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बौद्धिक संपदा अधिकार एवं नवाचार Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: बौद्धिक संपदा अधिकार एवं नवाचार
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारतीय पेटेंट अधिनियम के अनुसार, बीज बनाने की जैविक प्रक्रिया को भारत में पेटेंट कराया जा सकता है।
- भारत में कोई बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड नहीं है।
- पादप किस्में भारत में पेटेंट के लिए पात्र नहीं हैं।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — केवल 3
केवल कथन 3 सही है। भारतीय पेटेंट अधिनियम के तहत पादप किस्मों को पेटेंट नहीं कराया जा सकता, हालांकि उन्हें एक अलग सुई जेनेरिस प्रणाली (PPVFR अधिनियम, 2001) के तहत संरक्षण प्राप्त है। कथन 1 गलत है क्योंकि बीज उत्पादन के लिए जैविक प्रक्रियाओं को पेटेंट अधिनियम की धारा 3(j) के तहत स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। कथन 2 गलत है क्योंकि 2019 में जब यह प्रश्न पूछा गया था तब भारत में बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) मौजूद था (बाद में 2021 में इसे समाप्त कर दिया गया)।
❌ कथन 1 – गलत: भारतीय पेटेंट अधिनियम की धारा 3(j) पौधों (बीज सहित) के प्रसार या उत्पादन के लिए जैविक प्रक्रियाओं को पेटेंट से स्पष्ट रूप से बाहर रखती है।
❌ कथन 2 – गलत: बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड (IPAB) 2003 में स्थापित किया गया था और 2019 में जब यह प्रश्न सेट किया गया था तब यह कार्यरत था; इसे केवल 2021 में न्यायाधिकरण सुधार अधिनियम के माध्यम से समाप्त किया गया।
✅ कथन 3 – सही: पादप किस्में पेटेंट अधिनियम के तहत पेटेंट के लिए पात्र नहीं हैं; इसके बजाय उन्हें पादप किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 2001 के तहत संरक्षित किया जाता है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में जैविक नवाचारों के लिए बौद्धिक संपदा संरक्षण
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| भारतीय पेटेंट अधिनियम - धारा 3(j) | पौधों, जानवरों और उनके प्रसार या उत्पादन के लिए जैविक प्रक्रियाओं को पेटेंट योग्यता से बाहर रखता है। जैविक प्रक्रियाओं के माध्यम से बनाए गए बीजों को पेटेंट नहीं कराया जा सकता। |
| क्या पेटेंट कराया जा सकता है | सूक्ष्मजीव, सूक्ष्मजैविक प्रक्रियाएं और आनुवंशिक रूप से संशोधित जीव (यदि वे नवीनता, आविष्कारी कदम और औद्योगिक अनुप्रयोग मानदंडों को पूरा करते हैं)। |
| PPVFR अधिनियम, 2001 | नई पादप किस्मों के लिए सुई जेनेरिस संरक्षण प्रदान करता है। विशेष व्यावसायिक उपयोग के लिए पादप प्रजनक अधिकार (PBR) प्रदान करता है। किसानों के बीज सहेजने, उपयोग करने, बोने, आदान-प्रदान करने और बेचने के अधिकारों की भी रक्षा करता है। |
| IPAB (2003-2021) | बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड पेटेंट, ट्रेडमार्क और भौगोलिक संकेत पंजीकरण से संबंधित अपीलों की सुनवाई करता था। 2021 में समाप्त; कार्य उच्च न्यायालयों को हस्तांतरित। |
| अंतर्राष्ट्रीय संदर्भ | भारत TRIPS (व्यापार संबंधी बौद्धिक संपदा अधिकार) और UPOV 1978 (नई पादप किस्मों के संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ) का सदस्य है, जो बौद्धिक संपदा संरक्षण और किसानों के अधिकारों में संतुलन बनाता है। |
भारत ने भौगोलिक संकेतक वस्तुएं (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 को किसके प्रति अपने दायित्वों का अनुपालन करने के लिए अधिनियमित किया?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 4 — WTO
भारत ने भौगोलिक संकेतक वस्तुएं (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 को WTO के TRIPS (व्यापार-संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार) समझौते के तहत अपने दायित्वों का अनुपालन करने के लिए अधिनियमित किया। TRIPS सभी WTO सदस्य देशों को भौगोलिक संकेतकों के लिए कानूनी संरक्षण प्रदान करने का आदेश देता है, जो विशिष्ट भौगोलिक स्थानों से उत्पन्न होने वाले उत्पादों की पहचान करते हैं जिनकी गुणवत्ता या प्रतिष्ठा मूलतः उस मूल के कारण होती है।
📝 संक्षिप्त नोट्स: भारत में भौगोलिक संकेतक
- GI अधिनियम, 1999: WTO ढांचे के तहत TRIPS समझौते (अनुच्छेद 22-24) का अनुपालन करने के लिए अधिनियमित
- परिभाषा: GI वस्तुओं की पहचान एक विशिष्ट क्षेत्र से उत्पन्न होने के रूप में करता है जहां गुणवत्ता, प्रतिष्ठा या अन्य विशेषताएं मूलतः भौगोलिक मूल के कारण होती हैं
- अवधि: GI पंजीकरण 10 वर्षों के लिए वैध है और इसे अनिश्चित काल तक नवीनीकृत किया जा सकता है
- उदाहरण: दार्जिलिंग चाय (पहला भारतीय GI), बासमती चावल, कांचीपुरम सिल्क, तिरुपति लड्डू, कश्मीर पश्मीना
- प्राधिकरण: उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के तहत पेटेंट, डिजाइन और ट्रेडमार्क के नियंत्रक महानिदेशक GI पंजीकरण का प्रशासन करते हैं
- लाभ: अनधिकृत उपयोग के खिलाफ कानूनी संरक्षण, ग्रामीण और कृषि विकास को बढ़ावा, पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण
'राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति' के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- यह दोहा विकास एजेंडा और TRIPS समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराती है।
- औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों को विनियमित करने के लिए नोडल एजेंसी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति, जो 2016 में अपनाई गई थी, स्पष्ट रूप से TRIPS समझौते और दोहा विकास एजेंडा सहित अंतर्राष्ट्रीय IPR ढांचे के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराती है, जो विकासशील देशों के लिए लचीलापन प्रदान करता है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT), जिसे पूर्व में औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग के नाम से जाना जाता था, भारत में IPR नीति निर्माण और कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।
✅ कथन 1 – सही: राष्ट्रीय IPR नीति दोहा विकास एजेंडा और TRIPS समझौते के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराती है, जो सस्ती दवाओं के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग जैसी लचीलेपन तक पहुंच सुनिश्चित करती है।
✅ कथन 2 – सही: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अधीन औद्योगिक नीति और संवर्धन विभाग (अब DPIIT) वास्तव में भारत में IPR नीति को विनियमित और कार्यान्वित करने के लिए नोडल एजेंसी है।
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निम्नलिखित में से किसे/किन्हें "भौगोलिक संकेत" का दर्जा प्रदान किया गया है?
- बनारस के ब्रोकेड और साड़ियाँ
- राजस्थानी दाल-बाटी-चूरमा
- तिरुपति लड्डू
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: बनारस के ब्रोकेड और साड़ियों को 2009 में GI दर्जा प्रदान किया गया, जो वाराणसी, उत्तर प्रदेश की अनूठी हथकरघा बुनाई परंपराओं को मान्यता देता है।
❌ कथन 2 – गलत: राजस्थानी दाल-बाटी-चूरमा को GI दर्जा नहीं दिया गया है, हालांकि यह राजस्थान का प्रसिद्ध पारंपरिक भोजन है।
✅ कथन 3 – सही: तिरुपति लड्डू, तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर, आंध्र प्रदेश का पवित्र प्रसाद, को इसकी अनूठी विधि और प्रतिष्ठा की सुरक्षा के लिए 2009 में GI दर्जा मिला।