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मुद्रा, बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणाली Previous Year Questions (PYQs)
Showing solved Previous Year Questions for Chapter: मुद्रा, बैंकिंग एवं वित्तीय प्रणाली
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निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) देश में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सहायता करता है।
- NPCI ने रुपे (RuPay), एक कार्ड भुगतान योजना आरंभ की है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) एक अम्ब्रेला संगठन है जिसे खुदरा भुगतान और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए भुगतान अवसंरचना विकसित करके और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक भागीदारी को सक्षम करके स्थापित किया गया है। दोनों कथन NPCI की भूमिका और पहलों का सही वर्णन करते हैं।
✅ कथन 1 – सही: NPCI, UPI, IMPS और RuPay जैसी नवीन भुगतान प्रणालियों को विकसित करके वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, जो समाज के सभी वर्गों, जिनमें गैर-बैंकिंग और अल्प-बैंकिंग आबादी शामिल है, के लिए सस्ते और सुलभ डिजिटल भुगतान समाधान सक्षम करते हैं।
✅ कथन 2 – सही: NPCI ने 2012 में रुपे (RuPay) को भारत के घरेलू कार्ड भुगतान नेटवर्क के रूप में लॉन्च किया ताकि वीज़ा और मास्टरकार्ड जैसी अंतर्राष्ट्रीय योजनाओं का विकल्प प्रदान किया जा सके, जिससे लेन-देन लागत कम हो और स्वदेशी भुगतान अवसंरचना को बढ़ावा मिले।
निम्नलिखित में से 'यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI)' के कार्यान्वयन का सबसे संभावित परिणाम कौन सा है?
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — ऑनलाइन भुगतान के लिए मोबाइल वॉलेट की आवश्यकता नहीं होगी।
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) एक रियल-टाइम भुगतान प्रणाली है जो मोबाइल वॉलेट जैसे मध्यवर्ती साधनों की आवश्यकता के बिना मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सीधे बैंक-से-बैंक तत्काल हस्तांतरण को सक्षम बनाती है। उपयोगकर्ताओं को सीधे अपने बैंक खातों से भुगतान करने की अनुमति देकर, UPI ऑनलाइन लेनदेन के लिए पहले एक अलग वॉलेट में पैसे लोड करने की आवश्यकता को समाप्त कर देता है।
✅ कथन 1 – सही: UPI मोबाइल ऐप के माध्यम से सीधे बैंक-से-बैंक हस्तांतरण को सक्षम बनाता है, मध्यवर्ती मोबाइल वॉलेट की आवश्यकता को समाप्त करता है क्योंकि उपयोगकर्ता सीधे अपने बैंक खातों से भुगतान कर सकते हैं।
❌ कथन 2 – गलत: जबकि UPI डिजिटल लेनदेन और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देता है, यह लगभग दो दशकों में भौतिक मुद्रा को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं करेगा क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था में, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे लेनदेन के लिए, नकदी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहती है।
❌ कथन 3 – गलत: UPI खुदरा भुगतान के लिए डिज़ाइन किया गया एक घरेलू भुगतान बुनियादी ढांचा है और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) प्रवाह के साथ कोई सीधा कारण संबंध नहीं है, जो आर्थिक नीतियों, व्यापारिक वातावरण और नियामक ढांचे जैसे कारकों पर निर्भर करता है।
❌ कथन 4 – गलत: प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाएं मुख्य रूप से सब्सिडी वितरण के लिए आधार-लिंक्ड बैंक खातों और NEFT/RTGS प्रणाली का उपयोग करती हैं, UPI का नहीं, हालांकि UPI कुछ द्वितीयक लेनदेन को सुविधाजनक बना सकता है।
RBI द्वारा घोषित 'मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR)' का/के उद्देश्य क्या है/हैं?
- ये दिशानिर्देश बैंकों द्वारा अग्रिमों पर ब्याज दरें निर्धारित करने के लिए अपनाई गई पद्धति में पारदर्शिता सुधारने में मदद करते हैं
- ये दिशानिर्देश बैंक ऋण की उपलब्धता और ऐसी ब्याज दरें सुनिश्चित करने में मदद करते हैं जो उधारकर्ताओं के साथ-साथ बैंकों के लिए भी उचित हों
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 3 — 1 और 2 दोनों
✅ कथन 1 – सही: MCLR ढांचा बैंकों को उधार दरें निर्धारित करने के लिए एक मानकीकृत, पारदर्शी पद्धति अपनाने का आदेश देता है। बैंकों को अपने MCLR गणना घटकों (निधियों की सीमांत लागत, परिचालन लागत, अवधि प्रीमियम और नकारात्मक वहन) को सार्वजनिक रूप से प्रकट करना होता है, जो पहले की आधार दर प्रणाली की तुलना में पारदर्शिता में सुधार करता है।
✅ कथन 2 – सही: MCLR उधार दरों को निधियों की वास्तविक सीमांत लागत से जोड़कर निष्पक्षता सुनिश्चित करता है, जिससे उधारकर्ताओं को नीति दर परिवर्तनों का तेज़ संचरण संभव होता है। यह उधारकर्ता हितों (जब RBI दरें घटाता है तो कम दरें) और बैंक व्यवहार्यता (लागत कवर करना और उचित मार्जिन बनाए रखना) के बीच संतुलन बनाता है, जिससे ऋण की उपलब्धता और उचित मूल्य निर्धारण दोनों सुनिश्चित होते हैं।
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भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए 'पेमेंट बैंकों' की स्थापना की अनुमति दी जा रही है। इस संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
- मोबाइल टेलीफोन कंपनियां और सुपरमार्केट चेन जो निवासियों के स्वामित्व और नियंत्रण में हैं, पेमेंट बैंकों के प्रवर्तक बनने के पात्र हैं।
- पेमेंट बैंक क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड दोनों जारी कर सकते हैं।
- पेमेंट बैंक ऋण देने की गतिविधियां नहीं कर सकते हैं।
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 2 — केवल 1 और 3
✅ कथन 1 – सही: मोबाइल टेलीफोन कंपनियां और सुपरमार्केट चेन जो निवासियों के स्वामित्व और नियंत्रण में हैं, RBI के दिशानिर्देशों के तहत पेमेंट बैंकों के प्रवर्तक बनने के पात्र हैं। यह प्रावधान व्यापक पहुंच और वितरण नेटवर्क वाली संस्थाओं को बिना बैंक खाते वाली आबादी के बीच वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में सक्षम बनाता है।
❌ कथन 2 – गलत: पेमेंट बैंकों को केवल अपने जमा खातों से जुड़े डेबिट कार्ड और ATM कार्ड जारी करने की अनुमति है। वे क्रेडिट कार्ड जारी नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें किसी भी ऋण गतिविधि को करने का अधिकार नहीं है, जो क्रेडिट कार्ड जारी करने के लिए आवश्यक है।
✅ कथन 3 – सही: पेमेंट बैंकों को RBI नियमों के तहत ऋण देने की गतिविधियां करने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है। वे केवल जमा स्वीकार कर सकते हैं (प्रति ग्राहक ₹2 लाख तक) और भुगतान/प्रेषण सेवाएं प्रदान कर सकते हैं, इस प्रकार वे केवल लेनदेन और बचत की सुविधा पर ध्यान केंद्रित करते हैं न कि ऋण सृजन पर।
'कोर बैंकिंग सॉल्यूशन' शब्द कभी-कभी समाचारों में देखा जाता है। निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन इस शब्द का सर्वोत्तम वर्णन करता है/करते हैं?
- यह एक बैंक की शाखाओं की नेटवर्किंग है जो ग्राहकों को अपने खाते किसी भी शाखा से संचालित करने में सक्षम बनाती है, चाहे उन्होंने अपने खाते कहीं भी खोले हों।
- यह कम्प्यूटरीकरण के माध्यम से वाणिज्यिक बैंकों पर RBI के नियंत्रण को बढ़ाने का प्रयास है।
- यह एक विस्तृत प्रक्रिया है जिसके द्वारा भारी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों वाले बैंक को किसी अन्य बैंक द्वारा अधिग्रहित किया जाता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
Detailed Explanation:
उत्तर: विकल्प 1 — केवल 1
✅ कथन 1 – सही: कोर बैंकिंग सॉल्यूशन (CBS) एक केंद्रीकृत बैंकिंग प्रणाली है जो बैंक की सभी शाखाओं को नेटवर्क करती है, जिससे ग्राहक अपने खाते नेटवर्क की किसी भी शाखा से संचालित कर सकते हैं और बैंकिंग लेनदेन कर सकते हैं, चाहे खाता मूल रूप से कहीं भी खोला गया हो। यह बैंक के नेटवर्क के भीतर 'कभी भी, कहीं भी' बैंकिंग प्रदान करता है।
❌ कथन 2 – गलत: CBS वाणिज्यिक बैंकों पर RBI के नियंत्रण को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन नहीं किया गया है। यह व्यक्तिगत बैंकों द्वारा अपनाया गया एक आंतरिक बैंकिंग सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म है जो परिचालन दक्षता बढ़ाने, प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और ग्राहक सेवा वितरण में सुधार के लिए है।
❌ कथन 3 – गलत: CBS दैनिक बैंकिंग कार्यों जैसे जमा, निकासी और खाता प्रबंधन के प्रबंधन के लिए केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर बुनियादी ढांचे को संदर्भित करता है। इसका बैंक अधिग्रहण या गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) के समाधान की प्रक्रियाओं से कोई संबंध नहीं है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
- बैंक दर
- खुले बाजार की कार्रवाइयाँ
- सार्वजनिक ऋण
- सार्वजनिक राजस्व
उपर्युक्त में से कौन-सा/से मौद्रिक नीति का/के घटक है/हैं?
Detailed Explanation:
मौद्रिक नीति के साधन वे उपकरण हैं जिनका उपयोग भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति और ऋण को नियंत्रित करने के लिए करता है।
✅ बैंक दर (कथन 1): वह दर जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देता है; मौद्रिक नीति का एक प्रमुख मात्रात्मक साधन।
✅ खुले बाजार की कार्रवाइयाँ (कथन 2): बैंकिंग प्रणाली में तरलता को नियंत्रित करने के लिए RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद/बिक्री।
❌ सार्वजनिक ऋण (कथन 3): कुल सरकारी उधारी; राजकोषीय नीति का हिस्सा है, मौद्रिक नीति का नहीं।
❌ सार्वजनिक राजस्व (कथन 4): करों और गैर-कर स्रोतों से सरकारी आय; राजकोषीय नीति का घटक है, मौद्रिक नीति का नहीं।
'बेसल III समझौता' या केवल 'बेसल III', जो अक्सर समाचारों में देखा जाता है, का उद्देश्य है -
Detailed Explanation:
बेसल III बेसल कमेटी ऑन बैंकिंग सुपरविजन (BCBS) द्वारा विकसित अंतर्राष्ट्रीय बैंकिंग नियमों का एक समूह है जो 2007-2008 के वित्तीय संकट की प्रतिक्रिया में बनाया गया।
यह उच्च पूंजी पर्याप्तता आवश्यकताओं, बेहतर तरलता मानकों (तरलता कवरेज अनुपात और शुद्ध स्थिर वित्तपोषण अनुपात), और सुधरे हुए जोखिम प्रबंधन ढांचे के माध्यम से बैंकिंग क्षेत्र की लचीलापन को मजबूत करता है।
जब भारतीय रिज़र्व बैंक सांविधिक तरलता अनुपात में 50 आधार अंकों की कमी करता है, तो निम्नलिखित में से क्या होने की संभावना है?
Detailed Explanation:
सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) वह न्यूनतम प्रतिशत है जो वाणिज्यिक बैंकों को अपनी शुद्ध मांग और समय देनदारियों (NDTL) का तरल परिसंपत्तियों (नकदी, सोना, सरकारी प्रतिभूतियां) में बनाए रखना होता है।
✅ कथन 3 – सही: SLR में 50 आधार अंकों की कमी करने से सरकारी प्रतिभूतियों में बंधी निधियां मुक्त होती हैं, जिससे बैंकों के पास ऋण योग्य निधियां बढ़ती हैं और वे उधार को प्रोत्साहित करने के लिए ऋण दरों में कटौती कर सकते हैं।
❌ कथन 1 – गलत: SLR में कमी एक मौद्रिक नीति साधन है जिसका मध्यम प्रभाव होता है; GDP वृद्धि कई कारकों पर निर्भर करती है, एक नीतिगत बदलाव से 'भारी' वृद्धि नहीं होती।
❌ कथन 2 – गलत: विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) ब्याज दर अंतर, इक्विटी बाजार रिटर्न और वैश्विक स्थितियों पर प्रतिक्रिया देते हैं, घरेलू SLR समायोजन पर नहीं।
❌ कथन 4 – गलत: SLR में कमी से ऋण देने के लिए निधियां जारी होकर बैंकिंग प्रणाली में तरलता बढ़ती है, घटती नहीं।
'सीमान्त स्थायी सुविधा दर' (Marginal Standing Facility Rate) और 'निवल मांग और मीयादी देयताएं' (Net Demand and Time Liabilities), जो कभी-कभी समाचारों में दिखाई देती हैं, किसके संबंध में प्रयुक्त होती हैं?
Detailed Explanation:
सीमान्त स्थायी सुविधा (MSF) दर वह दर है जिस पर बैंक रातोंरात धन उधार लेते हैं भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) से सरकारी प्रतिभूतियों के बदले जब वे तीव्र तरलता की कमी का सामना करते हैं।
निवल मांग और मीयादी देयताएं (NDTL) किसी बैंक की मांग जमाओं (चालू और बचत खाते) और मीयादी जमाओं (सावधि जमा) का कुल योग है, जिसका उपयोग CRR और SLR जैसी वैधानिक आवश्यकताओं की गणना के लिए किया जाता है।
यदि किसी अर्थव्यवस्था में ब्याज दर घटाई जाती है, तो यह
Detailed Explanation:
जब ब्याज दरें घटती हैं, तो उधार लेने की लागत कम हो जाती है, जिससे व्यवसायों और उद्यमियों के लिए ऋण सस्ता हो जाता है।
इससे फर्मों को मशीनरी, उपकरण, बुनियादी ढांचे और विस्तार परियोजनाओं में पूंजी निवेश के लिए ऋण लेने के लिए प्रोत्साहन मिलता है, जिससे अर्थव्यवस्था में निवेश व्यय बढ़ता है।
कम ब्याज दरें बचत पर रिटर्न को भी कम करती हैं (जिससे बचत कम आकर्षक हो जाती है) और सस्ती EMI के माध्यम से उपभोग को प्रोत्साहित करती हैं, लेकिन सबसे प्रत्यक्ष और महत्वपूर्ण प्रभाव व्यवसायों द्वारा निवेश निर्णयों पर होता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा/से 'सांविधिक आरक्षित आवश्यकताओं' (Statutory Reserve Requirements) का उद्देश्य है/हैं?
- केंद्रीय बैंक को बैंकों द्वारा सृजित किए जा सकने वाले अग्रिमों की मात्रा को नियंत्रित करने में सक्षम बनाना
- बैंकों में लोगों की जमा राशि को सुरक्षित और तरल बनाना
- वाणिज्यिक बैंकों को अत्यधिक लाभ कमाने से रोकना
- बैंकों को अपनी दिन-प्रतिदिन की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त तिजोरी नकदी रखने के लिए बाध्य करना
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
Detailed Explanation:
✅ कथन 1 – सही: सांविधिक आरक्षित आवश्यकताएं (CRR और SLR) RBI द्वारा उपयोग किए जाने वाले प्रमुख मात्रात्मक उपकरण हैं जो वाणिज्यिक बैंकों द्वारा बनाए जा सकने वाले ऋण-सृजन क्षमता और अग्रिमों को नियंत्रित करते हैं, जिससे अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति नियंत्रित होती है।
❌ कथन 2 – गलत: हालांकि आरक्षित निधि तरलता प्रबंधन में सहायता करती है, जमा राशि की सुरक्षा DICGC (जमा बीमा और ऋण गारंटी निगम) और बेसल मानदंडों (पूंजी पर्याप्तता आवश्यकताओं) द्वारा सुनिश्चित की जाती है, न कि सांविधिक आरक्षित निधि के प्राथमिक उद्देश्य के रूप में।
❌ कथन 3 – गलत: सांविधिक आरक्षित निधि मौद्रिक नीति के उपकरण हैं जो तरलता और ऋण को नियंत्रित करने के लिए बनाए गए हैं, न कि बैंक मुनाफे को नियंत्रित या रोकने के लिए।
❌ कथन 4 – गलत: CRR को RBI के पास रखा जाता है और SLR को तरल परिसंपत्तियों जैसे सरकारी प्रतिभूतियों में रखा जाता है; बैंक दैनिक परिचालन आवश्यकताओं के लिए अलग से तिजोरी नकदी रखते हैं, जो सांविधिक आवश्यकताओं से अलग है।
बैंक दर में वृद्धि सामान्यतः यह संकेत देती है कि:
Detailed Explanation:
बैंक दर वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को धन उधार देता है।
बैंक दर में वृद्धि से उधार लेना महंगा हो जाता है, अर्थव्यवस्था में तरलता कम होती है, और यह मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए कठोर/संकुचनकारी मौद्रिक नीति का संकेत देती है।
निम्नलिखित तरल परिसंपत्तियों पर विचार कीजिए:
- बैंकों के पास मांग जमा
- बैंकों के पास सावधि जमा
- बैंकों के पास बचत जमा
- मुद्रा
इनके घटते क्रम में तरलता का सही क्रम है
Detailed Explanation:
तरलता का अर्थ है किसी परिसंपत्ति को बिना मूल्य हानि के नकद में बदलने की सुगमता और गति।
मुद्रा सबसे अधिक तरल परिसंपत्ति है क्योंकि यह पहले से ही नकद रूप में होती है।
मांग जमा को किसी भी समय मांग पर बिना सूचना या जुर्माने के निकाला जा सकता है, जो इसे अत्यधिक तरल बनाता है।
बचत जमा को निकाला जा सकता है लेकिन पूर्व सूचना या निकासी सीमा की आवश्यकता हो सकती है, जो इसे मध्यम तरल बनाता है।
सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) की एक निश्चित परिपक्वता अवधि होती है और समय से पहले निकासी पर जुर्माना लगता है, जो इसे सबसे कम तरल बनाता है।
तरलता का घटता क्रम: मुद्रा (4) > मांग जमा (1) > बचत जमा (3) > सावधि जमा (2) = 4-1-3-2
भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, 'खुले बाजार की कार्यवाही' से तात्पर्य है:
Detailed Explanation:
खुले बाजार की कार्यवाही (OMO) एक मौद्रिक नीति उपकरण है जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) खुले बाजार में सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद या बिक्री करता है ताकि मुद्रा आपूर्ति और तरलता को नियंत्रित किया जा सके।
जब RBI प्रतिभूतियाँ खरीदता है, तो यह बैंकिंग प्रणाली में तरलता डालता है और ब्याज दरें कम करता है; जब यह प्रतिभूतियाँ बेचता है, तो अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करता है और मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाता है।
भारतीय रिजर्व बैंक निम्नलिखित मामलों में वाणिज्यिक बैंकों को विनियमित करता है -
- परिसंपत्तियों की तरलता
- शाखा विस्तार
- बैंकों का विलय
- बैंकों का परिसमापन
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर चुनें।
Detailed Explanation:
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वाणिज्यिक बैंकों को बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत व्यापक रूप से विनियमित करता है। यह CRR (नकद आरक्षित अनुपात) और SLR (सांविधिक तरलता अनुपात) के माध्यम से परिसंपत्तियों की तरलता को नियंत्रित करता है, नई शाखाओं के लिए लाइसेंस देकर शाखा विस्तार को विनियमित करता है, वित्तीय स्थिरता और जमाकर्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए बैंकों के विलय की निगरानी करता है, और गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति में बैंकों का परिसमापन शुरू करता है। सभी चार विनियामक कार्य RBI की मुख्य शक्तियाँ हैं।