवी को मुख्य रूप से संचार उपग्रहों को लॉन्च करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
- पीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित उपग्रह पृथ्वी पर किसी विशेष स्थान से देखने पर आकाश में उसी स्थिति में स्थायी रूप से स्थिर दिखाई देते हैं।
- जीएसएलवी एमके III एक चार चरणों वाला प्रक्षेपण यान है जिसमें पहले और तीसरे चरण में ठोस रॉकेट मोटर्स का उपयोग किया जाता है, और दूसरे और चौथे चरण में तरल रॉकेट इंजन का उपयोग किया जाता है।
ऊपर दिए गए कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
सही उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
यह प्रश्न PSLV और GSLV लॉन्च व्हीकल के उपयोग और उनकी विशेषताओं पर आधारित है।
✅ कथन 1 – सही: PSLV का उपयोग मुख्यतः पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) उपग्रहों को Polar/Sun-Synchronous Orbit में भेजने के लिए किया जाता है, जबकि GSLV का उपयोग संचार उपग्रहों को Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में स्थापित करने के लिए किया जाता है।
❌ कथन 2 – गलत: PSLV द्वारा छोड़े गए उपग्रह आकाश में एक ही स्थान पर स्थिर नहीं दिखाई देते। वे Polar/Sun-Synchronous Orbit में पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। केवल Geostationary उपग्रह ही एक स्थान पर स्थिर दिखाई देते हैं।
❌ कथन 3 – गलत: GSLV Mk III (LVM3) चार-चरणीय नहीं, बल्कि तीन-चरणीय प्रक्षेपण यान है। इसमें दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन, एक लिक्विड स्टेज और एक क्रायोजेनिक अपर स्टेज होता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: PSLV एवं GSLV
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PSLV का उपयोग मुख्यतः Earth Observation और Sun-Synchronous Orbit (SSO) मिशनों के लिए किया जाता है।
-
GSLV का उपयोग संचार उपग्रहों को Geosynchronous Transfer Orbit (GTO) में भेजने के लिए किया जाता है।
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LVM3 (पूर्व नाम GSLV Mk III) एक तीन-चरणीय भारी प्रक्षेपण यान है जिसमें क्रायोजेनिक इंजन लगा होता है।
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क्रायोजेनिक इंजन में Liquid Hydrogen (LH₂) और Liquid Oxygen (LOX) का उपयोग होता है।
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PSLV को ISRO का "वर्कहॉर्स लॉन्च व्हीकल" कहा जाता है क्योंकि इसकी सफलता दर बहुत अधिक है।
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LVM3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और OneWeb मिशनों का सफल प्रक्षेपण किया है।
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Geostationary उपग्रह पृथ्वी के सापेक्ष स्थिर दिखाई देते हैं, जबकि Polar उपग्रह लगातार पृथ्वी के ऊपर घूमते रहते हैं।
सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग क्या है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — पशुओं की प्रजनन क्लोनिंग
सोमैटिक सेल न्यूक्लियर ट्रांसफर (SCNT) एक क्लोनिंग तकनीक है जिसमें किसी दाता जीव की दैहिक (शरीर की) कोशिका के केन्द्रक को एक निष्केन्द्रित अंड कोशिका (जिसका केन्द्रक हटा दिया गया हो) में स्थानांतरित किया जाता है। पुनर्निर्मित अंडे को विभाजित और भ्रूण में विकसित होने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिसे एक सरोगेट माँ में प्रत्यारोपित करके दाता जीव का आनुवंशिक रूप से समान क्लोन उत्पन्न किया जाता है। इस प्रक्रिया को प्रजनन क्लोनिंग कहते हैं।
प्रसिद्ध उदाहरण: डॉली भेड़ (1996) SCNT तकनीक का उपयोग करके सफलतापूर्वक क्लोन की गई पहली स्तनपायी थी। इस तकनीक का उपयोग पशुधन प्रजनन, लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और जैवचिकित्सा अनुसंधान में होता है। हालांकि, यह जैवलार्विसाइड, जैवनिम्नीकरणीय प्लास्टिक, या इस विशिष्ट तंत्र के माध्यम से रोगमुक्त जीवों के उत्पादन से संबंधित नहीं है।
भारत में कृषि के संदर्भ में, अक्सर समाचारों में देखी जाने वाली 'जीनोम अनुक्रमण' तकनीक का निकट भविष्य में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है?
- जीनोम अनुक्रमण का उपयोग विभिन्न फसल पौधों में रोग प्रतिरोध और सूखा सहनशीलता के लिए आनुवंशिक चिह्नकों की पहचान करने के लिए किया जा सकता है।
- यह तकनीक फसल पौधों की नई किस्मों को विकसित करने में लगने वाले समय को कम करने में मदद करती है।
- इसका उपयोग फसलों में पोषक-रोगजनक संबंधों को समझने के लिए किया जा सकता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — 1, 2 और 3
✅ कथन 1 – सही: जीनोम अनुक्रमण रोग प्रतिरोध और सूखा सहनशीलता जैसे वांछनीय गुणों से जुड़े विशिष्ट आनुवंशिक चिह्नकों की पहचान करता है। यह बेहतर लचीलेपन वाली फसल किस्मों को विकसित करने के लिए लक्षित प्रजनन कार्यक्रमों को सक्षम बनाता है।
✅ कथन 2 – सही: पारंपरिक फसल प्रजनन में वर्षों या दशकों का समय लगता है। जीनोम अनुक्रमण लाभकारी जीनों की सटीक पहचान की अनुमति देकर इस प्रक्रिया को तेज करता है, जिससे चिह्नक-सहायता चयन संभव होता है और नई किस्में विकसित करने का समय 10-15 वर्ष से घटकर केवल 3-5 वर्ष हो जाता है।
✅ कथन 3 – सही: जीनोम अनुक्रमण पोषक पौधों और रोगजनकों के बीच आनुवंशिक अंतःक्रियाओं को समझने में मदद करता है। इन पोषक-रोगजनक संबंधों को समझने से वैज्ञानिक लक्षित रोग प्रबंधन रणनीतियाँ विकसित कर सकते हैं और बेहतर प्रतिरोध तंत्र वाली फसलें तैयार कर सकते हैं।
तीनों कथन भारतीय कृषि में जीनोम अनुक्रमण के तत्काल अनुप्रयोगों का सही वर्णन करते हैं, जो इसे फसल सुधार और खाद्य सुरक्षा के लिए एक शक्तिशाली उपकरण बनाता है।
विकसित लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना (eLISA)' परियोजना का उद्देश्य क्या है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना
विकसित लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना (eLISA), जिसे अब LISA (लेजर इंटरफेरोमीटर स्पेस एंटीना) के नाम से जाना जाता है, एक अंतरिक्ष-आधारित गुरुत्वाकर्षण तरंग वेधशाला है जो ब्रह्मांडीय स्रोतों से कम-आवृत्ति वाली गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाने के लिए डिज़ाइन की गई है। यह लेजर इंटरफेरोमेट्री का उपयोग करके गुरुत्वाकर्षण तरंगों द्वारा उत्पन्न अंतरिक्ष-काल में सूक्ष्म विकृतियों को मापती है, जो विशाल ब्लैक होल के विलय, चरम द्रव्यमान अनुपात प्रेरणाओं और गैलेक्टिक द्विआधारी प्रणालियों जैसी घटनाओं से आती हैं। यह ESA के नेतृत्व वाला मिशन (NASA के योगदान के साथ) मिलीहर्ट्ज़ आवृत्ति रेंज में काम करता है, जो LIGO जैसे भूमि-आधारित डिटेक्टरों का पूरक है। गुरुत्वाकर्षण तरंगों का पता लगाना ब्रह्मांड का अवलोकन करने और चरम परिस्थितियों में आइंस्टीन के सामान्य सापेक्षता सिद्धांत का परीक्षण करने के लिए एक नई खिड़की खोलता है।
शैवाल-आधारित जैव ईंधन का उत्पादन संभव है, लेकिन विकासशील देशों में इस उद्योग को बढ़ावा देने की संभावित सीमा/सीमाएँ क्या है/हैं?
- शैवाल-आधारित जैव ईंधन का उत्पादन केवल समुद्रों में ही संभव है, महाद्वीपों पर नहीं।
- शैवाल-आधारित जैव ईंधन उत्पादन की स्थापना और इंजीनियरिंग के लिए निर्माण पूर्ण होने तक उच्च स्तर की विशेषज्ञता/प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है।
- आर्थिक रूप से व्यवहार्य उत्पादन के लिए बड़े पैमाने की सुविधाओं की स्थापना आवश्यक है जो पारिस्थितिक और सामाजिक चिंताएँ उत्पन्न कर सकती हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 2 और 3
❌ कथन 1 – गलत: शैवाल-आधारित जैव ईंधन उत्पादन केवल समुद्रों तक सीमित नहीं है। शैवाल को खुले तालाबों, बंद फोटोबायोरिएक्टरों या अपशिष्ट जल उपचार प्रणालियों का उपयोग करके भूमि पर उगाया जा सकता है। महाद्वीपीय उत्पादन तकनीकी रूप से संभव है और व्यापक रूप से प्रचलित है।
✅ कथन 2 – सही: शैवाल जैव ईंधन सुविधाओं की स्थापना के लिए उन्नत जैव प्रौद्योगिकी, फोटोबायोरिएक्टरों के लिए परिष्कृत इंजीनियरिंग, सटीक खेती नियंत्रण प्रणालियों और निष्कर्षण प्रौद्योगिकी की आवश्यकता होती है। यह उच्च तकनीकी बुनियादी ढांचा सीमित तकनीकी विशेषज्ञता और पूंजी वाले विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है।
✅ कथन 3 – सही: बड़े पैमाने पर शैवाल खेती सुविधाओं के लिए व्यापक भूमि/जल संसाधनों, महत्वपूर्ण ऊर्जा इनपुट और जल उपयोग की आवश्यकता होती है। ये आवश्यकताएँ पारिस्थितिक चिंताओं (जैव विविधता प्रभाव, जल की कमी) और सामाजिक मुद्दों (भूमि अधिग्रहण, समुदायों का विस्थापन, खाद्य उत्पादन के साथ प्रतिस्पर्धा) को जन्म दे सकती हैं।